पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एचआईवी और एड्स (रोकथाम और नियंत्रण) विधेयक, 2014 में संशोधन को मंजूरी दी है। एचआईवी और एड्स से पीड़ित लोगों की सुरक्षा के लिए इस विधेयक का मसौदा तैयार किया गया था। विधेयक के प्रावधान एचआईवी और एड्स से संबंधित भेदभाव की समस्या को रेखांकित करेंगे और कानूनी दायित्वों को निर्धारित कर मौजूदा कार्यक्रमों को मजबूत बनाएंगे। साथ ही इसके तहत तमाम शिकायतों के निवारण और जांच के लिए एक प्रणाली विकसित की जाएगी।
विधेयक में एचआईवी और एड्स के प्रसार को नियंत्रित करने का प्रयास करने के तहत पीड़ित व्यक्ति से भेदभाव से बचाने के उपाय किए गए हैं। इसके तहत एचआईवी और एड्स पीड़ित व्यक्ति के बारे में पूरी गोपनीयता बरती जाएगी। विधेयक में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि सहमति से एचआईवी संबंधी परीक्षण, उपचार और नैदानिक अनुसंधान के लिए गोपनीयता सुनिश्चित की जाएगी जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा मिल सके।
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति से भेदभाव के लिए विधेयक में कुछ आधार तय किए गए हैं जिनमें अनुचित व्यवहार, सेवा देने या लेने से इनकार नहीं करना आदि शामिल हैं:
I. रोजगार
II. शैक्षणिक संस्थान
III. स्वास्थ्य सेवाएं
IV. किराये पर संपत्ति लेने या रहने के लिए कमरा लेने
V. सार्वजनिक या निजी कार्यालय
VI. बीमा का प्रावधान (बीमांकिक अध्ययन के आधार पर) रोजगार प्राप्त करने या स्वास्थ्य देखभाल या शिक्षा के क्षेत्र तक पहुँचने के लिए एक शर्त के रूप में एचआईवी परीक्षण के लिए आवश्यकता भी निषिद्ध है।
अगर एचआईवी पीड़ित व्यक्ति 18 वर्ष से कम उम्र का है तो उसके पास साझा घर में रहने का अधिकार है और वहां उपलब्ध सुविधाओं का वह लाभ ले सकता है। विधेयक के प्रावधान के मुताबिक एचआईवी पीड़ित व्यक्ति या उसके साथ रहने वाले लोगों के खिलाफ घृणा फैलाने वाली सामग्री प्रकाशित नहीं की जा सकती है। यह विधेयक नाबालिग पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करेगा। 12 से 18 वर्ष के बीच उम्र वाला व्यक्ति जो एचआईवी और एड्स के मामलों को पूरी तरह से समझने लगे और उसमें एक परिपक्वता आ गई है तो वह परिवार के तमाम कामों मसलन शैक्षणिक संस्थानों, बैंक खातों का संचालन, संपत्ति की देखरेख, इलाज एवं देखभाल की जिम्मेदारी संभाल सकेगा।
विधेयक में यह प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति पीड़ित पर एचआईवी की स्थिति का खुलासा करने का दबाव नहीं डाल सकता है। इसके बारे में जानकारी तभी मांगी जा सकती है जब पीड़ित उससे सहमत हो या कोर्ट के आदेश पर ऐसा किया जा सकता है। एचआईवी पॉजिटिव व्यक्तियों के बारे में जानकारी का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी प्रतिष्ठानों की होगी। विधेयक के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारें इन निम्नलिखित बातों के लिए जिम्मेदारी होंगी।
· एचआईवी या एड्स के प्रसार को रोकने के लिए
· एचआईवी या एड्स पीड़ित व्यक्ति को एंटी-रीट्राइव थेरेपी और संक्रमण से बचाने के लिए इलाज मुहैया कराना।
· विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के लिए उनके उपयोग की सुविधा मुहैया कराना
· एचआईवी या एड्स संबंधी शिक्षा एवं संचार कार्यक्रमों का आयोजन करना होगा जिसमें उम्र, लिंग, संवेदनशील, कलंकित करने की भावना दूर करने की बात कही गई हो।
· एचआईवी या एड्स से पीड़ित बच्चों की देखभाल और उपचार के लिए दिशा निर्देश तैयार करना होगा। राज्य के प्रत्येक व्यक्ति को एचआईवी के सही रोकथाम के उपाय करने, जांच, उपचार और परामर्श सेवाओं को लेना का अधिकार है। विधेयक कहता है कि एचआईवी पॉजिटिव व्यक्तियों से संबंधित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर अदालत में निपटारा किया जाएगा और इसके बारे में विधिवत गोपनीयता सुनिश्चित की जाएगी।
देश में अभी एचआईवी पीड़ितों की संख्या करीब 21 लाख है। हालांकि बचाव के उपाय किए जाने के बाद इसके मामलों में पिछले दशकों में कमी आई है। इस विधेयक के जरिये राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के लिए जरूरी सहायता की बात कही गई है ताकि नए मामलों को रोका जा सके और 2030 तक इस महामारी को खत्म करने के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।