पीएमइंडिया
इस्लामिक गणराज्य अफगानिस्तान के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. मोहम्मद अशरफ गनी, इस्लामिक गणराज्य अफगानिस्तान के माननीय विदेश मंत्री सलाहूद्दीन रब्बानी, मेरे सहयोगी मंत्री अरुण जेटली जी, कई देशों से आए विदेश मंत्री, प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखों, गणमान्य जनों,
नमस्कार। सत श्री अकाल।
अफगानिस्तान पर छठा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल प्रोसेस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करने का मुझे सम्मान प्राप्त हुआ।
मेरे लिए यह खुशी की बात इसलिए है क्योंकि मेरे साझेदार और दोस्त अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के साथ मुझे इस सम्मेलन का संयुक्त रूप से उद्घाटन का अवसर मिला।
अपने निमंत्रण को स्वीकार करने और इस सम्मेलन की शोभा बढ़ाने की खातिर मैं महामहिम गनी का शुक्रगुजार हूं। मेरे लिए यह भी एक बड़े सम्मान की बात है कि मुझे अमृतसर में आप सभी का स्वागत करने का अवसर प्राप्त हुआ, जहां सादगी और सुंदरता व्याप्त है, जहां सिखों का पवित्र गुरुद्वारा स्वर्ण मंदिर स्थित है।
यह सिख गुरुओं का वह स्थान है, जो उनके ध्यान और साधना से पवित्र बना है। यह शांति और मानवता का प्रतीक है जो सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला हुआ है। इस शहर की सड़कें और पार्क सिखों की महान वीरता और बलिदान की कहानियों को बयां करते हैं।
यह वह शहर है जिसके चरित्र को देशभक्ति और इसके निवासियों के उदार परोपकार, उद्यम, रचनात्मकता और कड़ी मेहनत द्वारा आकार दिया गया है। अफगानिस्तान के साथ गर्मजोशी और स्नेह के एक पुराने और दृढ़ संबंध को संजोकर रखने वाला शहर है अमृतसर।
15वीं सदी में अफगान के काबुल में अपने धर्म का उपदेश देने वालों में सिखों के पहले गुरु बाबा गुरु नानक देव जी के शिष्य भी शामिल रहे हैं।
आज भी, अफगान मूल के एक सूफी संत हजरत शेख का पंजाब में दरगाह है, जहां सभी धर्मों के लोग जाते हैं। इनमें अफगानिस्तान के आगंतुक भी शामिल हैं।
हमारे क्षेत्र के माध्यम से व्यापार, लोग और उनके विचारों का प्रवाह अक्सर अमृतसर से होकर गुजरता है, जहां से एशिया का सबसे पुराना ग्रांड ट्रंक रोड होकर जाता है। अमृतसर उस संपर्क को बहाल करता है जो अफगानिस्तान के चुनौतीपूर्ण समग्र विकास, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
गणमान्य जनों,
इस सदी की शुरुआत के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुदाय बड़े पैमाने पर अफगानिस्तान में जुड़ा हुआ है।
दुनिया भर की प्रमुख शक्तियां, क्षेत्रीय देश और संबंधित राष्ट्र राजनीतिक, सामाजिक, सैन्य, आर्थिक और विकासात्मक समर्थन के कई कार्यक्रमों के माध्यम से अफगानिस्तान का सहयोग कर रहे हैं।
आज फिर से हमारी यह जुटान शांति और अफगानिस्तान में राजनीतिक स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता को जाहिर करता है। हमारे ये शब्द और कार्य अपने समय के एक महत्वपूर्ण अधूरे मिशन को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। और, अफगानिस्तान में मदद करने के लिए निम्नलिखित प्रतिबद्धताएं हैं-
* अपनी सामाजिक, राजनीतिक और संस्थागत ढांचे का निर्माण और मजबूत करना ।
* क्षेत्र और नागरिकों को बाहरी खतरों से सुरक्षित रखना ।
* आर्थिक और विकास गतिविधियों को प्रेरणा देना ।
* और यह अपने लोगों के लिए एक स्थिर और समृद्ध भविष्य का निर्माण करना ।
वास्तव में, इस सम्मेलन की जो मंशा है ‘समृद्धि की प्राप्ति के लिए चुनौतियों की पहचान’, उपयुक्त है। हमें चुनौतियों की व्यापकता पर संदेह नहीं है। लेकिन हम समान रूप से सफल होने के लिए इसे निर्धारित करेंगे।
हमने कड़ी मेहनत के जरिय जो हासिल किया है, वह उसी का परिणाम है। लेकिन वह मिश्रित है और उसकी सफलता महत्वपूर्ण है। लेकिन इसके बावजूद अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
समय की मांग है कि हम अपने जमीन पर खड़े हों। हमने पिछले पंद्रह वर्षों में जो हासिल किया है उसकी सुरक्षा करनी होगी और आगे बढ़ना होगा।
क्योंकि यह सिर्फ अफगानिस्तान के भविष्य के विकास, लोकतंत्र, बहुलवाद की दृष्टि से निवेश नहीं किया गया है बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए किया गया है।
हमें और क्या कुछ करना है यह हमारी तत्परता के साथ प्रतिबिंबित होता है। क्या हमें अफगानिस्तान की इसलिए अनदेखी करनी चाहिए कि उसके नागरिक खुद शांति स्थापित करें और विकास करें? इन सभी सवालों के जवाब मौजूद हैं। प्रश्न का उत्तर दिए जाने की जरूरत है ताकि कार्यवाही की जा सके। और, इसके लिए अफगानिस्तान और उसके लोगों को सबसे पहले रखना होगा।
इसके लिए, पहला, यह एक अफगान के नेतृत्व वाली, अफगान के स्वामित्व वाली और अफगान नियंत्रित प्रक्रिया की कुंजी होगी। यही स्थायी समाधान की गारंटी है। दूसरा, हमें आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करने के लिए हमें सामुहिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी, जो आतंक और डर फैलाता है।
आतंकवाद और बाहर से प्रेरित अस्थिरता अफगानिस्तान की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए गंभीरतम खतरा में से एक है। आतंकवादी हिंसा का बढ़ता दायरा हमारे पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है। अफगानिस्तान में शांति की आवाज के लिए सिर्फ समर्थन पर्याप्त नहीं है।
एक दृढ़ कार्रवाई का समर्थन किया जाना चाहिए। यह समर्थन सिर्फ आतंकवाद की ताकतों के खिलाफ ही नहीं होना चाहिए बल्कि यह ऐसे लोगों के खिलाफ भी होना चाहिए, जो आतंकी ताकतों का समर्थन करते हैं, जो उन्हें आश्रय देते हैं, जो उन्हें प्रशिक्षण मुहैया कराते हैं और जो उन्हें वित्तीय मदद देते हैं।
अफगानिस्तान और हमारे क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ निष्क्रियता केवल आतंकवादियों और उनके आकाओं को प्रोत्साहित करेगी। तीसरा, अफगानिस्तान के विकास के लिए सामग्री सहायता को लेकर हमारे द्विपक्षीय और क्षेत्रीय प्रतिबद्धताओं एवं मानवीय जरूरतों को जारी रखना और आगे बढ़ाना चाहिए।
अफगानिस्तान को अपने बुनियादी ढांचे और संस्थागत क्षमता विकास के लिए हमें सहकारी प्रयासों का योगदान देना चाहिए।
चौथा, हमें अफगानिस्तान और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच मजबूत एवं सकारात्मक संबंधों का निर्माण करने के लिए सभी काम करने चाहिए।
अफगानिस्तान हमारे कनेक्टिविटी नेटवर्क के केंद्र में होना चाहिए न की केवल परिधीय होना चाहिए। हम अपनी तरफ से, दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच संपर्क को मजबूत बनाने के लिए अफगानिस्तान को एक केंद्र के रूप में देखते हैं। हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि अफगानिस्तान से अधिकतम जुड़ाव इसलिए है कि वह व्यापार, पूंजी और बाजार की क्षेत्रीय धमनी है जो अपने आर्थिक विकास और प्रगति का आश्वासन देता है। राष्ट्रपति गनी और मैं इस क्षेत्र में अन्य सहयोगियों के साथ व्यापार और परिवहन संबंधों को मजबूत बनाने की प्राथमिकता के आधार पर यहां जुटे हैं।
गणमान्य जनों,
भारत की तरफ से, अपने बहादुर अफगान भाइयों और बहनों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता निरपेक्ष और अटूट है। अफगानिस्तान और वहां के लोगों के कल्याण की बात हमारे दिल और दिमाग के करीब है।
छोटी-बड़ी परियोजनाओं में हमारी भागीदारी के सफल रिकॉर्ड मौजूद हैं, जो अफगानिस्तान में खुद बोलते हैं। हमारे सहयोग के सिद्धांत हमेशा जन केंद्रित होते हैं।
हमारे संयुक्त प्रयास का उद्देश्य निम्मनिलिखित हैं-
* हमारा उद्देश्य अफगानिस्तान के युवाओं को शिक्षित करना है, जो अपने कौशल से परिपूर्ण हों।
* हमार मकसद स्वास्थ्य देखभाल और कृषि में सुधार पर केंद्रित है।
* निर्माण के बुनियादी ढांचे और संस्थाओं का निर्माण।
* हम अफगानिस्तान के व्यापारियों और छोटे व्यवसायियों को भारत में अपार वाणिज्यिक और आर्थिक अवसरों के साथ संबंध जोड़ने की अनुमति देते हैं।
और, हमारे संपर्क और इस तरह के प्रयासों का लाभ अफगानिस्तान के हर कोने को मिलता है। हेरात का भारत-अफगानिस्तान मैत्री बांध, जिसे सलमा बांध भी कहा जाता है, का उद्घाटन कुछ ही दिन पहले किया गया है। यह बांध वहां लोगों के लिए आर्थिक गतिविधि को पुनर्जीवित करेगा।
काबुल में संसद भवन निर्माण अफगानिस्तान के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए हमारी मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। जरांज-डेलाराम राजमार्ग और चाबहार पर भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग, दक्षिण एशिया और उससे इतर मजबूत आर्थिक विकास के केन्द्रों के साथ अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में सक्षम होगा।
हम एक हवाई परिवहन गलियारे के माध्यम से भारत और अफगानिस्तान को जोड़ने की योजना तैयार कर रहे हैं।
राष्ट्रपति गनी और मैंने अपने द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त उपायों पर चर्चा की है। हम अतिरिक्त एक बिलियन अमेरिकी डॉलर के उपयोग से अफगानिस्तान में क्षमता और क्षमता निर्माण के लिए भारत द्वारा निर्धारित योजनाओं को विकसित करने की दिशा में प्रगति कर रहे हैं।
इससे जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों का विस्तार होगा। भारत की इन प्रतिबद्धताओं के अतिरिक्त, हम अफगानिस्तान के विकास के लिए अन्य समान विचारधारा वाले सहयोगियों के साथ काम करने के लिए रास्ते खोले हुए हैं।
हम इस साल जुलाई में नाटो के वॉरसॉ शिखर सम्मेलन एवं अक्टूबर में ब्रसेल्स और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को देखकर खुश हैं । अफगानिस्तान की और बड़े पैमाने पर सहायता के लिए हमारे प्रयासों का समर्पण जारी रहेगा।
इस दिशा में, हमने परियोजनाओं पर काम करके कई सबक सीखें और सर्वोत्तम प्रथाओं एवं हमारे साझा अनुभव आकर्षित करते हैं।
गणमान्य जनों,
हर दिन गुजरते हुए याद करते हैं कि अफगानिस्तान के सफल राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक बदलाव को प्राप्त करने में हम मदद कर रहे हैं। साथ ही एक और अधिक शांतिपूर्ण क्षेत्र एवं दुनिया निर्मित करने में हम भी अपने आप को मदद कर रहे हैं।
मुझे उम्मीद है कि आपके विचार विमर्श में, रचनात्मक उत्पादन और कार्रवाई के लिए रास्ते की तलाश में आगे यह मुद्दे शामिल होंगेः
* संघर्ष की जगह में सहयोग को बढ़ावा देने में,
* आतंकवाद की जगह सुरक्षा और जरूरत की जगह विकास ।
अफगानिस्तान को शांति का एक भूगोल बनाने के लिए फिर से हमें अपने आप को समर्पित करना होगा। एक ऐसी जगह, जहां शांति हो, समृद्धि और प्रगति हो और जहां लोकतंत्र एवं बहुलता की जीत हो।
It is a particular pleasure to jointly inaugurate this Conference with our friend and partner, President @ashrafghani of Afghanistan: PM
— PMO India (@PMOIndia) December 4, 2016
Since the turn of this century, the international community has extensively engaged in Afghanistan: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) December 4, 2016
Our gathering today re-affirms commitment of the international community to durable peace and lasting political stability in Afghanistan: PM
— PMO India (@PMOIndia) December 4, 2016
We must protect and build on the gains of the last fifteen years and march ahead: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) December 4, 2016
We must demonstrate strong collective will to defeat terror network that cause bloodshed and spread fear: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) December 4, 2016
Silence and inaction against terrorism in Afghanistan and our region will only embolden terrorists and their masters: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) December 4, 2016
We should all work to build stronger positive connectivity between Afghanistan and other countries of the region: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) December 4, 2016
On India’s part, our commitment to our brave Afghan brothers and sisters is absolute and unwavering: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) December 4, 2016
As India implements its additional commitments, we are open to work with other like-minded partners for the development of Afghanistan: PM
— PMO India (@PMOIndia) December 4, 2016