पीएमइंडिया
महामहिम एवं मित्रों,
सबसे पहले, मैं पुर्तगाल के एक महान राजनेता और एक वैश्विक राजनीतिज्ञ, पूर्व राष्ट्रपति एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्री मारियो सोरेस के निधन पर पुर्तगाल की जनता एवं वहां की सरकार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं। वह भारत और पुर्तगाल के बीच राजनयिक संबंधों की पुनः स्थापना के शिल्पी थे। हम दुख की इस घड़ी में पूरी तरह से पुर्तगाल के साथ खड़े हैं।
महामहिम, सूरीनाम के उपराष्ट्रपति श्री माइकल अश्विन अधिन, महामहिम पुर्तगाल के प्रधानमंत्री डा. एंटोनियो कोस्टा,
कर्नाटक के राज्यपाल श्री वजु भाई वाला, कर्नाटक के मुख्यमंत्री, माननीय मंत्रीगण, भारत और विदेशों से पधारे गणमान्य व्यक्ति, और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण, प्रवासी भारतीयों के वैश्विक परिवार।
आप सभी का 14वें प्रवासी भारतीय दिवस पर स्वागत करना मेरे लिए अत्यंत हर्ष की बात है। दूर-दराज से यात्रा कर हजारों की संख्या में आप लोग आज यहां पधारे हैं। लाखों लोग डिजिटल माध्यमों के जरिए इस कार्यक्रम से जुड़े हैं।
यह भारत के सबसे महानतम प्रवासियों में से एक महात्मा गांधी के स्वदेश लौटने का उत्सव मनाने का दिन है।
ये एक ऐसा पर्व है जिसमें एक प्रकार से मेजबान भी आप हैं, मेहमान भी आप ही हैं। यह एक ऐसा पर्व है जिसमें विदेश में रहने वाली संतान से मिलने का अवसर है। अपनों को अपनों से मिलना, अपने लिए नहीं सबके लिए मिलना। इस आयोजन की असली पहचान आन-बान-शान, जो कुछ भी है, आप सब लोग हैं। आपका इस पर्व में सम्मिलित होना हमारे लिए बहुत गर्व की बात है। आप सबका तहे दिल से स्वागत है।
हम इस उत्सव को खूबसूरत शहर बेंगलुरू में मना रहे हैं। मैं इस कार्यक्रम के आयोजन और इसे सफल बनाने के लिए किए गए सहयोग तथा प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री रमैय्या जी और उनकी पूरी सरकार को धन्यवाद देता हूं।
मुझे पुर्तगाल के महामहिम प्रधानमंत्री, सूरीनाम के उपराष्ट्रपति, मलयेशिया एवं मॉरीशस के माननीय मंत्रियों का इस कार्यक्रम में स्वागत करते हुए विशेष हर्ष हो रहा है।
उनकी उपलब्धियां, उन्होंने जो नाम अपने समाज के बीच और विश्व में कमाया है, हम सभी के लिए बड़ी प्रेरणादायक हैं। यह दुनिया भर में भारतीय मूल के लोगों की सफलता, महत्व एवं व्यवहार-कुशलता को प्रदर्शित करता है। 30 लाख से अधिक प्रवासी भारतीय विदेशों में रह रहे हैं। लेकिन विदेशों में रहने वाले भारतीयों को उनके संख्याबल के कारण ही महत्व नहीं मिलता। भारत में, समाज के लिए और जिस देश में वे रहते हैं, वहां के लिए दिए गए योगदान के कारण उन्हें सम्मान मिलता है।
विदेशों और विश्व भर के समुदायों के बीच, भारतीय मूल के लोग जो रास्ता चुनते हैं, जिन लक्ष्यों को तय करते हैं, वो भारतीय संस्कृति, लोकाचार और मूल्यों का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व करता है। उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन, कानून का पालन करने वाली छवि और शांतिप्रिय प्रकृति विदेशों में अन्य अप्रवासी समुदायों के लिए रोल मॉडल है।
आपकी प्रेरणा कई प्रकार की है, उद्देश्य अनेक हैं, आपके मार्ग भिन्न–भिन्न हैं, हर किसी की मंजिल भी अलग है लेकिन हम सबके भीतर एक ही भाव विश्व है, और वो भाव जगत है भारतीयता। प्रवासी भारतीय जहां रहे उस धरती को उन्होंने कर्मभूमि माना, और जहां से आए उसे मर्मभूमि माना। आज आप उस कर्मभूमि की सफलताओं को, उसकी गठरी बांध करके उस मर्मभूमि में पधारे हैं जहां से आपको, आपके पूर्वजों को, अविरत प्रेरणा मिलती रही है।प्रवासी भारतीय जहां रहे वहां का विकास किया और जहां के हैं वहां भी अपना अप्रतिम रिश्ता जोड़ करके रखा, हो सके उतना योगदान किया।
मित्रों,
मेरी सरकार और व्यक्तिगत तौर पर मेरे लिए प्रवासी भारतीय समुदाय से मेलमिलाप महत्वपूर्ण प्राथमिकता वाला क्षेत्र रहा है। मैंने अपनी अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सिंगापुर, फिजी, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, केन्या, मॉरीशस, सेशेल्स और मलयेशिया यात्रा के दौरान अपने हजारों भाइयों और बहनों से मुलाकात की है। उनसे बात की है।
हमारी निरंतर और व्यवस्थित पहुंच के परिणामस्वरूप प्रवासी भारतीय समुदाय में भारत के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन से बड़े पैमाने पर और गहराई से जुड़ने के लिए नई ऊर्जा, गहरी इच्छा एवं प्रबल प्रेरणा आई है।
प्रवासी भारतीयों द्वारा सालाना भेजा जाने वाला करीब 69 अरब डॉलर भारतीय अर्थव्यवस्था में एक अमूल्य योगदान देता है।
प्रवासी भारतीयों में देश के विकास के लिए अदम्य इच्छाशक्ति है, वे देश की प्रगति में सहयात्री हैं। हमारी विकास यात्रा में आप एक मूल्यवान साथी हैं, सहयोगी हैं, हितधारक हैं। कभी चर्चा हुआ करती थी ‘ब्रेन-ड्रेन।’ हर कोई सवाल पूछता था ब्रेन-ड्रेन और मैं उस समय लोगों को कहता था, तब तो न मुख्यमंत्री था और न प्रधानमंत्री था। जब लोग कहते थे कि ब्रेन-ड्रेन, ब्रेन-ड्रेन हो रहा है तो मैं कह रहा था क्या बुद्धू लोग ही यहां बचे हैं क्या? लेकिन आज में बड़े विश्वास के साथ कहना चाहता हूं कि जो ब्रेन-ड्रेन की चर्चा करते थे, वर्तमान सरकार की पहलें उस ब्रेन-ड्रेन में से भी ब्रेन-गेन के लिए हैं। हम ब्रेन-ड्रेन को ब्रेन-गेन में बदलना चाहते हैं और वो आप सबकी सहभागिता से ही संभव होने वाला है और होके रहने वाला है, यह मेरा विश्वास है।
एनआरआई और पीआईओ ने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इनमें बड़े कद के नेता, ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक, उत्कृष्ट डॉक्टर, प्रतिभाशाली शिक्षाविद्, अर्थशास्त्री, संगीतकार, प्रसिद्ध परोपकारी, पत्रकार, बैंकर इंजीनियर, और वकील शामिल हैं। माफ कीजिए, क्या मैंने हमारे प्रसिद्ध सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवरों का जिक्र किया?
कल, 30 प्रवासी भारतीय राष्ट्रपति के हाथों प्रख्यात प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्राप्त करेंगे, जो भारत और विदेशों में विभिन्न क्षेत्रों में उनके द्वारा दिए गए योगदान को मान्यता देता है।
मित्रों,
पेशे और पृष्ठभूमि की परवाह किए बगैर विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों का कल्याण एवं सुरक्षा हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। इसके लिए, हम अपनी प्रशासनिक व्यवस्था के पूरे पारिस्थिति की तंत्र को मजबूत कर रहे हैं। चाहे वह उनके पासपोर्ट खो जाने का मामला हो या, कानूनी मदद की जरूरत, चिकित्सीय सहायता हो, शरण या फिर किसी के पार्थिव शरीर को भारत लाने की व्यवस्था। मैंने सभी भारतीय दूतावासों को विदेशों में रहने वाले भारतीयों की समस्याओं को दूर करने के लिए अतिसक्रिय होकर काम करने के निर्देश दिए हैं।
विदेशों में भारतीय नागरिकों की जरूरतों के लिए हमारी प्रतिक्रिया को पहुंच, संवेदनशीलता, गति और मुस्तैदी से परिभाषित किया गया है। भारतीय दूतावास में 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन, भारतीय नागरिकों के साथ ओपन हाउस बैठकें, परामर्श कैंप, पासपोर्ट सेवा के लिए ट्विटर सेवा और त्वरित उपलब्धता के लिए सोशल मीडिया के प्लेटफार्म का इस्तेमाल जैसे कुछ उपाय हैं, जो हमने शुरू किए हैं। ये उपाय इस बात का स्पष्ट संदेश देने के लिए हैं कि जब आपको हमारी जरूरत होगी, हम वहां आपकी सेवा में उपस्थित होंगे।
विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम पासपोर्ट का रंग नहीं देखते हैं, खून का रिश्ता सोचते हैं।
भारतीय नागरिकों के संकट का सामना करने की स्थिति में हम उनकी सुरक्षा, बचाव और स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं। हमारी विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज जी, सोशल मीडिया के माध्यम से विदेशों में संकट में फंसे भारतीयों तक शीघ्र पहुंचने के लिए विशेष रूप से सक्रिय रहती हैं।
जुलाई 2016 में ऑपरेशन “संकट मोचन” के जरिए हमने दक्षिण सूडान से 48 घंटे के भीतर 150 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को निकाला। इससे पहले, यमन में संघर्ष के दौरान हमने अपने हजारों नागरिकों को समन्वित, निर्विघ्न और तीव्र सह-संचालन के जरिए वहां से सुरक्षित निकाला। पिछले दो साल के दौरान, 2014 और 2016 में हमने 90 हजार से अधिक भारतीय नागरिकों की लगभग 54 देशों से सुगम स्वदेश वापसी करवाई। भारतीय समुदाय कल्याण कोष के जरिए हमने विदेशों में विषम परिस्थितियों में रह रहे 80 हजार से अधिक भारतीय नागरिकों को मदद पहुंचाई।
हमारा लक्ष्य यह है कि विदेश में रहने वाले प्रत्येक भारतीय के लिए घर कभी दूर न हो। हम लोग छोटे तब सुनते थे, मामा का घर कितना दूर तो बोले दीया जले उतना दूर। भारत कितना दूर, उसको लगना चाहिए दीया जले उतना दूर, इतनी निकटता उसको महसूस होनी चाहिए। दुनिया के किसी भी देश में क्यों न रहता हो, उसको ये अपनापन महसूस होना चाहिए। ऐसे कामगार जो विदेशों में आर्थिक अवसरों को देखते हैं, उनके लिए हमारा प्रयास अधिकतम सुविधा प्रदान करना और असुविधा को कम से कम सुनिश्चित करने का है। हमारा सिद्धांत साफ हैः ”सुरक्षित जाएं, प्रशिक्षित जाएं, विश्वास के साथ जाएं।” इसके लिए हमने अपने सिस्टम को सुव्यवस्थित किया है और भारतीय कामगारों की प्रवास के दौरान सुरक्षा के लिए कई उपाय किए हैं।
करीब छह लाख इंजीनियर प्रवासियों को पंजीकृत भर्ती एजेंटों के माध्यम से विदेशों में रोजगार के लिए ऑनलाइन इमिग्रेशन क्लीयरेंस दी गई है। विदेशी नियोक्ताओं के लिए ई-माइग्रेट पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है।
ई-माइग्रेट और मदद प्लेटफार्म के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों की शिकायतों, फरियाद और याचिकाओं को ऑनलाइन सुना जा सकता है। हम भारत में अवैध भर्ती एजेंटों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं। अवैध एजेंटों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी सीबीआई अथवा राज्य पुलिस देगी। भर्ती एजेंटों द्वारा जमा की जाने वाली बैंक गारंटी को भी 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। ये कुछ ऐसे कदम हैं, जो हमने इस दिशा में उठाए हैं। प्रवासी भारतीय कामगार बेहतर आर्थिक अवसरों का लाभ उठा सकें, यह सुनिश्चित करने के लिए हम जल्द ही एक कौशल विकास कार्यक्रम ‘प्रवासी कौशल विकास योजना’ लांच करने जा रहे हैं। इसमें ऐसे भारतीय युवाओं को लक्ष्य बनाया गया है जो विदेशों में रोजगार की तलाश में हैं।
कभी-कभी जो पहली बार विदेश जाते हैं, ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं; अगर उनका वहां के देश की आवश्यकता के अनुसार यहीं पर उसका 15 दिन, एक महीने का कोर्स हो, उसका विकास हो। मान लीजिए वो किसी देश में हाउसकीपिंग के काम के लिए जा रहा है, अगर यहां उसका प्रशिक्षण होगा तो वह बड़े विश्वास के साथ जाएगा। और इसलिए ये ‘प्रवासी कौशल विकास योजना’ है। भारत से बाहर जाने वाले लोग एक अतिरिक्त हुनर की अवस्था में जाएं जिसके कारण एक नया विश्वास पैदा हो, उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं, और उससे मुझे लगता है जो गरीब तबके के लोग छोटे-छोटे काम करने के लिए जा रहे हैं, उनको ज्यादा लाभ होगा। कुछ लोगों को उस देश की कुछ सजाएं हैं, कुछ उस देश के शिष्टाचार हैं, कुछ सांस्कृतिक चीजें हैं, जिन्हें सीखने की जरूरत होती हैं। वो भी कितने ही पढ़े-लिखे व्यक्ति क्यों न हों, उसको काम आती हैं; उस पर भी हम बल दे रहे हैं, जिसको हम सॉफ्ट-स्किल कहते हैं। तो ऐसी व्यवस्थाएं जिसके कारण भारत का व्यक्ति विश्व में पैर रखते ही उसको कुछ भी पराया न लगे; औरों को भी वो अपना लगे और उसका आत्मविश्वास उस ऊंचाइयों को पार करने वाला हो जैसे वो सालों से उस भूमि को जानता है; वहां के लोगों को जानता है; वो तुरंत ही अपने आपको सेट कर सकता है, तो उस रूप में उसकी चिंता, व्यवस्था हम कर रहे हैं।
मित्रों,
हमारा गिरमिटिया देशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों के साथ एक विशेष बंधन है। ये लोग अपने मूल स्थान से गहराई से और भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। हमें ज्ञात है कि इन देशों में रहने वाले पीआईओ को ओसीआई कार्ड हासिल करने में कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, विशेषकर तब जब वे चार-पांच पीढ़ियों पहले यहां आए हों। हम उनकी चिंताओं को स्वीकार करते हैं और इन मुद्दों को हल करने का प्रयास कर रहे हैं।
मुझे यह घोषणा करते हुए हर्ष हो रहा है कि हम मॉरीशस के साथ इसकी शुरुआत कर रहे हैं। हम नई प्रक्रियाओं और दस्तावेजीकरण की जरूरतों को ठीक से व्यवस्थित करने की दिशा में काम कर रहे हैं ताकि इस देश के गिरमिटियाओं के वंशज ओआईसी कार्ड के पात्र बन सकें। हम इसी तरह फिजी, रीयूनियन आइसलैंड, सूरीनाम, गुयाना और अन्य कैरेबियाई देशों के पीआईओ की दिक्कतों को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
पिछले प्रवासी भारतीय दिवस के अनुरोध की तरह ही मैं एक बार फिर सभी पीआईओ कार्ड धारकों को अपने कार्ड को ओसीआई कार्ड में परिवर्तित कराने के लिए प्रोत्साहित करता हूं। मैं बोलता रहता हूं, आग्रह भी करता हूं, लेकिन मैं जानता हूं कि आप लोग बहुत व्यस्त हैं और इसीलिए शायद ये काम रह जाता है। तो आपकी इस व्यस्तता को देखते हुए, मुझे यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि हमने इसे बदलने की समयसीमा बढ़ा दी है। अब इसे बिना किसी दंड के 31 दिसंबर 2016 से बढ़ाकर 30 जून, 2017 कर दिया गया है। इस साल जनवरी से दिल्ली और बेंगलुरू हवाईअड्डे पर हमने इसकी शुरुआत कर दी है। हमने ओसीआई कार्डधारकों के लिए हमारे हवाईअड्डों के इमिग्रेशन केंद्रों पर स्पेशल काउंटर भी स्थापित किए हैं।
मित्रों,
आज करीब सात लाख भारतीय छात्र विदेशों में शैक्षणिक कोर्स कर रहे हैं और मुझे भलीभांति ज्ञात है कि विदेश मे रह रहा हर भारतीय, भारत की प्रगति से जुड़ने के लिए आतुर है। उनका ज्ञान, विज्ञान और भारत के ज्ञान का मिलन, भारत को आर्थिक प्रगति को असीम ऊंचाई पर ले जायेगा।
मेरा सदैव यह प्रयास और विश्वास रहा है कि सक्षम तथा सफल प्रवासियों को भारत की विकास गाथा से जुड़ने का संपूर्ण मौका मिलना चाहिए, खास तौर से विज्ञान तथा तकनीकी क्षेत्रों में। इसके लिए हमने कई कदम उठाए हैं। इनमें से यह है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग विजिटिंग एडजंक्ट ज्वाइंट रिसर्च फैकल्टी यानी वज्र योजना शुरू कर रहा है। यह एनआरआई और विदेशों में रहने वाले वैज्ञानिक समुदाय के लोगों को भारत में अनुसंधान एवं विकास मे शामिल होने तथा अपना योगदान देने के लिए सक्षम बनाता है। इस योजना के तहत प्रवासी भारतीय एक से तीन महीने तक किसी भारतीय संस्थान में काम कर सकता है। वह भी अच्छी शर्तों पर और सबसे महत्वपूर्ण है कि प्रवासी भारतीय इसके द्वारा देश की प्रगति का एक अहम हिस्सा बन सकता है।
मित्रों,
मेरा यह दृढ़ मत है कि भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच जुड़ाव निरंतर और दोनों की समृद्धि के लिए होना चाहिए। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए गत वर्ष अक्टूबर में महात्मा गांधी की जन्मदिन पर, मुझे नई दिल्ली में प्रवासी भारतीय केंद्र के उद्घाटन का अवसर मिला। यह केंद्र प्रवासी भारतीय समुदाय को समर्पित है। हम चाहते हैं कि यह विदेशों में बसे भारतीयों की आकांक्षाओं, वैश्विक प्रवास, अनुभव, संघर्ष और उपलब्धियों का एक प्रतीक बने।
मुझे विश्वास है कि यह केंद्र प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ मेलमिलाप को फिर से परिभाषित करने के सरकार के प्रयासों को उभारने के लिए एक और महत्वपूर्ण मंच बन जाएगा।
मित्रों,
हमारे प्रवासी भारतीय कई पीढि़यों से विदेशों में हैं। हर पीढ़ी के अनुभव ने भारत को और सक्षम बनाया है। जैसे नए पौधे पर हमारे भीतर अलग से एक स्नेह उभर आता है, उसी तरह विदेश में रह युवा प्रवासी भारतीय भी हमारे लिए अनमोल है, विशेष हैं। हम प्रवासी भारतीयों की युवा पीढ़ीयों से, युवा प्रवासियों से करीबी और मज़बूत बनाना तथा संपर्क और गहरा बनाना चाहते हैं।
भारतीय मूल के युवाओं को अपने देश की यात्रा का अवसर प्रदान करने और भारतीय जड़ों, संस्कृति एवं विरासत से जोड़ने के लिए हमने सरकार के भारत को जानें कार्यक्रम को बढ़ा दिया है। इस कार्यक्रम के तहत पहली बार युवा प्रवासी भारतीयों के छह समूह इस वर्ष भारत की यात्रा कर रहे हैं।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि 160 युवा प्रवासी भारतीय आज यहां इस प्रवासी भारतीय दिवस में हिस्सा ले रहे हैं। युवा प्रवासियों का विशेष स्वागत है – मुझे उम्मीद है अपने-अपने देशों को लौटने के बाद भी आप हमसे जुड़े रहेंगे। चाहे आप कहीं भी रहें आप बार-बार भारत आते रहेंगे। गत वर्ष, युवा प्रवासी भारतीयों के लिए ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता “भारत को जानो” के पहले संस्करण में 5000 युवा एनआरआई और पीआईओ ने हिस्सा लिया। इस साल दूसरे संस्करण में, मैं कम से कम 50 हजार युवा प्रवासी भारतीयों के इसमें हिस्सा लेने की उम्मीद कर रहा हूं।
युवा मित्रों, क्या आप इस मिशन में मेरी सहायता करेंगे? क्या आप इस मिशन में मेरी सहायता करेंगे? क्या आप मेरे साथ काम करने के लिए तैयार हैं? तो फिर हम क्यों 50 हजार पर रुक जाएं?
मित्रों,
आज भारत एक नई प्रगतिशील दिशा की ओर अग्रसर है। ऐसी प्रगति जो न केवल आर्थिक है, अपितु सामाजिक, राजनैतिक और शासकीय भी है। आर्थिक क्षेत्र में, पीआईओ तथा एनआरआई के लिए एफडीआई मानदंड पूरी तरह उदार हैं और एफडीआई की मेरी दो परिभाषाएं हैं। एफडीआई की एक परिभाषा है प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और दूसरी फर्स्ट डेवलप इंडिया यानी पहले भारत का विकास।
पीआईओ द्वारा उनके स्वामित्व वाली कंपनियों, न्यासों और भागीदारी से स्वदेश आए बिना किया गया निवेश अब भारतीयों द्वारा किए गए घरेलू निवेश के बराबर ही समझा जाता है। हमारे कई ऐसा कार्यक्रम हैं, जैसे स्वच्छ भारत मिशन, डिजिटल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, जिनसे प्रवासी भारतीय भारत के सामान्य व्यक्ति की प्रगति से सीधा जुड़ सकते हैं। आपमें से कई ऐसे होंगे जो व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अपना योगदान करना चाहते हैं। अन्य स्वच्छ भारत, नमामि गंगे और दूसरे प्रयासों को योगदान के माध्यम से समर्थन देकर ज्यादा आराम महसूस कर रहे हैं।
कुछ अन्य भारत में अपना कीमती समय देकर और स्वेच्छा से प्रयास कर वंचितों की मदद करके अथवा विभिन्न क्षेत्रों में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में योगदान कर प्रेरित महसूस कर सकते हैं।
हम प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ भारत की साझेदारी को मजबूत बनाने के आपके सभी प्रयासों का स्वागत करते हैं। मैं आपको प्रवासी भारतीय समागम (पीबीडी कन्वेंशन) में लगी प्रदर्शनी का दौरा करने का आमंत्रण देता हूं। यह आपको हमारे कुछ फ्लैगशिप कार्यक्रमों की एक झलक दिखाएगी, जिन्हें हम शुरू कर रहे हैं और देखते हैं कि कैसे आप हमारे साथ भागीदार बन सकते हैं।
मित्रों,
यहां आने के बाद आपने सुना होगा, देखा होगा हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ, काले धन के खिलाफ एक बहुत बड़ा बीड़ा उठाया है। कालाधन और भ्रष्टाचार हमारी राजनीति, देश, समाज तथा शासन को धीरे-धीरे खोखला करता रहा है और ये दुर्भाग्य है कि कालेधन के कुछ राजनैतिक पुजारी हमारे प्रयासों को जनता विरोधी दर्शाते हैं। भ्रष्टाचार और काले धन को समाप्त करने में भारत सरकार की नीतियों का जो समर्थन प्रवासी भारतीयों ने किया है उसके लिए मैं आपका अभिनंदन करता हूं, आपका साधुवाद करता हूं, आपका धन्यवाद करता हूं।
मित्रों,
अंत में, मैं कहना चाहता हूं कि भारतीय होने के नाते हमारी एक साझा विरासत है, जो हमें एक साथ लाती है। और, इससे फर्क नहीं पड़ता कि हम कहां रहते हैं? हम विश्व के किसी भी कोने में रहें, यह हमारा साझा बंधन है, जिससे हम मजबूत हैं। और इसलिए मेरे प्यारे देशवासियों आपने जो सपने संजोकर रखे हुए हैं, आपके सपने हमारे संकल्प हैं। हम सब मिलकर उन सपनों को साकार करेंगे। इसके लिए अगर व्यवस्था में बदलाव जरूरी हो, अगर नियम-कानून में बदलाव की जरूरत हो, साहसिक कदम उठाने की जरूरत हो, हर एक को साथ लेकर चलने के लिए जो कुछ भी करना पड़े, करने की आवश्यकता हो… ये सब करते हुए मैं विश्वास से कहता हूं कि 21वीं सदी हिंदुस्तान की सदी है।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
धन्यवाद और जय हिंद।
It is a great pleasure for me to welcome all of you on this 14th Pravasi Bharatiya Diwas: PM @narendramodi #PBD2017 @PBDConvention
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
Indians abroad are valued not just for their strength in numbers. They are respected for the contributions they make: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
The Indian diaspora represents the best of Indian culture, ethos and values: PM @narendramodi #PBD2017 @PBDConvention
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
Engagement with the overseas Indian community has been a key area of priority: PM @narendramodi @PBDConvention #PBD2017
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
Remittance of close to sixty nine billion dollars annually by overseas Indians makes an invaluable contribution to the Indian economy: PM
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
NRIs and PIOs have made outstanding contributions to their chosen fields: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
The welfare and safety of all Indians abroad is our top priority: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
The security of Indian nationals abroad is of utmost importance to us: PM @narendramodi @PBDConvention #PBD2017
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
EAM @SushmaSwaraj has particularly been proactive and prompt in reaching out to distressed Indians abroad using social media: PM at #PBD2017
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
For those workers who seek economic opportunities abroad, our effort is to provide maximum facilitation and ensure least inconvenience: PM
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
I would again encourage all PIO Card holders to convert their PIO Cards to OCI Cards: PM @narendramodi @PBDConvention #PBD2017
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
We welcome all your efforts that seek to strengthen India’s partnership with the overseas Indian community: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
Our diaspora has supported the Government's moves against corruption and black money: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017
At the start of his speech at #PBD2017, PM @narendramodi condoled the passing away of Mr. Mario Soares, former President & PM of Portugal.
— PMO India (@PMOIndia) January 8, 2017