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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रचलित और अनावश्यक कानूनों को निरस्त करने को मंजूरी दी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 105 अधिनियमों को निरस्त करने के लिए निरस्त और संशोधन विधेयक, 2017 को लाए जाने को अपनी मंजूरी दे दी है।

पृष्ठभूमि:

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा गठित दो सदस्यीय समिति विधि आयोग और विधायी विभाग ने निरस्त किए जाने के लिए 1824 निरर्थक और अप्रचलित केंद्रीय अधिनियमों की पहचान की है।
भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के साथ विचार-विमर्श और सावधानीपूर्वक पड़ताल करने के बाद संसद द्वारा 1175 केंद्रीय अधिनियमों को निरस्त करने के लिए (मई 2014 से अगस्‍त 2016 की अवधि के दौरान) चार अधिनियमों को अधिनियमित किया गया है । जो क‍ि-

i. निरस्त एवं संशोधन कानून, 2015 (2015 का 17वां कानून) कानून निरस्त, निरस्त एवं संशोधन कानून (द्वितीय), 2015 (2015 का 19वां कानून), 90 कानून निरस्‍त;
ii. विनियोग अधिनियम ( निरस्‍त)ण्‍ 2016 (2016 का 22वां) 756 निरस्‍त;
iii. रेलवे विनियोग सहित विनियोग अधिनियम;
iv. निरस्त और संशोधन कानून, 2016 (2016 का 23वां कानून) 294 कानून निरस्‍त

1824 अधिनियमों में से 227 अधिनियमों (राष्‍ट्रपति शासन के दौरान संसद द्वारा राज्यों के लिए अधिनियमित विनियोग अधिनियमों सहित) की पहचान राज्‍य सरकार द्वारा निरस्‍त कराने के लिए की गई है और इसके लिए जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया गया है।
केंद्र सरकार ने बाकी बचे 422 केंद्रीय कानूनों को विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के पास उनके संबंधित मंत्रालयों/विभागों से संबंधित अधिनियमों को निरस्त किए जाने पर टिप्पणी करने के लिए भेजा था। इनमें से अभी तक विधायी विभाग समेत 73 मंत्रालयों/विभागों ने अपनी टिप्पणी की है, जिनमें उन्होंने 105 अधिनियमों को निरस्त करने पर सहमति जताई है जबकि वे 139 अधिनियमों को हटाने जाने से सहमत नहीं हैं। मंत्रालयों/विभागों से मिली टिप्पणी के आधार पर इस सरकार द्वारा निरस्त किए जाने के लिए 105 अधिनियमों की पहचान की गई है।