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राष्ट्रीय अपतटीय पवन ऊर्जा नीति को मंजूरी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय अपतटीय पवन ऊर्जा नीति को अपनी मंजूरी दे दी है।

इस मंजूरी के साथ ही नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) को देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के अंदर अपतटीय क्षेत्रों के उपयोग के लिए प्रमुख मंत्रालय के रूप में अधिकृत किया गया है। इसी तरह राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (एनआईडब्ल्यूई) को देश में अपतटीय पवन ऊर्जा के विकास और अपतटीय पवन ऊर्जा ब्लॉकों के आवंटन और संबंधित मंत्रालयों एवं एजेंसियों के साथ समन्वय एवं सम्बद्ध कार्यों के लिए प्रमुख एजेंसी के रूप में अधिकृत किया गया है। इस मंजूरी से अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना और आधार रेखा से 200 समुद्री मील (नॉटिकल माइल) की दूरी तक देश में अथवा उसके आस-पास जल में अनुसंधान व विकास कार्यों समेत अपतटीय पवन ऊर्जा के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

7600 किलोमीटर लंबी भारतीय तटीय रेखा के आस-पास आरंभिक आंकलनों से अपतटीय पवन ऊर्जा के विकास की संभावनाओं के संकेत मिले है। राष्ट्रीय अपतटीय पवन ऊर्जा नीति को मंजूरी के साथ ही सरकार अपतटीय पवन ऊर्जा के विकास में उपतटीय पवन ऊर्जा विकास के सफलता को दोहराना चाहती है। इस नीति से सभी निवेशकों/लाभार्थियों, चाहे वे घरेलू हों अथवा विदेशी, को समान अवसर प्राप्त होंगे। एनआईडब्ल्यूई सभी प्रक्रियाओं को पारदर्शी ढंग से पूरा करेगा।

इस कदम से देश को ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने और एनएपीसीसी लक्ष्यों को पाने की दिशा में अग्रसर होने में मदद मिलेगी।

यह योजना देशभर में मान्य होगी, जो अपतटीय पवन क्षमता की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।