इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के मेरे साथी श्री अमित शाह, श्री हरदीप पूरी जी, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, INA के सभी ट्रस्टी, NDMA के सभी सदस्यगण, jury मेम्बर्स, NDRF, कोस्ट गॉर्ड्स और IMD के डाइरेक्टर जनरल्स, आपदा प्रबंधन पुरस्कारों के सभी विजेता साथी, अन्य सभी महानुभाव, भाइयों एवं बहनों!
भारत मां के वीर सपूत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्मजयंती पर पूरे देश की तरफ से मैं आज कोटि-कोटि नमन करता हूं। ये दिन ऐतिहासिक है, ये कालखंड भी ऐतिहासिक है और ये स्थान, जहां हम सभी एकत्रित हैं, वो भी ऐतिहासिक है। भारत के लोकतंत्र की प्रतीक हमारी संसद पास में है, हमारी क्रियाशीलता और लोकनिष्ठा के प्रतीक अनेक भवन भी हमारे साथ पास में नजर आ रहे हैं, हमारे वीर शहीदों को समर्पित नेशनल वॉर मेमोरियल भी पास है। इन सबके आलोक में आज हम इंडिया गेट पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नेताजी सुभाष, जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया था, जिन्होंने बड़े गर्व के साथ, बड़े आत्मविश्वास के साथ, बड़े साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था- “मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा”। जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है। जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी। ये प्रतिमा आज़ादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है। नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा हमारी लोकतान्त्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी, आने वाली पीढ़ियों को, वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी।
साथियों,
पिछले साल से देश ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है। आज पराक्रम दिवस के अवसर पर सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी दिए गए हैं। नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेकर ही इन पुरस्कारों को देने की घोषणा की गई थी। साल 2019 से 2022 तक, उस समय के सभी विजेताओं, सभी व्यक्तियों, सभी संस्थाओं को जिने आज सम्मान का अवसर मिला है। उन सबको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
साथियों,
हमारे देश में आपदा प्रबंधन को लेकर जिस तरह का रवैया रहा था, उस पर एक कहावत बहुत सटीक बैठती है- जब प्यास लगी तो कुआं खोदना। और जिस मैं काशी क्षेत्र से आता हूं वहां तो एक और भी कहावत है। वो कहते हैं – भोज घड़ी कोहड़ा रोपे। यानि जब भोज का समय आ गया तो कोहड़े की सब्जी उगाने लगना। यानि जब आपदा सिर पर आ जाती थी तो उससे बचने के उपाय खोजे जाते थे। इतना ही नहीं, एक और हैरान करने वाली व्यवस्था थी जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है। हमारे देश में वर्षों तक आपदा का विषय एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास रहा था। इसका मूल कारण ये था कि बाढ़, अतिवृष्टि, ओले गिरना, ऐसी जो स्थितियों पैदा होती थी। उससे निपटने का जिम्मा, उसका संबंध कृषि मंत्रालय से आता था। देश में आपदा प्रबंधन ऐसे ही चलता रहता था। लेकिन 2001 में गुजरात में भूकंप आने के बाद जो कुछ हुआ, देश को नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर किया। अब उसने आपदा प्रबंधन के मायने बदल दिए। हमने तमाम विभागों और मंत्रालयों को राहत और बचाव के काम में झोंक दिया। उस समय के जो अनुभव थे, उनसे सीखते हुए ही 2003 में Gujarat State Disaster Management Act बनाया गया। आपदा से निपटने के लिए गुजरात इस तरह का कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना। बाद में केंद्र सरकार ने, गुजरात के कानून से सबक लेते हुए, 2005 में पूरे देश के लिए ऐसा ही Disaster Management Act बनाया। इस कानून के बाद ही National Disaster Management Authority उसके गठन का रास्ता साफ हुआ। इसी कानून ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी देश की बहुत मदद की।
साथियों,
डिजास्टर मैनैजमेंट को प्रभावी बनाने के लिए 2014 के बाद से हमारी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा काम किया है। हमने Relief, Rescue, Rehabilitation उस पर जोर देने के साथ-साथ ही Reform पर भी बल दिया है। हमने NDRF को मजबूत किया, उसका आधुनिकीकरण किया, देश भर में उसका विस्तार किया। स्पेस टेक्नालजी से लेकर प्लानिंग और मैनेजमेंट तक, best possible practices को अपनाया। हमारे NDRF के साथी, सभी राज्यों के SDRFs, और सुरक्षा बलों के जवान अपनी जान की बाजी लगाकर, एक-एक जीवन को बचाते हैं। इसलिए, आज ये पल इस प्रकार से जान की बाजी लगाने वाले, औरों की जिंदगी बचाने के लिए खुद की जिंदगी का दांव लगाने वाले चाहे वो NDRF के लोग हों, चाहे SDRF के लोग हों, हमारे सुरक्षाबलों के साथी हों, ये सब के सब उनके प्रति आज आभार व्यक्त करने का, उनको salute करने का ये वक्त है।
साथियों,
अगर हम अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत करते चलें, तो आपदा से निपटने की क्षमता दिनों-दिन बढ़ती चली जाती है। मैं इसी कोरोना काल के एक-दो वर्षों की बात करूं तो इस महामारी के बीच भी देश के सामने नई आपदाएँ आकर खड़ी हो गईं। एक तरफ कोरोना से तो लड़ाई लड़ ही रहे थे। अनेक जगहों पर भूकंप आए, कितने ही क्षेत्रों में बाढ़ आई। ओड़िशा, पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी तटों पर cyclones आए, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिमी तटों पर cyclones आए, पहले, एक-एक साइक्लोन में सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। देश ने हर चुनौती का जवाब एक नई ताकत से दिया। इसी वजह से इन आपदाओं में हम ज्यादा से ज्यादा जीवन बचाने में सफल रहे। आज बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, भारत के इस सामर्थ्य, भारत में आए इस बदलाव की सराहना कर रही हैं। आज देश में एक ऐसा end-to-end cyclone response system है जिसमें केंद्र, राज्य, स्थानीय प्रशासन और सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर के काम करती हैं। बाढ़, सूखा, cyclone, इन सभी आपदाओं के लिए वार्निंग सिस्टम में सुधार किया गया है। Disaster risk analysis के लिए एडवांस्ड टूल्स बनाए गए हैं, राज्यों की मदद से अलग अलग क्षेत्रों के लिए Disaster risk maps बनाए गए हैं। इसका लाभ सभी राज्यों को, सभी स्टेक होल्डर्स को मिल रहा है। और सबसे महत्वपूर्ण, डिजास्टर मैनेजमेंट – आपदा प्रबंधन, आज देश में जनभागीदारी और जन-विश्वास का विषय बन गया है। मुझे बताया गया है कि NDMA की ‘आपदा मित्र’ जैसी स्कीम्स से युवा आगे आ रहे हैं। आपदा मित्र के रूप में जिम्मेवारियां उठा रहे हैं। यानी जन भागीदारी बढ़ रही है। कहीं कोई आपदा आती है तो लोग विक्टिम्स नहीं रहते, वो वॉलंटियर्स बनकर आपदा का मुकाबला करते हैं। यानी, आपदा प्रबंधन अब एक सरकारी काम भर नहीं है, बल्कि ये ‘सबका प्रयास’ का एक मॉडल बन गया है।
और साथियों,
जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूँ, तो इसमें हर क्षेत्र में हो रहा प्रयास, एक holistic approach भी शामिल है। आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए, हमने अपने एजुकेशन सिस्टम में भी कई सारे बदलाव किए हैं। जो सिविल इंजीनियरिंग के कोर्सेस होते हैं, आर्किटेक्चर से जुड़े कोर्सेस होते हैं, उसके पाठ्यक्रम में डिजास्टर मैनेजमेंट से जोड़ा, इन्फ्रासट्रक्चर की रचना कैसी हो उसपर विषयों को जोड़ना, ये सारे काम प्रयासरत हैं। सरकार ने Dam Failure की स्थिति से निपटने के लिए, डैम सेफ्टी कानून भी बनाया है।
साथियों,
दुनिया में जब भी कोई आपदा आती है तो उसमें लोगों की दुखद मृत्यु की चर्चा होती है, कि इतने लोगों की मृत्यु हो गई, इतना ये हो गया, इतने लोगों को हटाया गया, आर्थिक नुकसान भी बहुत होता है। उसकी भी चर्चा की जाती है। लेकिन आपदा में जो इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान होता है, वो कल्पना से परे होता है। इसलिए ये बहुत आवश्यक है कि आज के समय में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण ऐसा हो जो आपदा में भी टिक सके, उसका सामना कर सके। भारत आज इस दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। जिन क्षेत्रों में भूकंप, बाढ़ या साइक्लोन का खतरा ज्यादा रहता है, वहां पर पीएम आवास योजना के तहत बन रहे घरों में भी इसका ध्यान रखा जाता है। उत्तराखंड में जो चार धाम महा-परियोजना का काम चल रहा है, उसमें भी आपदा प्रबंधन का ध्यान रखा गया है। उत्तर प्रदेश में जो नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उनमें भी आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीकियों को प्राथमिकता दी गई है। आपात स्थिति में ये एक्सप्रेसवे, विमान उतारने के काम आ सकें, इसका भी प्रावधान किया गया है। यही नए भारत का विज़न है, नए भारत के सोचने का तरीका है।
साथियों,
Disaster Resilient Infrastructure की इसी सोच के साथ भारत ने दुनिया को भी एक बहुत बड़ी संस्था का विचार दिया है, उपहार दिया है। ये संस्था है- CDRI – Coalition for Disaster Resilient Infrastructure. भारत की इस पहल में ब्रिटेन हमारा प्रमुख साथी बना है और आज दुनिया के 35 देश इससे जुड़ चुके हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच में, सेनाओं के बीच में हमने Joint Military Exercise बहुत देखी है। पुरानी परंपरा है उसकी चर्चा भी होती है। लेकिन भारत ने पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए Joint ड्रिल की परंपरा शुरू की है। कई देशों में मुश्किल समय में हमारी डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी एजेंसियों ने अपनी सेवाएँ दी हैं, मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है। जब नेपाल में भूकंप आया, इतनी बड़ी तबाही मची, तो भारत एक मित्र देश के रूप में उस दुख को बाटने के लिए जरा भी देरी नहीं की थी। हमारे NDRF के जवान वहां तुरंत पहुंच गए थे। डिजास्टर मैनेजमेंट का भारत का अनुभव सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि पुरी मानवता के लिए आप सभी को याद होगा 2017 में भारत ने साउथ एशिया जियो-स्टेशनरी communication satellite को लान्च किया। weather और communication के क्षेत्र में उसका लाभ हमारे दक्षिण एशिया के मित्र देश को मिल रहा है।
साथियों,
परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर हममे हौंसला है तो हम आपदा को भी अवसर में बदल सकते हैं। यही संदेश नेताजी ने हमे आजादी की लड़ाई के दौरान दिया था। नेताजी कहते थे कभी भी स्वतंत्र भारत के सपने का विश्वास मत खोना। दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को झकझोर सके”। आज हमारे सामने आज़ाद भारत के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य है। हमारे सामने आज़ादी के सौंवे साल से पहले, 2047 के पहले नए भारत के निर्माण का लक्ष्य है। और नेताजी को देश पर जो विश्वास था, जो भाव नेताजी के दिल में उभरते थे। और उनके ही इन भावों के कारण मैं कह सकता हूँ कि, दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने से रोक सके। हमारी सफलताएँ हमारी संकल्पशक्ति का सबूत हैं। लेकिन, ये यात्रा अभी लंबी है। हमें अभी कई शिखर और पार करने हैं। इसके लिए जरूरी है, हमें देश के इतिहास का, हजारों सालों की यात्रा में इसे आकार देने वाले तप, त्याग और बलिदानों का बोध रहे।
भाइयों और बहनों,
आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा। ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया। स्वाधीनता संग्राम में लाखों-लाख देशवासियों की तपस्या शामिल थी लेकिन उनके इतिहास को भी सीमित करने की कोशिशें हुईं। लेकिन आज आजादी के दशकों बाद देश उन गलतियों को डंके की चोट पर सुधार रहा है, ठीक कर रहा है। आप देखिए, बाबा साहब आंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों को देश उनकी गरिमा के अनुरूप विकसित कर रहा है। स्टेचू ऑफ यूनिटी आज पूरी दुनिया में सरदार वल्लभ भाई पटेल के यशगान की तीर्थ बन गई है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत भी हम सबने कर दी है। आदिवासी समाज के योगदान और इतिहास को सामने लाने के लिए अलग-अलग राज्यों में आदिवासी म्यूज़ियम्स बनाए जा रहे हैं। और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन से जुड़ी हर विरासत को भी देश पूरे गौरव से संजो रहा है। नेताजी द्वारा अंडमान में तिरंगा लहराने की 75वीं वर्षगांठ पर अंडमान के एक द्वीप का नाम उनके नाम पर रखा गया है। अभी दिसम्बर में ही, अंडमान में एक विशेष ‘संकल्प स्मारक’ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लिए समर्पित की गई है। ये स्मारक नेताजी के साथ साथ इंडियन नेशनल आर्मी के उन जवानों के लिए भी एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था। जिस प्रकार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढ़ियां, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है।
साथियों,
मैं 21 अक्टूबर 2018 का वो दिन भी नहीं भूल सकता जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष हुए थे। लाल किले में हुए विशेष समारोह में मैंने आजाद हिंद फौज की कैप पहनकर तिरंगा फहराया था। वो पल अद्भुत है, वो पल अविस्मरणीय है। मुझे खुशी है कि लाल किले में ही आजाद हिंद फौज से जुड़े एक स्मारक पर भी काम किया जा रहा है। 2019 में, 26 जनवरी की परेड में आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिकों को देखकर मन जितना प्रफुल्लित हुआ, वो भी मेरी अनमोल स्मृति है। और इसे भी मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि हमारी सरकार को नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का अवसर मिला।
साथियों,
नेताजी सुभाष कुछ ठान लेते थे तो फिर उन्हें कोई ताकत रोक नहीं सकती थी। हमें नेताजी सुभाष की ‘Can Do, Will Do’ स्पिरिट से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है। वो ये जानते थे तभी ये बात हमेशा कहते थे भारत में राष्ट्रवाद ने ऐसी सृजनात्मक शक्ति का संचार किया है जो सदियों से लोगों के अंदर सोई पड़ी थी। हमें राष्ट्रवाद भी जिंदा रखना है। हमें सृजन भी करना है। और राष्ट्र चेतना को जागृत भी रखना है। मुझे विश्वास है कि, हम मिलकर, भारत को नेताजी सुभाष के सपनों का भारत बनाने में सफल होंगे। आप सभी को एक बार फिर पराक्रम दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूं और मैं आज एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के लोगों को भी विशेष रूप से बधाई देता हूं। क्योंकि बहुत छोटे कालखंड में उन्होंने अपनी पहचान बना दी है। आज कहीं पर भी आपदा हो या आपदा के संबंधित संभावनाओं की खबरें हों, साईक्लोन जैसी। और जब एनडीआरएफ के जवान यूनिफार्म में दिखते हैं। सामान्य मानवीय को एक भरोसा हो जाता है। कि अब मदद पहुंच गई। इतने कम समय में किसी संस्था और इसकी यूनिफार्म की पहचान बनना, यानि जैसे हमारे देश में कोई तकलीफ हो और सेना के जवान आ जाएं तो सामान्य मानवीय को संतोष हो जाता है, भई बस अब ये लोग आ गये। वैसा ही आज एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने अपने पराक्रम से ये करके दिखाया है। मै पराक्रम दिवस पर नेताजी का स्मरण करते हुए, मैं एनडीआरएफ के जवानों को, एसडीआरएफ के जवानों को, उन्होंने जिस काम को जिस करुणा और संवेदनशीलता के साथ उठाया है। बहुत – बहुत बधाई देता हूं। उनका अभिनंदन करता हूं। मैं जानता हूं इस आपदा प्रबंधन के काम में, इस क्षेत्र में काम करने वाले कईयों ने अपने जीवन भी बलिदान दिए हैं। मैं आज ऐसे जवानों को भी श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने किसी की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी थी। ऐसे सबको में आदरपूवर्क नमन करते हुए मैं आप सबको भी आज पराक्रम दिवस की अनेक – अनेक शुभकामनाएं देते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। बहुत बहुत धन्यवाद !
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DS/DK/AK
भारत मां के वीर सपूत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्मजयंती पर पूरे देश की तरफ से कोटि-कोटि नमन: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) January 23, 2022
जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है।
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जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी: PM @narendramodi
हमारे देश में वर्षों तक आपदा का विषय एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास रहा था।
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इसका मूल कारण ये था कि बाढ़, अतिवृष्टि, ओले गिरना, इनसे बनी स्थितियों से निपटने का जिम्मा कृषि मंत्रालय के पास था।
देश में आपदा प्रबंधन ऐसे ही चल रहा था: PM @narendramodi
लेकिन 2001 में गुजरात में भूकंप आने के बाद जो कुछ हुआ, उसने आपदा प्रबंधन के मायने बदल दिए।
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हमने तमाम विभागों और मंत्रालयों को राहत और बचाव के काम में झोंक दिया।
उस समय के जो अनुभव थे, उनसे सीखते हुए ही 2003 में Gujarat State Disaster Management Act बनाया गया: PM @narendramodi
हमने Relief, Rescue और Rehabilitation पर जोर देने के साथ ही Reform पर भी बल दिया है।
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हमने NDRF को मजबूत किया, उसका आधुनिकीकरण किया, देश भर में उसका विस्तार किया।
स्पेस टेक्नालजी से लेकर प्लानिंग और मैनेजमेंट तक, best possible practices को अपनाया गया: PM @narendramodi
दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच में, सेनाओं के बीच में हमने Joint Military Exercise बहुत देखी है।
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लेकिन भारत ने पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए Joint ड्रिल की परंपरा शुरू की है: PM @narendramodi
नेताजी कहते थे- "कभी भी स्वतंत्र भारत के सपने का विश्वास मत खोना, दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को झकझोर सके।"
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आज हमारे सामने आज़ाद भारत के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य है।
हमारे सामने आज़ादी के सौंवे साल से पहले नए भारत के निर्माण का लक्ष्य है: PM @narendramodi
आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा।
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ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया: PM @narendramodi
ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था।
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जिस कार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढ़ियां, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है: PM @narendramodi
मैं 21 अक्टूबर 2018 का वो दिन भी नहीं भूल सकता जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष हुए थे।
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लाल किले में हुए विशेष समारोह में मैंने आजाद हिंद फौज की कैप पहनकर तिरंगा फहराया था।
वो पल अद्भुत है, अविस्मरणीय है: PM @narendramodi
नेताजी सुभाष कुछ ठान लेते थे तो फिर उन्हें कोई ताकत रोक नहीं पाती थी।
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हमें नेताजी सुभाष की ‘Can Do, Will Do’ स्पिरिट से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है: PM @narendramodi
At the programme to mark the unveiling of the hologram statue of Netaji Bose. https://t.co/OxRPKqf1Q7
— Narendra Modi (@narendramodi) January 23, 2022
A historic day,
— Narendra Modi (@narendramodi) January 23, 2022
A historic programme,
At a historic location…
The statue of Netaji Subhas Chandra Bose is a fitting tribute to his indelible contribution to our nation. pic.twitter.com/Azb4LF0o2E
Some unforgettable tributes to Netaji Subhas Chandra Bose. pic.twitter.com/AX7dxGswGk
— Narendra Modi (@narendramodi) January 23, 2022
Did you know that matters relating to disasters and disaster management earlier came under the agriculture department…
— Narendra Modi (@narendramodi) January 23, 2022
Much has changed in the last two decades and it is good to see this subject come to the mainstream of policymaking. pic.twitter.com/RzN0QPXyUU
We are making a sincere effort to ensure each and every contributor to India’s freedom struggle gets his or her due place in our history. pic.twitter.com/Zr8dV4A6vr
— Narendra Modi (@narendramodi) January 23, 2022