PMINDIA
The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today inaugurated various projects in Junagadh district. These included the Government Civil Hospital, a milk processing plant and some buildings of the Junagadh Agriculture University.
Addressing a public meeting on the occasion, he said that there are nine initiatives, worth over Rs 500 crore, which are either being dedicated today, or their foundation stones are being laid. He said that there is a new energy and vibrancy in India’s development journey.
He said that in Gujarat, there is a constant effort to ensure that adequate water reaches every part of the state. We are also working towards water conservation, he added.
The Prime Minister said that medical colleges and hospitals are coming up across Gujarat. He said that these are not only helping patients, but also those who want to study medicine. He mentioned the Jan Aushadhi Yojana, under which Jan Aushadhi stores are being opened, which is reducing the prices of medicines. It is important that the poor and the middle class gets access to affordable medicines, he added.
The Prime Minister said that the Government’s emphasis on cleanliness is being universally appreciated. The emphasis on cleanliness is important because a Clean India ensures people do not suffer from diseases, he added.
The Prime Minister said that the health sector requires good doctors, and paramedical staff. We also want medical instruments to be made in India, he added, saying that the sector must also keep pace with the technological advancements globally.
The Prime Minister asserted that the coming of Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana- Ayushman Bharat will transform the health sector and ensure that the poor get top class healthcare at affordable prices.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today addressed an event to mark World Biofuel Day in New Delhi. He addressed a diverse gathering, consisting of farmers, scientists, entrepreneurs, students, government officials, and legislators.
He said biofuels can provide fresh momentum to India in the 21st century. He added that it is fuel produced from crops, which can change lives of people in both villages and cities.
He said that the plan to produce ethanol from biofuel was initiated when Shri Atal Bihari Vajpayee was the Prime Minister. After 2014, a roadmap was prepared for the Ethanol Blending Programme. He said that besides providing benefit to farmers, this move helped save foreign exchange worth Rs. 4000 crore last year, and the target is to take this number to about Rs. 12,000 crore over the next four years.
The Prime Minister said that the Union Government is investing significantly in the effort to transform biomass to biofuel. There is a plan to set up 12 modern refineries. A large number of employment opportunities will be created in the process.
The Prime Minister said that schemes such as Jandhan, Vandhan and Gobardhan are helping to transform the lives of the poor, the tribal population, and the farmers. He said that the transformative potential of biofuels can be realized only through the participation of students, teachers, scientists, entrepreneurs and the people. He urged everyone present to help take the benefits of biofuel to the rural areas.
The Prime Minister also released a booklet on “National Policy on Biofuels 2018.” He also launched the “Proactive and Responsive Facilitation, by Interactive and Virtuous Environmental Single-window Hub” (PARIVESH).
यहां उपस्थित समाज के अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े हुए सभी देवियों और सज्जनों!
साथियो, अगस्त का ये महीना अपने-आप में पवित्रता और संकल्प का वातावरण लेकर आता है। ये क्रांति का देश की आजादी के लिए खुद को समर्पित करने वाले सैनानियों को याद करने का महीना होता है। स्वतंत्रता दिवस के साथ ही इस महीने में अनेक त्योहार आते हैं जो हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को समृद्ध बनाते हैं। आने वाले सभी पर्वों के लिए मैं आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।
हमारी परम्परा में, हमारे उत्सव में, हमारे त्योहारों में प्रकृति का, पर्यावरण का बहुत ही ऊंचा स्थान है। आज का यह आयोजन भी पकृति, पर्यावरण और आधुनिक परम्पराओं से जुड़ा हुआ है। मैं आप सभी को विश्व बायोफ्यूल दिवस की बधाई देता हूं।
साथियो, सवा सौ करोड़ देशवासियों के जीवन को कैसे बेहतर किया जा सके, इसके लिए सरकार अनेक कदम उठा रही है, लगातार प्रयास कर रही है, नई-नई योजनाएं बना रही है। गांव की अर्थव्यवस्था को ताकतवर बनाना, गांव के किसान की आय बढ़ाना, पेट्रोल, डीजल, गैस का विकल्प तैयार करना,और पर्यावरण को सुरक्षित करना; ये हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में है। बायोफ्यूल, इन लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभाने वाला है। बायोफ्यूल पर्यावरण और हमारी आर्थिक उन्नति के बीच तालमेल बिठाने में बड़ा सहायक बनने की शक्ति रखता है।
साथियो, बायोफ्यूल सिर्फ विज्ञान नहीं है बल्कि वो मंत्र है जो 21वीं सदी के भारत को, और न सिर्फ भारत को; पूरे विश्व की मानव जाति को नई ऊर्जा देने वाला है। बायोफ्यूल, यानी फसलों से निकला ईंधन, फसल के अवशेष से निकला ईंधन, कूड़े कचरे से निकला ईंधन। ये भारत के गांव से लेकर शहर तक के जीवन को बदलने वाला है, बेहतर बनाने वाला है। और अभी जो फिल्म दिखाई गई, उसमें एक पुरानी कहावत को भी याद किया गया- आम के आम और गुठली के दाम। बहुत पुरानी कहावत है, उसका एक प्रकार से ये आधुनिक रूप है।
बायोफ्यूल का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किसानों की आमदनी को बढ़ाएगा, रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, देश का धन भी बचाएगा और पर्यावरण के लिए भी वरदान साबित होगा। देश के लिए ये हमारे उस व्यापक vision का हिस्सा है, जहां स्वच्छता, स्वास्थ्य और गांव, गरीब किसान की समृद्धि का रास्ता और मजबूत होने वाला है। इसके अलावा ये हमारे Urban development के आधुनिक मॉडल से भी जुड़ा हुआ है। शहरों में clean energy के तमाम प्रयासों के बीच Biofuel Air Pollution को कम करने में बहुत मददगार है।
साथियो, यहां पर बहुत बड़ी संख्या में हमारे किसान भाई-बहन आज आए हुए हैं और किसान का विज्ञान भवन में आना अपने-आप में एक मैसेज है। देश के अधिकतर हिस्सों में बारिश की स्थिति अलग-अलग है, कहीं बाढ़ है तो कहीं बारिश का इंतजार है। हम लगातार उन खबरों को देख रहे हैं। कहीं संतोषजनक बारिश का एक आनंद भी होता है तो कहीं बारिश के कारण परेशानियों से चिंता भी होती है।
खास करके मेरे किसान भाइयो, बहनों- अब तो धान समेत खरीफ की तमाम फसलों की बुवाई मैं समझता हूं करीब-करीब देश के हर कोने में पूरी हो चुकी है और आपकी जानकारी में है कि सरकार ने 14 खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत का डेढ़ गुना तय किया है। और जब कृषि की बात आती है तो स्वामीनाथन जी का नाम स्वाभाविक रूप से हमारे यहां लिया जाता है। और मुझे खुशी है कि अभी दो-तीन दिन पहले श्रीमान स्वामीनाथन जी ने एक आर्टिकल के द्वारा कृषि क्षेत्र में किस प्रकार से बदलाव आ रहा है, सरकार कैसे initiative ले रही है, सरकार की नीतियां किस प्रकार से किसानों की जिंदगी में स्थायी रूप से बदलाव ला रही हैं, बड़ा विस्तार से हो रहा है और वो एक authority है। बहुत विस्तार से उन्होंने भारत सरकार की किसानों से संबंधित जो नीतियां हैं, योजनाएं है, प्रयास हैं, उसकी भरपूर सराहना की है।
और आपने भी देखा, फिल्म में भी देखा। खरीफ के मौसम में जो और फसलें होती हैं उसके साथ-साथ गन्ने के लिए भी हमने एमएसपी तय किया है कि किसानों को लागत के ऊपर लगभग 80 प्रतिशत लाभ मिल सके। इस सीजन के गन्ने का लाभकारी मूल्य 20 रुपये बढ़ाकर 275 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इस बढ़ी हुई कीमत से देश के करोड़ों किसानों को सीधा-सीधा फायदा होने वाला है। इसके अतिरिक्त गन्ने से Ethanol बनाने के लिए सरकार जो प्रयास कर रही है, उनका भी लाभ किसानों को मिलना सुनिश्चित है।
साथियो, गन्ने से Ethanol बनाने की योजना पर जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, उस समय काम का प्रारंभ हुआ था। लेकिन बीते एक दशक में, अब जैसा उस सरकार का हाल था, हर योजनाओं का भी वैसा ही हाल होता था; इस प्रयास को भी अति-गंभीरता से नहीं लिया गया। जब 2014 में फिर से केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के सरकार बनी तो बकायदा एक रोडमैप तैयार किया गया। Ethanol blending program शुरू किया गया। आज देश के 25 राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशों में ये प्रोग्राम सुचारू रूप से चल रहा है। बीते चार वर्षों में Ethanol का रिकॉर्ड उत्पादन किया गया है और आने वाले चार वर्षों में लगभग 450 करोड़ Ethanol का उत्पादन करने की दिशा में आज देश आगे बढ़ रहा है।
साथियो, इथेनॉल ने न सिर्फ किसानों को लाभ पहुंचाया है बल्कि देश का पैसा भी बचाया है। इथेनॉल को पेट्रोल के साथ मिक्स करने से पिछले वर्ष देश को लगभग चार हजार करोड़ रुपये के बराबर की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले चार वर्ष में ये बचत करीब-करीब 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचे। इतना ही नहीं, अगले चार वर्ष में गन्ने से इथेनॉल बनाने भर से ही लगभग 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक जुटने का अनुमान है। इस बचत से और गन्ने के लिए मिले विकल्प से गन्ना किसानों को जो बार-बार मुसीबतों को झेलना पड़ता है उसका एक स्थायी समाधान का रास्ता निकलेगा। इथेनॉल से पैसे की बचत तो हो ही रही है, इसके अलावा पेट्रोल से जो हानिकारक गैस निकलती है, उनमें भी कमी आने वाली है।
साथियो, बायोफ्यूल से जुड़े लक्ष्य तय किए जा रहे हैं, ये यानी कोई एक wishful thinking हो, बड़ी-बड़ी बातें होती हों, ऐसा नहीं है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नीतियां बनाई जा रही हैं, ठोस रणनीति बनाई जा रही है, responsibility fix की जा रही है, accountability तय की जा रही है, regular monitoring हो रहा है, टारगेट को पाने का समयबद्ध आयोजन हो रहा है। इथेनॉल समेत बायोफ्यूल के तमाम माध्यमों को विकसित करने के लिए सरकार ने National policy बनाई है। सरकार का ये प्रयास है कि 2022 तक 10 प्रतिशत और 2030 तक यानी दोगुना- 20 प्रतिशत इथेनॉल, पेट्रोल के साथ मिक्स करने की क्षमता विकसित की जा सके।
बायोफ्यूल से सिर्फ गन्ना किसानों को तो एक विकल्प मिलेगा ही, इससे देश के हर किसान को फायदा होने वाला है। हमारे गेहूं, चावल, मक्का, आलू, सब्जियां, हम सब जानते हैं- अक्सर कभी मौसम की वजह से या भंडारण के अभाव के कारण खराब हो जाती हैं, सड़ जाती हैं, बरबाद हो जाती हैं। और स्वाभाविक है किसान इसको संभाल कर क्या करेगा, वो फैंक देता है। लेकिन अब हमने तय किया है कि इसका इस्तेमाल भी इथेनॉल बनाने के लिए किया जाए।
एक और समस्या किसानों के सामने है कि प्राकृतिक कारणों से फसल में कुछ कमी रह जाती है- जैसे दाग लगना, साइज छोटा होना; ऐसे अनेक कारण होते हैं, और जिसकी वजह से उनकी फसल बिक नहीं सकती है। जो ग्राहक है वो उसको पसंद नहीं करता, नकार देता है। जो दुकानदार है, वो भी नहीं लेता है और इसके कारण मौसम की आधी-अधूरी मार भी किसान को बहुत नुकसान उठाने के लिए मजबूर करती है। इथेनॉल बनाने के लिए ऐसा सारा भी अनाज होता है- छोटा हो, टूटा-फूटा हो, दाना कम हो, रंग-रूप ठीक न हो, ये सारी चीजें इथेनॉल बनाने के लिए काम आती हैं। और इसमें अगर हम योजनाबद्ध नीति से जब पूर्णता को प्राप्त करेंगे तो आप विश्वास कर सकते हैं ऐसे में किसानों की फसल का एक भी दाना व्यर्थ नहीं जाएगा । आप कल्पना कर सकते हैं हमारे किसानों की जिंदगी में कितनी बड़ी ताकत आएगी।
साथियो, नेशनल पॉलिसी में सिर्फ फसल से नहीं, बल्कि अब घर से निकलने वाले कूड़े, खेत से निकलने वाले कचरे और पशुओं के गोबर को ईंधन में बदलने के लिए भी एक राष्ट्रव्यापी योजना बनाई जा रही है। आने वाले समय में केले के छिलके, जो न सिर्फ किसान बल्कि हर घर में कचरे के रूप में आसानी से मिल जाते हैं, वो भी ईंधन के रूप में काम आने वाला है।
इसके अलावा घास और बांस से भी इथेनॉल बनाया जा रहा है। बांस विशेष तौर पर उत्तर-पूर्व और दूसरे आदिवासी इलाके में अच्छी मात्रा में पैदा होता है। ऐसे में वहां की अर्थव्यवस्था के लिए ये महत्वपूर्ण कदम होगा, जो बांस की खेती करने वालों को फायदा करेगा।
साथियो, पराली भी किसानों की बहुत बड़ी समस्या है। और पता नहीं नासमझी के कारण, समय के अभाव से, कुछ भी कहो- ये पराली अपने-आप में एक बहुत बड़ी मूल्यवान प्राकृतिक सौगात है। लेकिन अज्ञानवश या आदतों के कारण हम ऐसी मूल्यवान जड़ी-बूटी को जला देते हैं। ये जमीन को नई जिंदगी देने वाली मूल्यवान जड़ी-बूटी हम अपनी आंखों के सामने अपने हाथों से जला देते हैं। और मैं तो देख रहा हूं- पंजाब हो, हरियाणा हो- यहां के किसान, ये एक नित्य कार्यक्रम होता है। और ये एक बहुत बड़ी चुनौती है।
लेकिन मेरे किसान भाइयों को मैं बार-बार समझाता हूं कि इस पराली को जलाने के कारण जमीन की उपजाऊ शक्ति पर तो असर पड़ता ही है, साथ में इससे निकले धुंए के कारण पूरे पर्यावरण का दुष्प्रभाव पैदा होता है। और इसलिए अब पराली से इथेनॉल बनाने की संभावनाओं पर बहुत व्यापक रूप से काम किया जा रहा है। यानि अब पराली भी आपको एक इन्कम का स्रोत बन सकती है। और इससे प्रदूषण की भी राहत मिलेगी और किसानों की अतिरिक्त आय भी होगी।
साथियो, biomass को बायोफ्यूल में बदलने के लिए सरकार बहुत बड़े स्तर पर निवेश कर रही है, investment कर रही है। देशभर में दस हजार करोड़ रुपये की लागत से 12 आधुनिक रिफाइनरी बनाने की योजना है। एक रिफाइनरी से लगभग 1000-1500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। यानि रिफाइनरी के संचालन से लेकर सप्लाई चेन तक, लगभग डेढ़ लाख नौजवानों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। इसके अलावा गोबर से ईंधन बनाने की योजना भी प्रगति पर है।
पिछले बजट में आपने देखा होगा, हमने योजना घोषित की- गोबर-धन। इस गोबर-धन योजना के तहत पूरे देश के हर जिले में एक बायोगैस प्लांट लगाया जा रहा है। अभी seven hundred plants बन रहे हैं लेकिन आगे इसको और विस्तार दिया जाएगा। देशभर के किसानों, self help groups, इन सबको इसमें जोड़ा जाएगा।
साथियो, आज गोबर-धन, वन-धन, जन-धन, इन योजनाओं से गरीबों, किसानों, आदिवासियों के जीवन में एक नई आर्थिक संभावनाएं, आर्थिक सामर्थ्य, एक नया बदलाव सुनिश्चित हो रहा है। न सिर्फ आपकी फसल, बल्कि पशु के गोबर का, खेत के अवशेष का, घर से निकले कूड़े-कचरे का, हर चीज का उचित उपयोग हो, इस दिशा में काम हो रहा है।
इसके अलावा जो जंगल में उगे पौधे और फल होते हैं, उनसे होने वाली आमदनी अलग। जब पतझड़ के मौसम में आप, अगर जंगलों में जाने की आदत होगी तो आपने देखा होगा- एक-एक, दो-दो फीट पत्ते गिर करके पड़े होते हैं1 ये भी अपने-आपमें बहुत बड़ी कमाई का साधन बन सकता है। ये waste to wealth का अभियान है ही, साथ में इससे स्वच्छ भारत अभियान को भी गति मिल रही है। क्योंकि यही waste गंदगी का भी बड़ा कारण है।
साथियो, इस अभियान में हमारे वैज्ञानिक बंधुओं और Start Up के जरिए तकनीक को सुलभ कराने वाले युवाओं का एक महत्वपूर्ण योगदान है। मैं आज इस अवसर पर आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं। आप बायोफ्यूल से जुड़ी तकनीक को बेहतर बनाने में निरंतर प्रयास कर रहे हैं लेकिन अभी भी इस क्षेत्र में बहुत कुछ करने की संभावना है। जैसे अनाज के अतिरिक्त ऐसे उत्पादों पर ध्यान दिया जाना जरूरी है जिससे अधिक गुणवत्ता वाला और अधिक मात्रा में बायोफ्यूल पैदा किया जा सके। इसके लिए Start Up से जुड़े उद्यमियों, टेक्नोलॉजी से जुड़े लोगों को एक साथ मिल करके काम करना होगा।
मैं समझता हूं कि हमारे इंजीनियरिंग कॉलेजों, आईटीआई पॉलिटेक्नीक के syllabus में बायोफ्यूल से जुड़े कोर्स को और प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके अलावा देशभर के KVK’s कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से बायोफ्यूल के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी किसानों तक पहुंचाई जानी चाहिए। देशभर में लगने वाले कृषि मेलों में भी बायोफ्यूल को मुख्य थीम बनाकर किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।
साथियो, शहरों के साफ-सफाई से जुड़ी ाभासबसे बड़ी समस्या यानि solid waste management- सीवर के पानी, उद्योग से निकला पानी, ऐसी तमाम चीजों से ऊर्जा पैदा करने के लिए नई और बेहतर टेक्नोलॉजी लाने का प्रयास सरकार कर रही है। और मैंने एक बार अख़बार में पढ़ा था, किसी छोटे से नगर में नाले के पास कोई चाय का ठेला ले करके खड़ा रहता था, चाय बना करके बेचता था, कोई चाय बनाने की बात आती है तो मेरा ध्यान जरा जल्दी जाता है, और वहीं पर एक नाली-गंदी नाली जाती थी। अब इसके दिमाग में कोई विचार आया। उसने उस नाली में- स्वाभाविक है जहां गंदी नाली होती है वहां गैस भी निकलता है- तो काफी दुर्गन्ध आती थी। उसने एक छोटे से बर्तन को उलटा करके उसमें छेद करके पाइप डाल दिया और जो गटर से गैस निकलता था वो पाईप लाइन से उसके अपने चाय के ठेले में ले लिया। और वो चाय बनाने के लिए उसी गैस का उपयोग कर-करके चाय बनाता था। सिम्पल सी टेक्नोलॉजी है। यानि कैसे उपयोग होता है, वैसे चाय वालों का ये काम जरा ज्यादा रहता है।
एक बार मैं जब गुजरात में था तो मैंने देखा कि, हमारा convey जा रहा था और आगे स्कूटर पर बड़ा जो ट्रेक्टर का ट्यूब होता है, पूरा अंदर भरा हुआ है, वो ले करके जा रहा था। कल्पना कर सकते हैं स्कूटर पर इतना बड़ा ट्रेक्टर का ट्यूब कोई लेकर जा रहा है तो पीछे आने वाले व्हीकल को डर लगता है, कहीं टकरा न जाए। मैं भी हैरान था कि ऐसे कैसे ले जा रहा है। कोई भी व्यक्ति समझदार तो यही करेगा ट्यूब खाली कर देगा और चला जाएगा। आगे जा करके हवा भर देगा। वो ले जा रहा था, मैंने कहा जरा रोकिए इसको।
हमने गाड़ी रोकी और स्कूटर वाले को पूछा भाई क्या है ये, क्या कर रहे हो, कहीं गिर जाओगे, चोट लग जाएगी, मर जाओगे। नहीं- बोला खेत जा रहा हूं। मैंने कहा ये क्यों ले जा रहे हो। तो बोला मेरे घर में जो घर के किचन का कूड़ा-कचरा निकलता है वो, और मेरे पास दो पशु हैं उसका जो गोबर निकलता है तो मैंने अपने घर में ही एक छोटा-सा गैस का प्लांट बनाया हुआ है। तो मैं उस गैस को इस ट्यूब में भरता हूं और ट्यूब ले करके खेत जाता हूं। और खेत में जा करके उससे मेरा पानी का पम्प चलाता हूं। आप कल्पना कीजिए हमारे देश का किसान। यानि इतना सामर्थ्य पड़ा हुआ है। आज भी हमारे किसान, गांव के लोग कुछ न कुछ नए प्रयोग करते रहते हैं।
जो Start Up की दुनिया के लोग हैं, वे अगर उसपर ध्यान दें तो शायद जो कभी बड़े-बड़े collages से नहीं मिलता है वो खेत में किसान की सोच में से मिल सकता है। और इन सबको समेटकर हम चीजों को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
आज बी-3 की एक योजना, एक व्यापक योजना पर काम किया जा रहा है। बी-3 यानि बायोमास, बायोफ्यूल से और बायोएनर्जी की तरफ देश बढ़ रहा है। इथेनॉल के अतिरिक्त आज कचरे से सीएनजी यानि बायो-सीएनजी बनाने का भी तेज गति से काम चल रहा है। देश की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था में सीएनजी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि पेट्रोल-डीजल से होने वाले प्रदूषण से बचा जा सके। फिलहाल हम सीएनजी विदेश से आयात करते हैं। अब बायो-सीएनजी से विदेशों पर निर्भरता को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए अभी तक देश भर में पौने दो से अधिक प्लांट लगाए जा चुके हैं। वो दिन दूर नहीं जब शहरों के साथ-साथ गांवों में भी सीएनजी से गाड़ियां चलने लगेंगी।
साथियो, हमारे आसपास आज प्लास्टिक का सामान, रबर के टायर, ऐसी तमाम चीजें जो उपयोग के बाद एक अपने-आप में बहुत बड़ी समस्या बन जाती हैं; इनका इस्तेमाल सड़क बनाने में किया जा रहा है। और वहीं जो दूसरा कचरा- जो घर से निकला है- उसका भी सड़कों के निर्माण में कैसे उपयोग हो, इसकी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
मैंने अभी एक African countries की, गरीब लोगों का एक छोटा सा काम सोशल मीडिया में देखा। वो गांव में से सारे प्लास्टिक इकट्ठा कर-करके नदी के तट पर ले जाते हैं और लकड़ी-वकड़ी ला करके उस प्लास्टिक को जला करके पिघला लेते हैं। और वहीं नदी से बालू ले करके मिक्स करते हैं और उसमें से ब्लॉक बना देते हैं और वो ब्लॉक बड़ीमात्रा में बेचते हैं वो। Women self help group की महिलाएं कर रही हैं ये काम। कचरे की सफाई भी कर रही हैं और उसका नया प्रॉडक्ट करके बाजार में बेच रही हैं।
विकास और पर्यावरण के बीच एक संतुलन बनाकर आगे बढ़ने की नीति पर सरकार काम कर रही है। पर्यावरण के साथ संतुलन की जब हम बात करते हैं तब बिजली का एक महत्वपूर्ण रोल है। बिजली कैसे पैदा होती है और कैसे इस्तेमाल होती है, इसका पर्यावरण पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
जब बिजली पैदा करने की बात आती है तो आज कोयले और गैस जैसे पारम्परिक तरीकों के साथ सोलार एनर्जी समेत तमाम दूसरे माध्यमों से बिजली बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। International Solar Alliance के जरिए तो हम न सिर्फ भारत में बल्कि पूरे विश्व में सौर ऊर्जा का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।
आज खेती में सोलर पंप से लेकर उद्योग धंधा, दफ्तरों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल पर काफी प्रगति हो रही है। इसके अलावा देश की गलियों, घरों और दफ्तरों में एलईडी बल्ब की रोशनी सुनिश्चित करने से बिजली की बचत हो रही है। और मुझे प्रसन्नता है कि अब देश के रेलवे स्टेशन एलईडी बल्ब से जगमगाने लगे हैं। सारा काम उन्होंने पूरा कर दिया। अब लक्ष्य ये है कि आने वाले दिनों में रेलवे की हर बिल्डिंग और रेलवे के हर र्क्वाटर्स में भी शत-प्रतिशत एलईडी बल्ब लगाए जाएं। एलईडी लाइट्स को बढ़ावा दे रहे हैं, पर्यावरण की चिंता- स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत के मिशन से जुड़ी हुई है।
धुंआमुक्त रसोई भी इसी व्यापक vision का हिस्सा है। आज मैं इस मंच से देश के उन पांच करोड़ गरीब परिवारों को बधाई देता हूं, उन माताओं-बहनों को बधाई देता हूं, जिनको धुंए से मुक्ति मिली है।
हिन्दुस्तान में इतना बड़ा काम इतने समय में हो सकता है ये अपने-आप में अजूबा है। हमारे देश में सवा सौ करोड़ जनसंख्या है और करीब-करीब 25-26 करोड़ परिवार हैं। इन 25-26 करोड़ परिवार में 5 करोड़ परिवारों को गैस का चूल्हा इतने कम समय में पहुंचाना, ये अपने-आप में, आप हिसाब लगा सकते हैं कि तेज गति से काम होता है तो कितना परिणाम आता है।
साथियो, आज दिनभर किसान भी होंगे, टैक्नीशियन भी होंगे, गर्वनमेंट के अफसर भी होंगे, आप सब मिल करके बायोफ्यूल को लेकर चर्चा करने वाले हैं। उससे जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने वाले हैं। किसान की जो रोजमर्रा की practical problems हैं, उसकी चर्चा करने वाले हैं। और मुझे विश्वास है कि इसी सवा सौ करोड़ देशवासियों की ऊर्जा जरूरतों और खेती को लाभकारी बनाने के लिए अनेक नए सुझावस आएंगे, अनेक नए रास्ते बनेंगे।
बायोफ्यूल से बदलाव की क्रांति घर-घर सिर्फ सरकार के प्रयासों से नहीं पहुंच पाएगी, बल्कि इसमें हमने हमारे छात्रों को, हमारे शिक्षकों को, हमारे वैज्ञानिकों को, हमारे उद्यमियों को, यानि एक प्रकार से जन-भागीदारी से जन-आंदोलन का रूप हमको देना पड़ेगा।
मेरा यहां मौजूद जो राज्यों के प्रतिनिधि आए हैं, उनसे भी आग्रह है कि देश के गांव-गांव तक बायोफ्यूल के लाभ पहुंचाने के लिए अपने स्तर पर भी अतिरिक्त प्रयास करें। और मुझे विश्वास है कि बायोफ्यूल की दिशा में भारत ने जो initiative लिए हैं और विश्व आज Biofuel day मना रहा है, तब भारत global warming से चिंतित विश्व को एक विश्वास देने का सामर्थ्य रखता है। भारत के इन कदमों की आज पूरे विश्व में सराहना हो रही है।
भारत की नीतियों और योजनाओं को विश्व बड़े गौर से देख रहा है और उसमें आज का ये प्रयास नई ऊर्जा भरेगा, दिशा को और अधिक स्पष्ट करेगा और गति तेज करेगा। इसी विश्वास के साथ इस सफल योजना के लिए मैं आप सबको हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।
धन्यवाद।
The Prime Minister, Shri Narendra Modi, will attend an event to mark World Biofuel Day, at Vigyan Bhawan in New Delhi on August 10, 2018.
He will address a diverse gathering, consisting of farmers, scientists, entrepreneurs, students, government officials, and legislators.
Biofuels can help reduce import dependency on crude oil. They can contribute to a cleaner environment, generate additional income for farmers, and generate employment in rural areas. Therefore, biofuels have synergies with various Government initiatives, including enhancing farmers’ incomes, and Swachh Bharat.
As a result of the efforts of the Union Government, ethanol blending in petrol has increased from 38 crore litres in the ethanol supply year 2013-14, to an estimated 141 crore litres in the ethanol supply year 2017-18. The Government also approved the National Policy on Biofuels in June 2018.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi, on Tuesday reviewed progress of key infrastructure sectors of power, renewable energy, petroleum and natural gas, coal, and mining. The review meeting, which lasted for over two hours, was attended by top officials from infrastructure-related Ministries, NITI Aayog, and PMO.
In course of the presentation made by CEO NITI Aayog, Shri Amitabh Kant, it was noted that the installed power generation capacity in India has risen to 344 GigaWatts. India’s energy deficit, which stood at over 4 per cent in 2014, has shrunk to less than 1 per cent in 2018. Significant capacity additions have been made in transmission lines, transformer capacity, and inter-regional transmission. India now ranks 26th in the World Bank’s “Ease of Getting Electricity” Index, up from 99th in 2014. Progress in household electrification under the SAUBHAGYA initiative, was reviewed. Discussions also focused on last mile connectivity and distribution, in both urban and rural areas. In the new and renewable energy sector, cumulative installed capacity has nearly doubled, from 35.5 GigaWatts in 2013-14, to about 70 GigaWatts in 2017-18. In solar energy, installed capacity has increased from 2.6 GigaWatts to 22 GigaWatts in the same period. Officials expressed confidence that India is on track to comfortably achieve the Prime Minister’s target of 175 GigaWatts renewable energy capacity by 2022.
The Prime Minister urged the officials to work towards ensuring that the benefits from increase in solar energy capacity, reach the farmers, through appropriate interventions such as solar pumps, and user-friendly solar cooking solutions. In the petroleum and natural gas sector, it was noted that targets set under the Pradhan Mantri Ujjwala Yojana will be comfortably achieved in the current financial year. In the coal sector, discussions focused on further augmentation of production capacity.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi, on Thursday reviewed progress of key infrastructure sectors of roads, PMGSY, rural housing, urban housing, railways, airports and ports. The review meeting, which lasted for nearly two hours, was attended by top officials from infrastructure-related Ministries, NITI Aayog, and PMO.
In course of the presentation made by CEO NITI Aayog, Shri Amitabh Kant, it was noted that the pace of road construction has picked up significantly. The average road length constructed per day in FY 17-18 was 26.93 km, as compared to 11.67 km in FY 13-14.
The Prime Minister was informed about progress made in digitisation of the transport sector. Over 24 lakh RFID tags have been issued so far, and over 22 percent of toll revenue now comes from electronic toll collection. The “Sukhad Yatra” App, which provides information about road conditions, and facilitates lodging of complaints, has seen over one lakh downloads so far. The Prime Minister called for faster progress in electronic toll collection.
Under the Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana, rural roads have now connected 88 percent of all eligible habitations. Over 44,000 villages have been connected in the period from 2014 to 2018, as compared to about 35,000 in the preceding four year period. The “MeriSadak” App has been launched in 10 regional languages, and has seen 9.76 lakh downloads so far. GIS Mapping of roads is underway, and 20 States have so far been hosted on the Geospatial Rural Road Information System (GRRIS). Green technologies, and non-conventional materials such as waste plastic and fly ash, are being used in rural road construction.
In the railways sector, there has been significant addition in capacity and rolling stock. Additions in “new lines, doubling and gauge conversion” between 2014 and 2018, was to the extent of 9528 kilometres, which is 56 percent higher than the preceding four year period.
Similarly, in the aviation sector, passenger traffic has grown by over 62 percent in the four year period between 2014 and 2018, as against 18 percent in the preceding four year period. Under the UDAN scheme, 27 airports are now operational in tier 2 and tier 3 cities.
In the ports sector, traffic volume in major ports increased by 17 percent in the period between 2014 and 2018.
In the rural housing sector, the Prime Minister was informed that over one crore houses have been constructed in the period from 2014 to 2018, as compared to about 25 lakh houses in the preceding four year period. This has boosted employment in the housing sector and related construction industries. According to an independent study, the average construction completion time has dropped sharply, from 314 days in 2015-16, to 114 days in 2017-18. Stress is also being given to disaster resilience, and low cost housing design typologies.
In urban housing, emphasis is being laid on new construction technologies. 54 lakh houses have been sanctioned under Pradhan MantriAwaas Yojana (Urban), since the inception of the scheme.
सबसे पहले आप सभी को, हरियाणा और दिल्ली के लोगों को बहादुरगढ़-मुंडका मेट्रो लाइन शुरू होने पर बहुत-बहुत बधाई।
हरियाणा का बहादुरगढ़ आज दिल्ली मेट्रो से जुड़ गया है। गुरुग्राम और फरीदाबाद के बाद अब बहादुरगढ़ हरियाणा का तीसरा बड़ा क्षेत्र है जो दिल्ली मेट्रो से कनेक्ट हुआ है। आज के इस लोकार्पण के बाद, हरियाणा में मेट्रो नेटवर्क की लंबाई 26 किलोमीटर तक पहुंच गई है।
साथियों, दिल्ली में चल रही मेट्रो ने किस तरह लोगों का जीवन बदला है, उसका गवाह हर वो व्यक्ति है, जिसने कभी न कभी इसमें सफर किया है। मैं भी कई बार दिल्ली मेट्रो में सफर कर चुका हूं। आज से ये अनुभव बहादुरगढ़-मुंडका लाइन पर चलने वाले लोगों को भी मिलेगा।
विशेषकर बहादुरगढ़ में तेजी के साथ विकसित होते उद्योगों की वजह से काफी अरसे से मेट्रो का इंतजार हो रहा था। बहादुरगढ़ में अनेक कॉलेज, इंस्टीट्यूट्स और यूनिवर्सिटीज़ भी हैं। दिल्ली से हर रोज़ अनेक छात्र-छात्राएं आवाजाही करते हैं। अब इस क्षेत्र के लाखों उद्यमियों को, विद्यार्थियों को, अलग-अलग प्रोफेशन के लोगों को, दिल्ली आने-जाने में और आसानी होगी।
ऐसे तो बहादुरगढ़ को Gateway of Haryana कहा जाता है लेकिन ये मेट्रो लाइन यहां Development का Gateway बनकर पहुंची है।
मेट्रो की वजह से लोगों की सहूलियत बढ़ेगी, नई कॉलोनियां बनेंगी, उद्योगों का विस्तार होगा, तो रोजगार के भी नए अवसर बनेंगे। कनेक्टिविटी का विकास से जो नाता है, इस मेट्रो नेटवर्क को देखकर समझा जा सकता है।
अभी दिल्ली-NCR में करीब 280 किलोमीटर मेट्रो लाइन ऑपरेशनल है। जिस तेजी से इसका विस्तार हो रहा है, बहुत जल्द शंघाई, बीजिंग, लंदन और न्यूयॉर्क के बाद, दुनिया के पांचवे सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्क के तौर पर दिल्ली मेट्रो की पहचान होगी। साथियों, जो सपना दिल्ली में साकार हुआ है, अटल इरादों का जो परिणाम आज दिल्ली-NCR की जनता देख रही है, वैसा ही प्रयास पूरे देश में किया जा रहा है।
मेट्रो से जुड़े कार्यों में एक बहुत बड़ी कमी ये थी कि हर शहर में पहले अपने ही तरीके से काम किया जा रहा था।
मेट्रो और उससे जुड़े निर्माण कार्यों के लिए कोई नीति नहीं थी, इसलिए कोई मानक, कोई स्टैंडर्ड भी नहीं तय था। नेताओं की मर्जी के मुताबिक स्टेशन और अलग-अलग विभागों के हितों के मुताबिक फैसले हो रहे थे।
अब 2017 में देश की पहली मेट्रो पॉलिसी के बनाने के बाद इन सब चीजों पर ध्यान दिया जा रहा है। लोगों को एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन और फिर अपने घर या दफ्तर तक पहुंचने में परेशानी ना हो इसके लिए शहरों के पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम का इंटीग्रेशन किया जा रहा है।
अब देश में कहीं भी मेट्रो बने, लेकिन एक तय स्टैंडर्ड पर काम करेगी।साथियों, 21वीं सदी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शहरों में स्मार्ट, सुलभ, सस्ता और साफ-सुथरा पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम देना इस सरकार की प्रतिबद्धता है।
आज देश के 12 शहरों में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। देश के दूसरे शहरों को भी मेट्रो से जोड़ने के लिए राज्य सरकारों को प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही मेट्रो के डिब्बे भी देश में तैयार करने का काम किया जा रहा है।
गुजरात के वड़ोदरा और तमिलनाडु के चेन्नई में आधुनिक प्लांट बनाए गए हैं , मेट्रो प्रोजेक्ट्स में Make In India को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने Procurement की पॉलिसी को बदला है और लगभग 75 प्रतिशत भारत में बना सामान लगाना अनिवार्य किया गया है।
साथियों, मेट्रो की व्यवस्था हमारे अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और सहयोग का भी एक बेहतरीन उदाहरण है। पहले कई देशों ने मेट्रो के लिए हमारी मदद की, अब भारत दुनिया के कई देशों को मेट्रो के कोच की सप्लाई करने के लिए तैयार हो रहा है।
ना सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय संबंध बल्कि Co-operative Federalism कैसे काम करता है उसका भी ये प्रमाण है। आज देश के जिन-जिन राज्यों में भी मेट्रो बन रही है वो केंद्र और राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी से बन रही है।
साथियों,
दिल्ली-NCR की ही बात करें तो आज जितना मेट्रो नेटवर्क विकसित हुआ है उसने हर रोज़ लगभग 6 लाख गाड़ियां की जरूरत को खत्म किया है।
मेट्रो ने लोगों का समय बचाया है, पैसा बचाया है और प्रदूषण भी कम करने का काम किया है। मेट्रो के साथ ही सरकार दिल्ली- NCR में ट्रांसपोर्ट की पूरी व्यवस्था को ही आधुनिक और लोगों की जरूरत के मुताबिक बनाने का काम कर रही है।
दिल्ली को हाई स्पीड रेल के माध्यम से सोनीपत, अलवर और मेरठ से जोड़ने के लिए रीजनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर भी काम चल रहा है।
इसके अलावा दिल्ली के चारों ओर Expressway का एक घेरा बनाने का काम भी तेजी से किया जा रहा है। उस काम को पूरा करने के लिए भी लोग कोशिश कर रहे हैं|
इसके पहले चरण यानि Eastern Peripheral Express way का कुछ दिन पहले ही मैंने लोकार्पण भी किया था। हरियाणा की तरफ से Western Peripheral Express way पर भी काम प्रगति पर है। पेरिफेरल एक्सप्रेसवे ने दिल्ली से होकर गुजरने वाली छोटी-बड़ी गाड़ियों की संख्या को
25 से 30 प्रतिशत तक कम किया है।
इससे ट्रैफिक पर तो प्रभाव पड़ा ही है प्रदूषण की एक बड़ी वजह भी कम हुई है। भाइयों और बहनों,
New India के लिए New और Smart Infrastructure इस सरकार का कमिटमेंट है।
बीते चार वर्षों में रोड, रेलवे, एयरवे, वॉटरवे और बिजली से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे अधिक निवेश किया गया है। करगिल से लेकर कन्याकुमारी तक कच्छ से लेकर कामाख्या तक कनेक्टिविटी पर बल दिया जा रहा है। सबसे लंबी सुरंगें हों या फिर सबसे पड़े पुल, एक के बाद एक सारे प्रोजेक्ट समय-सीमा में पूरे किए जा रहे हैं। भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत देश में 35 हजार किलोमीटर लंबे आधुनिक हाईवेज का जाल बिछाने का काम शुरू किया गया है।
आने वाले समय में एक तरफ जहां सौ से ज्यादा वॉटरवेज, बुलेट ट्रेन, देश के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव लायेंगे वहीं छोटे-छोटे शहरों में विकसित होते एयरपोर्ट,लोगों का हौसला आसमान तक पहुंचाने का काम करेंगे। ये आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर हमारे शहरों को, 21वीं सदी में आर्थिक विकास का केंद्र बिंदु बनाने में मदद करेंगे। देश के अलग-अलग इलाकों में जितना ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, संपर्क सुगम होगा, जितना ज्यादा ट्रांसपोर्ट के अलग-अलग माध्यम एक दूसरे को सपोर्ट करेंगे, उतना ही लोगों का जीवन आसान बनेगा, व्यापार के नए अवसर बनेंगे, रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
साथियों,
सरकार के इन प्रयासों में सामान्य जन, आप सभी की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं होता है, यह बहुत आवश्यक है।
आइए, New India के लिए बन रहे इस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मिलकर और अधिक प्रयास करें।
एक बार फिर हरियाणा और बहादुरगढ़ की जनता को बहुत-बहुत बधाई के साथ इसका लाभ हमारे नागरिक उठायें, निजी वाहनों से मुक्ति पायें|
मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
बहुत-बहुत धन्यवाद !
The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today inaugurated the Bahadurgarh-Mundka Metro Line via video conference.
Congratulating the people of Haryana and Delhi on the commencement of this new section of the Delhi Metro, he said he was happy to see Bahadurgarh connected with the Delhi Metro.
This is the third place in Haryana, after Gurugram and Faridabad to be connected like this.
The Prime Minister spoke of how the Metro in Delhi has positively impacted the lives of citizens. Noting that Bahadurgarh is witnessing tremendous economic growth, the Prime Minister said that there are several educational centres there, and students from there even travel to Delhi. The Metro will make this more convenient, he added.
Shri Narendra Modi said that there is a direct link between connectivity and development. He said the Metro will mean more employment opportunities for the people in the area.
The Prime Minister said that the Union Government has brought out a policy relating to Metros, to bring uniformity and standardization in metro rail networks across the country. He said the objective is to build convenient, comfortable and affordable urban transport systems in our cities. He said that the aim is also to boost “Make in India” by making metro rail coaches in India itself.
The Prime Minister said that the process of making Metro systems is also linked to cooperative federalism. Wherever Metros are being built in India, the Centre and the respective State Governments are working together, he added.
Noting that New India requires new and smart infrastructure, the Prime Minister said that the Union Government is working on roads, railways, highways, airways, waterways and i-ways. There is focus on connectivity and on ensuring that development projects are completed on time, he added.
सबी बेन भई पांवणा, ओरएं म्हारो राम राम जी।
विशाल संख्या में पधारे हुए राजगढ़ क्षेत्र के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।
जून महीने की इस भयानक गर्मी में आप सभी का इतनी बड़ी संख्या में आना मेरे लिए, हम सभी साथियों के लिए, एक बहुत बड़ा आशीर्वाद है। आपके इस स्नेह के आगे मैं सिर झुका करके नमन करता हूं। आपकी यही ऊर्जा, यही आशीर्वाद, भारतीय जनता पार्टी के हर कार्यकर्ता को आपकी सेवा करने के लिए नित्य नूतन प्रेरणा देता रहता है।
ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे आज 4 हज़ार करोड़ रुपए की मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के लोकार्पण के साथ-साथ पानी की तीन बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत करने का भी अवसर मिला। इन सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े हर व्यक्ति को, अपने सिर पर ईंटे उठाने वाले महानभावों को, तसला उठाने वाली माताओं, बहनों, भाइयों को, फावड़ा चलाने वालों को, छोटी-छोटी मशीनों से ले करके बड़े-बड़े यंत्र चलाने वाले को मैं इस सफलता के लिए प्रणाम करता हूं, उनका मैं अभिनंदन करता हूं।
गर्मी हो या बरसात, राष्ट्र निर्माण के जिस पुण्य कार्य में वे जुटे हैं, वो अतुलनीय है। मेरे प्यारे भाइयो-बहनों, बटन दबाकर लोकार्पण करना एक महज औपचारिकता है, लेकिन इन परियोजनाओं का असली लोकार्पण तो आपके पसीने से हुआ है, आपके श्रम से हुआ है। आपके पसीने की महक से ये महक उठा है।
आप जैसे करोड़ों लोगों के इसी श्रम से, इसी आशीर्वाद की वजह से केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सफलतापूर्वक जनसेवा करते-करते, एक के बाद एक जनकल्याण के फैसले लेते-लेते चार वर्ष की यात्रा पूर्ण की है। इतनी बड़ी संख्या में आपका आना इस बात की गवाही दे रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर, उसकी नीतियों पर आपका कितना विश्वास है। जो लोग देश में भ्रम फैलाने में लगे हैं, झूठ फैलाने में लगे हैं, निराशा फैलाने में लगे हैं, वो जमीनी सच्चाई से किस तरह कट चुके हैं, आप इसकी साक्षात तस्वीर हैं।
ये भी बहुत बड़ा संयोग है कि आज 23 जून, देश के महान सपूत, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि है। 23 जून के दिन कश्मीर में उनकी शंकास्पद मृत्यु हुई थी। आज के इस अवसर पर मैं डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पुण्य स्मरण करता हूं, उनको नमन करता हूं, और आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
भाइयों और बहनों, डॉक्टर मुखर्जी कहा करते थे- ‘कोई भी राष्ट्र सिर्फ अपनी ऊर्जा से ही सुरक्षित रह सकता है।‘ उनका भरोसा था देश के साधनों पर, संसाधनों पर, देश के प्रतिभाशाली लोगों पर।
स्वतंत्रता के बाद देश को हताशा से, निराशा से निकालने का उनका vision आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरणा दे रहा है। देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री के तौर पर उन्होंने देश की पहली औद्योगिक नीति बनाई। वे कहते थे-
“अगर सरकार, देश के शिक्षण संस्थान और औद्योगिक संगठन मिलकर उद्योगों को बढ़ावा देंगे, तो देश बहुत जल्द ही आर्थिक तौर पर भी स्वतंत्र हो जाएगा”।
शिक्षा से जुड़े क्षेत्र के लिए, महिला सशक्तिकरण के लिए, देश की परमाणु नीति को दिशा देने के लिए उन्होंने जो कार्य किया, जो विचार रखे वो उस दौर की सोच से भी बहुत आगे के थे। देश के विकास में जनभागीदारी का महत्व समझते हुए उन्होंने जो रास्ते सुझाए, वो आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
साथियों, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी कहते थे कि ‘शासन का पहला कर्तव्य धनहीन, गृहहीन जनता की सेवा और उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का है”। यही वजह है कि देश का उद्योग मंत्री बनने से पहले जब वो बंगाल के वित्त मंत्री थे, finance minister थे, तब बहुत व्यापक स्तर पर उन्होंने भूमि सुधार का काम किया था। उनका मानना था कि शासन अंग्रेजों की तरह राज करने के लिए नहीं बल्कि नागरिकों के सपने पूरे करने के लिए होना चाहिए।
डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने सबसे ज्यादा महत्व शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को दिया। वो कहते थे कि “सरकार को शुरुआती शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक, इसके लिए व्यापक सुविधाएं जुटानी चाहिए, युवाओं में छिपी प्रतिभा को निकालने के लिए उचित माहौल बनाया जाना चाहिए। ताकि हमारे युवा अपने गांव, अपने नगर की सेवा करने के लिए समर्थ बन सकें।“ डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन विद्या, वित्त और विकास; विद्या, वित्त और विकास- इन तीन मूलभूत चिंतन से जुड़ी धाराओं का संगम था।
ये हमारे देश का दुर्भाग्य रहा, कि एक परिवार का महिमामंडन करने के लिए, देश के अनेक सपूतों को और उनके योगदान को जानबूझ करके छोटा कर दिया गया, भुला देने के भरपूर प्रयास किए गए।
साथियों, आज केंद्र हो या फिर देश के किसी भी राज्य में चलने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार हो, डॉक्टर मुखर्जी के विजन से अलग नहीं है। चाहे युवाओं के लिए स्किल इंडिया मिशन हो, स्टार्ट अप योजना हो, स्वरोजगार के लिए बिना बैंक गारंटी कर्ज देने की सुविधा देने वाली मुद्रा योजना हो या फिर मेक इन इंडिया हो, इनमें आपको डॉक्टर मुखर्जी के विचारों की झलक मिलेगी।
आपका ये राजगढ़ जिला भी अब इसी विजन के साथ पिछड़े होने की अपनी पहचान को छोड़ने जा रहा है। सरकार ने इसे आकांक्षी जिलों या Aspirational District के तौर पर विकसित करने का फैसला लिया है। आपके जिले में अब स्वास्थ्य, शिक्षा, सफाई, पोषण, जल संरक्षण, कृषि जैसे विषयों पर और तेजी से काम किया जाएगा।
इन जिलों के गांवों में अब राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत जरूरी सुविधाओं को पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है। सरकार अब ये सुनिश्चित कर रही है कि आने वाले समय में इन जिलों के हर गांव में, सभी के पास उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन हो; सौभाग्य योजना के तहत हर घर में बिजली कनेक्शन हो; जनधन योजना के तहत सभी के पास बैंक खाते हों; सभी को सुरक्षा बीमा का कवच मिला हो; इंद्र धनुष योजना के तहत हर गर्भवती महिला और बच्चे का टीकाकरण हो।
साथियों, ये कार्य पहले भी हो सकते थे, पहले की सरकारों को किसी ने रोका नहीं था। लेकिन ये दुर्भाग्य है कि देश पर लंबे समय तक जिस दल ने शासन किया, उन्होंने आप लोगों पर, आपकी मेहनत पर भरोसा नहीं किया था। उसने कभी देश के सामर्थ्य पर भरोसा नहीं किया।
आप मुझे बताइए, पिछले चार वर्षों में भारत सरकार ने कभी भी निराशा की बात कही है? हताशा की बात कही है? हम क्या करें ये तो हो सकता है, नहीं हो सकता है। हमने हर बार संकल्प करके अच्छा करने के लिए कदम उठाए हैं, जी-जान से प्रयास किया है।
और इसलिए भाइयों, बहनों हम हमेशा एक आशा और विश्वास के साथ आगे बढ़ने वाले लोग हैं। साथियों, हमारी सरकार देश की आवश्यकताओं को समझते हुए, देश के संसाधनों पर भरोसा करते हुए, देश को 21वीं सदी में नई ऊँचाई पर पहुंचाने के लिए वचनबद्ध है और प्रयत्नरत है।
बीते चार वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा और बीते 13 वर्षो में भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश की सरकार ने गरीबों-पिछड़ों-शोषितों-वंचितों-किसानों को सशक्त करने का काम किया है। पिछले 5 वर्षों में मध्य प्रदेश में कृषि विकास दर सालाना औसतन 18 प्रतिशत रही है, जो देश में सबसे अधिक है। देश में दलहन के कुल उत्पादन की बात हो, तिलहन के कुल उत्पादन की बात हो, चना या सोयाबीन, टमाटर, लहसुन के उत्पादन में मध्य प्रदेश पूरे देश में नंबर एक रहा है। गेंहूं उत्पादन और अरहर, सरसो, आंवला, धनिया, इसके उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है और एक नंबर के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है।
शिवराज जी के शासन में मध्य प्रदेश ने विकास की नई गाथा लिखी है। आज यहां मोहनपुरा में सिंचाई परियोजना का लोकार्पण और तीन वॉटर सप्लाई स्कीमों पर काम शुरू होना, इस कड़ी का एक महत्वूपूर्ण हिस्सा है। ये परियोजना राजगढ़ ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की भी बड़ी परियोजनाओं में से एक है।
साथियों, इस प्रोजेक्ट से सवा सात सौ गांव के किसान भाई-बहनों को सीधा लाभ होने वाला है। आने वाले दिनों में, इन गांवों की सवा लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन पर ना सिर्फ सिंचाई की व्यवस्था होगी बल्कि 400 गांवों में पीने के पानी की समस्या से भी लोगों को मुक्ति मिलेगी। और 400 गांवों में पीने के पानी की समस्या से मुक्ति मिलना, इसका मतलब यहां की लाखों माताओं-बहनों का आशीर्वाद मिलना होगा। पानी की कठिनाई माताएं-बहने जितनी समझती हैं, शायद ही कोई और समझ सकता है। एक प्रकार से ये माताओं-बहनों की उत्तम सेवा का काम हुआ है।
ये परियोजना ना सिर्फ तेजी से होते विकास का उदाहरण है बल्कि सरकार के काम करने के तौर तरीके का भी सबूत है। लगभग 4 वर्ष के भीतर इस परियोजना को पूरा कर लिया गया है। इसमें micro irrigation का विशेष ध्यान रखा गया है, यानि खुली नहर को नहीं बल्कि पाइपलाइन बिछाकर खेत तक पानी पहुंचाने को प्राथमिकता दी गई है।
भाइयों और बहनों, यहां मालवा में एक कहावत है- मालव धरती गगन गंभीर, डग-डग रोटी, पग-पग नीर । ये कहावत पुरानी है-
यानि एक जमाना था जब मालवा की धरती में ना तो धन धान्य की कमी थी और ना ही पानी की कोई कमी थी। कदम-कदम पर यहां पानी मिला करता था। लेकिन पहले की सरकारों ने जिस तरह का काम किया, उसमें पानी के साथ ये कहावत भी संकट में पड़ गई। लेकिन बीते वर्षों में शिवराज जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने मालवा और मध्य प्रदेश की पुरानी पहचान को लौटाने का गंभीर प्रयास किया है।
साथियों, 2007 में सिंचाई परियोजनाओं से मध्य प्रदेश में सिर्फ साढ़े सात लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई होती थी। शिवराज जी के शासन में अब ये बढ़कर 40 लाख हेक्टेयर हो गई है। जो लोग टीवी पर देश में सुन रहे हैं, उनको भी मैं कहता हूं भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने से पहले साढ़े सात लाख हेक्टेयर और भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कार्यकाल में 40 लाख हेक्टेयर। अब तो राज्य सरकार इसे 2024 तक दोगुना करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। Micro irrigation system के विस्तार के लिए 70 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
आप सभी को मैं यहां विश्वास दिलाने आया हूं कि जो लक्ष्य राज्य सरकार ने तय किया है, उससे भी अधिक हासिल करने का प्रयास किया जाएगा और भारत सरकार कंधे से कंधा मिलाकर आपके साथ चलेगी।
मध्य प्रदेश को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से भी पूरी मदद मिल रही है। राज्य में इस योजना के तहत 14 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मध्य प्रदेश को भी इस योजना के तहत करीब 1400 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इस योजना के माध्यम से ‘per drop more crop’ के मिशन को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। चार वर्षों के परिश्रम का परिणाम है कि देशभर में माइक्रो इरीगेशन का दायरा 25 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इसमें डेढ़ लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि मध्य प्रदेश की है।
साथियों, आजकल आप भी देख रहे होंगे कि सरकारी योजनाओं के बारे में वीडियो तकनीक और नमो एप्प के माध्यम से मैं अलग-अलग लोगों से बात कर रहा हूं। तीन दिन पहले ही मैंने देशभर के किसानों से बात की थी। इसी कार्यक्रम में मुझे झाबुआ के किसान भाई-बहनों से बात करने का अवसर मिला। झाबुआ की एक किसान बहन ने मुझे विस्तार से बताया कि कैसे ड्रिप इरिगेशन से उसकी टमाटर की खेती में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
साथियों, New India के नए सपने में देश के गांव और किसान की महत्वपूर्ण भूमिका है। और इसलिए New India के उदय के साथ ही किसानों की आय को दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इस दिशा में बीज से ले करके बाजार तक, एक के बाद एक अनेक कदम उठाए गए हैं।
साथियों, पिछले चार वर्षों में देशभर में लगभग 14 करोड़ soil health card बांटे गए हैं, जिसमें से लगभग सवा करोड़ यहां मध्य प्रदेश के मेरे किसान भाई-बहनों को भी मिले हैं। इसमें अब किसान भाईयों को आसानी से पता लग रहा है कि उनकी जमीन के लिए कौन सा उर्वरक कितनी मात्रा में उपयुक्त है। इसी तरह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ मध्य प्रदेश के भी 35 लाख से ज्यादा किसान उठा रहे हैं।
किसानों को उनकी फसल की उचित कीमत दिलाने के लिए देशभर की मंडियों को ऑनलाइन बाजार से जोड़ा जा रहा है। अब तक देश की पौने 600 मंडियों को E-NAM प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, मध्य प्रदेश भी, उसकी भी आज 58 मंडियां इसके साथ जुड़ गई हैं। वो दिन दूर नहीं जब देश का ज्यादा से ज्यादा किसान सीधे अपने गांव के कॉमन सर्विस सेंटर या अपने मोबाइल फोन से ही देश की किसी भी मंडी में सीधे अपनी फसल वो बेच सकेगा।
भाइयों और बहनों, सरकार गांव और गरीब के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए एक के बाद एक अनेक कदम उठा रही है। विशेष रूप से दलित, आदिवासी, पिछड़े समाज की माताओं बहनों को जहरीले धुएं से मुक्ति दिलाने का काम निरंतर चल रहा है।
अब तक देश में 4 करोड़ से अधिक गरीब माताओं-बहनों को रसोई में मुफ्त एलपीजी सिलेंडर पहुंच चुका है। मध्य प्रदेश में भी अब तक लगभग 40 लाख महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिया जा चुका है।
साथियों, ये सरकार श्रम का सम्मान करने वाली सरकार है। देश में अधिक से अधिक रोजगार उत्पन्न करने वाले उद्यमी कैसे आगे आएं, इसकी चिंता आज भारत सरकार कर रही है। श्रम के प्रति कुछ लोगों का रवैया भले ही सकारात्मक ना हो, वो रोजगार का मजाक उड़ाते हों, लेकिन इस सरकार के प्रयास आज सफलता के रूप में सबके सामने हैं।
देश में आज मुद्रा योजना के तहत छोटे से छोटे उद्यमियों को बिना बैंक गारंटी कर्ज दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश के भी 85 लाख से अधिक लोगों ने इसका लाभ उठाया है।
भाइयों और बहनों, दिल्ली और भोपाल में लगा विकास का ये डबल इंजन पूरी शक्ति के साथ मध्य प्रदेश को आगे बढ़ रहा है।
मुझे याद है कि कभी मध्य प्रदेश की स्थिति ऐसी थी कि उसके साथ एक अपमानजनक शब्द जोड़ दिया गया था-और वो शब्द था जो हमें किसी को पसंद नहीं है, वो शब्द था- बीमारू। देश के बीमार राज्यों में मध्य प्रदेश को गिना जाता था। राज्य में लंबे समय तक शासन करने वाली कांग्रेस को मध्य प्रदेश का ये अपमान कभी दिखता नहीं था, चुभता नहीं था।
जन सामान्य को अपनी प्रजा समझकर, हमेशा अपनी जय जयकार लगवाना, यही कांग्रेस के नेता मध्य प्रदेश के अंदर करते रहे और न ही आने वाले भविष्य पर उन्होंने कोई गौर किया।
राज्य को उस स्थिति से निकालकर देश के विकास का प्रमुख भागीदार बनाने का काम यहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है। शिवराज जी को आपने एक पद दिया है लेकिन वो सेवक की तरह इस महान भूमि की, यहां की जनता की सेवा कर रहे हैं।
आज मध्य प्रदेश सफलता के जिस मार्ग पर है, उसके लिए मैं यहां के लोगों को, यहां की सरकार को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
एक बार फिर आप सभी को अनेक-अनेक शुभकामनाओं के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। आप सभी यहां भारी संख्या में आए, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!
मेरे साथ जोर से बोलिए, दोनों मुट्ठी बंद करके बोलिए –
भारत माता की – जय
भारत माता की – जय
भारत माता की – जय
बहुत-बहुत धन्यवाद।
The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today remotely inaugurated urban development projects at various locations across the State. These include houses under Pradhan Mantri Awaas Yojana, urban drinking water supply schemes, urban solid waste management, urban sanitation, urban transportation and urban landscape projects.
At an event in Indore, he also distributed the Swachh Survekshan-2018 Awards, and launched the Swachh Survekshan-2018 results dashboard.
Addressing a large gathering on the occasion, the Prime Minister said that Swachh Bharat was Mahatma Gandhi’s dream which has now become the resolve of 125 crore Indians. He said the entire country can take inspiration from Indore, which has been awarded for being the cleanest city in India. He also appreciated the three best performing States in cleanliness – Jharkhand, Maharashtra and Chhattisgarh. He spoke about the progress being made in sanitation. He expressed confidence Mahatma Gandhi’s dream will become a reality by his 150th birth anniversary next year.
The Prime Minister spoke about how the Union Government is working towards modernizing urban infrastructure in India. In addition to the Swachh Bharat Mission, he mentioned the Pradhan Mantri Awaas Yojana (Urban), the Smart City Mission, AMRUT, and Deendayal Upadhyay National Urban Livelihood Mission. He recalled that he had inaugurated the Integrated Command and Control Centre in Naya Raipur – India’s first smart city – a few days ago. He said a similar exercise is now underway in seven cities of Madhya Pradesh. He spoke in detail about the progress being made in various urban development initiatives in Madhya Pradesh. He said that through the housing projects inaugurated today, more than one lakh homeless people in Madhya Pradesh have got their own house.
He said the Government of India is working towards the vision of providing housing for all by 2022. He said that in the last four years, approximately 1.15 crore houses have been constructed, and nearly 2 crore more houses are to be constructed, to achieve the goal by 2022. He said that the Pradhan Mantri Awaas Yojana is also becoming a means for generating employment and women empowerment.
The Prime Minister also spoke of progress made in other spheres of development.