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आयरलैंड के प्रधानमंत्री के साथ संयुक्त प्रेस ब्रिफिंग के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के वक्‍तव्‍य का मूलपाठ

आयरलैंड के प्रधानमंत्री के साथ संयुक्त प्रेस ब्रिफिंग के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के वक्‍तव्‍य का मूलपाठ

आयरलैंड के प्रधानमंत्री के साथ संयुक्त प्रेस ब्रिफिंग के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के वक्‍तव्‍य का मूलपाठ

आयरलैंड के प्रधानमंत्री के साथ संयुक्त प्रेस ब्रिफिंग के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के वक्‍तव्‍य का मूलपाठ

आयरलैंड के प्रधानमंत्री के साथ संयुक्त प्रेस ब्रिफिंग के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के वक्‍तव्‍य का मूलपाठ


माननीय तोइसेच इंडा केन्नी,

मीडिया के सदस्य,

आयरलैंड में होना वास्तव में खुशी की बात है। संभव है यह छोटी सी यात्रा ऐतिहासिक बन जाए। 59 वर्ष बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह आयरलैंड यात्रा है।

शानदार तरीके से स्वागत और जोरदार ढंग से आतिथ्य के लिए आपका धन्यवाद। भारत के लिए दोस्ती शब्द का इस्तेमाल करने पर धन्यवाद।

भारत और आयरलैंड के बीच बहुत से मामलों में एक साझापन है। हम अपने साझा औपनिवेशिक इतिहास के आलेखों की तुलना कर सकते हैं। हमारे संविधानों में कुछ पावन चीजों को लेकर एक साझापन है। भारतीय संविधान में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं।

आयरलैंड के विद्वानों ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और पहला लिंग्विस्टि सर्वे ऑफ इंडिया जैसे संस्थान हमें दिए हैं। आज, भारत में खेल निर्माताओं ने आयरलैंड के रग्बी के जूनून को कायम रखा है।

आयरिश और भारतीय लोगों के बीच संबंधों को रवीन्द्रनाथ टैगोर और डब्ल्यू.बी येट्स की दोस्ती और सिस्टर निवेदिता के आध्यात्मिक योगदान ने मजबूती प्रदान की है।

आज 26,000 भारतीय, आयरिश समुदाय का जीवंत हिस्सा बन चुके हैं। और, एयर इंडिया के कनिष्क विमान में विस्फोट के शिकार लोगों की याद में यहाँ एक स्‍मारक है। त्रासदी की 30वीं बरसी पर स्मारक बनाकर उन्हें सम्मान देने के लिए हम एक बार फिर आपका शुक्रिया अदा करते हैं।

हमारे मूल्य एवं हमारी महत्वाकांक्षाएं और आज हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, और कुछ दुखद स्मृतियां हमें बांधे रखती हैं।

भारत और आयरलैंड के बीच साझेदारी और सहयोग के अवसरों की तलाश की जानी चाहिए।

भारत और आयरलैंड एशिया एवं यूरोप के सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैं।

वैश्विक और क्षेत्रीय अनिश्चितताओं के बावजूद बढ़ रहे अपने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों से हम खुश हैं। हमारी आर्थिक साझेदारी को सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स, कृषि एवं स्वच्छ ऊर्जा पर केंद्रित करके और मजबूत बनाया जा सकता है।

भारत के वाणिज्यिक हितों और चुनौतियों के लिए यूरोपीय संघ की अधिक से अधिक संवेदनशीलता, भारत-यूरोपीय संघ व्यापक व्यापार एवं निवेश करार पर फिर से चर्चा शुरू करने में मदद करेगी।

भारत और आयरलैंड डिजिटल युग में अवसरों का लाभ लेने के लिए और आदर्श उत्पादक साझेदारी बनाने के लिए विश्‍व के मानचित्र में अहम स्थानों पर स्थित हैं। मुझे भरोसा है कि सहयोग की रूपरेखा तैयार करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी पर हमारे संयुक्त कार्य समूह की जल्द बैठक होगी।

मुझे यह भी उम्मीद है कि भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों की जरूरतों के लिहाज से आयरलैंड अपनी वीजा नीति को संवेदनशील बनाएगा। मैंने एक सामाजिक सुरक्षा समझौते की जरूरत से भी अवगत करा दिया जिससे दोनों देशों के पेशेवरों को बड़ी मदद मिलेगी।

मुझे खुशी है कि हम दोनों देशों के बीच सीधी विमान सेवा जल्द शुरू करेंगे। इससे न केवल हमारे व्यापार संबंधों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हमारे पर्यटन संबंधों को भी बढ़ावा मिलेगा, जो पहले ही प्रतिवर्ष 14 फीसदी की दर से बढ़ रहा है।

विज्ञान व प्रौद्योगिकी और शिक्षा दो अन्य ऐसे क्षेत्र हैं, जहां हमारा अच्छे सहयोग का इतिहास रहा है। इसे हम और बेहतर बना सकते हैं। कर्नाटक में आयरलैंड का विज्ञान केन्‍द्र होना आपसी सहयोग का एक बड़ा उदाहरण है।

मैं अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों, जिसमें आतंकवाद एवं कट्टरता भी शामिल है और यूरोप व एशिया की स्थिति पर व्यापक रूप से विचारों के आदान प्रदान किए जाने से खुश हूं। हमारी चर्चा में भारत और आयरलैंड के बीच करीबी साझेदारी पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों, अंतरराष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता की लगातार वकालत की गई।

इस संदर्भ में हमने 21वीं सदी में इन चुनौतियों का सामना करने में संयुक्त राष्ट्र और इसकी सुरक्षा परिषद की भूमिका पर भी चर्चा की। भारत और आयरलैंड शांति अभियानों में भागीदार रहे हैं।

मैं सतत विकास लक्ष्यों में नेतृत्व के लिए आयरलैंड को धन्यवाद देता हूं।

मैंने विशेषकर संयुक्त राष्ट्र के 70वें वर्ष में अंतर-सरकारी वार्ता के सफल समापन के लिए निश्चित समय सीमा के भीतर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के वास्ते आयरलैंड से सहयोग मांगा है। मैंने सुरक्षा परिषद में सुधार कर भारत की सदस्यता के लिए भी आयरलैंड से सहयोग मांगा है।

भारत और आयरलैंड शांतिप्रिय देश हैं। हम दोनों परमाणु अप्रसार पर सबसे आगे रहे हैं। हम इस मुद्दे पर आयरलैंड की मजबूत और सैद्धांतिक स्थिति का सम्मान करते हैं। भारत आजादी के बाद से ही वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण पर एक अग्रणी आवाज बना रहा है। हम उस लक्ष्य के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध हैं। परमाणु अप्रसार पर हमारी साख और रिकॉर्ड भी किसी से पीछे नहीं है।

2008 में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से भारत के लिए विशेष छूट प्राप्त करने को लेकर आयरलैंड का समर्थन महत्वपूर्ण था। इससे सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए भारत की भारी ऊर्जा की मांग को पूरा करने का एक बड़ा विकल्प मिल गया है।

अब मैंने एनएसजी और अन्य अंतरराष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं में भारत की सदस्यता के लिए आयरलैंड के समर्थन की मांग की है। यह भारत की सदस्यता के लिए हमारे द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार के प्रयासों को मजबूत करेगा।

माननीय श्री प्रधानमंत्री, मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमें भारत और आयरलैंड में रिश्तों की विशाल क्षमता का अहसास करने के लिए और अधिक निवेश करना चाहिए। भारत एशिया का पहला ऐसा देश है जिसके साथ आपने राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं। अब हम एशिया में आपका भरोसा बन सकते हैं। इसी तरह आयरलैंड भारत के लिए यूरोप का प्रवेश द्वार बन सकता है और वह अटलांटिक तक सेतु का काम कर सकता है।

इस मेहमाननवाजी के लिए आपका एक फिर से धन्यवाद। अब आपकी भारत की यात्रा को भी दो दशक हो चुके हैं। हम आपका भारत में स्‍वागत करने को उत्‍सुक हैं।