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एपीटीए के चौथे दौर के समझौते के तहत टैरिफ रियायतों के आदान-प्रदान को कैबिनेट की मंजूरी


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एशिया प्रशांत व्यापार समझौते (एपीटीए) के चौथे दौर के समझौते के तहत टैरिफ रियायतों के आदान-प्रदान को स्वीकृति प्रदान की। एशिया प्रशांत व्यापार समझौते को आमतौर पर बैंकॉक समझौता कहा जाता है। एशिया प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग के तहत इसकी शुरुआत टैरिफ रियायतों के आदान-प्रदान के जरिये की गइ थी ताकि व्यापार का विस्तार किया जा सके। इसके दायरे में एशिया प्रशांत के विकासशील देश आते हैं। एपीटीए में अभी छह देश हैं जिनमें बांग्लादेश, चीन, भारत, लाओ, कोरिया गणराज्य और श्रीलंका शामिल है।

चूंकि यह एक तरजीही व्यापार समझौते है, इसलिए व्यापार समझौते के दौरान टैरिफ रियायतों को विस्तार दिया गया है और ऐसा समय समय पर किया जाता रहा है। अभी तक ऐसा तीन बार किया जा चुका है। तीसरे दौर के लिए भारत ने 570 टैरिफ लाइनों पर टैरिफ वरीयताओं की पेशकश की है।

कैबिनेट ने 33.45% की एक औसत एमओपी के साथ भारत के प्रस्ताव का शुल्क देय राष्ट्रीय टैरिफ लाइनों की 28.01% की मंजूरी दे दी है। इस समझौते के तहत रियाततों का विस्तार होगा। एपटीए में सातवें देश मंगोलिया को शामिल करने के प्रस्ताव को अनुमोदन किया गया है। इसके लिए एपीटीए की प्रस्तावना में संशोधन का प्रस्ताव किया गया था। अन्य संशोधनों समझौते के उत्पत्ति के क्षेत्रवार नियम भी अनुमोदित किया गया है। एपीटीए की मंत्रिस्तरीय परिषद के चौथे सत्र की बैठक जल्द ही आयोजित की जाएगी, इसमें औपचारिक रूप से सभी फैसलों को लागू किया जाएगा।