पीएमइंडिया
राष्ट्र के सामाजिक-सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के अयोध्या में पवित्र श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराया। ध्वजारोहण उत्सव मंदिर निर्माण के पूर्ण होने और सांस्कृतिक उत्सव एवं राष्ट्रीय एकता के एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष-बिंदु की साक्षी बन रही है। श्री मोदी ने कहा, “आज पूरा भारत और पूरा विश्व भगवान श्री राम की भावना से ओतप्रोत है।” उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रत्येक राम भक्त के हृदय में अद्वितीय संतोष, असीम कृतज्ञता और अपार दिव्य आनंद है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सदियों पुराने घाव भर रहे हैं, सदियों का दर्द समाप्त हो रहा है और सदियों का संकल्प आज सिद्ध हो रहा है। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि यह उस यज्ञ की परिणति है जिसकी अग्नि 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही, एक ऐसा यज्ञ जिसकी आस्था कभी डगमगाई नहीं, आस्था क्षण भर के लिए भी खंडित नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आज भगवान श्री राम के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा और श्री राम परिवार की दिव्य महिमा, इस धर्म ध्वजा के रूप में, इस दिव्यतम एवं भव्य मंदिर में प्रतिष्ठित हुई है।
श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “यह धर्म ध्वजा केवल एक ध्वज नहीं है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है।” उन्होंने बताया कि इसका केसरिया रंग, इस पर अंकित सूर्यवंश की महिमा, अंकित पवित्र ॐ और उत्कीर्ण कोविदार वृक्ष, रामराज्य की महानता के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि यह ध्वज संकल्प है, यह ध्वज सिद्धि है, यह ध्वज संघर्ष से सृजन की गाथा है, यह ध्वज सदियों से संजोए गए स्वप्नों का साकार रूप है, और यह ध्वज संतों की तपस्या और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणति है।
यह घोषणा करते हुए कि आने वाली सदियों और सहस्राब्दियों तक, यह धर्म ध्वज भगवान राम के आदर्शों और सिद्धांतों का उद्घोष करेगा, श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि यह आह्वान करेगा कि विजय केवल सत्य की होती है, असत्य की नहीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह उद्घोषणा करेगा कि सत्य स्वयं ब्रह्म का रूप है और सत्य में ही धर्म की स्थापना होती है। उन्होंने कहा कि यह धर्म ध्वज जो कहा गया है उसे अवश्य पूरा करने के संकल्प को प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि यह संदेश देगा कि संसार में कर्म और कर्तव्य को ही प्रधानता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भेदभाव और पीड़ा से मुक्ति और समाज में शांति और सुख की उपस्थिति की कामना व्यक्त करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह धर्म ध्वज हमें इस संकल्प के लिए प्रतिबद्ध करेगा कि हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहां कोई गरीबी न हो और कोई भी दुखी या असहाय न हो।
श्री मोदी ने अपने धर्मग्रंथों का स्मरण करते हुए कहा कि जो लोग किसी भी कारण से मंदिर में नहीं आ पाते, लेकिन उसकी ध्वजा के आगे झुकते हैं, उन्हें भी समान पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह धर्म ध्वजा मंदिर के उद्देश्य का प्रतीक है और दूर से ही यह रामलला की जन्मभूमि के दर्शन कराती रहेगी और युगों-युगों तक भगवान श्री राम के आदेशों और प्रेरणाओं को मानवता तक पहुंचाती रहेगी। उन्होंने इस अविस्मरणीय और अनूठे अवसर पर दुनिया भर के करोड़ों राम भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी भक्तों को नमन किया और राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले प्रत्येक दानदाता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने मंदिर निर्माण से जुड़े प्रत्येक कार्यकर्ता, प्रत्येक कारीगर, प्रत्येक योजनाकार और प्रत्येक वास्तुकार को नमन किया।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, “अयोध्या वह भूमि है जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं।” उन्होंने कहा कि यही वह नगरी है जहां से श्री राम ने अपनी जीवन यात्रा शुरू की थी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि अयोध्या ने दुनिया को दिखाया कि कैसे एक व्यक्ति, समाज और उसके मूल्यों की शक्ति से पुरुषोत्तम बनता है। उन्होंने स्मरण किया कि जब श्री राम वनवास के लिए अयोध्या से निकले थे, तो वे युवराज राम थे, लेकिन जब वे लौटे, तो वे ‘मर्यादा पुरुषोत्तम‘ बनकर लौटे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि श्री राम के मर्यादा पुरुषोत्तम बनने में महर्षि वशिष्ठ का ज्ञान, महर्षि विश्वामित्र की दीक्षा, महर्षि अगस्त्य का मार्गदर्शन, निषादराज की मित्रता, माता शबरी का स्नेह और भक्त हनुमान की भक्ति, सभी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विकसित भारत के निर्माण के लिए समाज की सामूहिक शक्ति को अनिवार्य बताते हुए, श्री मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त की कि राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की भी चेतना स्थली बन रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि यहां सात मंदिर निर्मित हैं, जिनमें माता शबरी का मंदिर भी शामिल है, जो आदिवासी समुदाय की प्रेम और आतिथ्य परंपराओं का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने निषादराज के मंदिर का भी जिक्र किया, जो उस मैत्री का साक्षी है जो साधनों की नहीं, बल्कि उद्देश्य और भावना की पूजा करती है। उन्होंने बताया कि एक ही स्थान पर माता अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य और संत तुलसीदास विराजमान हैं, जिनकी रामलला के साथ उपस्थिति भक्तों को उनके दर्शन कराती है। उन्होंने जटायु जी और गिलहरी की मूर्तियों का जिक्रं किया, जो महान संकल्पों की सिद्धि में छोटे से छोटे प्रयास के महत्व को दर्शाती हैं। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से आग्रह किया कि जब भी वे राम मंदिर जाएं, तो सप्त मंदिरों के भी दर्शन अवश्य करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये मंदिर हमारी आस्था को मजबूत करने के साथ-साथ मैत्री, कर्तव्य और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को भी सशक्त बनाते हैं।
“हमारे राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं”, श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि श्री राम के लिए व्यक्ति की भक्ति वंश से अधिक महत्वपूर्ण है, संस्कार वंश से अधिक प्रिय हैं और सहयोग महज शक्ति से भी बड़ा है। उन्होंने कहा कि आज हम भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले 11 वर्षों में महिलाओं, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, वंचितों, किसानों, श्रमिकों और युवाओं – समाज के हर वर्ग को विकास के केंद्र में रखा गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक क्षेत्र सशक्त होगा, तो सभी का प्रयास संकल्प की पूर्ति में योगदान देगा, और इन्हीं सामूहिक प्रयासों से 2047 तक एक विकसित भारत का निर्माण होगा।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर पर विचार करते हुए, प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के संकल्प को भगवान राम से जोड़ने की बात कही और याद दिलाया कि आने वाले हजार वर्षों के लिए भारत की नींव मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग केवल वर्तमान के बारे में सोचते हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं, और हमें केवल आज के बारे में ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बारे में भी सोचना चाहिए, क्योंकि राष्ट्र हमसे पहले भी था और हमारे बाद भी रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम एक जीवंत समाज हैं, हमें दूरदृष्टि के साथ काम करना होगा, हमें आने वाले दशकों, आने वाली सदियों को ध्यान में रखना ही होगा। इसके लिए हमें भगवान राम से सीखना होगा—उनके व्यक्तित्व को समझना होगा, उनके आचरण को अपनाना होगा, और यह याद रखना होगा कि राम आदर्शों, अनुशासन और जीवन के सर्वोच्च चरित्र के प्रतीक हैं। राम सत्य और वीरता के संगम हैं, धर्म के मार्ग पर चलने के साक्षात स्वरूप हैं, लोक-सुख को सर्वोपरि रखने वाले हैं, धैर्य और क्षमा के सागर हैं, ज्ञान और बुद्धि के शिखर हैं, सौम्यता में दृढ़ता, कृतज्ञता का सर्वोच्च उदाहरण हैं, उत्तम संगति के वरणकर्ता हैं, महाबल में विनम्रता हैं, सत्य का अटूट संकल्प हैं और सजग, अनुशासित एवं निष्कपट मन हैं। उन्होंने कहा कि राम के ये गुण हमें एक सशक्त, दूरदर्शी और स्थायी भारत के निर्माण में मार्गदर्शन प्रदान करें।
श्री मोदी ने कहा, “राम सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, राम एक मूल्य हैं, एक मर्यादा हैं, एक दिशा हैं।” उन्होंने कहा कि यदि भारत को 2047 तक विकसित बनाना हैं, अगर समाज को सामर्थ्यवान बनाना है, तो हमे अपने भीतर “राम” को जगाना होगा। हमारे हृदय में प्रतिष्ठित करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा संकल्प लेने के लिए आज से बेहतर कोई दिन नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि 25 नवंबर हमारी विरासत पर गर्व का एक और असाधारण क्षण लेकर आया है, जिसका प्रतीक धर्म ध्वज पर अंकित कोविदार वृक्ष है। उन्होंने बताया कि कोविदार वृक्ष हमें याद दिलाता है कि जब हम अपनी जड़ों से अलग हो जाते हैं, तो हमारा गौरव इतिहास के पन्नों में दफन हो जाता है।
प्रधानमंत्री ने उस प्रसंग का स्मरण किया जब भरत अपनी सेना के साथ चित्रकूट पहुंचे और लक्ष्मण ने दूर से ही अयोध्या की सेना को पहचान लिया। श्री मोदी ने वाल्मीकि द्वारा वर्णित उस वर्णन का जिक्र किया जिसमें लक्ष्मण ने राम से कहा था कि एक विशाल वृक्ष जैसा दीप्तिमान, ऊंचा ध्वज अयोध्या का है, जिस पर कोविदार का शुभ प्रतीक अंकित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज, जब राम मंदिर के प्रांगण में कोविदार की पुनः प्राण-प्रतिष्ठा हो रही है, तो यह केवल एक वृक्ष की वापसी नहीं है, बल्कि स्मृति की वापसी, पहचान का पुनरुत्थान और एक गौरवशाली सभ्यता का नवघोष है। कोविदार हमें याद दिलाता है कि जब हम अपनी पहचान भूल जाते हैं, तो हम स्वयं को खो देते हैं, लेकिन जब पहचान लौटती है, तो राष्ट्र का आत्मविश्वास भी लौटता है। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि देश को आगे बढ़ने के लिए अपनी विरासत पर गर्व करना होगा।
अपनी विरासत पर गर्व के साथ-साथ गुलामी की मानसिकता से पूर्ण मुक्ति को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताते हुए, प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 190 साल पहले, 1835 में, मैकाले नामक एक अंग्रेज संसदविद ने भारत को उसकी जड़ों से उखाड़ फेंकने का बीज बोया और मानसिक गुलामी की नींव रखी। उन्होंने कहा कि 2035 में उस घटना को दो सौ साल पूरे हो जाएंगे और आग्रह किया कि आने वाले दस साल भारत को इस मानसिकता से मुक्त करने के लिए समर्पित होने चाहिए। उन्होंने खेद व्यक्त किया कि सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि मैकाले के विचारों का व्यापक प्रभाव पड़ा। भारत को स्वतंत्रता तो मिली, लेकिन हीन भावना से मुक्ति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि एक विकृति फैल गई, जहां हर विदेशी चीज को श्रेष्ठ माना जाने लगा, जबकि हमारी अपनी परंपराओं और प्रणालियों को केवल दोष की दृष्टि से देखा जाने लगा।
श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि गुलामी की मानसिकता इस धारणा को पुष्ट करती रही कि भारत ने लोकतंत्र विदेश से उधार लिया है और यहां तक कि इसका संविधान भी विदेश से प्रेरित है, जबकि सच्चाई यह है कि भारत लोकतंत्र की जननी है और लोकतंत्र हमारे डीएनए में है। उन्होंने उत्तरी तमिलनाडु के उत्तिरामेरुर गांव का उदाहरण दिया, जहां एक हजार साल पुराने शिलालेख में बताया गया है कि उस युग में भी शासन कैसे लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाता था और लोग अपने शासक कैसे चुनते थे। उन्होंने कहा कि मैग्ना कार्टा की तो व्यापक प्रशंसा की जाती थी, लेकिन भगवान बसवन्ना के अनुभव मंडप के ज्ञान को सीमित रखा गया था। उन्होंने बताया कि अनुभव मंडप एक ऐसा मंच था जहां सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से बहस होती थी और सामूहिक सहमति से निर्णय लिए जाते थे। उन्होंने दुःख व्यक्त किया कि गुलामी की मानसिकता के कारण, भारत की पीढ़ियां अपनी लोकतांत्रिक परंपराओं के ज्ञान से वंचित रहीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी की मानसिकता हमारी व्यवस्था के हर कोने में समा गई है। उन्होंने याद दिलाया कि सदियों से भारतीय नौसेना के ध्वज पर ऐसे प्रतीक अंकित थे जिनका भारत की सभ्यता, शक्ति या विरासत से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब नौसेना के ध्वज से गुलामी के हर प्रतीक को हटा दिया गया है और छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल स्वरूप में परिवर्तन नहीं, बल्कि मानसिकता में परिवर्तन का क्षण है, एक ऐसी घोषणा कि भारत अब अपनी शक्ति को दूसरों की विरासत से नहीं, बल्कि अपने प्रतीकों से परिभाषित करेगा।
श्री मोदी ने यह भी कहा कि यही परिवर्तन आज अयोध्या में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यही गुलामी की मानसिकता थी जिसने इतने वर्षों तक रामत्व के सार को नकार दिया। श्री मोदी ने कहा कि ओरछा के राजा राम से लेकर रामेश्वरम के भक्त राम तक, शबरी के प्रभु राम से लेकर मिथिला के पहुना राम जी तक, भगवान राम, स्वयं में एक संपूर्ण मूल्य-व्यवस्था हैं। राम हर घर में, हर भारतीय के हृदय में और भारत के कण-कण में विराजमान हैं। फिर भी, उन्होंने दुःख व्यक्त किया कि गुलामी की मानसिकता इतनी हावी हो गई कि भगवान राम को भी काल्पनिक घोषित कर दिया गया।
श्री मोदी ने इस बात पर जोर देते हुए कि अगर हम अगले दस वर्षों में खुद को गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प लें, तो आत्मविश्वास की ऐसी ज्योति प्रज्वलित होगी कि 2047 तक विकसित भारत के स्वप्न को साकार होने से कोई भी ताकत नहीं रोक पाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले हजार वर्षों के लिए भारत की नींव तभी मज़बूत होगी जब अगले एक दशक में मैकाले की मानसिक गुलामी की परियोजना पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि अयोध्या में रामलला मंदिर परिसर और भी भव्य होता जा रहा है और अयोध्या के सौंदर्यीकरण का कार्य तेज़ी से जारी है। उन्होंने घोषणा की कि अयोध्या एक बार फिर दुनिया के लिए एक मिसाल बनने वाला शहर बन रहा है। उन्होंने कहा कि त्रेता युग में अयोध्या ने मानवता को उसकी आचार संहिता दी थी और 21वीं सदी में अयोध्या मानवता को विकास का एक नया मॉडल दे रही है। उन्होंने आगे कहा कि तब अयोध्या अनुशासन का केंद्र थी और अब अयोध्या एक विकसित भारत की रीढ़ बनकर उभर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य में अयोध्या परंपरा और आधुनिकता का संगम होगा, जहां सरयू का पावन प्रवाह और विकास की धारा एक साथ बहेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अयोध्या आध्यात्मिकता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच सामंजस्य स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ मिलकर एक नई अयोध्या का दर्शन कराते हैं। उन्होंने भव्य हवाई अड्डे और शानदार रेलवे स्टेशन का जिक्र किया, जहां वंदे भारत और अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें अयोध्या को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अयोध्या के लोगों को सुविधाएं प्रदान करने और उनके जीवन में समृद्धि लाने के लिए निरंतर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद से लगभग 45 करोड़ श्रद्धालु दर्शन के लिए आ चुके हैं, जिससे अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों के लोगों की आय में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि एक समय अयोध्या विकास के मानकों पर पिछड़ा हुआ था, लेकिन आज यह उत्तर प्रदेश के अग्रणी शहरों में से एक के रूप में उभर रहा है।
21वीं सदी के आने वाले युग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए, श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि स्वतंत्रता के बाद के 70 वर्षों में भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया, लेकिन पिछले 11 वर्षों में ही भारत 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन जाएगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आने वाला समय नए अवसरों और नई संभावनाओं का है और इस महत्वपूर्ण अवधि में भगवान राम के विचार राष्ट्र को प्रेरित करते रहेंगे। प्रधानमंत्री ने बताया कि जब भगवान श्री राम ने रावण पर विजय की महान चुनौती का सामना किया, तो रथ के पहिये वीरता और धैर्य थे, ध्वज सत्य और सदाचार था, अश्व बल, बुद्धि, संयम और परोपकार थे, और लगाम क्षमा, करुणा और समता थी, जिसने रथ को सही दिशा में आगे बढ़ाया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा को गति देने के लिए ऐसे रथ की आवश्यकता है जिसके पहिए वीरता और धैर्य से संचालित हों, अर्थात चुनौतियों का सामना करने का साहस और परिणाम प्राप्त होने तक अडिग रहने का धैर्य। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस रथ का ध्वज सत्य और सर्वोच्च आचरण होना चाहिए, अर्थात नीति, नीयत और नैतिकता से कभी समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस रथ के घोड़े बल, बुद्धि, अनुशासन और परोपकार होने चाहिए, अर्थात शक्ति, बुद्धि, संयम और दूसरों की सेवा की भावना होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रथ की लगाम क्षमा, करुणा और समता होनी चाहिए, अर्थात सफलता में अहंकार नहीं होना चाहिए और असफलता में भी दूसरों के प्रति सम्मान होना चाहिए। श्री मोदी ने श्रद्धापूर्वक कहा कि यह क्षण कंधे से कंधा मिलाकर चलने, गति बढ़ाने और रामराज्य से प्रेरित भारत के निर्माण का है। उन्होंने अंत में कहा कि यह तभी संभव है जब राष्ट्रहित, स्वार्थ से ऊपर रहे, और एक बार फिर सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत इस कार्यक्रम में अन्य गणमान्य व्यक्तियों के अलावा उपस्थित थे।
पृष्ठभूमि
यह कार्यक्रम मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की शुभ पंचमी को, श्री राम और माता सीता के विवाह पंचमी के अभिजीत मुहूर्त के साथ, दिव्य मिलन के प्रतीक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। यह तिथि नौवें सिख गुरु – गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस का भी प्रतीक है, जिन्होंने 17वीं शताब्दी में अयोध्या में 48 घंटे तक निरंतर ध्यान किया था, जिससे इस दिन का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
दस फुट ऊंचे और बीस फुट लंबे समकोण त्रिभुजाकार ध्वज पर भगवान श्री राम के तेज और पराक्रम का प्रतीक एक दीप्तिमान सूर्य की छवि अंकित है, जिस पर ‘ॐ‘ अंकित है और कोविदार वृक्ष की छवि भी अंकित है। यह पवित्र भगवा ध्वज राम राज्य के आदर्शों को साकार करते हुए गरिमा, एकता और सांस्कृतिक निरन्तरता का संदेश देगा।
ध्वज पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर स्थापत्य शैली में निर्मित शिखर के ऊपर फहराया जाएगा, जबकि मंदिर के चारों ओर निर्मित 800 मीटर का परकोटा, जो दक्षिण भारतीय स्थापत्य परंपरा में डिजाइन किया गया है, मंदिर की स्थापत्य विविधता को प्रदर्शित करता है।
मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर की बाहरी दीवारों पर वाल्मीकि रामायण पर आधारित भगवान श्री राम के जीवन से जुड़े 87 जटिल रूप से तराशे गए पत्थर के प्रसंग और परिसर की दीवारों पर भारतीय संस्कृति से जुड़े 79 कांस्य-ढाल वाले प्रसंग अंकित हैं। ये सभी तत्व मिलकर सभी आगंतुकों को एक सार्थक और शिक्षाप्रद अनुभव प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें भगवान श्री राम के जीवन और भारत की सांस्कृतिक विरासत की गहरी समझ मिलती है।
आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष-बिंदु की साक्षी बन रही है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर ध्वजारोहण उत्सव का यह क्षण अद्वितीय और अलौकिक है। सियावर रामचंद्र की जय! https://t.co/4PPt0rEnZy
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आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व…राममय है: PM @narendramodi pic.twitter.com/NaWcE8NAED
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ये धर्म ध्वजा केवल एक ध्वज नहीं… ये भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है: PM @narendramodi pic.twitter.com/3sI3HsusQe
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अयोध्या वह भूमि है, जहां आदर्श…आचरण में बदलते हैं: PM @narendramodi pic.twitter.com/elzUvALvUr
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राम मंदिर का ये दिव्य प्रांगण… भारत के सामूहिक सामर्थ्य की भी चेतना स्थली बन रहा है: PM @narendramodi pic.twitter.com/mWvkzabhki
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हमारे राम…भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं: PM @narendramodi pic.twitter.com/d1TdWQEYee
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हम एक जीवंत समाज हैं… हमें दूरदृष्टि के साथ ही काम करना होगा…
हमें आने वाले दशकों, आने वाली सदियों को ध्यान में रखना ही होगा: PM @narendramodi pic.twitter.com/UWtTRWAEfv
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राम यानी आदर्श, राम यानी मर्यादा, राम यानी जीवन का सर्वोच्च चरित्र। pic.twitter.com/OtgvIBIOi8
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राम सिर्फ एक व्यक्ति नहीं… राम एक मूल्य हैं, एक मर्यादा हैं, एक दिशा हैं। pic.twitter.com/srviB91AME
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अगर भारत को साल 2047 तक विकसित बनाना है… अगर समाज को सामर्थ्यवान बनाना है…
तो हमें अपने भीतर “राम” को जगाना होगा: PM @narendramodi pic.twitter.com/BvDFjwN92l
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देश को आगे बढ़ना है तो अपनी विरासत पर गर्व करना होगा: PM @narendramodi pic.twitter.com/BxfDP129pE
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हमें आने वाले दस वर्षों का लक्ष्य लेकर चलना है कि हम भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहेंगे: PM @narendramodi pic.twitter.com/MclchQMORs
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भारत…लोकतंत्र की जननी है… लोकतंत्र हमारे DNA में है: PM @narendramodi pic.twitter.com/2GdyoGnqVP
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विकसित भारत की यात्रा को गति देने के लिए ऐसा रथ चाहिए… pic.twitter.com/Oz81LjdNc5
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आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष-बिंदु की साक्षी बन रही है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर ध्वजारोहण उत्सव का यह क्षण अद्वितीय और अलौकिक है। सियावर रामचंद्र की जय! https://t.co/4PPt0rEnZy
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आज अयोध्या में रामलला मंदिर के ध्वजारोहण अनुष्ठान से पूर्व मंदिर परिसर में सप्त मंदिरों के दर्शन कर आशीर्वाद लेने का सौभाग्य भी मिला। महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज एवं माता शबरी के सप्त मंदिरों से वह बोध एवं भक्ति… pic.twitter.com/SkyS8BmYXD
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सप्त मंदिरों के सभी सात ऋषियों एवं महा भागवतों की उपस्थिति से ही रामचरित पूर्ण होता है। महर्षि वशिष्ठ एवं महर्षि विश्वामित्र ने प्रभु रामलला के विद्याध्ययन की लीला पूरी कराई। महर्षि अगस्त्य से वन गमन के समय ज्ञान चर्चाएं हुईं एवं राक्षसी आतंक के विनाश का मार्ग प्रशस्त हुआ। आदिकवि… pic.twitter.com/m1Fl5WwBQ4
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Today, before the Dharma Dhwajarohan Utsav at the Shri Ram Janmabhoomi Mandir in Ayodhya, I was blessed with the opportunity to pray and seek blessings at the Sapt Mandir complex within the temple premises. pic.twitter.com/9lZ1cdXlgw
— Narendra Modi (@narendramodi) November 25, 2025
These seven sacred shrines, dedicated to Maharishi Vashishtha, Maharishi Vishwamitra, Maharishi Agastya, Maharishi Valmiki, Devi Ahalya, Nishadraj and Mata Shabari offer us both wisdom and devotion. It is this divine grace that helps us become worthy of following the ideals of… pic.twitter.com/eXuQ8sb9K9
— Narendra Modi (@narendramodi) November 25, 2025
अयोध्या के पावन धाम में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला अनुभव रहा। शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ यह अनुष्ठान हमारे सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के नए अध्याय का उद्घोष है। राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के… pic.twitter.com/1uwYN2NXHW
— Narendra Modi (@narendramodi) November 25, 2025
To witness the Dharma Dhwajarohan Utsav at Shri Ram Janmabhoomi Mandir is a moment crores of people in India and the world have waited for. History has been made in Ayodhya and this inspires us even more to walk the path shown by Prabhu Shri Ram. pic.twitter.com/3K9j6CQS68
— Narendra Modi (@narendramodi) November 25, 2025
आज अयोध्या में माता अन्नपूर्णा मंदिर में पूजा-अर्चना का सौभाग्य प्राप्त हुआ। देवी मां से समस्त देशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की। माता अन्नपूर्णा अन्न, आनंद और अभय की अधिष्ठात्री देवी हैं। मेरी प्रार्थना है कि उनका आशीर्वाद, विकसित भारत के हर प्रयास को यश और… pic.twitter.com/11Q1ofjRE7
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अलौकिक श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्री राम परिवार के दर्शन का सुअवसर मिला। यह क्षण श्रद्धा और भक्ति से भावविभोर कर गया। प्रभु श्री राम, माता जानकी, शेषावतार लक्ष्मण जी और सकल परिवार का दिव्य ये स्वरूप, भारत की चेतना की साक्षात प्रतिमूर्ति सा है। ये असंख्य रामभक्तों की तपस्या का… pic.twitter.com/HV2TKciM04
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अयोध्या की पावन भूमि पर दिव्य-भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्री राम लला के दर्शन-पूजन का अलौकिक क्षण मन को अद्भुत आनंद से भर गया। रामलला की ये बाल प्रतिमा, भारत की चेतना का जागृत स्वरूप है। हर बार रामलला का ये दिव्यतम विग्रह, मुझे एक असीम ऊर्जा देने का माध्यम बनता है। ये… pic.twitter.com/AUj3mHdfdT
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श्री राम लला मंदिर के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा और उनका दिव्य प्रताप धर्म ध्वजा के रूप में दिव्यतम-भव्यतम श्री राम जन्मभूमि मंदिर में प्रतिष्ठापित हुआ है। ये धर्म ध्वजा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का प्रतीक है। pic.twitter.com/MO4YMod4Su
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मुझे बहुत खुशी है कि राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की चेतना स्थली बन रहा है। हर देशवासी से मेरा आग्रह है कि वे यहां सप्तमंदिर के दर्शन अवश्य करें, जो हमारी आस्था के साथ-साथ मित्रता, कर्तव्य और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को दर्शाता है। pic.twitter.com/gTio9Vsf7o
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राम एक मूल्य हैं, एक मर्यादा हैं, एक दिशा हैं। भारत को 2047 तक विकसित और समाज को सामर्थ्यवान बनाने के लिए हमें अपने भीतर के राम की प्राण-प्रतिष्ठा करनी होगी। pic.twitter.com/OCof5lUyx6
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मैं इसलिए कहता हूं कि हमारे देश को आगे बढ़ना है तो हमें अपनी विरासत पर गर्व करना होगा… pic.twitter.com/ZzQsmZ0pSU
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भारत के हर घर में, हर भारतीय के मन में और भारतवर्ष के हर कण में राम हैं। लेकिन गुलामी की मानसिकता इतनी हावी हो गई कि प्रभु राम को भी काल्पनिक घोषित किया जाने लगा। pic.twitter.com/x8uEZ37r5N
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हमें वैसा भारत बनाना है, जो रामराज्य से प्रेरित हो। ये तभी संभव है, जब स्वयंहित से पहले देशहित हो और राष्ट्रहित सर्वोपरि हो। pic.twitter.com/lVGgOWWJ0A
— Narendra Modi (@narendramodi) November 25, 2025