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अंतर्राष्ट्रीय बुद्ध पूर्णिमा दिवस समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री का संबोधन


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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि भगवान बुद्ध का प्रेम एवं करुणा का शाश्वत संदेश दुनिया को युद्ध एवं हिंसा की समस्याओं से निजात दिलाने में मददगार साबित हो सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “अगर युद्ध से मुक्ति चाहिए, तो बुद्ध की राह पर मिलेगी।”

प्रधानमंत्री ने आज नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय बुद्ध पूर्णिमा दिवस समरोह के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि पूरी दुनिया ने यह स्वीकार किया है कि 21वीं सदी एशिया की शताब्दी साबित होगी। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के उपदेश एशिया के लिए प्रेरणा एवं मार्गदर्शक हैं, क्योंकि इसने दुनिया को टकराव एवं घृणा की समस्याओं से मुक्ति की राह दिखाई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज इस अवसर पर उपस्थित जन समूह भगवान बुद्ध की जन्म भूमि नेपाल में हाल ही में आए भूकंप से मची तबाही से निश्चित तौर पर वाकिफ है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही यह सभी लोगों के लिए भगवान बुद्ध के करुणा के संदेश का अनुसरण करने एवं नेपाल में भारी कष्ट का सामना कर रहे लोगों के आंसुओं को पोंछने का भी अवसर है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा बुद्ध व्यक्तिगत मुक्ति एवं सामाजिक सुधार दोनों से ही पूरी तरह अवगत थे। उन्होंने कहा कि “संघ” को दी गई अहमियत यह दर्शाती है कि महात्मा बुद्ध ने एक नेक काम के लिए लोगों को एकजुट करने के महत्व को किस तरह समझा था। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का उपदेश “अत्त दिप भव” यानी “अपनी रोशनी खुद बनो” प्रबंधन का एक महानतम पाठ है, जो महज तीन शब्दों में समाहित है।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में अपनी जापान एवं श्रीलंका यात्राओं के दौरान बौद्ध मंदिरों के दर्शन का स्मरण किया। उन्होंने चीन की अपनी यात्रा के दौरान बौद्ध मंदिरों के दर्शन को भी याद किया, जिस दौरान वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने कहा कि इन मंदिरों से जो दिव्य चेतना जुड़ी हुई है उसे निश्चित तौर पर दुनिया में अच्छाई के लिए एक शक्तिशाली ताकत में तब्दील किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग महात्मा बुद्ध को “पूर्व की रोशनी” कहा करते थे। प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही यह भी कहा कि उनके विचार में यह वास्तविकता से कम आकलन है, क्योंकि महात्मा बुद्ध वास्तव में समस्त विश्व के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

केन्द्रीय संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री महेश शर्मा, केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री श्री किरेन रिजीजू और अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव वेन. लामा लॉबजैंग भी इस अवसर पर उपस्थित थे।