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भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास और पुनर्स्‍थापन (संशोधन) अध्‍यादेश, 2015


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास और पुनर्स्‍थापन (संशोधन) अध्‍यादेश, 2015 में संशोधन की मंजूरी दे दी है।

अधिनियम के प्रावधानों में बदलाव से किसानों को समुचित सरकार की ओर से अनिवार्य रूप से अधिग्रहीत भूमि के बदले में बेहतर मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्स्‍थापन लाभ मिलेंगे।

भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास और पुनर्स्‍थापन अधिनियम, 2013 पहली जनवरी, 2014 से लागू हुआ था। हालांकि पता चला था कि अधिनियम को लागू करने में कई मुश्किलों का सामना किया जा रहा था। इसके अलावा, राष्‍ट्रीय परियोजनाओं के लिए अपेक्षित जमीन के अधिग्रहण में प्रक्रियागत मुश्किलें भी कम करने की जरूरत है। वे मुश्किलें दूर करने के लिए, अधिनियम में कुछ संशोधन किए गए जबकि “प्रभावित किसानों” के हितों की रक्षा संबंधी प्रावधानों को और मजबूत किया गया है। ऐसा करने की तत्‍काल जरूरत को समझते हुए, 31-12-2014 को अध्‍यादेश जारी किया गया। उसके बाद इस अध्‍यादेश के स्‍थान पर 10-03-2015 को लोक सभा ने संशोधित विधेयक पारित किया। लोकसभा में पारित संशोधित विधेयक में कुछ और परिवर्तन किए गए और उसके लिए अध्‍यादेश लाया गया। महत्‍वपूर्ण बदलाव इस प्रकार हैं:-

1- अधिनियम की पहली अनुसूची और दूसरी एवं तीसरी अनुसूची में निर्दिष्‍ट पुनर्वास एवं पुनर्स्‍थापन के अनुरूप मुआवजे का, भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास एवं पुनर्स्‍थापन अधिनियम, 2013 की चौथी अनुसूची में उल्‍लेखित तेरह कार्यों तक विस्‍तार किया गया है।

2- राष्‍ट्रीय सुरक्षा या रक्षा के लिए तैयारी एवं रक्षा उत्‍पादन सहित भारत की रक्षा जैसी रणनीतिक और विकास गतिविधियों, विद्युतीकरण, किफायती आवास और गरीबों के लिए आवास सहित बुनियादी ढांचे, समुचित सरकार और उसके उपक्रमों के जरिए औद्योगिक गलियारों की स्‍थापना।

3- संबंधित जमीन मालिकों (जिनकी जमीन अधिग्रहीत की गई) की आपत्तियों की सुनवाई संबंधित जिले में ही होगी।