पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जैव-चिकित्सीय अनुसंधान करियर कार्यक्रम (बीआरसीपी), चरण-III को जारी रखने की मंज़ूरी दे दी है। यह कार्यक्रम जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और वेलकम ट्रस्ट (डब्ल्यूटी), ब्रिटेन और एसपीवी, इंडिया अलायंस के बीच तीसरे चरण (2025-26 से 2030-31 तक, और अगले छह वर्षों (2031-32 से 2037-38 तक) के लिए साझेदारी में कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य 1500 करोड़ रुपये की कुल लागत से 2030-31 तक स्वीकृत फ़ेलोशिप और अनुदान प्रदान करना है, जिसमें डीबीटी और डब्ल्यूटी, ब्रिटेन क्रमशः 1000 करोड़ रुपये और 500 करोड़ रुपये का योगदान देंगे।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने कौशल और नवाचार को बढ़ावा देने के विकसित भारत के लक्ष्यों के अनुरूप, जैव-चिकित्सीय अनुसंधान करियर कार्यक्रम (बीआरसीपी) के तीसरे चरण की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम अत्याधुनिक जैव-चिकित्सीय अनुसंधान के लिए शीर्ष स्तरीय वैज्ञानिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहन प्रदान करेगा और नवाचार को व्यावहारिक समाधान में बदलने (ट्रांसलेशनल इनोवेशन) के लिए अंतःविषयक अनुसंधान को बढ़ावा देगा। यह वैश्विक प्रभाव वाली विश्व स्तरीय जैव-चिकित्सीय अनुसंधान क्षमता विकसित करने के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले अनुसंधान का समर्थन करने वाली प्रणालियों को भी मजबूत करेगा और वैज्ञानिक क्षमता में क्षेत्रीय असमानताओं को कम करेगा।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने 2008-2009 में मंत्रिमंडल की मंज़ूरी से, वेलकम ट्रस्ट (डब्ल्यूटी), ब्रिटेन के साथ साझेदारी में, डीबीटी/वेलकम ट्रस्ट इंडिया अलायंस (इंडिया अलायंस), एक समर्पित विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के माध्यम से “जैव-चिकित्सीय अनुसंधान करियर प्रोग्राम” (बीआरसीपी) की शुरुआत की थी, जो विश्व स्तरीय मानकों पर जैव चिकित्सा अनुसंधान के लिए भारत में आधारित अनुसंधान फेलोशिप प्रदान करता है। इसके बाद, 2018/19 में विस्तारित पोर्टफोलियो के साथ चरण II लागू किया गया।
चरण-III में, निम्नलिखित कार्यक्रमों को लागू करने का प्रस्ताव है: i.) बुनियादी, नैदानिक और जन स्वास्थ्य में प्रारंभिक करियर और मध्यवर्ती अनुसंधान फेलोशिप। ये विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं और एक वैज्ञानिक के शोध करियर के प्रारंभिक चरणों के लिए तैयार किए गए हैं। ii.) सहयोगात्मक अनुदान कार्यक्रम, इनमें भारत में मज़बूत रिसर्च ट्रैक रिकॉर्ड वाले क्रमशः प्रारंभिक और मध्य-वरिष्ठ करियर शोधकर्ताओं के लिए 2-3 अन्वेषक टीमों के लिए करियर विकास अनुदान और उत्प्रेरक सहयोगात्मक अनुदान शामिल हैं। iii) मुख्य शोध प्रयासों को मज़बूत करने के लिए अनुसंधान प्रबंधन कार्यक्रम। चरण III में मेंटरशिप, नेटवर्किंग, जन सहभागिता को मज़बूत करने और नई एवं नवोन्मेषी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों को विकसित करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
अनुसंधान फेलोशिप, सहयोगात्मक अनुदान और अखिल भारतीय स्तर पर कार्यान्वित अनुसंधान प्रबंधन कार्यक्रम मिलकर वैज्ञानिक उत्कृष्टता, कौशल विकास, सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे। अपेक्षित परिणामों में 2,000 से अधिक छात्रों और पोस्टडॉक्टरल फेलो को प्रशिक्षित करना, उच्च-प्रभावी प्रकाशन तैयार करना, पेटेंट योग्य खोजों को सक्षम बनाना, समकक्ष मान्यता प्राप्त करना, महिलाओं को मिलने वाले समर्थन में 10-15% की वृद्धि, 25-30% सहयोगात्मक कार्यक्रमों को टीआरएल4 और उससे ऊपर के स्तर तक पहुँचाना और टियर-2/3 परिवेश में गतिविधियों और सहभागिता का विस्तार शामिल है।
चरण I और II ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर के जैव चिकित्सा विज्ञान के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित किया। विज्ञान में भारत का बढ़ता निवेश और वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में इसकी बढ़ती भूमिका रणनीतिक प्रयासों के एक नए चरण की मांग करती है। पहले के चरणों के लाभों को आगे बढ़ाते हुए, चरण III राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिभा, क्षमता और रूपांतरण में निवेश करेगा।
***
पीके/केसी/आरके
Cabinet’s approval for Phase-III of the Biomedical Research Career Programme will nurture scientific talent, support fellowships, collaborative grants and build world-class biomedical research capacity across India. https://t.co/RG4hDJ4s11
— Narendra Modi (@narendramodi) October 1, 2025