पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कम्पनी अधिनियम, 1956/2013, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 और अन्य सम्बद्ध अधिनियमों के प्रावधानों के अनुसार हिंदुस्तान केबल्स लिमिटेड (एचसीएल), कोलकाता को बंद करने की मंजूरी प्रदान की। कम्पनी के कर्मचारियों को 2007 के वेतनमानों के अनुसार धारणात्मक (नोशनल) आधार पर आकर्षक स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति/वीएसएस पैकेज और अन्य कर्मचारी संबंधी देयताओं का भुगतान किया जाएगा। इनमें अप्रैल, 2015 से वीआरएस/वीएसएस पर कम्पनी से पृथक होने की तारीख तक वेतन और भत्तों का भुगतान किया जाएगा। बीमार/घाटे में चल रहे केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसईज़) को समयबद्ध रूप में बंद करने और उनकी चल एवं अचल परिसम्पत्तियों का निपटान करने के लिए लोक उद्यम विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन किया जाएगा।
कम्पनी को बंद करने के लिए कुल 1309.90 करोड़ रुपये की नकदी और 3467.15 करोड़ रुपये मूल्य के गैर-नकदी संसाधनों की आवश्यकता होगी। इसमें 30.09.2016 को बकाया भारत सरकार की इक्विटी पूंजी को (ब्याज सहित) ऋण में रूपांतरित करना भी शामिल है।
कम्पनी के कंसोर्टियम ऋणदाताओं के रूप में भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में एचसीएल, कोलकाता के सुरक्षित ऋणदाताओं ने उदारतापूर्वक सहायता की है। एकबारगी समाधान (ओटीएस) के अंतर्गत ब्याज से पूरी तरह मुक्ति और उनके द्वारा रखी गई सभी समनुरूप प्रतिभूतियों के निपटारे में 305.63 करोड़ रूपये के मूलधन का निपटान शामिल है।
कम्पनी में जनवरी, 2003 से कोई उत्पादन गतिविधि संचालित नहीं की जा रही है। कम्पनी के कर्मचारी 1997 के वेतनमानों में हैं। वेतन और भत्तों का भुगतान न होने के कारण कर्मचारियों के लिए अस्तित्व बनाए रखना और अपने वित्तीय दायित्व पूरे करना कठिन हो गया है। वीआरएस/वीएसएस पैकेज और अन्य बकाया देयताओं का निपटारा होने के साथ कर्मचारी अपने वर्तमान वित्तीय संकट से बाहर आ सकेंगे। इससे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्वास में भी मदद मिलेगी। कम्पनी को वर्तमान में समयबद्ध तरीके से बंद किए जाने से उसकी बहुमूल्य परिसम्पत्तियों का इस्तेमाल अनुकूलतम तरीके से किया जा सकेगा।
पृष्ठभूमि
एचसीएल की स्थापना 1952 में की गई थी। इसकी चार विनिर्माण इकाइयां रूपनारायणपुर (पश्चिम बंगाल), हैदराबाद (तेलंगाना), नैनी (उत्तर प्रदेश) और नरेंद्रपुर (पश्चिम बंगाल) में स्थित हैं। कम्पनी का पंजीकृत कार्यालय कोलकाता में है। इसकी स्थापना सरकारी स्वामित्व वाली कम्पनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल के लिए दूरसंचार केबल्स के विनिर्माण की जरूरतें पूरी करने के लिए की गई थी। दूरसंचार प्रौद्योगिकी में तीव्र बदलाव (वाइर लाइन के स्थान पर वाइरलैस), के कारण दूरसंचार केबल्स की मांग में भारी कमी आई है। भारी उद्योग विभाग द्वारा कम्पनी को पटरी पर लाने के अनेक प्रयास किए गए, लेकिन उनमें कोई सफलता नहीं मिली। एचसीएल यूनिटों को रक्षा मंत्रालय/रक्षा उत्पादन विभाग में स्थानांतरित करने के प्रयास भी सफल नहीं हो पाए। कम्पनी को बंद करने का प्रस्ताव बीआईएफआर, बीआरपीएसई की अनुशंसाओं के अनुसार किया गया और तत्संबंधी रोडमैप 29.12.2014 को सीसीईए (आर्थिक मामलों से सम्बद्ध कैबिनेट समिति) द्वारा किया गया।
2002 से कम्पनी को बीआईएफआर के सुपुर्द कर दिया गया था। कम्पनी को बंद करने के भारत सरकार के निर्णय की जानकारी बीआईएफआर को दी जाएगी ताकि उसका अनुमोदन प्राप्त किया जा सके। कम्पनी के कर्मचारियों को आकर्षक वीआरएस/वीएसएस पैकेज दिया जाएगा। औद्योगिक विवाद नियम 1947 के अनुसार छंटनी की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। सुरक्षित ऋणदाताओं के पास रखे गए कम्पनी के ओटीएस का इस्तेमाल कम्पनी की भूमि परिसम्पत्तियों को मुक्त कराने के लिए किया जाएगा। कम्पनी को बंद करने की प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न देयताओं सहित कम्पनी की अन्य देयताओं का निपटान कानून के प्रावधानों और लोक उद्यम विभाग के उक्त दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।