PMINDIA
Prime Minister Shri Narendra Modi attended a prayer meet and paid his respects at Gandhi Smriti on the occasion of 150th Birth Centenary of Mahatma Gandhi ,in New Delhi today.
The Union Cabinet, chaired by the Prime Minister Shri Narendra Modi, has approved the creation of National Bench of the Goods and Services Tax Appellate Tribunal (GSTAT).
The National Bench of the Appellate Tribunal shall be situated at New Delhi. GSTAT shall be presided over by the President and shall consist of one Technical Member (Centre) and one Technical Member (State).
The creation of the National Bench of the GSTAT would amount to one time expenditure of Rs.92.50 lakh while the recurring expenditure would be Rs.6.86 crore per annum.
Details:
Goods and Services Tax Appellate Tribunal is the forum of second appeal in GST laws and the first common forum of dispute resolution between Centre and States. The appeals against the orders in first appeals issued by the Appellate Authorities under the Central and State GST Acts lie before the GST Appellate Tribunal, which is common under the Central as well as State GST Acts. Being a common forum, GST Appellate Tribunal will ensure that there is uniformity in redressal of disputes arising under GST, and therefore, in implementation of GST across the country.
Chapter XVIII of the CGST Act provides for the Appeal and Review Mechanism for dispute resolution under the GST Regime. Section 109 of this Chapter under CGST Act empowers the Central Government to constitute, on the recommendation of Council, by notification, with effect from such date as may be specified therein, an Appellate Tribunal known as the Goods and Services Tax Appellate Tribunal for hearing appeals against the orders passed by the Appellate Authority or the Revisional Authority.
मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी अरुण जेटली जी, गिरिराज सिंह जी, शिव प्रताप शुक्ल जी, पोन राधाकृष्णन जी, अन्य सहयोगीगण, बैंकिंग सेक्टर से, वित्तीय संस्थानों से, व्यापार और कारोबार जगत के आप सभी महानुभाव, यहां सब उपस्थित महानुभाव और देश भर से मेरे साथ जुड़े लघु उद्यमीगण, देवियों और सज्जनों !
देश के लघु उद्योगों को समर्पित इस आयोजन में, मैं आप सभी का और देश के अन्य क्षेत्रों से जुड़े उद्यमी बंधुओं का हृदय से बहुत-बहुत स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं।
सबसे पहले आप सभी को दीपावली और नए संवत्-नए वर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं। हम सभी जानते हैं कि दीपावली और नए साल का हमारे यहां कितना ज्यादा महत्व है। अब तो दुनिया में भी फैल रहा है। खासकर हमारे व्यापारी भाई-बहनों के लिए, जो इस दिन नया खाता इस उम्मीद के साथ खोलते हैं कि दीपावली का शगुन अच्छा होगा तो पूरा साल अच्छा निकलेगा।
इसके अलावा, ये समय इसलिए भी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी अवधि में एग्रीकल्चर और एग्री-प्रॉडक्ट्स, हमारे किसानों द्वारा उपजाया गया अनाज, मार्केट का हिस्सा बनता है। इस समय हुई खरीद-फरोख्त, अगले साल के बाजार के, देश के ग्रोथ को भी तय करती है।
इसलिए दीपावली का ये समय देश के लिए उतना ही अहम होता है, जैसे बजट के दौरान होता है। इस दौरान लिए गए फैसले, हमारे भविष्य पर बहुत बड़ा असर डालते हैं।
आज इस विशेष आयोजन में मैं आपके सामने लघु उद्योग सेक्टर के लिए सरकार द्वारा लिए गए 12 बड़े फैसलों पर विस्तार से बात करना चाहता हूं। पिछले कुछ हफ्तों से भारत सरकार के कई मंत्रालय मिलकर इन फैसलों तक पहुंचने में जुटे हुए थे। कई फैसलों को बीते दिनों, छोटे स्तर पर लागू करके एक ट्रायल रन भी देखा। सारी समीक्षा, सारी पड़ताल के बाद अब आज वो अवसर आया है जब मैं देश को इन 12 ऐतिहासिक फैसलों के बारे में बताना चाहता हूं।
साथियों, ये 12 फैसले इस बात का भी प्रमाण हैं कि जब Silos को तोड़कर, Collective Initiative लिया जाता, Collective Responsibility निभाई जाती है, Collective Decision लिया जाता है, तो कितने व्यापक स्तर पर उसका प्रभाव पड़ता है।
Silos में तो आपके सारे सपने फाइलों में ही दबे पड़े रह जाते हैं। लेकिन जब Silos टूटते हैं, तो फाइलों को भी गति मिल जाती है, अफसर खुद फाइलें लेकर, आगे बढ़कर फैसले सुनिश्चित कराने लगते हैं।
ये 12 फैसले, देश के MSME यानि Micro, Small and Medium Enterprises के लिए दीपावली का एक बहुत बड़ा उपहार तो हैं हीं, देश में छोटे उद्योगों के एक नए युग, एक नए अध्याय की भी शुरुआत होने वाली है।
भाइयों और बहनों, भविष्य का खाका खींचने से पहले, मैं आपसे अतीत और वर्तमान की भी चर्चा करना चाहूंगा।ये इसलिए भी जरूरी है क्योंकि जो अतीत हमें गौरव का भान कराए, जो वर्तमान हमारा हौसला बढ़ाए, उसका जिक्र जरूर किया जाना चाहिए।
साथियों, ये हम भली-भांति जानते हैं कि MSMEया छोटे उद्योग हमारे देश में करोड़ों देशवासियों की रोज़ी-रोटी का साधन हैं, अर्थव्यवस्था में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये MSME कृषि के बाद रोज़गार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है। खेती अगर भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है तो MSME उसके मज़बूत कदम हैं, जो देश की प्रगति को गति देने का काम करते हैं।
कढ़ाई-बुनाई से लेकर दवाई तक, खेत-खलिहान से लेकर खेल के मैदान तक,वस्त्र से लेकर शस्त्र तक, ऊन से लेकर ऊर्जा तक, ऐसे अनेक क्षेत्रों में लघु उद्योगहमेशा से अपना अहमयोगदान देते रहे हैं।
• कांचीपुरम की साड़ी हो या पानीपत का हैंडलूम,
• लुधियाना की हौजरी हो यामुरादाबाद का पीतल
• बनारस की साड़ी हो या अलीगढ़ के ताले,
• जमशेदपुर और पुणे का ऑटो उद्योग हो, भरूच का कैमिकल उद्योग हो या फिर कोयंबटूर के बिजली के पंप,
• जोधपुर, किशनगढ़ का हैंडीक्राफ्टस और पत्थर उद्योग हो याकटक का ज़ेवर,
• मधुबनी की पेंटिंग्स हों या मेरठ की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री
• पूरब से लेकर पश्चिम तक, उत्तर से लेकर दक्षिण तक इसका विस्तार है।
हमारे लिए ये सिर्फ उद्योग नहीं हैं बल्कि हमारी विरासत, हमारी परंपरा, हमारे जीवन का अहम हिस्सा रहे हैं। कितने ही शहरों की पहचान, उनके यहां चलने वाले लघु उद्योगों की वजह से ही है।
अगर मैं कहूं कि देश के हर जिले के साथ, उसकी एक खास पहचान जुड़ी हुई हो तो शायद वह गलत नहीं होगा। इन सभी की कमान लघु उद्योगों ने ही तो संभाल रखी है।
इस विरासत को संजोते हुए हमारे लघु उदयोगों ने समय के साथ खुद को और मजबूत किया है और भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी है।
साथियों, आज भारत Global Economy में एक ब्राइट स्पॉट बनकर चमक रहा है। पूरे विश्व की नजरें भारत पर हैं, वैश्विक कारोबार की चर्चा के केंद्र में नया भारत है। एक ऐसा नया भारत जिसमें संकल्प को सिद्ध करने की शक्ति है, जिसमें अपने 130 करोड़ नागरिकों की आशाओं-आकांक्षाओं को पूरा करने का सामर्थ्य है।
भारत को इस ऊँचाई पर पहुंचाने का श्रेय, देश को नई ऊर्जा देने का श्रेय हमारे MSME सेक्टर, मतलब आप सबको भी जाता है। ये आप लोगों का ही परिश्रम और पुरुषार्थ है जिसकी वजह से आज भारत Economic Powerhouseबन गया है।
भारत में पिछले चार-साढ़े चार वर्षों में जो परिवर्तन हुए हैं, आप उसके सबसे बड़े भागीदार हैं। आपने Formalization की दिशा में बड़े प्रयास किए हैं, डिजिटल लेन-देन को आत्मसात किया है, ई-कॉमर्स जैसी नई व्यवस्थाओं के साथ तालमेल बिठाया है, GST जैसे देश के इतने बड़े टैक्स रीफॉर्म को आपने अपनाया है। आप बहुत समझदारी और बहादुरी के साथ वैश्विक बाजार का भी मुकाबला कर रहे हैं।
देश में हुए इन परिवर्तनों की वजह से ही आज भारत चौथी औद्यौगिक क्रांति का नेतृत्व करने की ओर अग्रसर है। हम एक नई उड़ान भरने वाले हैं, नए युग में प्रवेश करने वाले हैं। ये सब इसलिए हो पा रहा है क्योंकि आपने, देश के MSME सेक्टर ने इन परिवर्तनों के साथ खुद को जोड़ा है, उन्हें अपनी व्यवस्था का हिस्सा बनाया है।
साथियों, आपके इस साहस को और प्रोत्साहन देने के लिए सरकार भी कंधे से कंधा मिलाकर आपके साथ आगे बढ़ रही है।
देश में हुए अनेक सुधारों और फैसलों की वजह से आज भारत में व्यापार करना बहुत आसान हो गया है। अभी दो दिन पहले आई वर्ल्ड बैंक की Ease of Doing Business Ranking इसकी गवाह है। जिस पर 4 साल पहले कोई यकीन नहीं कर सकता था वो आज हिन्दुस्तान ने करके दिखाया है वो हमने करके दिखा दिया है।
साथियों, ये हम सभी के लिए गौरव का विषय है कि इस बार भारत ने Ease of Doing Business Ranking में 23 रैंक की एक लंबी छलांग लगाई है। सिर्फ चार वर्ष पहले, ये सरकार बनने से पहले, हम 142वें स्थान पर थे। आज मुझे खुशी है कि हम 65 पायदान चढ़कर 77वें स्थान पर पहुंच चुके हैं और मेरा विश्वास है कि जिस प्रकार राज्य सरकार केन्द्र सरकार हमारे सभी विभाग एक के बाद एक कदम उठाते चले जा रहे हैं। अब टॉप-50 भी हमारी पहुंच से ज्यादा दूर है ऐसा मुझे नहीं लगता है।
Ease of Doing Business में सरलता बढ़ती है, सुविधाएं मिलती हैं, तो उसका सबसे ज्यादा लाभ हमारे MSME सेक्टर को ही मिलता है। कंस्ट्रक्शन की परमीशन हो, बिजली की उपलब्धता हो या फिर दूसरे क्लीयरेंस, हमारे लघु उद्योगों के लिए ये हमेशा से बड़ी चुनौती रहे हैं। बिल्कुल जमीनी स्तर पर जाकर, नियमों में सुधार करके, MSMEs के लिए अब उद्योग की राह और आसान बनाने का काम हमने किया है।
इसके अलावा, पिछले चार-साढ़े चार वर्षों में इस सेक्टर को विशेष ध्यान में रखते हुए नीतियों-निर्णयों में जो व्यापक फेरबदल हुआ है, उसने भी MSME सेक्टर को एक नई मजबूती दी है।
साथियों,
लघु उद्योग और मजबूत हों, इसके लिए कुछ चीजें बहुत आवश्यक हैं। मैं इनको अलग-अलग कैटेगरी में बांटता हूं।
A– आपको आसानी से पैसा मिले, कर्ज मिले, सस्ती दर पर कर्ज मिले और कैश फ्लो बना रहे
B– आपको मार्केट मिले, ई-कॉमर्स जैसे प्लेटफॉर्म पर आपकी हिस्सेदारी बढ़े
C–Technology Upgradation हो
D-Ease of Doing Business, सरकारी दखल कम हो
और E-Employees में सुरक्षा की भावना।
मैं एक-एक करके इनके बारे में आपसे विस्तार से बात करूंगा।
सबसे पहले कैटेगरी “A” पर आते हैं- यानि आपको आसानी से पैसा मिले, कर्ज मिले। बैंकों के चक्कर काटे बिना मिले, सस्ती दर पर मिले और आपका कैश फ्लो बना रहे।
किसी भी बिजनेस के लिए ये आपकी पहली आवश्यकता होती है। मैं मानता हूं बहुत से लोग अपनी खुद की पूंजी लगाकर भी शुरुआत तो करते हैं, लेकिन बिजनेस को विस्तार देने के लिए, आपको कर्ज लेना ही होता है। आपकी इस आवश्यकता की पूर्ति करते हैं हमारे बैंक।
लेकिन इसकी जमीनी सच्चाई क्या रही है? छोटे उद्यमियों, जिनका सालाना टर्नओवर 20 लाख से पांच करोड़ रुपए के बीच रहता है, उनको कर्ज लेने में परेशानी आती है। बैलेंस शीट का साइज छोटा होने के कारण अक्सर उनको कर्ज मिलने में देरी भी होती है, और पर्याप्त मात्रा में ऋण भी नहीं मिल पाता।
ऊपर से जिन बड़ी कंपनियों को, बड़े उद्योगों को सामान सप्लाई किया जाता है, वहां से भी बिल स्वीकृत करने में, भुगतान में देरी उनका संकट और गहरा कर देते हैं। इसका सीधा असर आपकी कैश साइकिल पर पड़ता है और एक प्रकार से पूरा बिजनेस ही संकट में आ जाता है।
आपकी इस समस्या को दूर करने के लिए, मैं आज की पहली घोषणा करने जा रहा हूं, और वो है- 59 मिनट लोन पोर्टल का देशव्यापी लॉन्च। यानि अब जितनी देर में आप सुबह घर से ऑफिस पहुंचते हैं, या शाम को जितनी समय आप अपना बही-खाता मिलाने में लगाते हैं, उतनी ही देर में आपकोएक करोड़ रुपए तक के ऋण को सैद्धांतिक स्वीकृति मिल जाया करेगी।
साथियों, कुछ समय पहले जेटली जी के निर्देशन में एक प्रयास शुरू किया गया था। उस समय मैंने अधिकारियों से कहा था कि आप ट्रायल के तौर पर इसे शुरू तो कर रहे हैं लेकिन जो लक्ष्य मैं आपको दूंगा, उस तरह पहुंच पाएंगे?
भाइयों और बहनों, हमारी आजादी को इस वर्ष 72 वर्ष हुए हैं। मैंने उन्हें कहा था कि क्या जिस दिन इस पोर्टल का देशभर में लागू किया जाएगा, तब तक क्या आप लोग 72 हजार छोटे उद्यमियों को कर्ज स्वीकृत कर पाएंगे।
साथियों, इस वक्त, जब मैं आपके साथ बात कर रहा हूं, उस समय ये जो काउंटर दिख रहा है, जो घड़ी जैसी दिखाई दे रही है, वो बता रही है कि अब तक कितने MSME उद्यमियों को इस पोर्टल के माध्यम से या तो कर्ज स्वीकृत किया गया है या फिर उनका Renewal हुआ है। आप लगातार देख सकते हैं कि कैसे इस संख्या में बदलाव हो रहा है।
यहीं कहीं दूर, देश के किसी कोने में बैठे आपके उद्यमी भाई या बहन को मात्र 59 मिनट में एक करोड़ रुपए तक के कर्ज की मंजूरी इस वक्त भी दी जा रही है।सोचिए, सिर्फ 59 मिनट। सिर्फ 59 मिनट।और मैंने जानबूझकर एक घंटा नहीं रखा वरना एक के दो दो के तीन होते देर नहीं लगता और इसलिए इस पर कैप लगाया 59 मिनट का।
भाइयों और बहनों। ये काम पहले की सरकारों में भी हो सकते थे। लेकिन ऐसे कामों के लिए नीयत सबसे ज्यादा जरूरी है, ईमानदारी की प्रतिष्ठा जरूरी है। Minimum Government Maximum Governance के मूलमंत्र पर चल रही हमारी सरकार, हर कदम पर आपको नियमों के जाल से मुक्ति दिलाने का काम कर रही है।
मुझे याद है, जब मैं अफसरों से इस पोर्टल के बारे में बात कर रहा था, तोमैंने कहा था कि उद्यमियों के Turnover की सूचना आपके GST Return में है, Income की सूचना भी Tax Return में है, Cash Flow भी बैंक अकाउंट में है, तो फिर इन सबको जोड़कर Analytics के द्वारा ही बैंक आपको Loan क्यों नहीं दे सकते?
मैंने ये भी कहा था कि इस सुविधा का ज्यादा से ज्यादा प्रसार हो और हर उस जगह पर इसका लिंक हो, जहां हमारे लघु उद्योग से जुड़े कारोबारी जाते हैं। जैसे GST पोर्टल।
इस पोर्टल से जुड़ने वाले ईमानदार करदाता, ईमानदार उद्यमी को आखिर कर्ज मिलने में दिक्कत क्यों हो? इसलिए जब आप GST पोर्टल पर अपना रिटर्न फाइल करेंगे उस समय भी आपको ये सुविधा मिलेगी। जैसे ही पोर्टल पर जाएंगे वैसे ही आपसे पूछा जाएगा कि क्या आपको लोन चाहिए? यदि आप हां करते हैं तो वहीं पर 59 मिनट लोन पोर्टल की सुविधा आपको मिल जाएगी।
साथियों, हमारी कोशिश यही है कि GST से जुड़े हर उद्यमी, हर MSME के द्वार पर सरकार खुद पहुंचे।
आज मुझे खुशी है कि इन सारी बातों को ध्यान में रखकर, अब आपके लिए ये 59 मिनट में लोन स्वीकृति की सुविधा आप को मैं समर्पित करता हूं और इसका लाभ आज से देश के हर क्षेत्र के लघु उद्यमी को मिलना शुरू हो गया है।
ये नया भारत है, इसमें बैंक में बार-बार जाने के चक्कर खत्म करो जी।
साथियों,
अब मैं आता हूं, आज की दूसरी घोषणा पर।
आपको 59 मिनट में लोन की सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई, लेकिन ये भी तो अहम है कि ब्याज किस दर पर मिल रहा है।
अब जो मैं कहने जा रहा हूं, उसे ध्यान से सुनिएगा, गौर से सुनिएगा।
भाइयों और बहनों, अब ये तय किया गया है कि GST पंजीकृत हर MSME को एक करोड़ रूपये तक के नए कर्ज या इन्क्रीमेंटल लोन की रकम पर ब्याज में 2 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
मैंने अभी आपसे जो ईमानदारी की प्रतिष्ठा की बात की थी। ये उसी का विस्तार है। अब GST से जुड़ना और Tax भरनाआपकीताकतबनेगा, आपको ब्याज में 2 प्रतिशत की छूट दिलवाएगा।
इतना ही नहीं निर्यातकों के लिए भी दीपावली गिफ्ट तैयार है। निर्यातकों को Pre-Shipment और Post Shipment की अवधि में जो लोन मिलता है उसकी ब्याज की दर में छूट को भी सरकार ने 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है।
भाइयों और बहनों, MSME का देश के निर्यात में बहुत बड़ा योगदान है। देश के कुल निर्यात का लगभग 40 प्रतिशत निर्यातआप ही संभालते हैं। विश्व में भारत की बढ़ी साख का लाभ आपको मिले, MSME के Exporters को मिले, इसके लिए ब्याज की दर में छूट देने का फैसला किया गया है।
मुझे उम्मीद है कि इस कदम से MSME के Exporters का हिस्सा और बढ़ेगा।
साथियों, अभी तक की घोषणाओं से ऋण मिलना और सरल होगा, बैंकों के चक्कर कम लगेंगे, कम ब्याज दर पर लोन मिलेगा।
लेकिनमैं ये भी चाहता हं कि जिस बड़ी मजबूरी की वजह से आपको अक्सर कर्ज लेना पड़ता है, वो भी कम हो।
मैं जानता हूं कि MSME जो माल बड़ी कंपनियों को सप्लाई करते हैं, उसका बिल स्वीकृत होने में बहुत देर लगती है। कई बार तो आपको अपने ही पैसे के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में आपको बिजनेस को चलाए रखने के लिए कर्ज लेना पड़ता है।
मेरी आज की तीसरी घोषणा इसी से जुड़ी हुई है। वो सारी कंपनियां जिनका टर्नओवर 500 करोड़ से ऊपर है, उनको अब Trade Receivables e-Discounting System यानि “ट्रेडस” (TReDS) Platform पर लाना ज़रूरी कर दिया गया है।ताकि MSME’sको कैश फ्लो में दिक्कत न आए।
जैसा कि आप में से बहुतों को पता होगा कि TReDS एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिस पर कुछ MSME’s हैं, सरकार के कुछ PSU’s हैं, बैंक भी हैं और देश की कुछ कंपनियां भी हैं जिनको लघु उद्योग अपना सामान सप्लाई करता है।
अब सरकार इसका विस्तार और बढ़ाने जा रही है। सरकार के सारे PSU’s को निर्देश दिया गया है कि वो TReDSपर आएं और अपने से संबंधित उद्योगों को भी TReDS पर लाने के लिए प्रोत्साहित करें।
अब 500 करोड़ रुपए से ज्यादा के टर्नओवर की कंपनियों के TReDS से जुड़ने का फायदाक्या होगा, ये मैं आपको बताता हूं।
मान लीजिए ये जो बड़ी कंपनी है, उसने किसी लघु उद्यमी से 10 लाख रुपए की कुछ खरीदारी की है। उस उद्यमी के पास सप्लाई ऑर्डर की कंफर्म रिसीट भी है और सप्लाई की भी। लेकिन किसी वजह से वो बड़ी कंपनी जब पेमेंट नहीं करती, तो मेरा ये लघु व्यापारी तो फंस जाता है। उसके लिए तो 10 लाख रुपए बहुत बड़ी बात है।
ऐसे में उस छोटे व्यापारी की मदद करेगा TReDS प्लेटफॉर्म। वो इस प्लेटफॉर्म पर उस बड़ी कंपनी से मिली हुई कंफर्म रिसीट या बिल को अपलोड कर सकता है। इस बिल के आधार पर वो ये कह सकता है कि महीने-दो महीने-तीन महीने के भीतर-भीतर में मुझे इतना पैसा, उस बड़ी कंपनी से मिलने वाला है।
बड़ी कंपनी का बिल होने पर, साख वाली कंपनी का बिल होने पर, बैंक भी उस बिल पर विश्वास करेंगे और उसके आधार पर, उस व्यापारी को बैंक से उचित धनराशि मिल जाएगी। बाद में जब कंपनी से पैसा आएगा, तो बैंक उस पैसे को अपने पास रख लेंगे और उसका कारोबार चलता रहेगा।
साथियों, इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि आपका जो पैसा रोटेट होना है, आपको जो अपने बिजनेस में पैसा लगाना है, उसकी कमी आपको नहीं होगी, आपका पैसा फंसेगा नहीं, आपकी कैश सायकिल नहीं टूटेगी।
हालांकि आज इस अवसर पर मैं, इस घोषणा के साथ, बड़ी कंपनियों से भी ये आग्रह करूंगा कि लघु उद्योगों से जुड़े बिल जल्दी स्वीकारें जाएं और उनके भुगतान में देरी न हो।
भाइयों और बहनों,
फिर भी अगर भुगतान में देरी होती है तो आपके लिए एक और विकल्प तैयार किया गया है। MSME मंत्रालय के समाधान पोर्टल में छोटे उद्मी अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जिनका समाधान समय-सीमा में सरकारी Intervention सेकिया जाएगा।ये बड़ी कंपनियों को, समय से आपका भुगतान करने के लिए भी प्रेरित करेगा।
साथियों, कर्ज आसानी से मिले, ब्याज कम हो, MSME Exporters को भी ब्याज में छूट का लाभ मिले, कैश साइकिल भी बनी रहे, ये हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में है। मेरी पहली तीन घोषणाएं इसी दिशा में हैं।
अब मैं कैटेगरी “B” की तरफ आता हूं। और ये है आपके लिए, देश के MSME सेक्टर के लिए नए बाजारों का निर्माण।इस मोर्चे पर भी सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं और कुछ महत्वपूर्ण फैसलों का ऐलान मैं आज करने जा रहा हूं।
भाइयों और बहनों, पिछले वर्ष में लगभग 1 लाख 14 हजार करोड़ रुपए का सामान सरकारी कंपनियों ने अलग-अलग स्रोतों से खरीदा है। अब तक जो नियम चला आ रहा था, वो ये था कि सरकारी कंपनियों को 20 प्रतिशत खरीदारी माइक्रो और स्मॉल इंटरप्राइजेज यानि सूक्ष्म और लघु उद्योगों से करना जरूरी था।
मेरी आज की चौथी घोषणा इसी से जुड़ी हुई है। सरकार ने इस 20 प्रतिशत की अनिवार्यता को बढ़ाकर अब 25 प्रतिशत करने का फैसला लिया है। यानि अब सरकारी कंपनियां जितना सामान खरीदती हैं, उसमें अब माइक्रो और स्मॉल इंटरप्राइजेज की हिस्सेदारी और बढ़ने जा रही है।
इसी को आगे बढ़ाती एक और महत्वपूर्ण और आज की पांचवी घोषणा है महिला उद्यमियों से जुड़ी हुई। ये जो माइक्रो और स्मॉल इंटरप्राइजेज द्वारा खरीदारी की अनिवार्यता को बढ़ाया गया है, उसमें ये भी तय किया गया है कि इसमें से कुल खरीद का 3 प्रतिशत, महिला उद्यमियों के लिए आरक्षित हो। यानि सरकारी कंपनियों के लिए अब ये जरूरी हो गया है कि वो अपनी खरीद का कम से कम 3 प्रतिशत महिला उद्यमियों से ही खरीदें।
मैं समझता हूं कि आज का ये फैसला, देश में women entrepreneurship को और मजबूत करेगा।
साथियों, MSME के लिए मार्केट उपलब्ध कराने के लिए एक और प्लेटफॉर्म सरकार ने विकसित किया है, GeM यानि गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस। जब दो-ढाई वर्ष पहले इसकी शुरुआत हुई, तो एक बड़ा मकसद था सरकारी सामान की खरीद में पारदर्शिता लाने का।
इस पारदर्शिता का सीधा लाभ भी MSME सेक्टर को मिल रहा है। GeM की वजह से छोटे उद्यमियों के Products सरकारी खरीदारों तक पहुंचना आसान हुआ है।मैं तो आज भी तमिलनाडु की उस महिला को याद करता हूं, जिसने छोटा सा थर्मस प्रधानमंत्री कार्यालय को बेचा था और समय पर भुगतान भी की गई थी। ऐसे ही न जाने कितने सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को इस पोर्टल ने नया अवसर दिया है, उनके जीवन को नई प्रेरणा दी है। वरना क्या पहले कोई सोच भी सकता था कि बडी-बड़ी सप्लाई कंपनियों के आगे वो टिक भी पाएंगे, कभी सरकार को अपना सामान बेच भी पाएंगे। नहीं। लेकिन ये सब संभव किया है GeM पोर्टल ने।
साथियों, GeM पोर्टल पर अब तक डेढ़ लाख से अधिक सप्लायर जुड़ चुके हैं, जिसमें 40 हजार MSME हैं। इसके तहत अब तक 9 लाख ऑर्डर दिए गए हैं और करीब 14 हज़ार करोड़ रुपए का कारोबार हो भी चुका है।
आप सोचिए, बिना किसी बिचौलिए, बिना किसी को कमीशन दिए, अपनी कमाई का हिस्सा दिए, कितने उद्यमियों को इसका लाभ मिला है।
भाइयों और बहनों, GeM की इस व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आज ही और एक महत्वपूर्ण फैसला केंद्र सरकार ने किया है। ये मेरी आज की छठी घोषणा है, आपका छठा दीपावली गिफ्ट है।
साथियों, अब केंद्र सरकार की सभी कंपनियों के लिए GeM की सदस्यता लेना ज़रूरी कर दिया गया है। इतना ही नहीं वो अपने सभी Vendors-MSME’s को भी इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत कराएंगी, जिससे उनके द्वारा की जा रही खरीद में भी MSMEs को अधिक से अधिक लाभ मिलेगा।GeM पर आने से आपके लिए अनंत संभावनाएं बनी थीं। अब आज के फैसले से उनका और विस्तार होगा।
साथियों, आज का ये समय कंप्यूटराइजेशन और टेक्नोलॉजी का, ई कॉमर्स और ऑनलाइन मार्केटिंग का है। लघु उद्योग भी इससे जितना ज्यादा जुड़ेंगे, उतना ही उनका फायदा होगा।
GeM की तरह ही ई-कॉमर्स के अन्य प्लेटफॉर्म पर आपके बनाए सामानों की बिक्री हो, इसके लिए Quality Certificationकी भी आवश्यकता होती है। ये Certification, आपके क्ल्स्टर्स, आपकी फैक्ट्री के पास ही आपको मिल सके, इसके लिए भी सरकार विभिन्न Certification Agencies के साथ काम कर रही है।
Aggregator का ये मॉडल हम लघु उद्योगों को निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ जोड़ने के लिए भी कर रहे हैं।
साथियों, अब मैं कैटेगरी“C” की तरफ बढ़ता हूं। कैपिटल और मार्केट के अलावा एक बड़ी चुनौती हमारे लघु उद्योगों के सामने रही है Technological Upgradation की। हमारे बहुत सारे लघु उद्योगों को समय पर आधुनिक टेक्नॉलॉजी का लाभ नहीं मिल पाता।
देश मेंअभी जो टूलरूम हैं, वो आपको प्रोडक्ट डिजाइन और उसके सुधार में मदद कर रहे हैं। इन Tool Rooms में आप ऐसे हाई टेक्नोलॉजी प्रोडक्टस भी तैयार कर पाते हैं, जिनकी मशीन आपके पास उपलब्ध नहीं हैं।
सरकार ने बीते चार वर्षों में इन टूलरूम्स की स्थिति को सुधारने पर भी जोर दिया है। इन टूलरूम्स के द्वारा पिछले सरकार के चार वर्षों में जहां साढ़े 3 लाख लोगों को ट्रेनिंग दी गई थी, वहीं हमारी सरकार के दौरान इससे कहीं ज्यादा, यानि करीब साढ़े 6 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
मेरी आज की सातवीं घोषणा Technological Up gradation के इस महत्वपूर्ण विषय से ही जुड़ी हुई है।
भाइयों और बहनों, सरकार ने फैसला लिया है कि देशभर में टूलरूम की इस व्यवस्था को और विस्तार दिया जाए। इसके लिए देशभर में 20 हब बनाए जाएंगे और Tool Room जैसे 100 स्पोक देशभर में स्थापित किए जाएंगे। मैं आज इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए 6 हजार करोड़ रुपए के पैकेजकी घोषणा करता हूं।
इससे बेहतर डिजाइन से लेकर, क्वालिटी, ट्रेनिंग और कंसल्टेंसी जैसे अनेक मामलों में MSME को भरपूर लाभ होगा।
भाइयों और बहनों, Technological Upgradation के बाद अब मैं कैटेगरी “D” की तरफ बढ़ूंगा और वो है- Ease of Doing Business.
आप में से बहुत सारे उद्यमी फार्मा क्षेत्र में कार्य करते हैं। आप दवाएं बनाते हैं, उनका निर्यात भी करते हैं। हमारी छोटी-छोटी कंपनियां जीवन के लिए अहम दवाइयां बना रही हैं, बहुत ही प्रतिष्ठित दवाइयां बना रही हैं। इन छोटी कंपनियों में भी अपार Talent है लेकिन उन्हें अपनी बनाईदवाइयों को अक्सर बड़ी कंपनियों के माध्यम से ही बेचना पड़ता है।
मेरी आज की आठवीं घोषणा इन्हीं फार्मा कंपनियों से जुड़ी हुई है। MSME सेक्टर की फार्मा कंपनियों को बिजनेस करने में आसानी हो, वो सीधे ग्राहकों तक पहुंच पाएं, इसके लिए अब क्लस्टर बनाने का फैसला लिया गया है। इन क्लस्टर्स पर 70% खर्च केंद्र सरकार द्वारा किए जाने का भी ऐलान करता हूं। सरकार का आज का ये फैसला फार्मा क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के लिए भी बहुत अहम साबित होगा।
साथियों, आपने अनुभव किया होगा कि जब से ये चर्चा शुरु हुई है तब से अनेक बार मैंने टेक्नॉलॉजी, GST, ऑनलाइन पोर्टल, Formalization, TReDS, GeM, Portal, ऐसे अनेक शब्दों का उपयोग किया है। असल में यही वो व्यवस्थाएं हैं जो आपको प्रक्रियाओं के जाल से मुक्ति दिलाने वाली हैं।
GST ने अर्थव्यवस्था को Organize किया है,Formalize किया है। इससे व्यापार को नए दौर की नई टेक्नॉलॉजी Big Data Analyticsसे जोड़ना आसान हो गया है। डेटा की इस एनालिसिस से Ease Of Doing Businessमें और ज्यादा सुधार होगा, सुविधाओं को आपके द्वार तक पहुंचाने में और मदद मिलेगी।
मैं मानता हूं कि ये New Indiaके नए Business Environment की बुनियाद होने वाला है और ईमानदारी को प्रोत्साहन देने वाला है।
साथियों, MSMEs के लिए सरकारी प्रक्रियाओं को आसान करने की कड़ी में, मैं अब आज की नवीं घोषणा करने जा रहा हूं। आपकोकम से कम फॉर्म और रिटर्न देने पड़ें, इसके लिए बड़ा फैसला लिया गया है। 8 श्रम कानूनों और 10 केन्द्रीय नियमों के तहत दिया जाना वाला रिटर्न अब आपको साल में दो बार की जगह सिर्फ एक बार ही देना पड़ेगा।
सरकार, व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए, Human Intervention को कम करने के लिए लगातार काम कर रही है। और अभी IT के संबंध में अरुण जी ने इसका उल्लेख भी किया। इसी से संबंधित मेरी आज की 10वीं घोषणा है।
अनावश्यक जांच से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार ने ये फैसला किया है कि अब Inspectorको कहां जाना है,किस फैक्ट्री में जाना है। इसका निर्णय सिर्फ एक Computerized Random Allotment से ही होगा और इतना ही नहीं उसने किसी फैक्ट्री का visit कियाफिर आए फिर हफ्ते भर इंतजार किया के वो आता है कि नहीं आता है ये सब बंद। और उसे 48 घंटे में अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर डालनी होगी। अब वो सिर्फ अपनी मर्जी से किसी भी जगह नहीं जा सकता।
भाइयों और बहनों, लघु उद्योगों को इंस्पेक्टर राज से मुक्ति दिलाने में ये फैसला बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। अब कोई Inspector आपके यहां ऐसे ही नहीं आ जाएगा, उससे पूछा जाएगा कि तुम क्यों उस फैक्ट्री में गए थे, क्या मकसद था?
भाइयों और बहनों, सरकार आप पर भरोसा करती है, अपने देश के नागरिकों पर भरोसा किया करती है। पिछले 4 वर्षों में हमारी सरकार ने कई जगहों पर Affidavit खत्म किया, सरकारी नौकरियों की कई श्रेणियों में Interview खत्म किया, Self certification किया।
अब आज मैं छोटे उद्योगों के लिए पर्यावरण कानून से जुड़े एक बड़े सुधार का भी ऐलान करने जा रहा हूं। यानि ये आपका 11वां दीपावली गिफ्ट हुआ और मेरा 11वां ऐलान।ये ऐलान भी सीधे जुड़ा हुआ है आपके और सरकार के बीच आपसी विश्वास से। ये 11वां ऐलान है, Environmental Clearance की प्रक्रियाओं का सरलीकरण और Self Certificationको बढ़ावा।
साथियों, आप सभी जानते हैं कि अब तक कोई उद्यम लगाने के लिए Environmental Clearance और Consent to Establish के दो पड़ाव को पार करना जरूरी होता है। सरकार ने फैसला किया है कि वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण कानूनों के तहत MSMEs के लिए इन दोनों को एक करके, अब सिर्फ एक ही Consent अनिवार्य होगा।
सरकार आप पर भरोसा करके Self-Certificationपर आपके रिटर्न स्वीकृत करेगी। Labor Departmentकी तरह पर्यावरण के Routine Inspection समाप्त होंगे और सिर्फ 10 प्रतिशत MSMEs का निरीक्षण होगा।
सरकार द्वारा ये भी फैसला लिया गया है कि Greenऔर White Category में आने वाले उद्यमों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। चाहे मैं टूल रूम की बात करूं चाहे Self-Certification की बात करूं, और आपने लालकिले से प्रारंभ में मेरे मुंह से एक शब्द निकला था सुना होगा zero defect zero effect हम ऐसा मैन्युफैक्चरिंग करेंगे जो दुनिया के बाजार में कोई defect निकाल ही नहीं सकता। हम उस प्रकार से मैन्युफैक्चरिंग करेंगे कि हम environment पर zero effect करेंगे। हम इस मंत्र को लेकर चल रहे हैं।
सरकार का मानना है कि सामान्य जनों पर, आप सभी उद्यमियों पर भरोसा करके ही हम पर्यावरण की रक्षा ज्यादा प्रभावी तरीके से कर सकते हैं। इस भरोसे के चलते ही देश में जनभागीदारी बढ़ रही है और इसका एक परिणाम देश के Forest Cover में वृद्धि पर भी दिख रहा है।
साथियों, सरकार लगातार ये सुनिश्चित कर रही है कि कानूनी प्रक्रियाएं सरल हों जिस सेआप सभी को व्यापार करने में उतनी ही आसानी हो।
कल ही सरकार ने इस दिशा में एक और बड़ा फैसला लिया है। ये फैसला मेरा आज का 12वां ऐलान है, 12वीं घोषणा है। सरकार ने कंपनी अधिनियम में बहुत बड़ा बदलाव कर, MSMEs को कानूनी जटिलताओं से राहत दी है।
भाइयों और बहनों, कंपनी अधिनियम में अब तक ऐसे प्रावधान थे, उससे जुड़े ऐसे कानून थे,जिनकी वजह से छोटी-छोटी मामूली गलतियां या अनजाने में कोई उल्लंघनहोनेपर,आपको क्रिमिनल, गुनहगार मान लिया जाता था। इन छोटी-छोटी गलतियों की वजह से कई बार व्यापारियों के लिए जेल तक जाने की नौबत आ जाती थी। छोटी-छोटी भूल सुधारने के लिए आपको कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ते थे।
इस सब में आपका कीमती समय और पैसा दोनों व्यर्थ तो होता ही था, आपके मान-सम्मान को भी गहरी ठेस पहुंचती थी।लघु और मध्यम उद्योगों को तो इसकी वजह से बहुत ज्यादा परेशानी होती थी।
मुझे आप सभी को ये बताते हुए खुशी होरही है किइ नपरेशानियों से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार एक अध्या देश ले करआ यी है। अध्यादेश हमने जारी कर दिया है।
अब तक जो नियम चल रहे थे, जो प्रणाली थी, वो सरकार ने बदल दी है। अब आपको छोटी-छोटी गलतियों को सुधारने के लिए कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा।अब अनजाने में हुए छोटे उल्लंघन के लिए आप संबंधित विभाग में जाकर, कुछ आसान प्रक्रियाओं के माध्यम से उन सारी गलतियों को सुधार सकते हैं।
इसका एक और फायदा ये होगा कि 60 प्रतिशत से अधिक केस,जो अलग अलग विशेष अदालतों में चलरहे हैं, वो सभी अब उधर से बाहर आजाएंगे। मुझे बताया गया है कि ऐसे केसों की संख्या हजारों में नहीं लाखों में है। इस वजह से NCLT-National Company Law Tribunal के कई के सभी रीजनलडायरेक्टर्स के अधिकार मेंचलेजायें गे। ऐसा होने पर केसों की सुनवाई में और तेजी आएगी।
भाइयों और बहनों, सरकार ने छोटे उद्योगों और एक व्यक्ति के अधिकार वाली कंपनी को भी राहत दी है। कई विषयों पर पहले जोभी पेनल्टी लागू होती थी, उसे भी घटाकर अब आधा कर दिया गया है।
साथियों, अब मैं कैटेगरी “E” की तरफ बढ़ता हूं। सरकार के इन बड़े फैसलों और प्रयासों के बीच, हमें ये भी ध्यान रखना है कि MSME को चलाते हैं हमारे कारीगर, हमारे श्रमिक। इन सभी की सोशल सेक्योरिटी बहुत आवश्यक है।
इसलिए सरकार ने ये भी तय किया है कि देश भर में एक अभियान चलाकर इस सेक्टर में काम करने वाले कारीगरों को सरकार की सोशल सेक्योरिटी योजनाओं से जोड़ा जाए। सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि MSME में काम करने वाले श्रमिकों के पास जनधन अकाउंट हों, उनका प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में नामांकन हो।
अगर फैक्ट्री थोड़ी बड़ी है तो वहां पर Employee Provident Fund और ESIC के द्वारा भी उन्हें सुविधाएं सुनिश्चित कराई जाएंगी। इस दौरान MSME में जिन नए लोगों को रोजगार मिलेगा, उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना का लाभ मिले, ये भी सुनिश्चित किया जाएगा।
साथियों, Globalisationके इस दौर में ये 12 फैसले MSME को सुदृढ़ कर, एक नया अध्याय लिखेंगे।
सिर्फ 59 मिनट में लोन की सुविधा, GST पोर्टल के माध्यम से भी लोन, जो उद्यमी GST से जुड़े हैं उन्हें ब्याज में छूट, सस्ता Export credit, TReDS पर सारी सरकारी कंपनियों और 500 करोड़ से ज्यादा की बड़ी कंपनियों को लाने का फैसला, सरकारी खरीद में MSME’sके लिए 25 प्रतिशत की अनिवार्यता, महिला उद्यमियों से कम से कम 3 प्रतिशत खरीद की अनिवार्यता,GeM पर सभीसरकारी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन, Technology Upgradationके लिए देशभर में 20 HUB और 100 Spokes, देश में फार्मा क्ल्स्टर्स का निर्माण, लेबर कानूनों में बदलाव, रिटर्न में आसानी, 48 घंटे में Inspection की रिपोर्ट, Environmental Clearanceसे जुड़ी प्रक्रियाओं का सरलीकरण और कंपनीज एक्ट में बड़ा फेरबदल,
ये सारे फैसले MSME सेक्टर को मजबूत करने वाले हैं, एक नई ऊँचाई देने वाले हैं।
मैं आज इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों से भी राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में आगे बढ़कर कार्य करने का आग्रह करूंगा।आपके प्रयासों से ही इन फैसलों का बेहतर परिणाम आएगा, इनका लाभ देश भर के छोटे उद्यमियों तक पहुंचेगा।
और साथियों, जब मेरी टीम ये दायित्व निभाएगी, इतना परिश्रम करेगी, तो मेरा भी तो मन करता है उनके इस परिश्रम में अपना भी थोड़ा सा योगदान मैं स्वयं भी करने वाला हूं।
इसलिए ऐसे 100 जिले जहां MSMEs के साथ एक विरासत, एक Specialization जुड़ी है, वहां पर हो रहे कार्यों की समीक्षामैं खुद करूंगा। जो टीम, जमीन पर काम कर रही है, उसके साथ मिलकर अगले 100 दिन तक मेरी देखरेख में Monitoringका काम किया जाएगा। मैं भी आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करूंगा और इसको सफल करके देखना है।
साथियों, भारत के MSMEs, आप सभी वास्तव में Aspirational India, आकांक्षी India हैं, महत्वाकांक्षी India हैं। आपको अपनी मेहनत के परिणाम सामने दिखते हैं। इसी मेहनत से कमाई बढ़ती है और यही MSMEs बीज बनकर भविष्य में बड़े उद्यम बनते हैं और नए उद्यमों को स्फूर्ति देते हैं, पोषण करते हैं।
MSMEs सरकार की उस भावना के प्रतीक हैं जिसके मूल में Job Seeker की जगह, Job Creatorबनाना है। आप सिर्फ उद्ममी ही नहीं हैं, New India के महत्वपूर्ण निर्माताओं में से एक हैं।
मुझे पूरी उम्मीद है कि ये अभियान छोटे उद्योगों के लिए फायदेमंद होगा और देश भर के MSMEsइन सभी फैसलों से लाभान्वित होगें।
मुझे ये भी भरोसा है कि छोटे उद्यम ही आगे चलकर देश की औद्योगिक क्रांति को एक नया रूप, नया आयाम देंगे और Technology driven clean businessकी आधारशिला बनेंगे।
इन तमाम सुधारों पर सवार होकर आप Make in Indiaको और गति दें, ऊर्जा दें, इसी कामना के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
मुझे पूरा विश्वास है कि ये दीपावली आप सभी के लिए भी, देश के पूरे MSME सेक्टर के लिए शुभ भी रहेगी, लाभकारी भी रहेगी और नए अवसर भी लेकर आएगी।
आप सभी को बहुत-बहुत शुभकमानाएं।
बहुत-बहुत धन्यवाद!
The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today launched a historic support and outreach programme for the Micro, Small and Medium Enterprises (MSME) sector. As part of this programme, the Prime Minister unveiled12 key initiatives which will help the growth, expansion and facilitation of MSMEs across the country.
The Prime Minister said that the 12 decisions that he is announcing today, will mark a new chapter for the MSME sector. Noting that MSMEs are one of the principal employment generators in India, the Prime Minister recalled the glorious Indian traditions of small scale industry, including Ludhiana’s hosiery, and Varanasi’s sarees.
The Prime Minister said that the success of economic reforms launched by the Union Government, can be gauged from the rise in India’s “Ease of Doing Business Rankings,” from 142 to 77 in four years.
The Prime Minister said that there are five key aspects for facilitating the MSME sector. These include access to credit, access to market, technology upgradation, ease of doing business, and a sense of security for employees. He said that as a Diwali gift for the sector, the 12 announcements he is making, will address each of these five categories.
Access to Credit
As the first announcement, the Prime Minister announced the launch of the 59 minute loan portal to enable easy access to credit for MSMEs. He said that loans uptoRs. 1 crore can be granted in-principle approval through this portal, in just 59 minutes. He said a link to this portal will be made available through the GST portal. The Prime Minister asserted that in New India, no one should be compelled to visit a bank branch repeatedly.
The Prime Minister mentioned the second announcement as a 2 percent interest subvention for all GST registered MSMEs, on fresh or incremental loans. For exporters who receive loans in the pre-shipment and post-shipment period, the Prime Minister announced an increase in interest rebate from 3 percent to 5 percent.
The third announcement made by the Prime Minister was that all companies with a turnover more than Rs. 500 crore, must now compulsorily be brought on the Trade Receivables e-Discounting System (TReDS). He said that joining this portal will enable entrepreneurs to access credit from banks, based ontheir upcoming receivables. This will resolve their problems of cash cycle.
Access to Markets
The Prime Minister said that on access to markets for entrepreneurs, the Union Government has taken a number of steps already. In this context, he made his fourth announcement, thatpublic sector companies have now been asked to compulsorily procure 25 percent, instead of 20 percent of their total purchases, from MSMEs.
The Prime Minister said his fifth announcement is related to women entrepreneurs. He said that out of the 25 percent procurement mandated from MSMEs, 3 percent must now be reserved for women entrepreneurs.
The Prime Minister said that more than 1.5 lakh suppliers have now registered with GeM, out of which 40,000 are MSMEs. He said transactions worth more than Rs. 14,000 crore have been made so far through GeM. He said the sixth announcement is that all public sector undertakings of the Union Government must now compulsorily be a part of GeM. He said they should also get all their vendors registered on GeM.
Technology Upgradation
Coming to technological upgradation, the Prime Minister said that tool rooms across the country are a vital part of product design. His seventh announcement was that 20 hubs will be formed across the country, and 100 spokes in the form of tool rooms will be established.
Ease of Doing Business
On Ease of Doing Business, the Prime Minister said his eighth announcement is related to pharma companies. He said clusters will be formed of pharma MSMEs. He said 70 percent cost of establishing these clusters will be borne by the Union Government.
The Prime Minister said that the ninth announcementis on simplification of government procedures. He said the ninth announcement is that the return under 8 labour laws and 10 Union regulations must now be filed only once a year.
The Prime Minister said that the tenth announcement is that now the establishments to be visited by an Inspector will be decided through a computerised random allotment.
The Prime Minister noted that as part of establishing a unit, an entrepreneur needs two clearances namely, environmental clearance and consent to establish. He said that the eleventh announcement is that under air pollution and water pollution laws, now both these have been merged as a single consent. He further said that the return will be accepted through self-certification.
As the twelfth announcement, the Prime Minister mentioned that an Ordinance has been brought, under which, for minor violations under the Companies Act, the entrepreneur will no longer have to approach the Courts, but can correct them through simple procedures.
Social Security for MSME Sector Employees
The Prime Minister also spoke of social security for the MSME sector employees. He said that a mission will be launched to ensure that they have Jan Dhan Accounts, provident fund and insurance.
The Prime Minister said that these decisions would go a long way in strengthening the MSME sector in India. He said the implementation of this outreach programme will be intensively monitored over the next 100 days.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi, will launch the Union Government’s Support and Outreach Initiative for Micro, Small and Medium Enterprises (MSMEs) at Vigyan Bhawan in New Delhi on November 02, 2018.
Besides Delhi, similar launch programmes will be held at 100 locations across the country, where Union Ministers, and Ministers from State Governments will be present. All these locations will also connect with Delhi, for the main event, which will include a special address by the Prime Minister. He is expected to touch upon several matters of vital interest to the MSME sector.
The Union Government has accorded high priority to the MSME sector in recent years. This outreach and support programme, which will run for the next 100 days, covering the entire country, is expected to provide even greater synergy to the efforts being made for this sector. The progress of this programme, to be implemented in mission mode, will be monitored on a continuous basis by senior officials of Union and State Governments.
Union Minister for Finance and Corporate Affairs, Shri Arun Jaitley and the Union Minister of State (I/C) for MSME, Shri Giriraj Singh, are among those who will be present on the occasion.
नमस्कार।
वाराणसी में उपस्थित मंत्रीपरिषद की मेरी सहयोगी स्मृति ईरानी जी, Carpet Sector से जुड़े सभी उद्यमीजन, मेरे बुनकर भाई-बहन, और वहां मौजूद अन्य सभी महानुभाव। काशी की पावन धरती पर देशभर से जुटे, विदेशों से आए, आप सभी का मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूं। मुझे बताया गया है कि दुनिया के करीब 38 देशों के ढाई सौ से अधिक अतिथि इस Expo का हिस्सा हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और देश के अन्य राज्यों से भी Carpet Sector से जुड़े लोग वहां पहुंचे हैं। आप सभी का बनारस में बनारस के सांसद के नाते भी मैं बहुत-बहुत स्वागत करता हूं।
साथियो, देश में आजकल त्योहारों का मौसम है। दशहरे, दुर्गापूजा के बाद मुझे पहली बार टेक्नोलॉजी के माध्यम से बनारस से जुड़ने का मौका मिला है।अब आप सभी धनतेरस और दीपावली की तैयारी में जुटे होंगे। ये साल का वो समय होता है जब आप सभी, सबसे अधिक व्यस्त होते हैं। इसमें आम दिनों की तुलना में काम जरा अधिक रहता है, क्योंकि मांग ज्यादा होती है। आपके श्रम का, कला का पुरस्कार आपको मिले; इसके लिए भी ये सबसे उत्तम समय होता है।
साथियो, वाराणसी और यूपी के बुनकर और व्यापारी भाई-बहनों के लिए तो इस बार के त्योहार दोहरी खुशियां ले करके आए हैं। दीनदयाल हस्तकला संकुल में पहली बार India Carpet Expoहो रहा है। इसके लिए आप सभी को बहुत-बहुत बधाई। अब दिल्ली के साथ-साथ वाराणसी में भारत के कारपेट उद्योग को, हमारे बुनकरों को, डिजाइनरों को, व्यापारियों को, अपना कौशल, अपने उत्पादन दुनिया के सामने दिखाने का अवसर मिल रहा है।
साथियो, मुझे खुशी है कि जिन लक्ष्यों को ले करके दीनदयाल हस्तकला संकुल का निर्माण किया गया था, उन लक्ष्यों की तरफ हम तेज गति से बढ़ रहे हैं। ये इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये क्षेत्र बुनकरों का, कारपेट उद्योग का Hub है। यहां देश के हस्तशिल्प से जुड़े करीब एक-चौथाई बुनकर, श्रमिक और कारोबारी बहन-भाई रहते हैं। वाराणसी हो, भदोई हो, मिर्जापुर हो; ये कारपेट उद्योग के सेंटर रहे हैं, और अब पूर्वी भारत, ये पूरा क्षेत्र देश के textile export का भी Global Hub बन रहा है। इतना ही नहीं, दीनदयाल हस्तकला संकुल भी Handicrafts के मामले में इस अंतर्राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
साथियों, सरकार का निरंतर यही प्रयास है कि हस्तशिल्प छोटे और मझले उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए टेक्नोलॉजी से ले करके प्रचार और प्रसार को बल दिया जाए, सुविधाओं को वहां पहुंचाया जाए जहां पर product बनता है। इस बार वाराणसी में हो रहा ये India Carpet Expo इसी कड़ी में एक और बड़ा कदम तो है ही, साथ में Textile Sector के लिए हमारे Five App के vision का भी अहम स्तंभ है। और जब मैं Five App कहता हूं तो Five App का मतलब है Farm to Fiber, Fiber to Factory, Factory to Fashion, Fashion to Foreign ये किसान और बुनकर को सीधे दुनियाभर के मार्केट से जोड़ने की तरफ एक बहुत बड़ा प्रयास है।
आने वाले चार दिनों के दौरान इन Expo में एक से एक उत्कृष्ट डिजाइनों का प्रदर्शन होगा, करोड़ों-करोड़ों रुपयों का व्यापार होगा, समझौते होंगे, बिजनेस के नए अवसर खुलेंगे, बुनकरों को नए ऑर्डर मिलेंगे। मुझे विश्वास है कि विदेशों से जो व्यापारी साथी आए हैं, वो भी हमारी संस्कृति, काशी और भारत के बदले हुए व्यापारिक माहौल का अनुभव ले पाएंगे।
साथियो, हस्तशिल्प को लेकर भारत में एक बहुत लम्बी परम्परा है। भारत के ग्रामीण इलाकों में आज भी सूत कातने में हथकरघे की बड़ी व्यापकता है। बनारस की धरती का तो इसमें और भी अहम रोल रहा है। बनारस की जितनी पहचान संत कबीर से जुड़ी है, उतनी ही हस्तशिल्प से भी जुड़ी है। संत कबीर सूत भी कातते थे और उसके जरिए जीवन का संदेश भी देते थे। कबीरदास जी ने कहा है-
कहि कबीर सुनो हो संतो, चरखा लखे जो कोय।
जो यह चरखा लखि भए, ताको अवागमन न होय।।
यानी चरखा ही जीवन का सार है और जिसने इसे समझ लिया, उसने जीवन का मर्म भी समझ लिया। जहां हस्तशिल्प को जीवन के इतने बड़े दर्शन से जोड़ा गया हो वहां बुनकरों के जीवन को सरल बनाने के लिए इस प्रकार की व्यवस्थाएं जब बनती हैं तब संतोष का एक भाव आता है।
साथियो, हमारे देश में हस्तशिल्प- व्यापार, कारोबार से भी ऊपर प्रेरणा का, स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का, स्वाबलंबन का माध्यम रहा है। गांधीजी, सत्याग्रह और चरखे का हमारे आजादी के आंदोलन में क्यामहत्व रहा है, ये हम भलीभांति जानते हैं।
हस्तशिल्प के माध्यम से स्वाबलंबन के इस संदेश को मजबूती देने के लिए आप सभी के सहयोग से सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। यही कारण है कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा कारपेट उत्पादक देश है। बीते चार-साढ़े चार वर्षों से तो हाथ से बने कालीन के मामले में हम दुनिया में टॉप पर हैं।ये लाखों बुनकरों, डिजाइनरों, व्यापारियों के श्रम, और सरकार की नीतियों के चलते संभव हो पाया है।
साथियो, आज दुनियाभर के carpet market का एक-तिहाई से भी अधिक यानी 35 प्रतिशत हिस्सा भारत के पास है और आने वाले दो-तीन वर्षों में ये बढ़कर 50 प्रतिशत तक होने का अनुमान है। यानी आने वाले सालों में दुनिया में carpet का जितना भी कारोबार होगा, उसका आधा हिस्सा भारत के पास होगा, आप सभी के पास होगा।
पिछले वर्ष हमने 9 हजार करोड़ रुपये के कालीन निर्यात किए। इस वर्ष करीब 100 देशों को हमने कारपेट निर्यात किए हैं। ये प्रशंसनीय कार्य है लेकिन हमें इसको और आगे बढ़ाना है। हमें कोशिश करनी है कि 2022 तक, जब हमारी आजादी के 75 साल पूरे होंगे, तो हम निर्यात के इस आंकड़े को ढाई गुना से भी अधिक, 25 हजार करोड़ रुपये तक ले जाएं।
सिर्फ निर्यात ही नहीं बल्कि देश में भी कालीन कारोबार में बीते चार वर्षों के दौरान तीन गुना से अधिक बढ़ोत्तरी हुई है। चार वर्ष पहले जो बाजार 500 करोड़ का था, वो आज 1600 करोड़ का बन चुका है।
देश में कालीन मार्केट का दायरा अगर बढ़ा है तो उसके लिए, उसके पीछे दो स्पष्ट कारण हैं। एक तो, देश में मध्यम वर्ग का लगातार विस्तार हो रहा है और दूसरा, कालीन उद्योग के लिए, उसके प्रचार-प्रसार के लिए अभूतपूर्व सुविधाएं दी जा रही हैं।
साथियो, इस ट्रेंड को लेकर ही हम चलें तो कालीन उद्योग का, पूरे textile sector का भविष्य देश में उज्ज्वल है। आज भारत दुनिया का एकमात्र देश है जो छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा carpet बनाता है। इतना ही नहीं, भारतकेcarpet, कला और शिल्प के मामले में उत्कृष्ट तो होते ही हैं, ये environment friendly भी हैं। ये आप सभी की मेधा, आपकी skills का ही कमाल है कि दुनियाभर में Made in India Carpet, ये Made in India Carpet एक बड़ा Brand बन करके उभरा है।
साथियो, इस Brand को और मजबूत करने के लिए सरकार हर तरह के प्रयास के लिए प्रतिबद्ध है।Carpet Exporters को असुविधा न हो, इसके लिए logistic support को और मजबूत किया जा रहा है। देशभर में गोदाम और शोरूम की सुविधा देने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इससे आप एक बड़े मार्केट तक अपने सामान को आसानी से पहुंचा पाएंगे।
इतना ही नहीं, टेक्नोलॉजी और क्वालिटी को लेकर भी सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। भदोई और श्रीनगर में कालीन परीक्षण सुविधा के लिएIndian Institute of Carpet Technology यानी IICT; इसमें विश्वस्तरीय laboratory स्थापित की गई है। कोशिश ये है कि हमारे products, zero defect, zero effect वाले हों, जिसमें खोट बिल्कुल न हो और पर्यावरण की चिंता उत्पाद में भी झलके।
इसके अलावा, कालीन के साथ-साथ हस्तशिल्प के दूसरे सामान की मार्केटिंग और बुनकरों को अन्य सहायता के लिए भी अनेक व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं। वहां वाराणसी में ही 9 common facility centre, common service centre बनाए गए हैं। इन सेंटरों का लाभ हजारों बुनकरों को मिल रहा है।
साथियो, गुणवत्ता के अलावा बुनकरों को, छोटे व्यापारियों को पैसे की दिक्कत न हो, इसके लिए भी अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। मुद्रा योजना के तहत 50 हजार रुपये से ले करके 10 लाख रुपये की गारंटी फ्री ऋण से बहुत बड़ी मदद हो रही है। बुनकरों के लिए तो मुद्रा योजना में 10 हजार रुपये की margin money का भी प्रावधान किया गया है।
इतना ही नहीं, अब जो भी सहायता या कर्ज, बुनकरों का दिया जा रहा है, वह बहुत ही कम समय में सीधा उनके खाते में पहुंच रहा है।‘पहचान’ नाम से जो पहचान पत्र बुनकरों को दिया गया है, उससे बिचौलियों को हटाने में बहुत बड़ी मदद मिली है।
इसके अलावा भदोई, मिर्जापुर Mega Carpet Cluster और Srinagar Carpet Clusterबुनकरों को आधुनिक loom भी दिए जा रहे हैं। Loom चलाने का कौशल पैदा हो, इसके लिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है।बुनकरों के कौशल में बढ़ोत्तरी हो, इसके लिए skill development के अनेक प्रोगाम चल रहे हैं।
साथियो, पहले जब भी मैं बुनकर भाई-बहनों से बात करता था तो एक बात जरूर सुनने को मिलती थी, वो कहते थे कि हमारे बच्चे अब इस काम में जुड़ना नहीं चाहते हैं। इससे गंभीर स्थिति भला क्या हो सकती है? आज जब हम carpet के मामले में दुनिया के शीर्ष पर हैं, तब आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित और प्रोत्साहित करना भी उतना ही आवश्यक है।
इसी लक्ष्य के तहत IICT भदोई में, कालीन प्रौद्योगिकी मेंबीटेक (B.Tech)कार्यक्रम चलाया जा रहा है। देश के दूसरे हिस्सों में भी प्रशिक्षण संस्थानों में इस तरह के कार्यक्रम चलाने की योजना है। बुनकरों के कौशल के साथ-साथ उनकी और उनके बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। गरीब बुनकर परिवारों के बच्चों की फीस का 75 प्रतिशत सरकार द्वारा ही वहन किया जा रहा है।
साथियो, आपकी कला और श्रम को राष्ट्र की शक्ति बनाने के लिए भी ये सरकार प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में देश के लिए, बनारस के लिए इस कला का प्रदर्शन करने के बहुत बड़े अवसर आने वाले हैं।
अगले वर्ष जनवरी में जो प्रवासी भारतीय सम्मेलन काशी में होने वाला है, वो भी प्रचार का एक बहुत बड़ा माध्यम साबित होगा। मुझे विश्वास है कि दुनियाभर से आए व्यापारी साथी हमारे हस्तशिल्प के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक स्मृति और बदलती काशी का आनंद भी ले पाएंगे।
एक बार फिर आप सभी को धनतेरस, दीपावली और छठ पूजा की अग्रिम बधाई देता हूं और इस सफल आयोजन के लिए, काशी को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा दिलाने के लिए मैं मंत्रालय को, मेरे बुनकर भाइयों-बहनों को, export-import से जुड़े हुए सभी महानुभावों को काशी पधारने के लिए, काशी को प्रतिष्ठा के केंद्र में लाने के लिए मैं फिर से एक बार बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today, addressed via video conference, the India Carpet Expo at Varanasi.
Welcoming guests from India and abroad, the Prime Minister noted that this is the first time that the India Carpet Expo is being organized at the Deendayal Hastkala Sankul, in Varanasi. He mentioned Varanasi, Bhadohi and Mirzapur as important centres of the carpet industry. He spoke of efforts being made to encourage handicrafts, small and medium industries.
The Prime Minister said that India has a long tradition of handicrafts, and Varanasi has played a key role in this regard. In this context, he mentioned the great saint poet, Kabir, who also belonged to the same region.
He said handicrafts have been a source of inspiration, in the freedom struggle, and for self-reliance. In this context, the Prime Minister mentioned Mahatma Gandhi, Satyagraha, and the Charkha.
The Prime Minister said that India is today the biggest producer of carpets, and has about 35 percent of the global marketshare. He spoke of the impressive export performance of this sector. He said the rising middle class, and the support provided to the carpet industry are two key factors behind the growth in this sector. He appreciated the skills of the carpet makers, which have made the “Made in India carpet” a big brand. He spoke of the logistic support being provided to carpet exporters, and the creation of world class laboratories to ensure quality. He also spoke of other facilitation measures, including modern looms and credit facilities being made available to the sector.
The Prime Minister asserted that the Union Government is committed to ensuring that the skill and hard work of the carpet makers, becomes one of the strengths of the nation.
मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी, आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी जी, वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री श्री सी. आर. चौधरी जी, वाणिज्य मंत्रालय और संबंधित विभागों के अधिकारीगण और यहां उपस्थित अन्य महानुभाव
सबसे पहले मैं आप सभी को वाणिज्य भवन का शिलान्यास होने पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आज इसका कार्य शुरू हो गया है और जैसा कि मंच पर ही बताया गया है कि अगले वर्ष दिसंबर तक निर्माण का काम पूरा हो जाएगा। मुझे उम्मीद है कि समय की सीमाओं में ही वाणिज्य भवन बनेगा और जल्द से जल्द इसका लाभ लोगों को मिलने लगेगा।
साथियों, समय की बात सबसे पहले मैं इसलिए कर रहा हूं क्योंकि इस सरकार के दौरान जितने भी भवनों का शिलान्यास या उद्घाटन करने का अवसर मुझे मिला, उसमें ज्यादातर में एक बात कॉमन थी। कॉमन ये की इमारतों का निर्माण भी सरकारों के काम करने के तरीकों का प्रतिबिम्ब होता है। न्यू इंडिया की ओर बढ़ते देश और पुरानी व्यवस्थाओं के बीच का फर्क भी इसी से पता चलता है।
साथियों, मैं आपको कुछ उदाहरण देना चाहता हूं। मुझे याद है जब वर्ष 2016 में प्रवासी भारतीय केंद्र का लोकार्पण हुआ, तो उस समय ये बात भी सामने आई थी कि उस केंद्र का ऐलान अटल बिहारी वाजपायी जी के समय हुआ था। बाद में उसे मूर्त रूप में आते-आते 12 साल लग गए।
पिछले साल दिसंबर में जिस डॉक्टर आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर का लोकार्पण हुआ, उसे बनाने का निर्णय भी 1992 में लिया गया था। लेकिन इसका शिलान्यास हुआ वर्ष 2015 में मैंने कहा , कहाँ 1992 कहाँ 2015, इसका लोकार्पण 2017 में हुआ। यानि निर्णय होने के बाद 23-24 साल लग गए, सिर्फ एक सेंटर बनने में।
साथियों, इसी साल मार्च में मैंने Central Information Commission के नए भवन को भी देश को समर्पित किया था। CIC के लिए नए भवन की मांग भी 12 साल से हो रही थी लेकिन इसके लिए भी काम NDA की अभी की सरकार ने ही शुरू करवाया और तय समय में उसे पूरा भी किया।
एक और उदाहरण है अलीपुर रोड में बनी आंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक का। दो महीना पहले इसका भी लोकार्पण किया गया है। इस स्मारक के लिए भी बरसों तक चर्चा हुई, अटल जी के समय काम में तेजी भी आई , लेकिन बाद में दस बारह साल सब ठप पड़ गया।
दिल्ली की ये चार अलग-अलग इमारतें, प्रतीक हैं कि जब सरकार silos में काम नहीं होता, जब सारे विभाग, मंत्रालय, silos से निकलकर solution के लिए, एक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करते हैं, तो कितना अच्छा और कितना जल्दी परिणाम निकलता है। हर काम को अटकाने-भटकाने-लटकाने की प्रवत्ति से देश अब आगे निकल चुका है।
मुझे खुशी है कि आज इसमें पाँचवाँ प्रतीक जुड़ने की शुरुआत हो गई है। इस वाणिज्य भवन में, एक छत के नीचे, commerce sector के हर क्षेत्र से silos को खत्म करने का कार्य और बेहतर तरीके से किया जाएगा, मेरी यही कामना है। मुझे विश्वास है की यह परिपूर्ण भी होगा|
साथियों, आज भारत समय के बहुत महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। हमारा Demographic Dividendकिसी भी देश के लिए ईर्ष्या का विषय हो सकता है। हमारी democracy को हमारे नौजवान नई ऊर्जा देते हैं। ये नौजवान 21वीं सदी के भारत का आधार हैं। उनकी आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति, सिर्फ कुछ मंत्रालयों की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
भारत पिछली शताब्दी में औद्योगिक क्रांति का लाभ उठाने से चूक गया था। तब उसकी अनेक वजहें थीं। लेकिन अब उतनी ही वजहें हैं जिनकी वजह से भारत अब इस शताब्दी की औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करने वालों में से एक बन सकता है।चौथी औद्योगिक क्रांति, जिसे 4th Industrial Revolution भी कहते हैं, उसका मुख्य आधार डिजिटल टेक्नोलॉजी है और निश्चित तौर पर भारत इसमें दुनिया के कई देशों से कहीं आगे है।
आज आप वाणिज्य मंत्रालयों के भी जितने लक्ष्यों को देखेंगे, जितने भी कार्यों को देखेंगे, तो उसमें डिजिटल टेक्नोलॉजी की प्रमुखता ही आपको नजर आएगी।
ये वाणिज्य भवन ही देखिए। जिस जमीन पर ये इमारत बनेगी, वो पहले Directorate General of Supplies and Disposal के अधिकार में थी। सौ वर्ष से भी ज्यादा पुराना ये विभाग अब बंद हो चुका है और इसकी जगह ली है डिजिटल तकनीक पर आधारित Government-e-Marketplace- GeMने। सरकार किस तरह से अपनी जरूरत के सामान की खरीद करती है, उस व्यवस्था को GeM ने पूरी तरह से बदल दिया है।
आज की तारीख में1 लाख 17 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े विक्रेता, कंपनियां इससे जुड़ी चुकी हैं। इन Sellers को 5 लाख से ज्यादा Orders GeM के माध्यम से दिए जा चुके हैं। बहुत कम समय में GeM पर 8700 करोड़ रुपए के सामान को खरीदा गया है।
जिस तरह GeM ने देश के सुदूर कोने में बैठे छोटे-छोटे उद्मियों को अपने Products सीधे सरकार को बेचने का अवसर मुहैया कराया है, उसके लिए Commerce Ministry प्रशंसा की पात्र है। लेकिन आप लोगों के लिए, मैं इसे एक लंबी यात्रा की शुरुआत मानता हूं।
GeM का विस्तार और कैसे बढ़ाया जाए, कैसे ये देश के MSME सेक्टर, छोटे उद्यमियों को International Commerce की तरफ ले जाए, इस बारे में बहुत कुछ किया जाना बाकी है। आज देश में 40 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन, इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की बढ़ती हुई संख्या, सस्ता डेटा, आपके कार्यों को और आसान कर रहा है।
साथियों, हमारे यहां कहा गया है- को हि भार: समर्थानाम् किम् दूर व्यवसायिनाम्। यानि जो व्यक्ति शक्तिशाली होता है, उसके लिए कोई चीज भारी नहीं होती। इसी तरह व्यवसायियों के लिए कोई जगह दूर नहीं होती। आज टेक्नोलॉजी ने व्यापार को इतना सुगम बना दिया है कि दूरी दिनोंदिन कम होती जा रही है। ये टेक्नोलॉजी देश के बिजनेस कल्चर में जितनी बढ़ेगी, उतना ही फायदा पहुंचाएगी।
हम देख रहे हैं कि किस तरह एक वर्ष से भी कम समय ने GST देश में बिजनेस का तरीका बदल दिया है। अगर टेक्नोलॉजी नहीं होती, तो क्या ये संभव होता? नहीं। आज GST की वजह से ही देश में Indirect Tax औऱ उससे जुड़ने वाले लोगों का विस्तार बहुत तेजी से हो रहा है।
स्वतंत्रता के बाद से हमारे देश में Indirect Tax सिस्टम से जहां सिर्फ 60 लाख जुड़े हुए थे, वहीं GST के बाद के 11 महीनों में ही अब तक 54 लाख से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन दिया है और इनमें से 47 लाख से ज्यादा रजिस्टर हो चुके हैं। इस तरह रजिस्टर्ड लोगों की संख्या अब एक करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।
ये इस बात को दर्शाता है कि प्रक्रियाओं को सरल करने पर, Minimum Government, Maximum Governance की राह पर चलने पर नतीजे भी आते हैं, और ज्यादा से ज्यादा लोग भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए कदम बढ़ाते हैं।
साथियों, आप भली-भांति जानते हैं कि पिछले 4 वर्षों में सरकार ने People friendly, Development friendly और Investment friendly माहौल बनाने का निरंतर प्रयास किया है। तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के Macro-Economic Indicators stable बने हुए हैं। Inflation हो, Fiscal Deficit हो, या फिर Current Account Balance, इनमें पहले की सरकारों की तुलना में सुधार हुआ है।
भारत आज दुनिया की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अभी पिछले ही क्वार्टर में देश की विकास दर ने 7.7 प्रतिशत के आंकड़े को Touch किया है। पिछले 4 वर्षों में हुआ विदेशी निवेश, विदेशी मुद्रा का भंडार अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
आज भारत FDI Confidence Index में top two emerging market performers में से एक है। Ease of doing Business की रैंकिंग में 142 से 100 नंबर पर पहुंचना, Logistics Performance Index में 19 अंकों का सुधार, Global Competitiveness Index में रैंकिंग 71 से सुधकर 39 पर पहुंचना, Global Innovation Index में 21 अंक का उछाल आना, ये इसी विजन का नतीजा है।
आपकी जानकारी में अवश्य होगा कि हाल ही में भारत ने दुनिया के top 5 Fin Tech countries में भी जगह बना ली है।
लेकिन इन Positive Indicators के साथ ही आगे बहुत बड़ा सवाल ये भी है कि अब आगे क्या? साथियों, सात प्रतिशत, आठ प्रतिशत की विकास दर से आगे बढ़कर हमें डबल डिजिट की विकास दर प्राप्त करने के लक्ष्य पर काम करना है। दुनिया की नजरें आज भारत को इस दृष्टि से भी देख रही हैं कि भारत कितने वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर के क्लब में शामिल होता है?
मैं मानता हूं कि Commerce Ministry को, आप सभी जिम्मेदार अधिकारीगणों को इन लक्ष्यों को एक चैलेंज की तरह लेना चाहिए। आर्थिक मोर्चे पर की गई ये प्रगति सीधे-सीधे देश के सामान्य नागरिक के जीवन से जुड़ी हुई है।
इसलिए आपने ये भी देखा होगा कि जब भी मैं Ease of Trading, Ease of Doing Businessकी बात करता हूं, वो साथ ही Ease of Livingका विषय भी हमेशा उठाता हूं। आज की Interconnected दुनिया में ये सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
जब बिजली कनेक्शन लेना आसान होता है, कंस्ट्रक्शन को लेकर मंजूरी जल्दी मिलती है, जब उद्योगों को, कंपनियों को प्रक्रियाओं से उलझना नहीं होता, तो इसका लाभ जन सामान्य तक भी पहुंचता है। इसलिए आप लोगों के लिए भी ये एक चैलेंज है कि अब भी जो अलग-अलग सेक्टरों में जो bottleneck बचे हुए हैं, जहां पर silos में काम हो रहा है, उन्हें जितना जल्दी हो सके दूर किया जाए।
विशेषकर Infrasector में जो दिक्कतें आती हैं, high Transaction cost होता है, Manufacturing को बढ़ाने में जो बातें गतिरोध पैदा करती हैं, services का inadequate diversification करती हैं, उन्हें रोका जाना, सुधारा जाना बहुत आवश्यक है।
मुझे खुशी है कि अभी हाल ही में Department of Commerce ने देश के logistics sector के integrated development का बीड़ा उठाया है। ये initiative देश में trade के environment को सुधारने में बहुत बड़ी भूमिका निभाने वाला है।
साथियों, Integrated logistics action plan आज समय की मांग है और New India की जरूरत भी है।Policy में बदलाव करके, जो वर्तमान में Procedures हैं, उन्हें सुधार करके,आज की आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाकर इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
मुझे बताया गया है कि Department of Commerce इस दिशा में एक Online Portal पर भी काम कर रहा है। Global Trade में भारत की उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए, नई ऊँचाई पर पहुंचाने के लिए सभी मंत्रालयों और सभी राज्यों का एकसाथ मिलकर काम करना भी आवश्यक है। जिसको हम कहते हैं, ‘Whole of Government’ Approach,उसे अपनाए जाने की जरूरत है।
ये भी एक अच्छा कदम है कि Council for Trade Development and Promotion राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों में International Trade को बढ़ावा देने वाला वातावरण बनाने के लिए काम कर रही है। भारत के Exports को बढ़ाना है तो राज्यों को Active Partner बनाकर ही आगे बढ़ना होगा।
मैं समझता हूं कि राज्यों में State level export strategy का निर्माण करके, उन्हें National Trade Policy के साथ तालमेल करते हुए, आर्थिक सहायता करते हुए, जितने भी stakeholders हैं, उन्हें साथ लेते हुए, इस दिशा में जितनी तेजी से आगे बढ़ेंगे, उतना ही देश का लाभ होगा।
साथियों, International मार्केट में भारत की उपस्थिति को बढ़ाने के लिए जो हमारे Traditional Products और Markets हैं, उन्हें बनाए रखते हुए नए Products और नए Markets पर ध्यान दिया जाना भी बहुत आवश्यक है।हमें देश के भीतर की चुनौतियों के साथ ही देश के बाहर की परिस्थितियों के लिए भी खुद को और मजबूत करना होगा।
जब हम short-term developmental gains और long-term sustainability के बीच एक संतुलन बनाकर चलेंगे तो उसके नतीजे भी दिखाई देंगे।
पिछले साल दिसंबर में Foreign Trade policy से जुड़ा जो Mid Term review किया गया था, उसे भी मैं बहुत सकारात्मक पहल मानता हूं। Incentive बढ़ाकर, MSME सेक्टर की Hand Holding करके निर्यात को बढ़ाने के लिए किया गया हर बदलाव प्रशंसनीय है। ये सीधे-सीधे देश की रोजगार जरूरतों से भी जुड़ा हुआ है।
एक और महत्वपूर्ण विषय है-Product की Quality. यही वजह है कि साल 2014 में मैंने 15 अगस्त को लाल किले से Zero Defect, Zero Effect का आह्वान किया था। उद्योग छोटा हो या बड़ा, हर मैन्यूफैक्चरर को इस बात के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए कि वो ऐसे Products बनाए, जिसमें Zero Defect हो, कोई हमारे exported goods को वापस न भेजे। इसके साथ ही मैंने Zero Effect की बात की थी, यानि हमारे Products पर्यावरण पर कोई negative effect न डालें।
Products की Quality को लेकर ये जागरूकता Make in India की चमक बढ़ाने और New India की पहचान को मजबूत करने का काम करेगी।
आप भी जब देखते होंगे कि जहां 2014 में हमारे देश में सिर्फ 2 मोबाइल मैन्यूपैक्चरिंग कंपनियां थीं, वो अब बढ़कर 120 हो गई हैं, बहुत ही कम कीमत पर विश्व स्तर के QualityProduct का निर्माण कर रही हैं, तो खुद को गौरवांवित महसूस करते होंगे।
साथियों, ये समय संकल्प का है, चुनौतियां स्वीकारने का है।
क्या Department of Commerce ये संकल्प ले सकता है की विश्व के कुल निर्यात में भारत के योगदान को बढ़ाकर दोगुना करे, अभी के 1.6 प्रतिशत से बढ़ाकर कम से कम 3.4 प्रतिशत तक ले जाए। ये world economy मेंGDP के भारत के योगदान के बराबर होगा। इस से देश में रोज़गार के और नए अवसर बनेंगे और हमारी per capita इनकम में भी बढ़ोतरी होगी।
इसके लिए सरकार के सभी विभागों और यहाँ उपस्थित एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल्स के सभी लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा।
इसके अलावा एक और संकल्प लिया जा सकता है इम्पोर्ट को लेकर। क्या हम कुछ चुने हुए क्षेत्रों में इम्पोर्ट पर अपनी निर्भरता को कम कर सकते हैं? चाहेवो एनर्जी इम्पोर्ट हो, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का इम्पोर्ट हो, डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग का क्षेत्र हो या मेडिकल devices का क्षेत्र हो। Make in india के द्वारा ये संभव है।
डोमेस्टिकमैन्यूफैक्चरिंग के द्वारा इम्पोर्ट में 10% की कमी देश में साढ़े तीन लाख करोड़रुपए कीआय बढ़ा सकती है। ये देश की GDP में वृद्धि को डबल डिजिट में ले जाने में एक Effective tool बन सकती है।
मैं आपको इलेक्ट्रॉनिक गुड्स की मैन्यूफैक्चरिंग का ही उदाहरण देना चाहता हूं। क्या ये आप सभी लोगों के लिए एक चुनौती नहीं है कि देश में इलेक्ट्रॉनिक गुड्स की कुल मांग का 65 प्रतिशत हमें बाहर से खरीदना पड़ता है?
जैसा मोबाइल फोन के क्षेत्र में हुआ है, वैसे हीक्या आप इस चुनौती को स्वीकार कर, देश को इलेक्ट्रॉनिक गुड्स की मैन्यूफैक्चरिग में आत्मनिर्भर बना सकते हैं?
साथियों, आप इससे भी परिचित हैं कि इम्पोर्ट पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बहुत महत्वपूर्ण कदम पिछले वर्ष उठाया गया है। Public Procurement (Preference to Make in India)आदेश के द्वारा सरकार के तमाम विभागों और संस्थानों में खरीदी जा रही वस्तुओं और सेवाओं के Domestic Source से खरीदने पर बल दिया जा रहा है। इस आदेश को पूरी गंभीरता के साथ लागू करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
इसके लिए आप सभी लोगों को, सरकार के सभी निकायों को, अपनी मॉनीटरिंग व्यवस्था को, इस आदेश के पालन के लिए और सुदृढ़ करना होगा।
घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने कई और अहम फैसले भी लिए हैं। वो चाहे regulatory framework हों, regulatory frameworkमें सरलता लाने की बात हो, investor friendly policyहो, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजीस्टिक्स पर बल हो, ये सभी इसलिए किया जा रहा है ताकि भारत आत्मनिर्भर बने, 21वीं सदी की औद्योगिक क्रांति में एक कदम भी पीछे न रह जाए।
Make in India के साथ बढ़ता ये गौरव, नए बनने वाले वाणिज्य भवन का भी गौरव बढ़ाए, मेरी यही कामना है।
साथियों, यहां आने से पहले एक और शुभ कार्य आप लोगों ने मुझसे कराया है। इस परिसर में मौलश्री या बकुल के पौधे को लगाने का सौभाग्य मुझे मिला। मौलश्री की बहुत पौराणिक मान्यता है, कितने ही औषधीय गुणों से संपन्न है और इसका वृक्ष सालों-साल छाया देता है। मुझे बताया गया है कि इसके अलावा भी यहां करीब हजार पेड़ और लगाए जाने की योजना है।
नए बनने वाले वाणिज्य भवन का, प्रकृति के साथ ये संवाद, उसमें काम करने वाले लोगों को भी स्फूर्त रखेगा, उन्हें राहत देगा।
पर्यावरण के लिए अनुकूल, लेकिन आधुनिक तकनीक से संपन्न वातावरण में आप सभी न्यू इंडिया के लिए अपना श्रेष्ठतम दें, Best Effort करें, इसी कामना के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
एक बार फिर आप सभी को वाणिज्य भवन के निर्माण का काम शुरू होने पर बहुत-बहुत बधाई।
धन्यवाद !!!
The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today laid the foundation stone for Vanijya Bhawan, a new office complex for the Union Government’s Department of Commerce, at New Delhi.
The Prime Minister expressed confidence that the building will be completed well within the stipulated time. He emphasized that this would be in keeping with the spirit of New India, and moving away from old practices, under which important building projects, even in the Capital, had been inordinately delayed. In this context, he mentioned the Dr. Ambedkar International Centre, the Dr. Ambedkar National Memorial, the Pravasi Bharatiya Kendra and the new office building for the Central Information Commission.
He said that this is also the result of breaking silos within the working of the Government. He hoped that the new office building – Vanijya Bhawan – would further facilitate elimination of silos in India’s commerce sector. Speaking about the country’s demographic dividend, the Prime Minister said that it is our collective responsibility to fulfil the aspirations of our youth.
Talking of adoption of digital technology, the Prime Minister remarked that the land on which the new building is being constructed, was earlier occupied by the Directorate General of Supplies and Disposal. This has now been replaced by the Government e-Marketplace (GeM), which has seen transactions worth Rs. 8700 crore in a short time, he added. He urged the Department of Commerce to work towards further expansion of GeM, and leverage it for the benefit of the country’s MSME sector. He also spoke of the benefits of GST, and said the Union Government is making constant efforts to create a people-friendly, development-friendly and investment-friendly environment.
The Prime Minister mentioned various macro-economic parameters, and other indicators to explain how the India is now playing an important role in the global economy. He said India is now among the top five fin-tech countries, globally. He said subjects such as “Ease of Trading,” and “Ease of Doing Business,” are all related to “Ease of Living” in an interconnected world.
The Prime Minister emphasized the need for an increase in exports, and said that States must be made active partners in this effort. He said the Department of Commerce must resolve to raise India’s share in total global exports to at least 3.4 percent, from the current 1.6 percent. Similarly he said, efforts must be made to raise domestic manufacturing output, to reduce imports. In this context, he gave the example of electronics manufacturing. He said the Union Government has taken a number of steps to boost domestic manufacturing.
भारत माता की जय, भिलाई स्टील प्लांट छत्तीसगढ़ महतारी के कोरा के अनमोल रत्न हैं। छत्तीसगढ़ महतारी के प्रताप के चिन्हारी हैं।छत्तीसगढ़ के यशस्वी और लोकप्रिय मुख्यमंत्री हमारे पुराने साथी डॉ. रमन सिंह जी, केंद्र में मंत्री परिषद के मेरे साथी चौधरी बीरेंद्र सिंह जी, मंत्री श्री मनोज सिन्हा जी, इसी धरती की संतान केंद्र में मेरे साथी श्री विष्णु देव सहाय जी, छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष श्रीमान गौरीशंकर अग्रवाल जी, राज्य सरकार के सभी वरिष्ठ मंत्रीगण और छत्तीसगढ़ के मेरे प्यारे भाईयो और बहनों।
दो महीना पहले वो भी 14 तारीख थी। आज भी 14 तारीख है। मुझे दोबारा एक बार आपके आर्शीवाद प्राप्त करने का अवसर मिला है।
जब मैं 14 अप्रैल को आया था यहीं की धरती से आयुष्मान भारत योजना के पहले चरण की शुरुआत की थी। आज दो महीने बाद 14 तारीख को भिलाई में आप सभी से आर्शीवाद लेने का सौभाग्य फिर एक बार मुझे प्राप्त हुआ है।
छत्तीसगढ़ के इतिहास में, छत्तीसगढ़ के भविष्य को मजबूत बनाने वाला एक और सुनहरा अध्याय आज जोड़ा जा रहा है। अब से कुछ देर पहले भिलाई में स्टील प्लांट के विस्तार और आधुनिकीकरण, दुसरा जगदलपुर हवाई अड्डा, नया रायपुर के कमांड सेंटर के लोकार्पण, अनगिनत विकास के काम। इसके अलावा भिलाई में आईआईटी कैंपस के निर्माण और राज्य में भारत नेट फैज-2 पर भी आज से काम शुरू हो गया है।
करीब-करीब 22 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की योजनाओं का उपहार आज छत्तीसगढ़ के मेरे प्यारे भाईयो बहनों को मैं समर्पित कर रहा हूं। ये सभी योजनाएं यहां रोजगार के नए अवसर बनाने वाली है। शिक्षा के नए अवसर पैदा करने वाली है। आवाजाही के आधुनिक साधन देने वाली है औरछत्तीसगढ़ के दूर दराज के इलाकों को संचार की आधुनिक तकनीक से जोड़ने वाली है। कई वर्षों में हिन्दुस्तान में जब बस्तर की बात आती थी, तो पंप, बंदूक, पिस्तौल और हिंसा की बात आती थी। आज बस्तर की बात जगदलपुर के हवाई अडडे से जुड़ गई है।
साथियों जिस राज्य के निर्माण के पीछे हम सबके ध्येय अटल बिहारी वाजपेयी जी का विजन है। मेरे छत्तीसगढ़ वासियों का कठोर परिश्रम है, तपस्या है। उस राज्य को तेज गति से आगे बढ़ते देखना हम सबके लिए एक बहुत सुखद अनुभव है। आनंद और प्रेरणा देने वाला अनुभव है।
अटल जी के विजन को मेरे मित्र मुख्यमंत्री रमन सिंह जी ने पूरे परिश्रम के साथ आगे बढ़ाया है। अब जब भी मैं उनसे बात करता हूं, टेलीफोन पर तो अक्सर मिलते रहते हैं। रूबरू मिलता हूं। हर बार वो कोई नई कल्पना नई योजना नई चीज लेकर के आते हैं और इतने उमंग और उत्साह के साथ आते हैं। और वो उसको लागू करके सफलता के शिखर पर पहुंचाने का आत्मविश्वास उनकी हर बात में नजर आता है।
साथियों, हम सब जानते हैं विकास करना है प्रगति करनी है तो शांति, कानून और सामान्य जीवन की व्यवस्थाएं- ये प्राथमिकता रहती है। रमन सिंह जी ने एक तरफ शांति, स्थिरता, कानून, व्यवस्था उस पर बल दिया। तो दूसरी तरफ विकास की नई ऊंचाइयों को पार करने के लिए छत्तीसगढ़ को आगे बढ़ाते चले। नर्इ कल्पनाएं, नई योजनाएं को लेकर आते रहे और विकास की इस तीर्थयात्रा के लिए मैं रमन सिंह जी और उनके यहां के ढाई करोड़ से ज्यादा मेरे छत्तीसगढ़ के भाईयो बहनों को अभिनंदन करता हूं। शुभकामनाएं देता हूं।
भाईयो बहनों, ये क्षेत्र मेरे लिए नया नहीं है। जब छत्तीसगढ़ बना नहीं था मध्य प्रदेश का हिस्सा था। मैं कभी इस क्षेत्र में टू-व्हीलर पर आया करता था। मैं संगठन के काम के लिए आता था। ये मेरे सारे साथी, हम पांच-पचास लोग मिलते थे। देश की, समाज की छत्तीसगढ़ की, मध्यप्रदेश मैं की कई समस्याएं देखता था। बाते करते थे तब से लेकर आज तक कोई ऐसा वक्त नहीं आया जब मेरा छत्तीसगढ़ से दूरी बनने का कोई कारण बना। इतना प्यार आप लोगों ने दिया है। हर बार आपसे जुड़ा रहा। शायद पिछले 20,22-25 साल हुए होंगें जिसमें एक भी वर्ष ऐसा नहीं होगा कि जहां मेरा छत्तीसगढ़ आना न हुआ हो। शायद यहां कोई डिस्ट्रिकट ऐसा बचा होगा कि जहां मेरा जाना न हुआ हो। और यहां के प्यार को यहां के लोगों की पवित्रता को मैंने भलीभांति अनुभव किया है।
भाईयो बहनों, आज यहां आने से पहले मैं भिलाई स्टील प्लांट गया था। 18 हजार करोड़ से अधिक खर्च करके इस प्लांट को और आधुनिक तकनीक और नई क्षमताओं से युक्त किया गया है। और मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे इस परिवर्तित आधुनिक प्लांट के लोकार्पण का भी अवसर मिला है। ये देख के बहुत कम लोगों को पता होगा कि कच्छ से कटक तक और करगिल से कन्याकुमारी तक आजादी के बाद जो भी रेल की पटरियां बिछी हैं। उनमें अधिकतर इसी धरती से आप ही के पसीने के प्रसाद के रूप में पहुंची हैं। निश्चित तौर पर भिलाई ने सिर्फ स्टील ही नहीं बनाया है बल्कि भिलाई ने जिंदगियों को भी संवारा है। समाज को सजाया है और देश को भी बनाया है।
भिलाई का ये आधुनिक परिवर्तित स्टील प्लांट अब न्यू इंडिया की बुनियाद को भी स्टील जैसा मजबूत करने का काम करेगा। साथियों भिलाई और दुर्ग में तो आपने खुद अनुभव किया है। कि कैसे स्टील प्लांट लगाने के बाद यहां की तस्वीर ही बदल गई है। इस वातावरण को देखकर मुझे विश्वास है कि बस्तर के नगर में जो स्टील प्लांट जो स्थापित हुआ है। वो भी बस्तर अनचल के लोगों की जिंदगी में बहुत बड़ा बदलाव लाएगा।
भाईयो और बहनों, छत्तीसगढ़ की प्रगति को गति देने में यहां के स्टील अयस्क, लौह अयस्क ये खनन ने बहुत बड़़ी भूमिका निभाई है। इस पर आपका और विशेषकर मेरे आदिवासी भाईयो बहनों का अधिकार है। यही वजह है कि हमनें सरकार में आने के बाद एक बहुत बड़ा कानून में बदलाव किया है। और हमें ये सुनिश्चित किया कि जो भी खनिज निकलेगा, उससे होने वाली कमाई का एक हिस्सा वहां के स्थानीय निवासियों को उनके विकास के लिए खर्च किया जाएगा। ये हमनें कानूनन तय कर लिया है। और इसलिए खनन वाले हर जिले में District Mineral Foundationकी स्थापना की गई।
इस कानून में बदलाव के बाद छत्तीसगढ़ को भी तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की अतिरिक्त राशी प्राप्त हुई है। ये पैसे अब खर्च हो रहे हैं। आपके लिए अस्पताल बनाने के लिए, स्कूल बनाने के लिए, सड़के बनाने के लिए, शौचालय बनवाने के लिए।
भाईयो और बहनों जब विकास की बात करते हैं, Make in India की बात करते हैं तो इसके लिए कौशल विकास यानी skill development भी उतना ही आवश्यक है। भिलाई की पहचान तो दशकों से देश के बड़े education हक के तौर पर रही है। लेकिन इतनी व्यवस्थाएं होने के बावजूद यहां आईआईटी की कमी महसूस हो रही है।
आपके मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पिछली सरकार के समय भी इस बात के लिए लगातार कोशिश कर रहे थे। कि भिलाई को आईआईटी मिलना चाहिए। लेकिन वो भी कौन लोग थे आप जानते हैं भली भांति। रमन सिंह जी ने दस साल मेहनत की पानी में गई। लेकिन जिस छत्तीसगढ़ ने हमें भरपूर आर्शीवाद दिया है। जब हमारी बारी आई, रमन सिंह जी आए और हमनें तुरंत फैसला कर दिया। पांच नए आईआईटी और जब पांच नए आईआईटी बने तो आज भिलाई में सैंकड़ों, करोड़ों रुपयों का एक आधुनिक आईआईटी का कैंपस उसका शिलान्यास भी हो रहा है। लगभग 1100 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला आईआईटी कैंपस छत्तीसगढ़ और देश के मेघावी छात्रों के लिए प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा का तीर्थ बनेगा उन्हें कुछ नया करने के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
साथियों, मुझे कुछ मिनट पहले मंच पर ही कुछ युवाओं को लैपटॉप देने का अवसर मिला है। मुझे खुशी है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार सूचना क्रांति योजना के माध्यम से कंम्पूयटर और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई पर निरंतर बल दे रहे हैं। तकनीक के साथ जितना ज्यादा हम लोगों को जोड़ पाएंगे उतना ही तकनीक से होने वाले लाभ को जन-जन तक पहुंचा पाएंगे। इसी विजन के साथ बीते चार वर्षों के दौरान डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस अभियान को, उसके लाभ को घर-घर पहुंचाने के दिशा में जुटी हुई है।
मैं पिछली बार जब बाबा साहेब अंबेडकर की जन्म जयंती पर आया था तो बस्तर को इंटरनेट से कनेक्ट करने वाले प्रोजेक्ट बस्तर नेट के फेस-1 के लोकार्पण का अवसर मिला था। अब आज से यहां भारत नेट फेस-2 इस पर काम शुरू हो गया है। लगभग ढाई हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट को अगले वर्ष मार्च महीने तक पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की चार हजार पंचायतों तक तो इंटरनेट पहले ही पहुंच चुका है। अब बाकि छ: हजार तक भी अगले साल पहुंच जाएगा।
साथियों, डिजिटल भारत अभियान, भारत नेट यहां राज्य सरकार की संचार क्रांति योजना पचास लाख से ज्यादा स्मार्ट फोन का वितरण, 1200 से ज्यादा मोबाइल टावरों की स्थापना ये सारे प्रयास गरीबों को, आदिवासियों को, दरिद्र, पीडि़त, वंचित, शोषित उनके सशक्तिकरण का एक नया फाउंडेशन तैयार हो रहा है। एक मजबूत नींव तैयार हो रही है। डिजिटल कनेक्टिविटी सिर्फ जगहों को नहीं, सिर्फ एक जगह को दूसरी जगह से जोड़ रही है ऐसा नहीं वो लोगों को भी कनेक्ट कर रही है।
भाईयो और बहनों, आज देश को जल, थल, नभ हर प्रकार से जोड़ने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पुरानी सरकारें जिन इलाकों में सड़के तक बनाने से पीछे हट जाती थी वहां आज सड़कों के साथ ही हवाई अड्डे भी बन रहे हैं।
और मैंने कहा कि मेरा सपना है हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में जा सके इस सोच के साथ उड़ान योजना चलाई जा रही है। और देश भर में नए हवाई अड्डों का निर्माण किया जा रहा है। ऐसा ही एक शानदार हवाई अड्डा आपके जगदलपुर में बना रहे हैं। आज जगदलपुर से रायपुर के लिए उड़ान भी शुरू हो गई है। अब जगदलपुर से रायपुर की दुसरी यानी रायपुर और जगदलपुर के बीच की दूरी छ: से सात घंटे की जगह सिर्फ 40 मिनट रह गई है।
साथियों, ये सरकार की नीतियों का ही असर है। कि अब ट्रेन में एसी डिब्बों में सफर करने वालों से ज्यादा यात्री हवाई जहाज में सफर कर रहे हैं। एक जमाने में रायपुर में तो दिनभर में सिर्फ छ: flight आती थी। अब वहां रायपुर एयरपोर्ट पर एक दिन में पचास flight आने जाने लग गई हैं। आने-जाने के इन नए साधनों से न सिर्फ राजधानी से दूरी घटेगी लेकिन पर्यटन बढ़ेगा, उद्योग धंधे लगेगे और साथ ही साथ रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।
साथियों, आज छत्तीसगढ़ ने आज बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नया रायपुर शहर देश का पहला green field smart city बन गया है। इसी कड़ी ने मुझे Integrated command and control centre का उद्घाटन करने का मुझे अवसर मिला है।
पानी, बिजली, स्ट्रीट लाइट, सीवेज, ट्रांसपोर्ट अब पूरे शहर की निगरानी का काम इसी एक छोटे से सेंटर से हो रहा है। आधुनिक टेकनोलॉजी और डेटा के आधार पर ये सुविधाएं संचालित हो रही है। नया रायपुर अब देश के दूसरे स्मार्ट सिटीज के लिए भी एक मिसाल का काम करेगा।
जो छत्तीसगढ़ पिछड़ा, आदिवासियों का जंगलों का यही उसकी पहचान थी वो छत्तीसगढ़ आज देश में स्मार्ट सिटीज की पहचान बन रहा है। इससे बड़ा गर्व का विषय क्या हो सकता है।
साथियों, हमारी हर योजना देश के हर जन को सम्मान, सुरक्षा और स्वाभिमान का जीवन देने की तरह आगे बढ़ रही है। ये बड़ी वजह है कि पिछले चार वर्षों में छत्तीसगढ़ समेत देश के बड़े-बड़े हिस्सों में रिकॉर्ड संख्या में नौजवान मुख्यधारा से जुड़े हैं। देश के विकास से जुड़े हैं।
मैं मानता हूं किसी भी तरह की हिंसा का, हर तरह की साजिश का एक ही जवाब है, एक ही जवाब है, एक ही जवाब है- विकास, विकास और विकास। विकास से विकसित हुआ विश्वास हर तरह की हिंसा को खत्म कर देता है। और इसलिए केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व में चल रही एनडीए सरकार हो या फिर छत्तीसगढ़ में रमन सिंह जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार हो। हमने विकास के माध्यम से विश्वास का वातावरण बनाने का प्रयास किया है।
भाईयो और बहनों जब पिछली मैं छत्तीसगढ़ आया था तभी देश भर में ग्राम स्वराज अभियान की भी शुरुआत की गई थी। पिछले दो महीनों में इस अभियान का बहुत सकारात्मक असर पड़ा है। ये अभियान विशेषकर देश के 115 आंकाक्षी जिले यानी कि aspirational district में चलाया जा रहा है। जो विकास की दौड़ में पिछले 70 साल में पीछे रह गया था। इसमें छत्तीसगढ़ के भी 12 जिले शामिल हैं। इन जिलों में विकास के अलग-अलग पैमानों को ध्यान में रखते हुए नई ऊर्जा के साथ काम किया जा रहा है। गांव में सभी के पास बैंक खाते हों, गैस कनेक्शन हो, हर घर में बिजली कनेक्शन हो, सभी का टीकाकरण हुआ हो, सभी को बीमा का सुरक्षा कवच मिला हो, हर घर में एलईडी बल्ब हो, ये सुनिश्चित किया जा रहा है।
ग्राम स्वराज अभियान जनभागीदारी का बहुत बड़ा माध्यम बना है। छत्तीसगढ़ के विकास में भी ये अभियान नए आयाम स्थापित करेगा। विश्वास के इस माहौल में गरीब को, आदिवासी को जो ताकत मिलती है उसकी तुलना कभी नहीं कर सकते इतनी ताकत मिलती है।
छत्तीसगढ़ में जन-धन योजना के तहत और ये मैं सिर्फ छत्तीसगढ़ का आंकड़ा बता रहा हूं पूरे देश का आंकड़ा नहीं बता रहा हूं। छत्तीसगढ़ में जन-धन योजना के तहत एक करोड़ तीस लाख से ज्यादा गरीबों के बैंक अकाउंट खुले है। 37 लाख से ज्यादा शौचालयों के निर्माण से, 22 लाख गरीब परिवारों को उज्ज्वला योजना के जरिये मुफ्त कनेक्शन मिलने से गैस का, 26 लाख से ज्यादा लोगों को मुद्रा योजना के तहत बिना बैंक गारंटी कर्ज मिलने से, 60 लाख से ज्यादा गरीबों को 90 पैसे प्रतिदिन और एक रुपया महीना पर बीमा सुरक्षा कवच मिलने से, 13 लाख किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ मिलने से विकास की एक नई गाथा आज छत्तीसगढ़ की धरती पर लिखी गई है।
भाईयो और बहनों, यहां छत्तीसगढ़ में 7 लाख ऐसे घर थे जहां बिजली कनेक्शन नहीं था, प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना के तहत साल भर में ही इनमें से करीब-करीब आधे घरों में यानी साढ़े तीन लाख घरों में बिजली कनेक्शन पहुंचाने का काम पूरा कर दिया गया है। लगभग 1100 ऐसे घर हैं जहां आजादी के इतने वर्षों के बाद भी बिजली नहीं पहुंची थी वहां अब बिजली पहुंच चुकी है। ये उजाला, ये प्रकाश विकास और विश्वास को घर-घर में रोशन कर रहा है।
साथियों, हमारी सरकार देश के हर बेघर को घर देने के मिशन पर भी काम कर रही है। पिछले चार साल में देश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में एक करोड़ 15 लाख से ज्यादा घरों का निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ ही पुरानी सरकारों के दौरान अधूरे बने मकानों को भी पूरा करने का काम हमनें आगे किया है। यहां छत्तीसगढ़ में भी करीब छ: लाख घर बनवाए जा चुके हैं। अभी दो-तीन दिन पहले ही सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना और ये मैं छत्तीसगढ़ के मध्यप्रदेश के या हमारे देश के अन्य भू-भाग के मध्यमवर्गीय परिवारों को खास कहना चाहता हूं। एक बड़ा अहम फैसला लिया है जिसका मध्यमवर्गीय परिवार को बहुत बड़ा फायदा होने वाला है। सरकार ने तय किया है कि मध्यम वर्गीय के लिए बन रहे घरों पर जो ब्याज में छूट दी जाती थी। वो घर लोगों को छोटे पड़ते थे। मांग थी कि जरा एरिया बढ़ाने की परमिशन मिल जाए। दायरा बढ़ा दिया जाए। भाईयो-बहनों मुझे गर्व होता है कि जनता जर्नादन की इस इच्छा को भी हमनें पूरा कर दिया है। यानी अब ज्यादा बड़े घरों पर भी वही छूट दे दी जाएगी। सरकार का ये फैसला विशेषकर मध्यम वर्ग को बहुत बड़ी राहत देने वाला है।
आज यहां केंद्र और राज्य सरकार की ऐसी अनेक योजना जैसे प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, उजज्वला, मुद्रा और स्टेंडअप, बीमा योजना के लाभार्थियों को सर्टिफिकेट और चेक देने का मुझे अवसर मिला है। मैं सभी लाभार्थियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और भविष्य के लिए मैं मंगल कामना करता हूं।
साथियों ये मात्र योजनाएं नहीं हैं। बल्कि गरीब, आदिवासी, वंचित, शोषित का वर्तमान और भविष्य उज्ज्वल बनाने वाले संकल्प है। हमारी सरकार आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आय बढ़ाने के लिए भी विशेष तौर पर कार्य कर रही है।
दो महीने पहले ही बीजापुर से मैंने वन-धन योजना की शुरुआत की थी। इसके वन-धन विकास केंद्र खोले जा रहे हैं। ये सुनिश्चित किया गया है। कि जंगल के उत्पादों का सही दाम मार्किट में मिलना चाहिए।
इस बजट में सरकार ने 22 हजार ग्रामीण हाटों को विकसित करने का भी ऐलान किया है। शुरुआती चरण में इस वर्ष हम 5 हजार हाट विकसित कर रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि मेरे आदिवासी भाईयो को, किसानों को गांव से 5-6 किलोमीटर के दायरे में ऐसी व्यवस्था मिले जो उन्हें देश की किसी भी मंडी से टेक्नोलॉजी से कनेक्ट कर देगा।
इसके अलावा आदिवासियों के हितों को देखते हुए वन अधिकार कानून को और शक्ति से लागू किया जा रहा है। पिछले चार साल में छत्तीसगढ़ में करीब एक लाख आदिवासी, और आदिवासी समुदायों को बीस लाख एकड़ से ज्यादा जमीन का टाइटल दिया गया है।
सरकार ने बांस से जुड़े एक पुराने कानून में भी बदलाव किया है। अब खेत में उगाया गया बांस आप आसानी से बेच सकते हैं। इस फैसले ने जंगलों में रहने वाले भाई-बहनों को अतिरिक्त कमाई का एक बड़ा साधन दिया है।
भाईयो और बहनों, सरकार आदिवासियों की शिक्षा, स्वाभिमान और सम्मान को ध्यान में रखते हुए भी काम कर रही है। आदिवासी बच्चों में शिक्षा का स्तर ऊपर उठाने के लिए देश भर में एकलव्य विद्यालय खोले जा रहे हैं।
यहां छत्तीसगढ़ में भी हर वो ब्लॉक जहां पर मेरे आदिवासी भाई-बहनों की आबादी पचास प्रतिशत से अघिक है। या कम से कम 20 हजार लोग इस वर्ग के रहते हैं वहां एकलव्य मॉडल रिहायशी स्कूल को रेजिडेंशल स्कूल बनाया जाएगा।
इसके अलावा देश की स्वतंत्रता में 1857 से लेकर के आदिवासियों के योगदान के बारे में देश और दुनिया को जागृत करने का भी एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। आजादी की लड़ाई में अपनी आहुति देने वाले महान आदिवासी स्वतंत्र सेनानियों के सम्मान में, अलग-अलग राज्यों में museum बनाए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के आर्थिक और सामाजिक infrastructure को बढ़ाने वाले इन योजनाओं से बस्तर से सरगुजा तक और रायगढ़ से राजनंद गांव तक आर्थिक और सामाजिक विकास में एकरूपता भी आएगी। प्रदेश में क्षेत्रीय असमान को समाप्त करने का अभियान भी तेज गति से पूरा होगा।
और आज छत्तीसगढ़ में, मैं जब भिलाई प्लांट में जा रहा था। छत्तीसगढ़ ने जिस प्रकार से मेरा स्वागत और सम्मान किया, जैसे पूरा हिन्दुस्तान छत्तीसगढ़ की रोड पर छाया हुआ था। हिन्दुस्तान का कोई ऐसा कोना नहीं होगा जिसके आज मुझे दर्शन न हुए हों। जिनके आज मुझे आर्शीवाद न मिले हों।
मैं एक लघु भारत ये मेरा भिलाई और दुर्ग देश भर से यहां बसे हुए लोगों ने आज जो देश की एकता का माहौल मेरे सामने प्रस्तुत किया, देश की विविधता का माहौल प्रस्तुत किया। अपने-अपने राज्य की परंपरा के आधार पर आर्शीवाद दिए। मैं इन सभी लोगों का छत्तीसगढ़ का दुर्ग का और मेरी इस भिलाई का अन्त:करण पूर्वक आभार व्यक्त करता हूं।
मैंहा जब-जब छत्तीसगढ़ आथया, तब-तब यहां नवा-नवा काम होता, नवा-नवा निर्माण के काम हर पई कुछ नवा कुछ बेहतर देखे भर मिलते छत्तीसगढ़ हर एक कीर्तिमान रचे के बाद खुद नवा लक्ष्य तय कर लेते इसी कारण यहां विकट विकास होवत है।
भाईयो और बहनों, नया छत्तीसगढ़ 2022 में न्यू इंडिया का रास्ता प्रशस्त करेगा मुझे विशवास है कि आपके आर्शीवाद से, आपके साथ से न्यू इंडिया का संकल्प अवश्य सिद्ध होगा इसी कामना के साथ मैं आप सबका ह्दय से अभिनंदन करते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार को बधाई देते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं।
बहुत-बहुत धन्यवाद।