प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने परिधान/वस्त्रों और मेड अप्स के निर्यात के लिए राज्य और केन्द्रीय करों और लेवी (आरओएससीटीएल) की छूट योजना 31 मार्च 2026 तक जारी रखने की अनुमति दे दी।
दो (2) वर्षों की प्रस्तावित अवधि के लिए योजना को जारी रखने से स्थिर नीतिगत व्यवस्था मिलेगी जो दीर्घकालिक व्यापार योजना के लिए आवश्यक है, विशेष रूप से कपड़ा क्षेत्र में जहां दीर्घकालिक डिलीवरी के लिए अग्रिम आदेश दिए जा सकते हैं।
आरओएससीटीएल की निरंतरता नीति व्यवस्था में पूर्वानुमान और स्थिरता सुनिश्चित करेगी, करों और लेवी के बोझ को दूर करने में मदद करेगी और इस सिद्धांत पर समान अवसर प्रदान करेगी कि “वस्तुओं का निर्यात किया जाता है न कि घरेलू करों का”।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना को 31.03.2020 तक और आरओएससीटीएल को 31 मार्च 2024 तक जारी रखने की अनुमति दे दी थी। 31 मार्च 2026 तक का वर्तमान विस्तार वस्त्रों और मेड-अप्स क्षेत्रों की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में मदद करता है। यह परिधान/वस्त्रों और मेड अप्स उत्पादों को लागत-प्रतिस्पर्धी बनाता है और शून्य-रेटेड निर्यात के सिद्धांत को अपनाता है। अन्य कपड़ा उत्पाद (अध्याय 61, 62 और 63 को छोड़कर) जो आरओएससीटीएल के अंतर्गत शामिल नहीं हैं, अन्य उत्पादों के साथ आरओडीटीईपी के तहत लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं।
योजना का उद्देश्य परिधान/वस्त्रों और मेड-अप्स के निर्यात पर शुल्क वापसी योजना के अलावा राज्य और केन्द्रीय करों और लेवी की भरपाई छूट के माध्यम से करना है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य सिद्धांत पर आधारित है कि निर्यात के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में समान अवसर प्रदान करने के लिए करों और शुल्कों का निर्यात नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए, न केवल इनपुट पर अप्रत्यक्ष करों में छूट या प्रतिपूर्ति की जानी है, बल्कि अन्य गैर-वापसी वाले राज्य और केंद्रीय करों और लेवी पर भी छूट दी जानी है।
राज्य करों और लेवी की छूट में परिवहन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन, कैप्टिव पावर, कृषि क्षेत्र, मंडी कर, बिजली शुल्क, निर्यात दस्तावेजों पर स्टांप शुल्क, कच्चे कपास के उत्पादन में उपयोग किए जाने वाले कीटनाशकों, उर्वरक इत्यादि जैसे इनपुट पर भुगतान किए गए एसजीएसटी, अपंजीकृत डीलरों से खरीद, बिजली के उत्पादन में उपयोग किया जाने वाला कोयला और परिवहन क्षेत्र के लिए इनपुट पर वैट शामिल है। केन्द्रीय करों और लेवी की छूट में परिवहन में उपयोग किए जाने वाले ईंधन पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, कच्चे कपास के उत्पादन में उपयोग किए जाने वाले कीटनाशकों, उर्वरक आदि जैसे इनपुट पर भुगतान किया गया एम्बेडेड सीजीएसटी, अपंजीकृत डीलरों से खरीद, परिवहन क्षेत्र के लिए इनपुट और एम्बेडेड सीजीएसटी और बिजली के उत्पादन में प्रयुक्त कोयले पर मुआवजा उपकर शामिल हैं।
आरओएससीटीएल एक महत्वपूर्ण नीतिगत उपाय रहा है और इसने परिधान और निर्मित वस्तुओं के भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद की है जो कपड़ा मूल्य श्रृंखला के मूल्य वर्धित और श्रम सघन खंड हैं। योजना को दो (2) वर्षों की अवधि के लिए जारी रखने से स्थिर नीति व्यवस्था उपलब्ध होगी जो दीर्घकालिक व्यापार योजना के लिए आवश्यक है, विशेष रूप से कपड़ा क्षेत्र में जहां दीर्घकालिक डिलीवरी के लिए अग्रिम आदेश दिए जा सकते हैं।
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एमजी/एआरएम/केपी/एजे
This Cabinet decision is great news for the textiles sector, which is vital to India's economic growth. It will significantly enhance the competitiveness of Indian products and boost exports. https://t.co/Xtk44uxGIM https://t.co/g2hrjPNZ49
— Narendra Modi (@narendramodi) February 1, 2024