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एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में भाग लेने के दौरान प्रधानमंत्री का संबोधन

एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में भाग लेने के दौरान प्रधानमंत्री का संबोधन


आप सबको नमस्कार! ये त्योहारों का समय है, देश उत्सव, उत्साह और उमंग से भरा हुआ है। उत्सव और उमंग के इस वातावरण में, दुनियाभर से यहां आए आप सभी साथियों का स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं।

Friends,

NDTV की ये समिट गंभीर विषयों पर मंथन से जुड़ी है। आजकल, नए वर्ल्ड ऑर्डर की चर्चा भी हर कोई कर रहा है। क्योंकि इसका प्रभाव, सामान्य जीवन पर पड़ रहा है, ऐसे में इस तरह की वर्ल्ड समिट्स का महत्व और बढ़ जाता है।

साथियों,

The World Between Orders की बात करते हुए, हमें दो बातों को समझना होगा। पहली बात, दुनिया का Order बदल क्यों रहा है? पुराना Global Order आज की चुनौतियों का समाधान क्यों नहीं दे पा रहा? और दूसरी बात, इस बदलती दुनिया में भारत की भूमिका क्या है?

साथियों,

अगर मैं पहली बात को विस्तार दूं, तो यह बदलाव सहज और स्वाभाविक है। Second World War ने दुनिया को एक बड़ा सबक दिया था। दुनिया ने समझा कि केवल Power और Interests के आधार पर विश्व व्यवस्था नहीं चल सकती। संवाद जरूरी है, सहयोग जरूरी है और विवादों का समाधान भी जरूरी है। इसी भावना ने United Nations यानी UN की नींव रखी। UN ने दशकों तक वैश्विक सहयोग और शांति को बढ़ावा देने के लिए, अपनी एक भूमिका निभाई है। लेकिन समय के साथ दुनिया बदलती गई। नई Aspirations उभरीं। नई Economies और नई Powers का उदय हुआ। दुनिया के सामने मौजूद Challenges भी पहले से कहीं अधिक Complex होती गईं। Technology ने समाज, अर्थव्यवस्था और शक्ति के स्वरूप को बदल दिया। और जो देश उस समय Global Order बनाने वाली टेबल पर नहीं थे, वो अपनी भूमिका के साथ आगे आ गए। यानी सवाल ये कि क्या Global Order उसी गति से बदला? जवाब है – नहीं। ना वर्ल्ड ऑर्डर बदला, और ना ही Global Institutions खुद को उसी गति से बदल पाए। United Nations और दूसरे Global Institutions की अपनी ऐतिहासिक भूमिका रही है। लेकिन आज की चुनौतियों के सामने उनकी सीमाएं स्पष्ट दिखाई देती हैं। अब नई शक्तियां उभर रही हैं। नई आवाजें अपनी जगह मांग रही हैं। नई चुनौतियां नए समाधानों की मांग कर रही हैं। जब दुनिया की वास्तविकता बदल जाए, लेकिन फैसले लेने के तरीके न बदलें, तो व्यवस्था और वास्तविकता के बीच दूरी बढ़ने लगती है। यही आज हम होते हुए देख रहे हैं। दशकों तक Trade ने देशों को जोड़ा, Technology ने दूरियां मिटाईं, Sea Routes ने अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ा, Culture और Mobility, अलग-अलग समाजों को करीब लाए, लेकिन आज यही कड़ियां नए तनावों का सामना कर रही हैं। Trade, वेपनाइज़ेशन का माध्यम बन रहा है। Technology, Competition और Conflict का नया क्षेत्र बन रही है। Sea Routes, Geopolitical Tensions के केंद्र बन रहे हैं। इसलिए, आज की चुनौती केवल एक नए Global Order के उभरने की नहीं है। चुनौती ये है, कि बदलती दुनिया में ऐसा Order कैसे बने, जिसमें नई वास्तविकताओं को जगह मिले, Global Institutions अधिक प्रभावी हों और देशों के बीच सहयोग की भावना मजबूत हो। और यहीं से भारत की भूमिका का सवाल सामने आता है।

साथियों,

भारत की भूमिका को विस्तार देने से पहले मैं आपको 7-8 साल पहले के दौर में ले चलूंगा। कोरोना के दौरान क्या हुआ, ये हम सभी ने देखा है। जब दुनिया को सबसे ज्यादा सहयोग की ज़रूरत थी, तब दुनिया बिल्कुल बंटी हुई नज़र आई। जो लोग ग्लोबलाइजेशन को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करते थे, उन्होंने संकट के समय अपने स्वार्थ को प्राथमिकता दी। बिखराव के उस दौर में, हर कोई एक-दूसरे को संदेह से देख रहा था, ग्लोबल ट्रस्ट निचले स्तर पर था, तब 2020 में, जब जी 20 के मंच से मैंने दुनिया के सामने एक बात रखी थी, और मैंने कहा था a new world order  for the collective well-being of humankind. इसका मैंने का आह्वान किया था। यानी ऐसी व्यवस्था जिसके केंद्र में मानवता हो। उसी वर्ष UNGA के मंच से मैंने कहा था, ‘यदि सदी बदल जाए और हम न बदले, तो बदलाव लाने की हमारी क्षमता भी कमजोर पड़ जाती है।’

साथियों,

आज ये सवाल तो है ही कि World Order बदल रहा है, लेकिन सवाल ये भी है, कि जब दुनिया का पुराना क्रम बदल रहा है, तो हम मिलकर कैसी नई विश्व व्यवस्था बनाना चाहते हैं? मल्टीलैटरल इंस्टीट्यूशन्स में Reform जरूरी है। Global South की आवाज को उचित स्थान देना जरूरी है। इंटरनेशनल को-ऑपरेशन सिर्फ गुड टाइम्स के लिए न हो, संकट के समय भी वो प्रभावी हो, इसके लिए सभी स्टेकहोल्डर्स में प्रभावी सहमति होना जरूरी है।

साथियों,

हमारे यहां चाणक्य ने अर्थशास्त्र में कहा है ‘अप्रणीतः तु मात्स्य न्यायं उद्-भावयति! यानि’ जब व्यवस्था कमजोर पड़ती है, तो मत्स्य न्याय पैदा होता है। मत्स्य न्याय में बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है। दुनिया को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जो मत्स्य-न्याय की स्थिति पैदा होने से रोके। और यही भारत का विजन है, और यही भारत कर रहा है। दुनिया ने कोरोना के उस भीषण संकट के दौरान, भारत की इस भूमिका को अनुभव भी किया। जब दुनिया के समर्थ देश अपने बारे में ही सोच रहे थे, तब भारत ने आगे बढ़कर, हर जरूरतमंद देश तक वैक्सीन्स पहुंचाईं, 100 से ज्यादा देशों को दवाइयां भेजीं।

साथियों,

भारत सबका साथ-सबका विकास के मंत्र पर चलते हुए, विश्व-बंधु के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। आपने भी देखा है, भारत के नेतृत्व में G20 समिट हुई, भारत के नेतृत्व में ब्रिक्स समिट हुई। इन दोनों समिट्स को लेकर कितनी आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं। कहा जा रहा था, कि घोषणापत्रों को लेकर सहमति बनाना असंभव होगा। लेकिन भारत ने सेतु बनाए, संवाद पर बल दिया, और दोनों बार आम सहमति से दिल्ली घोषणापत्र जारी हुआ। परस्पर विरोधी कहे जाने वाले देश भी, भारत के मंच पर एक साथ आए। ये सिर्फ संयोग नहीं है। ये विश्व-बंधु के रूप में भारत की भूमिका का भरोसा है।

साथियों,

भारत जितना मजबूत होगा, भारत जितना सशक्त होगा, मानवता को उतना ही अधिक फायदा होगा। क्योंकि भारत की नीतियों को, निर्णयों को, युगों के अनुभव, और सभ्यता के मूल्य प्रेरित करते हैं। भारत, क्षणों के हिसाब से फैसले नहीं लेता। इसलिए भारत, स्थिरता की गारंटी है, निरंतरता का आश्वासन है। और विकसित भारत का हमारा संकल्प भी इसी भावना को बढ़ावा देता है। अभी कुछ दिन पहले ही एक समिट में मैंने Power to Empower का विजन सामने रखा है। विकसित भारत, सिर्फ हमारे लिए नहीं है। ये एक बेहतर विश्व की भी गारंटी है। जब भारत, आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ता है, तो ये ग्लोबल सप्लाई चैन्स को मजबूत करता है। जब भारत की इकॉनमी मजबूत होती है तो ये विश्व को समृद्धि की उम्मीद देता है। जब भारत की युवाशक्ति समर्थ और स्किल्ड होती है, तो ये विश्व को इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी का भरोसा देती है। यानी भारत आज अपना सामर्थ्य बढ़ा रहा है, ताकि विश्व का सामर्थ्य भी बढ़ सके।

साथियों,

भारत आज, टॉप-3 इकॉनमी बनने के लिए पूरी शक्ति से काम कर रहा है। और हमारा हौसला तब और बढ़ता है, जब हम वर्तमान मुश्किल वैश्विक परिस्थितियों को देखते हैं, और इसमें भी भारत,फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमी बनकर उभरता है। आज भारत, ग्रीन एनर्जी के मामले में टॉप की इकॉनमीज में है। भारत, AI के मामले में टॉप-3 इकोसिस्टम्स में से एक है। भारत, टॉप थ्री स्टार्ट अप इकोसिस्टम्स में से एक है। भारत, सबसे बड़ी डिजिटल इकॉनमीज में से एक है। भारत, रियल टाइम डिजिटल पेमेंट्स में नंबर वन है।

साथियों,

आज का भारत, अपने अलग-अलग क्षेत्र में अपने सामर्थ्य को बढ़ा रहा है, ऐसी अनेक घटनाएं हैं जो भारत में पहली बार हुई हैं। भारत के Fast Breeder Reactor ने, पहली बार Criticality हासिल की। भारत ने पहली बार Census को भी डिजिटल टेक्नोलॉजी से जोड़ा। इसी दौरान, भारत में पहली बार हाइड्रोजन ट्रेन चली, इसी दौरान, भारत ने पहली बार, Non-fossil Electricity Capacity में 300 गीगावॉट का आंकड़ा पार किया।

साथियों,

मैं आपको एक और उदाहरण दूंगा। कुछ दिन पहले ही मुझे, Asian Games से लौटे युवा खिलाड़ियों से मिलने का अवसर मिला। भारत ने इस बार 85 Medals जीते हैं। और इसमें भी हमने कई उपलब्धियां पहली बार हासिल की हैं। महिला रिकर्व टीम ने, पहली बार टीम और व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीते हैं। एक ही Asian Games में, Boxing में भारत ने तीन Gold Medals जीते हैं, और ये भी पहली बार हुआ है।

साथियों,

अब मैं एक शब्द बोलूंगा, उम्मीद है, हॉल में बहुत सारे लोगों ने ये शब्द सुना होगा। ये शब्द है -सिपक-टकरॉ। सिपक-टकरॉ, आप लोगों ने सुना है ये शब्द? जिन्हें नहीं पता, उन्हें मैं बता दूं कि ये एक खेल का नाम है। दुनिया इसको खेलती है, और इसमें मेडल भी जीतती रही है। ये एक प्रकार से फुटबॉल और वॉलीबॉल का हाईब्रिड कंबिनेशन है। खेला पैरों से जाता है, लेकिन खेल, नेट के आर-पार का होता है। भारत ने पहली बार, हाल ही के एशियम गेम्स में, इस खेल के एक इवेंट – Men क्वाडरेन्ट में, उसमें भी मेडल जीता है।

साथियों,

ये बदलते भारत की पहचान है। हर एक क्षेत्र में कुछ ना कुछ नया और पहली बार हो रहा है। यानी भारत की जो कन्वेंशनल स्ट्रेंथ रही है, वो तो मजबूत हो ही रही है। जहां हम उतने समर्थ नहीं थे, वहां भी नई ताकत बनकर उभर रहे हैं। और ये सब आइसोलेशन में नहीं हो रहा, ये सब, रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म की नीति का परिणाम है।

साथियों,

देश ने वो दिन देखे हैं, जब बिजली की डिमांड बढ़ने पर पूरा ग्रिड बैठ जाया करता था। लेकिन जब देश एक इच्छाशक्ति के साथ उठ खड़ा होता है, चल पड़ता है, तो पावर ग्रिड बैठता नहीं, बल्कि वही पावर ग्रिड देश की प्रगति और आत्मविश्वास को बुलंद करता है।

साथियों,

आज हमारी युवाशक्ति, नारीशक्ति, हमारे किसान, हमारे मछुआरे, गरीब और मिडिल क्लास, बुलंद हौसले के साथ विकसित भारत के निर्माण में जुटे हैं। आज आप देखिए, भारत का एक्सपोर्ट नए रिकॉर्ड बना रहा है, अगर मैं सितंबर की ही बात करूं, तो गुड्स और प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट पिछले साल की तुलना में करीब 25 परसेंट बढ़ा है। सी-फूड एक्सपोर्ट, 12 वर्षों में बढ़कर दोगुने से अधिक हो चुका है। हमारे गांवों में साढ़े तीन करोड़ से अधिक लखपति दीदी बन चुकी हैं, और हम 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत बहुत कम समय में ही करीब 70 लाख नई जॉब्स क्रिएट किए हैं। मिडिल क्लास के लिए 12 लाख रुपए की आय पर टैक्स ज़ीरो हुआ है, ये आप लोगों को बार-बार याद कराना पड़ता है, जो मिला वो हजम, ऐसा नहीं चलता है। देश में Ease of Living भी सुधर रही है और रोजगार के नए मौके भी बन रहे हैं।

साथियों,

एक समय था, जब दुनिया भारत को World’s Back Office कहती थी, लेकिन आज का भारत सिर्फ सर्विस प्रोवाइडर नहीं है, हम दुनिया के लिए इनोवेट कर रहे हैं, डिजाइन कर रहे हैं, नए सोल्यूशंस, नई टेक्नोलॉजी बना रहे हैं। आप रिसर्च का ही क्षेत्र देखिए, आज Research Publications के मामले में हम तीसरे स्थान पर हैं। वर्ष 2025 में करीब डेढ़ लाख Patents File हुए हैं, एक साल में डेढ़ लाख Patents. ये रिसर्च एंड इनोवेशन को लेकर भारत में संभावनाओं की एक झलक है।

साथियों,

आप सेमीकंडक्टर सेक्टर को भी देखिए, दुनिया के Chip-design Workforce का करीब 20 परसेंट भारत में है। भारतीय इंजीनियर्स देश में ही 2-3 नैनोमीटर, ऐसे एडवांस्ड चिप डिजायन पर भी काम कर रहे हैं। और इस Talent Pool को और बड़ा करने के लिए देश में आज हर सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। भारत के एकेडमिक इंस्टीट्यूशंस में हमारे स्टूडेंट्स, अब तक सवा तीन सौ से ज्यादा Chip Designs तैयार कर चुके हैं।

साथियों,

एक और उदाहरण, Global Capability Centres का भी है। दुनिया के आधे से ज्यादा कैपेबिलिटी सेंटर्स भारत में हैं, ये सिर्फ नंबर्स की बात नहीं है, इनका काम भी बदल रहा है। पहले कई सारे सेंटर्स में Support Services पर ही फोकस होता था। लेकिन आज, ये AI, Cloud, Engineering, Analytics, Product Development, ऐसे अनेक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, यानि भारत का रोल बदल रहा है, भारत की पहचान बदल रही है। हम Talent at Scale से Thinking at Scale तक पहुंचे हैं। पहले जो दुनिया भारत की Manpower पर भरोसा करती थी, आज वो भारत की Mind-power पर भी भरोसा करती है। और इसी का परिणाम है, कि हम अब सिर्फ Back Office ही नहीं, Brain Office के रूप में भी दुनिया के साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

सरकार जब भी किसी क्षेत्र में नीति बनाती है, निवेश का फैसला लेती है, तो वो उसके पीछे एक सोच होती है। भारत में कौन-सी क्षमताएं विकसित करनी हैं, किन क्षेत्रों में दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता कम करनी है और आने वाले समय में, किन संकटों के लिए आज ही तैयारी करनी है। हम हर फैसले में इन बातों को ध्यान में रखते हैं। बहुत सारे इन्वेस्टमेंट्स ऐसे होते हैं, जिनका फायदा दिखने में सालों-साल लग जाते हैं, लेकिन देश के भविष्य के लिए उनका बहुत महत्व होता है। मैं इसका एक दिलचस्प उदाहरण देता हूं। आप सभी भारत की फार्मा कैपेबिलिटीज से परिचित हैं, लेकिन कुछ वर्ष पहले तक भारत बहुत बड़ी मात्रा में दवाओं के लिए, रॉ मटीरियल के लिए इंपोर्ट पर निर्भर था। अब देश इस स्थिति को बदल रहा है। आपने Penicillin G के बारे में सुना होगा, ये एंटीबायोटिक्स के लिए जरुरी है। पिछले दो-तीन दशकों में , भारत में इसका डोमेस्टिक प्रोडक्शन लगभग बंद हो गया था। हम इसको Production Linked Incentive यानी PLI Scheme के दायरे में लाए। अब, आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में कई सालों बाद Penicillin G का घरेलू उत्पादन फिर से शुरू हुआ है।

साथियों,

Penicillin -G तो एक उदाहरण है। भारत में हम API, यानि दवा बनाने का जो मटैरियल होता है, उससे जुड़ी पूरी डोमेस्टिक सप्लाई चैन बना रहे हैं। इसलिए, इस सेक्टर को PLI स्कीम के तहत लाया गया है और अब तक इसमें 5 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की इन्वेस्टमेंट हुई है। और करीब 40 प्रोजेक्ट्स शुरु हो चुके हैं। ऐसी ही नीतियां और निर्णय भारत को आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे हैं।

साथियों,

देश की इतनी सारी उपलब्धियों की चर्चा के बीच हमारे मीडिया के साथी शिकायत करेंगे कि बाते तो बहुत हुईं, लेकिन हमारे काम का तो कुछ हुआ नहीं। NDTV इतना शानदार आयोजन कर रहा है और हमारा तो मंत्र है, सबका साथ सबका विकास, मीडिया का भी विकास, तो थोड़ी खट्टी-मीठी बातें भी अच्छी लगेगी आप लोगों को?

साथियों,

दुनिया जहां नए ऑर्डर की तलाश में है, कुछ लोग भारत में डिस-ऑर्डर के सपने देख रहे हैं। आज जब दुनिया में इतनी अव्यवस्था है, तब एक मज़बूत भारत की तस्वीर दुनिया में जानी चाहिए। लेकिन ये लोग भारत की प्रतिष्ठा को ही मिट्टी में मिलाने पर तुले हुए हैं। ये लोग विदेशों में जा-जाकर भारत को बदनाम करते हैं, विदेशियों से दखल की अर्ज़ी लगाते हैं, पता नहीं कब तक कांग्रेस अपने Failed Product की लॉन्चिंग के लिए देश को दांव पर लगाती रहेगी। साल भर में हमारे श्री हरिकोटा से उतनी लॉन्चिंग नहीं होती, जितनी एक साल में कांग्रेस के लोग अपने नेता को लॉन्च करने की विफल कोशिश कर लेते हैं।

साथियों,

कांग्रेस को अपनी जो दुर्दशा करनी हो, करे, इससे हमें कोई समस्या नहीं है। लेकिन अपने परिवार को लगातार नाकामी के दाग से बचाने के लिए कांग्रेस अब भारत की उपलब्धियों को, भारत की अच्छाइयों को और भारत की प्रगति को ही कठघरे में खड़ा कर रही है। अंगूर इतने खट्टे हैं कि कांग्रेस अंगूर की बेल को काटने में ही जुट गई है। दरअसल, कांग्रेस का ये परिवार उनकी पार्टी पर बोझ बन चुका है, पार्टी के बड़े-बुजुर्ग भी ये समझते हैं, अकेले में मिलने पर हमें बताते भी हैं, लेकिन अपमान का घूंट पीकर वो चुप ही रहते हैं।

साथियों,

कांग्रेस के इस रवैये का नुकसान सरकार के ईमानदार आलोचकों को भी होता है, और ये लोकतंत्र में बहुत बड़ा खर्चा है। ईमानदार आलोचकों  को इससे बहुत नुकसान हो रहा है। जो लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के खिलाफ अपनी बात रखना चाहते हैं, उनकी बात भी कांग्रेस के शोर में खो जाती है, उन ईमानदार आलोचकों की आवाज दब जाती है। जो लोकतंत्र का भला चाहते हैं, देश का हित चाहते हैं और भले ही सरकार के कट्टर विरोधी हैं, उनको कांग्रेस के इस चीखने-चिल्लाने में कहीं मौका ही नहीं मिलता, अपनी बात रखने का। हमने संसद में देखा है, विपक्षी दलों के कितने ही प्रतिभावान युवा सांसद हैं, जो अपनी बात रखना चाहते हैं, सरकार की आलोचना करना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस संसद नहीं चलने देती कि दूसरों को मौका ना मिल जाए, क्योंकि कांग्रेस को लाइम-लाइट में सिर्फ एक को ही रखना है। ऐसा करके विपक्ष के युवा सांसदों के साथ कांग्रेस बहुत अन्याय करती है।

और साथियों,

ऐसे आंदोलन, जो स्वाभाविक रूप से सरकार की कमियों को उजागर करना चाहते हैं, जो वाकई सिस्टम में सुधार करना चाहते हैं और लोकतंत्र में ये आवश्यक भी है, लेकिन उन्हें भी कांग्रेस तबाह कर देती है। कांग्रेस वो परजीवी बन गई है, जो किसी को आगे नहीं बढ़ने देना चाहती। दिमागी नक्सलियों ने कांग्रेस के दिमाग पर ऐसा कब्जा कर लिया है कि कांग्रेस ने खुद के सोचने की क्षमता ही खो दी है। जो जंगलों में विनाश करते थे, वो अब कांग्रेस में घुसकर देश का सर्वनाश करने पर तुले हुए हैं।

साथियों,

इन सारी चुनौतियों के बीच हमारे सामने विकसित भारत का विराट लक्ष्य है। देश की आकांक्षाएं असीमित हैं। इसलिए, भारत में एक ही स्पिरिट आज गुंजायमान है, और ये स्पिरिट है- We Will Do It, We Will Do It. हम बड़े सपने देखेंगे, हर चुनौती को अवसर में बदलेंगे, हर संकल्प को सिद्धि तक लेकर जाएंगे। हमारी शक्ति, हमारा आत्मविश्वास है, हमारी प्रेरणा, 140 करोड़ देशवासियों के सपने हैं। हम Innovation करेंगे, नई राहें बनाएंगे, नई ऊंचाइयां छुएंगे और भारत की सफलता को दुनिया की सफलता से जोड़ेंगे। मुझे विश्वास है इस समिट से निकला अमृत हमारी इसी स्पिरिट को सशक्त करेगा, हमारे संकल्पों को नई ऊर्जा देगा और भारत की विराट आकांक्षाओं को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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MJPS/SS/SS/RK/DK