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प्रधानमंत्री ने जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित किया

प्रधानमंत्री ने जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित किया

प्रधानमंत्री ने जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के बीच विशेष संबंधों का जिक्र किया और इस वर्ष के प्रारंभ में नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह को याद किया, जहां इंडोनेशिया समेत 10 आसियान देशों के राजनेता उपस्थित हुए थे। उन्होंने कहा कि यह कोई संयोग नहीं है कि 1950 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति नई दिल्ली के गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि थे।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि इंडोनिशिया में भारतीय प्रवासी इंडोनेशिया के स्वाभिमानी नागरिक हैं परंतु वे भारत से भी जुड़े रहना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में भारत में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। इस संदर्भ में उन्होंने एफडीआई, अर्थव्यवस्था का उदारीकरण, व्यापार करने में आसानी तथा भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धा का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपने लोकतांत्रिक प्रकृति तथा विभिन्नता पर गर्व है। उन्होंने दोनों देशों के मध्य गहरे सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करने के लिए बाली-जात्रा तथा खान-पान व भाषा की समानता का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने और राष्ट्रपति विडोडो ने आज संयुक्त रूप से पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया जिसमें रामायण और महाभारत की थीम ली गयी है।

भारत के विकास के संबंध में उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ऐसी प्रणालियों का निर्माण कर रही है जो विकास-अनुकुल और भ्रष्टाचार-मुक्त हैं। “व्यापार करने में आसानी” से आगे जाकर “जीवन यापन में आसानी” पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी प्रक्रियाएं पारदर्शी और संवेदनशील हैं। उन्होंने आधारभूत संरचना विकास के कई क्षेत्रों में हुए नाटकीय विकास कार्यों का विवरण दिया। उन्होंने जीवंत स्टार्टअप पारितंत्र और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि जरूरतमंदों को सहायता करने के मामले में भारत और इंडोनेशिया संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत किसी के पासपोर्ट का रंग नहीं देखता और सभी लोगों की सहायता करता है जिन्हें मदद की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के केवल नामों में ही लय नहीं है बल्कि संस्कृति, परंपरा और लोकतांत्रिक मूल्यों में भी लय विद्यमान है।

प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों को देश में हो रहे बदलावों का जायजा लेने के लिए भारत-भ्रमण का आमंत्रण दिया।