पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल नेअमेरिकी लैंड रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट डाटा के आदान प्रदान में सहयोग और उपयोग के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और संयुक्त राज्य अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) को स्वीकृति प्रदान की। इस समझौते ज्ञापन पर बेलारूस में 9 जुलाई 2016 को हस्ताक्षर हुए थे।
इस समझौते के बाद इसरो भारत में यूएसजीएस लैंडसैट-7 और 8 प्राप्त करने और यूएसजीएस इसरो के रिसोर्ससैट -2 (एडब्ल्यूआईएफएस और लिस तृतीय) अमेरिका क्षेत्र का डेटा प्राप्त करने में सक्षम होंगे।
पृष्ठभूमिः
इसरो के अंतरिक्ष विभाग ने असैन्य अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग के लिए अमेरिका के कई संगठनों नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिस्ट्रेशन (नासा), राष्ट्रीय समुद्रीय और वायुमंडलीय प्रशासन(एनओएए), संयुक्त राज्य अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) सक्रिय रूप से संपर्क बनाए रखा। भारतीय वैज्ञानिकों ने यूएसजीएस द्वारा संचालित उपग्रहों के लैंडसैट श्रृंखला के डेटा का भारत के सुदूर संवेदन कार्यक्रम की स्थापना के दौरान इस्तेमाल किया था।शादनगर के अपने केंद्र के जरिये इसरो ने 1984 से 2001 तक लैंडसैट डैटा प्राप्त किए। यूएसजीएस ने फरवरी 2013 में लैंडसैट -8 उपग्रह का शुभारंभ किया था। इसरो ने भारत में सीधे लैंडसैट-8 डेटा प्राप्त करने में रुचि दिखाई है जबकि यूएसजीएस ने इसरो के रिसोर्ससैट -2 उपग्रह से डेटा प्राप्त करने में रुचि जाहिर की है।
इसरो औऱ यूएसजीएस ने बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों समान हित वाले सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए एक दूसरे के उपग्रहों के इस्तेमाल कर सकेंगे।