পিএমইন্ডিয়া
নয়াদিল্লি, ১৭ সেপ্টেম্বর, ২০২২
প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদী আজ কুনো ন্যাশনাল পার্কে ভারত থেকে বিলুপ্ত হয়ে যাওয়া আরণ্যক চিতা ছাড়লেন। নামিবিয়া থেকে আনা চিতা ভারতে ছাড়া হল প্রজেক্ট চিতার অধীনে যা বিশ্বে প্রথম আন্তঃ-মহাদেশীয় বৃহৎ আরণ্যক মাংসাশী প্রাণীর স্থানান্তরকরণ প্রকল্প। ৮টি চিতার মধ্যে ৫টি মেয়ে এবং ৩টি পুরুষ চিতা।
প্রধানমন্ত্রী কুনো ন্যাশনাল পার্কের দুটি জায়গা থেকে চিতাগুলি ছাড়লেন। প্রধানমন্ত্রী ওই স্থানে কথা বলেন চিতা মিত্র, চিতা পুনর্বাসন ব্যবস্থাপনা গোষ্ঠী এবং ছাত্রছাত্রীদের সঙ্গে। প্রধানমন্ত্রী এই ঐতিহাসিক ঘটনায় জাতির উদ্দেশে ভাষণ দিলেন।
কুনো ন্যাশনাল পার্কে প্রধানমন্ত্রীর এই আরণ্যক চিতা ছাড়ার কাজ ভারতে বন্যপ্রাণ এবং তার বাসস্থান পুনঃস্থাপন এবং বৈচিত্র্যকরণে তাঁর প্রয়াসের অঙ্গ। চিতা ভারত থেকে লুপ্ত হয়ে যায় ১৯৫২ সালে। চিতাগুলি আনা হয়েছে আফ্রিকার নামিবিয়া থেকে। এর জন্য এ বছরের গোড়ায় একটি সমঝোতাপত্র স্বাক্ষরিত হয়েছিল। ভারতে এই চিতা আনা হয়েছে প্রজেক্ট চিতার অধীনে যা বিশ্বে প্রথম আন্তঃমহাদেশীয় বৃহৎ আরণ্যক মাংসাশী প্রাণীর স্থানান্তরকরণ প্রকল্প। চিতা ভারতে মুক্ত অরণ্য এবং তৃণভূমি পরিবেশের উন্নতিতে সাহায্য করবে। এতে জীব বৈচিত্র্য সংরক্ষণ এবং জল নিরাপত্তা, কার্বন নিঃসরণ হ্রাস, মৃত্তিকার আর্দ্রতা, সংরক্ষণ বৃদ্ধিতে সাহায্য করবে। সব মিলিয়ে সমাজের উপকার হবে। প্রধানমন্ত্রীর পরিবেশ রক্ষা এবং বন্যপ্রাণ সংরক্ষণে দায়বদ্ধতার সঙ্গে সঙ্গতি রেখে এই প্রয়াস পরিবেশ উন্নয়ন এবং পরিবেশ পর্যটন কার্যাবলীর মাধ্যমে স্থানীয় জনগোষ্ঠীর জীবিকার্জনের সুবিধা বৃদ্ধি করবে।
গত ৮ বছরে দীর্ঘস্থায়ী পরিবেশ রক্ষা নিশ্চিত করতে একাধিক পদক্ষেপের অঙ্গ হিসেবে ভারতে চিতা আনার এই ঐতিহাসিক ঘটনা পরিবেশ রক্ষা এবং দীর্ঘস্থায়িত্বের ক্ষেত্রে একটি উল্লেখযোগ্য সাফল্য। ২০১৪য় দেশের ভৌগোলিক অঞ্চলের ৪.৯০ শতাংশ ছিল সংরক্ষিত অঞ্চল। সেটি এখন বেড়ে হয়েছে ৫.০৩ শতাংশ। দেশে সংরক্ষিত এলাকার বৃদ্ধি হয়েছে। ২০১৪য় ৭৪০টি অঞ্চলের মোট পরিমাপ ছিল ১৬১০৮১.৬২ বর্গ কিলোমিটার। সেটি বর্তমানে রয়েছে ৯৮১টি এলাকায় ১৭১৯২১ বর্গ কিলোমিটার জুড়ে।
গত ৪ বছরে বন এবং গাছের বৃদ্ধি হয়েছে ১৬ হাজার বর্গ কিলোমিটার জুড়ে। বিশ্বে ভারত কয়েকটি দেশের অন্যতম যেখানে বনাঞ্চল নিয়মিত বেড়ে চলেছে।
জনগোষ্ঠী সংরক্ষণের সংখ্যাও বেড়েছে। ২০১৪য় মাত্র ৪৩ থেকে ওই সংখ্যা বেড়ে হয়েছে ১০০র বেশি।
ভারতে ৫২টি ব্যাঘ্র প্রকল্প আছে ১৮টি রাজ্যের প্রায় ৭৫ হাজার বর্গ কিলোমিটার জুড়ে যা সারা বিশ্বে বন্য ব্যাঘ্রের সংখ্যার ৭৫ শতাংশ। ভারত ২০১৮য় বাঘের সংখ্যা দ্বিগুণ করতে সক্ষম হয়েছে। ২০২২এর মধ্যে এই সংখ্যা দ্বিগুণ করার লক্ষ্য নেওয়া হয়েছিল, তার ৪ বছর আগেই এটি সম্পন্ন করা হয়েছে। ২০১৪য় ভারতে বাঘের সংখ্যা ছিল ২ হাজার ২২৬টি। সেটি ২০১৮য় বেড়ে হয়েছে ২ হাজার ৯৬৭।
ব্যাঘ্র সংরক্ষণে বাজেট বরাদ্দ ২০১৪য় ১৮৫ কোটি টাকা থেকে ২০২২এ বাড়িয়ে করা হয়েছে ৩০০ কোটি টাকা।
এশিয়াটিক সিংহের সংখ্যাও বৃদ্ধি পাচ্ছে। ২০১৫য় ৫২৩টির থেকে বেড়ে হয়েছে ৬৭৪টি। বৃদ্ধির হার ২৮.৮৭ শতাংশ (এ যাবৎ সর্বোচ্চ বৃদ্ধির হার)।
ভারতে বর্তমানে (২০২০) ১২ হাজার ৮৫২টি চিতাবাঘ আছে। ২০১৪য় পূর্ববর্তী সমীক্ষায় এর সংখ্যা ছিল ৭ হাজার ৯১০টি অর্থাৎ এদের সংখ্যায় ৬০ শতাংশের বেশি বৃদ্ধি লক্ষ্য করা গেছে।
অনুষ্ঠানে অন্যদের মধ্যে মধ্যপ্রদেশের রাজ্যপাল শ্রী মঙ্গুভাই প্যাটেল, মুখ্যমন্ত্রী শ্রী শিবরাজ সিং চৌহান, কেন্দ্রীয় মন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র সিং তোমর, শ্রী ভূপেন্দর যাদব, শ্রী জ্যোতিরাদিত্য এম সিন্ধিয়া এবং শ্রী অশ্বিনী চৌবে উপস্থিত ছিলেন।
PG/AP/NS
Project Cheetah is our endeavour towards environment and wildlife conservation. https://t.co/ZWnf3HqKfi
— Narendra Modi (@narendramodi) September 17, 2022
दशकों पहले, जैव-विविधता की सदियों पुरानी जो कड़ी टूट गई थी, विलुप्त हो गई थी, आज हमें उसे फिर से जोड़ने का मौका मिला है।
— PMO India (@PMOIndia) September 17, 2022
आज भारत की धरती पर चीता लौट आए हैं।
और मैं ये भी कहूँगा कि इन चीतों के साथ ही भारत की प्रकृतिप्रेमी चेतना भी पूरी शक्ति से जागृत हो उठी है: PM @narendramodi
मैं हमारे मित्र देश नामीबिया और वहाँ की सरकार का भी धन्यवाद करता हूँ जिनके सहयोग से दशकों बाद चीते भारत की धरती पर वापस लौटे हैं: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) September 17, 2022
ये दुर्भाग्य रहा कि हमने 1952 में चीतों को देश से विलुप्त तो घोषित कर दिया, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए दशकों तक कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ।
— PMO India (@PMOIndia) September 17, 2022
आज आजादी के अमृतकाल में अब देश नई ऊर्जा के साथ चीतों के पुनर्वास के लिए जुट गया है: PM @narendramodi
ये बात सही है कि, जब प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण होता है तो हमारा भविष्य भी सुरक्षित होता है। विकास और समृद्धि के रास्ते भी खुलते हैं।
— PMO India (@PMOIndia) September 17, 2022
कुनो नेशनल पार्क में जब चीता फिर से दौड़ेंगे, तो यहाँ का grassland ecosystem फिर से restore होगा, biodiversity और बढ़ेगी: PM @narendramodi
कुनो नेशनल पार्क में छोड़े गए चीतों को देखने के लिए देशवासियों को कुछ महीने का धैर्य दिखाना होगा, इंतजार करना होगा।
— PMO India (@PMOIndia) September 17, 2022
आज ये चीते मेहमान बनकर आए हैं, इस क्षेत्र से अनजान हैं।
कुनो नेशनल पार्क को ये चीते अपना घर बना पाएं, इसके लिए हमें इन चीतों को भी कुछ महीने का समय देना होगा: PM
कुनो नेशनल पार्क में छोड़े गए चीतों को देखने के लिए देशवासियों को कुछ महीने का धैर्य दिखाना होगा, इंतजार करना होगा।
— PMO India (@PMOIndia) September 17, 2022
आज ये चीते मेहमान बनकर आए हैं, इस क्षेत्र से अनजान हैं।
कुनो नेशनल पार्क को ये चीते अपना घर बना पाएं, इसके लिए हमें इन चीतों को भी कुछ महीने का समय देना होगा: PM
कुनो नेशनल पार्क में छोड़े गए चीतों को देखने के लिए देशवासियों को कुछ महीने का धैर्य दिखाना होगा, इंतजार करना होगा।
— PMO India (@PMOIndia) September 17, 2022
आज ये चीते मेहमान बनकर आए हैं, इस क्षेत्र से अनजान हैं।
कुनो नेशनल पार्क को ये चीते अपना घर बना पाएं, इसके लिए हमें इन चीतों को भी कुछ महीने का समय देना होगा: PM
प्रकृति और पर्यावरण, पशु और पक्षी, भारत के लिए ये केवल sustainability और security के विषय नहीं हैं।
— PMO India (@PMOIndia) September 17, 2022
हमारे लिए ये हमारी sensibility और spirituality का भी आधार हैं: PM @narendramodi
आज 21वीं सदी का भारत, पूरी दुनिया को संदेश दे रहा है कि Economy और Ecology कोई विरोधाभाषी क्षेत्र नहीं है।
— PMO India (@PMOIndia) September 17, 2022
पर्यावरण की रक्षा के साथ ही, देश की प्रगति भी हो सकती है, ये भारत ने दुनिया को करके दिखाया है: PM @narendramodi
हमारे यहाँ एशियाई शेरों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है।
— PMO India (@PMOIndia) September 17, 2022
इसी तरह, आज गुजरात देश में एशियाई शेरों का बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा है।
इसके पीछे दशकों की मेहनत, research-based policies और जन-भागीदारी की बड़ी भूमिका है: PM @narendramodi
हमारे यहाँ एशियाई शेरों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है।
— PMO India (@PMOIndia) September 17, 2022
इसी तरह, आज गुजरात देश में एशियाई शेरों का बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा है।
इसके पीछे दशकों की मेहनत, research-based policies और जन-भागीदारी की बड़ी भूमिका है: PM @narendramodi
Tigers की संख्या को दोगुना करने का जो लक्ष्य तय किया गया था उसे समय से पहले हासिल किया है।
— PMO India (@PMOIndia) September 17, 2022
असम में एक समय एक सींग वाले गैंडों का अस्तित्व खतरे में पड़ने लगा था, लेकिन आज उनकी भी संख्या में वृद्धि हुई है।
हाथियों की संख्या भी पिछले वर्षों में बढ़कर 30 हजार से ज्यादा हो गई है: PM