पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रामीण विकास मंत्रालय और एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र एकीकृत ग्रामीण विकास केंद्र (सीआईआरडीएपी) के बीच हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीएंडपीआर) में सीआईआरडीएपी के केंद्र की स्थापना के लिए समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है।
एनआईआरडीएंडपीआर परिसर में सीआईआरडीएपी केंद्र से एनआईआरडीएंडपीआर को ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में विशेषज्ञता रखने वाले संगठनों के साथ नेटवर्किंग के प्रत्यक्ष ज्ञान का लाभ मिलेगा, जो बदले में एनआईआरडीएंडपीआर के लिए संस्थागत ज्ञान के भंडार का निर्माण करने में मदद करेगा। यह केंद्र सीआईआरडीएपी सदस्य देशों (सीएमसी) में अन्य मंत्रालयों/संस्थानों के साथ संबंधों के माध्यम से एनआईआरडीएंडपीआर को इस क्षेत्र में अपनी हैसियत बढ़ाने में मदद करेगा। एनआईआरडीएंडपीआर के फैकल्टी और मंत्रालय के अधिकारी एक दूसरे के यहां की यात्रा के जरिए सीएमसी के सर्वोत्तम अभ्यासों से लाभान्वित होंगे। केंद्र का काम एकीकृत ग्रामीण विकास विशेषकर सीएससी के सदस्य देशों में गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रमों के कार्यान्वयन पर ध्यान देना है।
पृष्ठभूमि
सीआईआरडीएपी एक क्षेत्रीय अंतर-सरकारी एवं स्वायत्त संस्थान है। यह एशिया प्रशांत क्षेत्र के देशों की पहल पर संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) तथा संयुक्त राष्ट्र की दूसरी संस्थाओं एवं दानदाताओं के सहयोग से 1979 में अस्तित्व में आया। भारत इस संगठन के प्रमुख संस्थापक सदस्यों में से एक है। इसका मुख्यालय बांग्लादेश के ढाका में है। सीआईआरडीएपी का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और अनुसंधान क्रिया, प्रशिक्षण, सूचना प्रसार आदि के जरिए एकीकृत ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाकर अपने सदस्य देशों के लिए एक सेवारत संस्था के रूप में काम करना है।
सीआईआरडीएपी का इंडोनेशिया के जकार्ता में एक उप-क्षेत्रीय कार्यालय है। दक्षिण पूर्व एशिया (एसओसीएसईए) में सीआईआरडीएपी का यह उप-क्षेत्रीय कार्यालय इंडोनेशिया के जकार्ता में 1997 को स्थापित किया गया। इसका उद्देश्य दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र से संबंधित प्रशिक्षण अनुसंधान और पायलट परियोजना का संचालन करने के लिए सीआईआरडीएपी के सद्स्यों और इसके स्रोतों की संख्या के विस्तार में मदद करना और उन्हें बढ़ाना था। एशिया प्रशांत क्षेत्र में 46 देश हैं, इसलिए सीआईआरडीएपी में विस्तार की विस्तृत क्षमता है, इसके लिए उन्हें सीआईआरडीएपी केंद्रों की मदद की आवश्यकता होगी।