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وزیر اعظم کی، گاندھی نگر، گجرات میں، آئی آئی ٹی، گاندھی نگر کو وقف کرنے اور ’پردھان منتری گرامین ڈیجیٹل ساکشرتا ابھیان اسکیم‘ کی لانچنگ کے موقع پر تقریر

وزیر اعظم کی، گاندھی نگر، گجرات میں، آئی آئی ٹی، گاندھی نگر کو وقف کرنے اور ’پردھان منتری گرامین ڈیجیٹل ساکشرتا ابھیان اسکیم‘ کی لانچنگ کے موقع پر تقریر

وزیر اعظم کی، گاندھی نگر، گجرات میں، آئی آئی ٹی، گاندھی نگر کو وقف کرنے اور ’پردھان منتری گرامین ڈیجیٹل ساکشرتا ابھیان اسکیم‘ کی لانچنگ کے موقع پر تقریر

وزیر اعظم کی، گاندھی نگر، گجرات میں، آئی آئی ٹی، گاندھی نگر کو وقف کرنے اور ’پردھان منتری گرامین ڈیجیٹل ساکشرتا ابھیان اسکیم‘ کی لانچنگ کے موقع پر تقریر

प्‍यारे नौजवान साथियों आप IIT-ians हैं। लेकिन मैं ऐसा इंसान हूं जिसको वो डबल आई नहीं जुड़ा। आप सब IIT-ians हैं मैं बचपन से सिर्फ टीएन रहा। टी इ ए वाला टीएन चाय वाला। मैं सोच रहा था कि कॉलेज के नौजवान बड़े sharp होते हैं इतनी देर नहीं लगाते। फिर वही हुआ। आज 7 अक्‍टूबर है। 2001 में 26 जनवरी को भंयकर भुकंप आया था। और उसके बाद स्थिति ऐसी बनी कि जो मेरे जीवन की कभी राह नहीं थी। और मुझे अचानक 7 अक्‍टूबर 2001 को इसी गांधीनगर में मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेकर के जिम्‍मेवारी का निर्वाह शुरू हुआ। न शासन व्‍यवस्‍था जानता था न कभी विधानसभा देखी थी। लेकिन एक नया दायित्‍व आ गया था। लेकिन मन में तय किया था कि मेहनत करने में कोई कमी नहीं रखूंगा और आज देश ने मुझे हर बार कोई-कोई नई जिम्‍मेवारी दी है। और इस नई जिम्‍मेवारी के तहत आज आपके बीच में हूं।

आज यहां हिन्‍दुस्‍तान के अलग-अलग भू-भाग से आए हुए ग्रामीण क्षेत्र के युवक-युवतियां हैं कुछ बुर्जुग भी है। जिनको मैंने सबसे पहले प्रमाणपत्र दिया। मैं उनसे सारी बाते पूछ रहा था और मैं हैरान था। उनको सब पता था वो गांव में क्‍या कर रही है, लोगों को कैसे मदद कर रही है, उन्‍होंने क्‍या ट्रेनिंग ली है। उस ट्रेनिंग का क्‍या उपयोग करेगी। सारे सवालों के वो मुझे जवाब दे रही थी। मैं समझता हूं यही revolution है। देश और दुनिया शायद पिछले तीन सौ साल में जितना technology का revolution नहीं देखा है। गत 50 साल में अक्‍ल पर technology का revolution आया। technology जिंदगी का हिस्‍सा बन गई है। technology अपने आप में driving force बन गई है। और ऐसे समय किसी भी देश को अगर प्रगति करनी है तो हिन्‍दुस्‍तान के सभी स्‍तर के लोगो को शहर हो गांव शिक्षित हो अशिक्षित हो, बुर्जुग हो नौजवान हो, इस technology के साथ उसको जोड़ना एक उज्‍ज्‍वल भविष्‍य के लिए अनिवार्य है।

आजादी के आंदोलन के समय महात्‍मा गांधी जिस प्रकार से साक्षरता पर बल दे रहे थे। अगर स्‍वराज के आंदोलन में साक्षरता की एक ताकत थी। तो सुराज के आंदोलन में digital literacy एक बहुत बड़ी अहम ताकत है। और इसलिए भारत सरकार का प्रयास है कि हिन्‍दुस्‍तान का हर गांव, वहां की हर पीढ़ी उनको digital literate करने की दिशा कदम उठाए। आज ये जो कार्यक्रम है भारत के ग्रामीण भारत में छ: करोड़ परिवार रहते हैं इन छ: करोड़ परिवारों को परिवार के कम से कम एक व्‍यक्ति को digitally literate करने का बीढ़ा उठाया है। बीस घंटे का कैप्सूल है उसको पढ़ाया जाता है। आनलाइन एग्‍जाम ली जाती है वीडियो कैमरा के सामने बैठकर के उसको एग्‍जाम देनी होती है। और वहां से उसको certify किया जाता है। और अनुभव ये आया है। कि digital literacy के लिए आप कितने शिक्षित है, आप किस उम्र के हैं, वो गौण बन जाता है वो मायने नहीं रखता है।

एक जमाना था जब कार्ल मार्क्‍स की philosophy चलती थी दुनिया में लोग quote करते थे कार्ल मार्क्‍स की बातों को have and have not वो लोग जिनके पास है और लोग जिनके पास कुछ नहीं है। इस divide के आधार पर उन्‍होंने अपनी राजनीतिक विचारधारा को develop किया था। वो कारगर हुआ कि नहीं हुआ वो विद्वान लोग उसकी चर्चा करेंगे। सिकुड़ते-सिकुड़ते वो विचार अब कहीं नजर नहीं आ रहा है। नाम मात्र के बोर्ड लगे पड़े हैं लेकिन technology के संबंध में अगर भारत के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य के लिए हम लोगों को सतर्क रहकर के प्रयास करना होगा कि देश में digital divide पैदा न हो। कुछ लोग digital technology में माहिर हो और कुछ लोग पूरी तरह अछूत हो तो आने वाले युग में जिस प्रकार से बदलाव नजर आ रहा है। ये digital divide सामाजिक संरचना के लिए बहुत बड़ा संकट पैदा कर सकता है। और इसलिए सामाजिक समरसता के लिए विकास के मूलभूत बिंदुओं को समाहित करते हुए ये digital divide से मुक्ति पाने की दिशा में ये ग्रामीण भारत में digital literacy का अभियान चलाया। हम जानते हैं घर में कितना ही बढि़या टीवी आ जाए। रिमोट से चलता हो। शुरू में सबको लगता है क्‍या है। लेकिन घर में जब दो-तीन साल का बच्‍चा अपने आप जरूरत चैनल बदल देता है। VCR चालू कर देता है। बंद कब करना है चालू करना सीख लेता है। तो घर के बुजुर्गों को भी लगता है कि हमें भी सीखना पड़ेगा। और फिर वो भी switch on switch off करना सीख जाता है। क्‍या किसी ने whatsapp कैसे forward होता है। उसका क्‍लासरूम देखा है क्‍या? क्‍या whatsapp forward करने के लिए हिन्‍दुस्‍तान में कोई institute है क्‍या? लेकिन आप देखते है कि लोगो को whatsapp forward आ गया कि नहीं आ गया। कहने का तात्‍पर्य ये है कि अगर user friendly technology के रास्‍ते से हम जाते हैं तो हम आसानी से digital literacy की दिशा में देश को ले जाते है। digital literacy, digital technology, digital India एक good governess की गांरटी है। transparency की गारंटी है।

भारत सरकार ने एक JAM trinity के द्वारा विकास की एक कल्‍पना की हुई है। JAM J-Jandhan Account, A- Aadhaar, M-Mobile Phone इन तीनों को जोड़कर के सामान्‍य मानवी की आवश्‍यकता के अनुसार सरकार उसके मोबाइल फोन पर मौजूद हो इस प्रकार की हमारी विकास यात्रा के कदम चल रहे हैं। देश में एक बहुत बड़ा अभियान चला है। optical fiber network का बहुत तेजी से लाखों गांवों में optical fiber network को पहुंचाने की दिशा में प्रयास हुआ है। और आज दूर से दूर इलाकों में हमारी भावी पीढ़ी को हमारे गरीब बच्‍चों को अच्‍छी शिक्षा देने में long distance education digital के माध्‍यम से देना संभव हुआ है। और जैसे-जैसे optical fiber network हिन्‍दुस्‍तान के हर गांव तक पहुंच जाएगा। उस गांव की शिक्षा में उस गांव की आरोगी की व्‍यवस्‍थाओं में, उस गांव की सरकार की जनसुविधा की सेवाओं में आमूल चूल परिवर्तन आने वाला है। और उसी डिजाईन को लेकर के हम जो चल रहे हैं। उसी का हिस्‍सा है कि आज देश के अलग-अलग कोने से आए हुए community service centre के लोग जिन्‍होंने कोर्स किए हैं। और कुछ लोग करने वाले है और आने वाले दिनों में छ: करोड़ परिवारों में एक-एक व्‍यक्ति को ये शिक्षा दी जाएगी वो उसकी रोजी-रोटी का एक साधन बनने वाला है। क्‍योंकि अब services उसके द्वारा हो रही हैं। और उस दिशा में हमें प्रयास करना चाहिए। कभी-कभार अनुभव ऐसा आता है। कि बहुत लोग आपने देखे होंगे। कि बढि़या से बढि़या मोबाइल का अगर मॉडल आया। टीवी में advertisement देखी, अखबार में मैगजीन में पढ़ लिया या गूगल गुरू ने बता दिया तो सबसे पहले वो काम करता है उस मोबाइल को खरीदना। आपको 80 प्रतिशत लोग ऐसे मिलेगें जिनको मोबाइल के अंदर इतनी सारी चीजे हैं लेकिन न उसका अता-पता है न उसको उपयोग करने की आदत है। शायद यहां आई आई टी में भी कुछ लोग मिल जाएंगे जिनको पूरी तरह मोबाइल उपयोग करने की आदत नहीं होगी। अच्‍छे से अच्‍छे मॉडल का मोबाइल रखते होंगे और इसलिए अगर digital literacy है तो जो हमने खर्च किया है उसका भी हम सर्वाधिक उपयोग कर सकते हैं। और हम एक प्रकार से value edition कर सकते हैं। और इसलिए ये digital literacy का digital India का अभियान चलाया है। less cash society बनाने में भी ये digital literacy का काम बहुत बड़ा रोल प्‍ले करेगा।

भारत सरकार ने जो bheem app बनाई है। दुनिया के देशों को अजूबा हो रहा है। हमारे पास जो Aadhaar digitally biometric system से जो डाटा बैंक है हिन्‍दुस्‍तान के पास पूरे विश्‍व के लिए अचरज है। इसको जोड़कर के हम विकास को empowerment को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। और उसका मैं मानता हूं एक बहुत बढ़ा उपयोग होने वाला है। आज मेरे लिए सौभाग्‍य का विषय है। कि आज यहां इस IIT के नए कैंपस का लोकार्पण करने का अवसर मिला है। अगर चुनाव के दिन होते और मैंने उस समय ये जमीन देने का निर्णय किया होता। करीब-करीब 400 एकड़ भूमि और वो भी गांधीनगर में और वो भी साबरमती नदी के तट पर ये जमीन कितनी महंगी हुई उसका आप अंदाज कर सकते हैं। और जिस दिन ये 400 एकड़ भूमि देने का निर्णय किया तो कुछ लोग अगर चुनाव होता तो निकल पड़ते। जैसे इन दिनों बुलेट ट्रेन के खिलाफ बोलते रहते हैं। उस समय भी बोलते, उस समय भी बोलते कि मोदी अरे गुजरात के गांव में प्राथमिक शिक्षा का मकान है वो तो ढीला-ढाला है। और तुम IIT बनाने में पैसे लगा रहे हो। जरूर आलोचना करते। लेकिन अच्‍छा था जिस समय मैंने जमीन का निर्णय किया उस वक्‍त चुनाव का मौसम नहीं था। लेकिन अब आपको पता चलता होगा कि ये कैसा दीर्ध दृष्टि पूर्ण निर्णय था और मैंने उस दिन कहा था कि सुधीर जैन जी को और हमारे डिर्पाटमेंट के लोगों को याद होगा मैंने कहा था IIT एक brand है। हिन्‍दुस्‍तान में IIT एक brand बन चुका है। लेकिन IIT के बीच में अंदर कैंपस ब्रांड ज्‍यादा ताकतवर पूरवार होगा। किस IIT का कैंपस कैसा है। ये आने वाले दिनों में चर्चा का विषय रहेगा। और इसलिए मैंने कहा था कि मुझे गुजरात में ऐसा कैंपस चाहिए जो हिन्‍दुस्‍तान के top most IIT campus का अंदर शिरोमोर ये कैसे बन सके। और आज मुझे देखकर के खुशी हुई। कि कैंपस हिन्‍दुस्‍तान की प्रमुख IIT की बराबरी में आकर आज खड़ा हो गया है। कैंपस की अपनी एक ताकत होती है। दूसरी ताकत होती है faculty मुझे खुशी है मुझे बताया गया कि आज गांधीनगर IIT में 75 प्रतिशत faculty वो हैं जो विदेशों में trained होकर के आई हैं। expertise करके आई हुए हैं। और उन्‍होंने अपना समय शक्ति इस IIT के students को dedicate करने का निर्णय किया है। मैं उनके इस निर्णय का स्‍वागत करता हूं। लेकिन भारत सरकार ने चुनौती दी है देश की शिक्षा संस्‍थाओं को। मैं चाहता हूं कि IIT गांधीनगर इस चुनौती के लिए मैदान में आएं। आएंगे। क्‍या हो गया सारे IIT-ians को आवाज तो वहां से आ रही है। पहली बार हिन्‍दुस्‍तान में शिक्षा संस्‍थान क्षेत्र में ऐसा reform हुआ है। जिसकी सालों से अपेक्षा थी लेकिन कोई हिम्‍मत नहीं करता था।

आज दुनिया में 500 top universities आजादी के 70 साल बाद भी इन 500 top universities में हम कहीं नजर नहीं आते। क्‍या ये कलंक मिटना चाहिए कि नहीं मिटना चाहिए। क्‍या आज आप 2022 भारत की आजादी के 75 साल हों तब तक हम हमारी universities को उस ऊंचाई पर ले जा सकते ताकि हम भी दुनिया के अंदर ये कह सके कि हम भी कुछ कम नही है। कर सकते हैं कि नहीं कर सकते हैं। भारत सरकार ने पहली बार निर्णय किया है कि दस private universities और दस public universities, challenge रूट पर उनको select किया जाएगा। करीब एक हजार करोड़ रूपया लगाया जाएगा। और जो ऐसी दस universities जो हैं दस private और दस public वे challenge रूट से अगर जीतती जीतती ऊपर आती हैं। और global standard को establish करती हैं। तो आज भारत सरकार के और राज्‍य सरकारों के जितने नियम हैं उन नियमों से उनको मुक्‍त करके वही उनकी दुनिया वही उनका देश वो ताकत दिखाए और कुछ करके दिखाए इतनी स्‍वतंत्रता उनको दी जाए। syllabus में campus में faculty में खर्च करने में वे अपना फैसला करें सरकार कहीं आएगी नहीं और आपको परिणाम लाकर के देना होगा। सरकार एक हजार करोड़ रूपया लगाने के लिए इन 20 यूनिवर्सिटी के लिए तैयार हुई है। गांधीनगर IIT के पास इतना बड़ा 400 एकड़ का कैंपस हो 1700 करोड़ रूपये की लागत से सारी व्‍यवस्‍था खड़ी हुई हो। मुझे विश्‍वास है कि सुधीर जैन और उनकी टीम और ये पूरे हमारे नौजवान मिलकर के बीढ़ा उठाएं और आगे आएं। किसी भी देश में विकास करने के लिए institutions को जितना हम समय समय पर निर्माण करे वो आवश्‍यक है। गुजरात इस बात के लिए गर्व कर सकता है। कि पिछले दस साल के भीतर भीतर गुजरात ने global level के institutions देश को दिए हैं। आज भी दुनिया में कहीं पर भी forensic science university नहीं है। दुनियां में कहीं नहीं है। गुजरात अकेला है। जिसकी अपनी forensic science university है। दुनिया की एकमात्र यूनिवर्सिटी है। आज भी हिन्‍दुस्‍तान में Indian institute of teacher education IITE ऐसी कोई university नहीं है जो best quality के टीचर तैयार करे। teaching में उनका graduation हो, teaching में उनका post graduation हो। और उत्‍तम से उत्‍तम टीचर वहां से निकले। गुजरात पहला देश का राज्‍य है। जिसने Indian Institute of Teacher Education ऐसी एक university बनाई है। गुजरात पहला राज्‍य है। जिसने children university बनाई है। दुनिया में कहीं पर भी children university नहीं है। आज micro family की दिशा में दुनिया आगे बढ़ रही है। मां भी अपने व्‍यस्‍त है बाप भी अपने में व्‍यस्‍त है। बच्‍चा परिवार में जो काम करने वाले लोग हैं उनके भरोसे छोड़ दिया जाता है। समय की मांग है हमें एक ऐसी institution arrangement करनी होगी। कि हमारे छोटे-छोटे बालक उनका सही development हो उनकी सही खातिरदारी हो। उनका विकास एक उत्‍तम नागरिक के लिए जो जड़े जमानी हों वो बचपन में हो। और उसके लिए research का काम ये children university करें। बच्‍चों के खिलौने कैसे हों, बच्‍चे जिस कमरे में हो उनके दीवारों के कलर कैसे हों। बच्‍चों को किस प्रकार के गीत सुनाए जाएं। बच्‍चों को nutrition value वाले खाना कैसा होना चाहिए। बच्‍चों को पढ़ने की modern technique क्‍या हो ताकि आसानी से वो पकड़ पाएं। ये सारे research की आवश्‍यकता है।

पहले तो परिवार संयुक्‍त हुआ करता था। और परिवार अपने आप में एक university हुआ करती थी। और बालक दादी मां से एक सीखता था, दादा से दूसरा सीखता था, चाचा से तीसरा सीखता था। मां से एक सीखता था, फूफा से एक सीखता था। आज micro परिवार के अंदर उसके लिए ये शिक्षा का दाम बंद हो चुका है, तब जाकर के ये विचार आया था। कि दुनिया को आने वाली पीढि़यों के बच्‍चों कि चिंता करने के लिए और उसमें से children university का जन्‍म हुआ था। जो इसी गुजरात की धरती पर पैदा हुआ था। crime की दुनिया में तीन महत्‍वपूर्ण क्षेत्र हैं। एक legal faculty, दूसरी पुलिस और तीसरी crime detection के लिए forensic गुजरात ने इन तीनों पर काम किया। national law university बनाई। जो उत्‍तम से उत्‍तम lawyer तैयार करेगी। उत्‍तम जज तैयार करेगी। और judiciary के पार्ट को संभालेगी। police academy university बनाई है हिन्‍दुस्‍तान में चंद university है जो policing के लिए है। गुजरात उसमें से एक राज्‍य है। गुजरात देश का दूसरा राज्‍य था। जिसने ये police university बनाई रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी और जहां जो uniform forces में जाना चाहता है वो uniform forces में जाने वाला दसवीं, बारहवीं कक्षा के बाद ही उस धारा में आ जाए सारी पढ़ाई वहीं हो जाए। communication deal आ जाए crowd management आ जाए, crowd physiology management आ जाए। हिन्‍दुस्‍तान के IPC धाराओं का उसको पता हो जाए। और पढ़ लिखकर के कहीं भी police recruitment के लिए जाए। तो एक qualitative change भारत की सुरक्षा क्षेत्र लाने की दिशा में गुजरात ने पहल की है। और फॉरेसिंक सांइस यूनिवर्सिटी आज सारे criminal घटनाएं आप देखते होंगे। technology के द्वारा crime पकड़े जा रहे है। अगर फॉरेसिंक सांइस यूनिवर्सिटी की ताकत जितने फॉरेसिंक सांइस यूनिवर्सिटी के स्‍टूडेंट तैयार होंगे। साइबर क्राइम हो या और क्राइम हो उसको उसमें से बचने के लिए उसमें से detect करने के लिए, गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए फॉरेसिंक वर्ल्‍ड सबसे ज्‍यादा बढ़ा रोल पैदा करने वाला है। ऐसी तीनों विधाओं को इसी गुजरात की धरती पर एक साथ develop किया गया है। जो आने वाले दिनों में हिन्‍दुस्‍तान का बहुत बड़ा contribution करने वाला है। और आज देश और दुनिया के लोग जो नये प्रयोग किए हैं यूनिवर्सिटी के उनके साथ जुड़ रहे हैं। और इसलिए आज जब IIT-ians के बीच बैठा हूं तब मैं जानता हूं आपका काफी समय लैब में जाता है। आप कुछ न कुछ नया करते रहते हैं। लेकिन ज्‍यादातर Exam oriented innovation, Exam oriented projects, मैं नहीं चाहता हूं कि मेरे देश का नौजवान इसी एक गलियारे में बंध करके रह जाए। समय की मांग है हम innovation को बल दें।

भारत सरकार ने नीति आयोग में AIM नाम के institute develop किए हैं। Atal innovation mission, AIM और उसके द्वारा हम देश की जो challenge route से select होती हैं। ऐसी स्‍कूलों को increasing lab के लिए पैसे दे रहे हैं। और पांचवी, सातवीं, आठवीं, दसवीं, बारहवीं के बच्‍चों को innovation के प्रेरित करते हैं। हिन्‍दुस्‍तान का भाग्‍य बदलने के लिए हमारे पास जो natural talent है हमें innovation में जाना पड़ेगा। जिस देश के अंदर IT की महारथ हो लेकिन गूगल किसी और देश में पैदा हो। जिस देश में IT की महारथ वाले नौजवान हों लेकिन फेसबुक कहीं ओर हो। जिस देश में IT की महारथ वाले नौजवान हों लेकिन यूटयूब कहीं ओर हो। मैं चाहता हूं, मैं देश के नौजवानों को चुनौती देता हूं। आइए हम दुनिया का भाग्‍य बदलने के लिए, भारत का बदलने के लिए innovation के रास्‍ते को पकड़े। और ऐसा नहीं कि बुद्धि किसी की बपौती होती है। अरे एक बार आप उलझ जाओगे तो आप भी नई चीजे खोजकर के रहोगे। और देश और दुनिया को बहुत कुछ देकर जाओगे। लेकिन कभी-कभार हमें कुछ नया करने का जो मूड रहता है। लेकिन अच्‍छा innovation का तरीका दूसरा होता है। और मैं आपको गाइड करना चाहता हूं आज मैं आशा करता हूं कि मेरी इस बात को आप गौर से सुनेगें। आप जो academic knowledge है आपने भी सरकीट को पढ़ा होगा। basic structural engineering पढ़ा होगा। उसके आधार पर innovation करना एक तरीका है। दूसरा तरीका है आप अपने अगल-बगल में समस्‍याओं को देखिए, कठिनाईयों को देखिए और फिर सोचिए। कि मैं इसका समाधान दे सकता हूं क्‍या। वो तो बेचारा एक भला व्‍यक्ति है तकलीफ से जी रहा है। मैं IIT-ians हूं मैं कुछ करूंगा ताकि इसकी जिंदगी में सुधार आए और वही innovation बन जाएगा। और वो कभी इतना बड़ा स्केल पर हो सकता है। कि एक बहुत बड़ा business model बन सकता है। हमारे देश में ऐसी ढेर सारी समस्‍याएं हैं। अब जैसे स्‍वच्‍छता का अभियान चल रहा है। कियूं न innovation करने वाले मेरे नौजवान waste में से wealth create करने वाले innovation के नए नए project कियूं न करे।

आज solar energy पर काम चल रहा है। आज solar energy, wind energy, renewable energy, climate change ये सब तो हमारे काम पर आ रहे हैं। हम भारत के स्‍वभाव के अनुसार हम ऐसे क्‍या innovation करें कि हर घर के अंदर एक चीज आसानी से हम पहुंचा सकें। अगर भारत जहां इतनी बढ़ी solar energy उपलब्‍ध है। हम कुकिंग के लिए हर परिवार को खर्च से मुक्‍त कर सकते हैं क्‍या। हम solar energy से चलने वाली energy generate करके energy से चलने वाले कुकिंग equipment क्‍यों न बनाएं, खाना उसी पर पके न उसको गैस लेने के लिए जाना पड़ा, न उसको चूल्‍हा जलाना पड़े। खुद का ही solar plant हो छत के ऊपर दो solar panel लगी हो। घर में आवश्‍यक खाना पक जाता हो। गरीब के घर में मध्‍यम वर्ग के परिवार का, कीचन के अंदर फ्यूल का जो खर्चा होता है। बच जाएगा कि नहीं बच जाएगा। छोटी-छोटी चीजे हम देख रहें हैं। उन्‍हीं को innovation के रूप में क्‍यों न पकड़े। हम समाधान क्‍यों न खोजे मुझे विश्‍वास है IIT गांधीनगर एक कल्‍चर पैदा करेगा innovation का कल्‍चर पैदा करेगा। और वो कल्‍चर need based होना चाहिए। knowledge base नहीं need based होगा तो वो innovation sustain कर जाता है। वो स्‍केलेबल हो जाता है। वो commercial उसको अवसर भी मिल जाता है। और बहुत बड़ी कंपनियां इसको purchase करने के लिए भी आगे आती हैं। और इसलिए मैं चाहता हूं कि IIT इस दिशा में काम करे।

मैं IIT नौजवानों से एक और बात बताना चाहता हूं। शायद हिन्‍दुस्‍तान में गुजरात पहला राज्‍य है। जिसने I creat नाम की एक institute पैदा किया है। बहुत कम लोगों ने ये नाम सुना होगा। अब उसकी उम्र भी मेरे हिसाब से करीब तीन-चार साल हो गई है। अभी उसके भवन का लोकार्पण बाकी है। मैं समय दे नहीं पा रहा हूं। लेकिन दे दूंगा। ये I create राज्‍य के और देश के जो innovation में interest रखते हैं। इनको incubation provide करने का काम करती है। वहां रहने की व्‍यवस्‍था है। लैब है। आपके idea सरकार वहां अवसर देने को तैयार है। आप ऐसे innovation कीजिए जो भारत के जीवन में बदलाव लाने के लिए सरलता से व्‍यवस्‍थाओं को विकसित कर सके। ये I create अपने आप में हिन्‍दुस्‍तान में इकलौता ऐसा होता है और दुनिया की अच्‍छी से अच्‍छी innovation करने वाली institution के साथ उसका collaboration किया हुआ है। ये मैं ऐसी जानकारी आपको दे रहा हूं। जो सामान्‍य अखबार की सुर्खियों में रहने वाली नहीं है। लेकिन देश का भविष्‍य जो युवा पीढ़ी बनाती है। उनके लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है। और इसलिए मैं दोस्‍तों आपसे अपेक्षा करता हूं। ये 2022 भारत की आजादी के 75 साल, पांच साल हमारे पास हैं।

1942 में महात्‍मा गांधी ने कहा था। हिंद छोड़ो क्‍वीट इंडिया पांच साल के भीतर-भीतर देश ऐसा खड़ा हो गया। अंग्रेजों को बोरिया-बिस्‍तर उठाकर के जाना पड़ा। मेरे देशवासी अगर पांच साल हम भी अगर खड़े हो जाएं कि देश से गरीबी जानी चाहिए, देश से जातिवाद जाना चाहिए, देश से भ्रष्‍टाचार जाना चाहिए, देश से भाई-भतीजावाद जाना चाहिए। ये सब हो के रह सकता है देश में दोस्‍तों आइए मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर के चलिए। ये हम करके रहने का संकल्‍प लेकर के चल पड़े हैं।

मैं IT के नौजवानों से एक और बात भी बताना चाहता हूं। जब convocation होता होगा तब आपको बहुत सलाह दी जाती होगी, बहुत कुछ बताया जाता होगा। इतने बड़े भव्‍य भवन में आप रह रहे हैं। भव्‍य भवन के अंदर शिक्षा दीक्षा प्राप्‍त कर रहे हैं। क्‍या इसलिए संभव हुआ है। कि आपके पास तेज दिमाग है। क्‍या इसलिए संभव हुआ है। कि आपके माता-पिता संपन्न थे और उनकी स्थिति अच्‍छी थी इसलिए उन्‍होंने आपको यहां तक पहुंचाया है। ये सब सच होने के बाद भी मेरे नौजवान साथियों आप इस भव्‍य कैंपस में इसलिए हैं। आप इतनी बढि़या से बढि़या शिक्षा प्राप्‍त में भाग्‍यशाली इसलिए हुए हैं कि किसी न किसी गरीब ने इसके लिए contribute किया है। किसी गरीब के हक का आपको मिला है। ये चार एकड़ भूमि अगर सरकार ने उसको बेचकर के पैसे लाकर के गांव के अंदर प्राथमिक शिक्षा के मकान बनाए होते तो कितने सारे मकान बन जाते। PSE centre बनाए होते तो कितने सारे बन जाते। लेकिन देश के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य के लिए ये चार सौ एकड़ भूमि मेरे देश के भविष्‍य के लिए यहां लगाई गई है। समाज के किसी गरीब तबके ने अपना छोड़ा है तब हमने पाया है। अगर ये भाव मन के अंदर रहा तो IIT-ians होने के बावजूद भी समाज के प्रति मेरी जो संवेदना है वो कभी कम नहीं होगी। समाज के लिए करने का मेरा कुछ इरादा है। उसमें कभी भी कहीं कमी नहीं आएंगी। और जीऊंगा तो भी मेरे देश के सामान्‍य मानवी के लिए जीऊंगा कुछ पाऊंगा करूंगा, करके रहूंगा तो भी मेरे देश के सामान्‍य मानवी के लिए करके रहूंगा। इस भाव को लेकर के इस नए भवन के लोकार्पण के समय आप भी ह्दय से संकल्‍प करे। इसी एक आशा के साथ आप सबको मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।