पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रीमंडल ने (i) संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 संशोधन को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसमें ओडिशा में अनुसूचित जाति की सूची में सुधार किया गया है।(ii) संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1964 (पोंडीचेरी) केंद्र शासित प्रदेश का नाम बदलकर आदेश में पुडुचेरी किया गया है। इस विधेयक का अब नाम संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश(संशोधन) विधेयक, 2017 होगा जिसमें उपर्युक्त परिवर्तन सन्निहित होंगे। इसे संसद में पेश किया जाएगा।
अनुमोदित सुधारों के साथ प्रस्तावित सौलागिरी, स्वलागिरी जाति ओडिशा के अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किए जाने के योग्य पाई गई है। यह सभाकिया जाति का पर्यायवाची है जो क्रम संख्या 79 में अधिसूचित है। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश पोंडीचेरी का नाम बदल कर पुडुचेरी किया गया है। यह पोंडीचेरी(वैकल्पिक नाम) अधिनियम 2006, था। इस बदलाव को प्रभावी बनाने के लिए संविधान (पांडिचेरी) अनुसूचित जाति आदेश, 1964 में संशोधन जरूरी था।
सरकार ने सुधारों को जून 1999 में अनुमोदित किया था, जिसे जून 2002 में संशोधित किया गया। इसमें अनुसूचित जाति एवं जनजाति की सूचि में सुधार का प्रस्ताव था। अनुमोदित सुधारों के मुताबिक भारत के महापंजीयक (आरजीआई) और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) की सहमति से संबंधित राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश के संविधान आदेश में विधायी संशोधन किया जाता है।
भारतीय संविधान के अनुसूचित जाति के सदस्यों को कुछ निश्चत विशेषाधिकार और रियायतें प्रदान की हैं। यह विशेषाधिकार संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत इस समुदाय को मिला हुआ है। संबंधित राज्य सरकार से परामर्श के बाद राष्ट्रपति अधिसूचित आदेश जारी करते हैं जिसमें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की अनुसूचित जाति की पहली सूची होती है। इसके बाद संसद के अधिनियम के अनुच्छेद 341 के खंड (2) के तहत परिकल्पना के जरिये अनुसूचित जाति की सूची में बदलाव प्रभावी होता है।
विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को लेकर इस संबंध में 1950 से 1978 के बीच में राष्ट्रपति के छह आदेश जारी किए गए थे। समय समय पर संविधान के संसद के अधिनियम के अनुच्छेद 341 के खंड (2) के तहत इन आदेशों में संशोधन किया गया है।
इस विधेयक के अधिनियम बनने के बाद अनुसूचित जाति की सूची में शामिल गए समुदाय के सदस्य अनुसूचित जाति के लिए निर्धारित योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इन योजनाओं में पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप, नेशनल ओवरसीज छात्रवृत्ति, राजीव गांधी नेशनल फेलोशिप, टॉप क्लास एजुकेशन, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम से रियायती दर पर ऋण और छात्र-छात्राओं के छात्रावास की सुविधा शामिल है। इन सब सुविधाओं के अलावा नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ भी मिलता है।