प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) के लिए केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) को पांच वर्ष की अवधि यानी 01.04.2026 से 31.03.2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 3,788.04 करोड़ रुपये (केंद्रीय हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा 1,434.89 करोड़ रुपये) है। केंद्रीय हिस्से को निर्भया फंड से वित्त पोषित किया जाएगा।
अनुमोदित योजना की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
प्रमुख प्रभाव:
योजना को जारी रखने से निम्नलिखित प्रमुख प्रभाव पड़ने की उम्मीद है:
कार्यान्वयन रणनीति और लक्ष्य:
इस योजना को न्याय विभाग द्वारा संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के समन्वय से लागू किया जाएगा। प्रमुख कार्यान्वयन रणनीतियाँ और लक्ष्य इस प्रकार हैं:
इस योजना के प्राथमिक लाभार्थी महिलाएं और बच्चे हैं जो पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत दुष्कर्म और अपराधों की शिकार हैं।
इस योजना को 850 एफटीएससी तक कवर करने के लिए विस्तारित करने का प्रस्ताव है। इस विस्तार का उद्देश्य अतिरिक्त जिलों को शामिल करना है, जिनकी पहचान दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के लंबित मामलों के आधार पर की जाएगी।
पृष्ठभूमि:
यह योजना 02.10.2019 से प्रचालनगत है। दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के मामलों के त्वरित निपटान के लिए समर्पित फास्ट ट्रैक अदालतों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए इसे लगातार विस्तार दिया गया है। योजना की स्थिति इस प्रकार है:
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लॉन्च की तारीख |
02.10.2019 |
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भाग लेने वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश |
29 |
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विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित कुल कार्यात्मक एफटीएससी |
779 जिसमें 399 विशेष पॉक्सो न्यायालय शामिल हैं |
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स्कीम शुरू होने के बाद से निपटाए गए कुल मामले |
4,02,457 |
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विस्तारित योजना के तहत एफटीएससी की प्रस्तावित संख्या |
850 |
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स्वीकृत निरंतरता अवधि |
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विवरण |
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इस योजना ने दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के मामलों के निपटान के लिए समर्पित न्यायालय प्रदान करके यौन अपराधों के अपराध के लिए न्यायिक प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करने में योगदान दिया है। न्याय विभाग नियमित रूप से एफटीएससी डैशबोर्ड के माध्यम से एफटीएससी के कामकाज की निगरानी करता है, उच्च न्यायालयों से समय-समय पर डेटा संग्रह करता है और संबंधित हितधारकों के साथ समीक्षा बैठकें करता है। इस योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने से न्यायपालिका की संस्थागत क्षमता और मजबूत होने, यौन अपराध के लंबित मामलों को कम करने और पीड़ितों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को समय पर न्याय सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों के लिए केंद्र प्रायोजित योजना आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के अनुसरण में 02.10.2019 को शुरू की गई थी और भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 25.07.2019 के निर्देशों के अनुपालन में स्वत: संज्ञान रिट (आपराधिक) संख्या 1/2019 में शुरू की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत 100 से अधिक लंबित मामलों वाले जिलों में विशिष्ट विशेष न्यायालयों की स्थापना का निर्देश दिया था।
तदनुसार, केंद्र सरकार ने विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित समर्पित एफटीएससी स्थापित करने की योजना शुरू की। पोक्सो अधिनियम, 2012 के तहत दुष्कर्म और अपराधों से संबंधित लंबित मामलों के समयबद्ध निपटान पर बल दिया गया।
यह योजना आरंभ में एक वर्ष की अवधि के लिए शुरू की गई थी और बाद में इसे 31.03.2026 तक बढ़ा दिया गया था। वर्तमान अनुमोदन योजना को पांच वर्ष की अवधि यानी 31.03.2031 तक जारी रखना सुनिश्चित करता है।
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