पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में नागर विमानन नीति को अपनी स्वीकृति प्रदान की है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद ये पहला ऐसा अवसर है नागर विमानन मंत्रालय द्वारा एक संपूर्ण नागर विमानन नीति लाई गई है।
नागर विमानन नीति के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:-
• भारत को वर्ष 2022 तक 9वें से तीसरा सबसे बड़ा नागर विमानन बाजार बनाना
• घरेलू टिकटिंग को वर्ष 2015 में 8 करोड़ से बढ़ाकर वर्ष 2022 तक 30 करोड़ करना
• वाणिज्यिक उड़ानों के लिए हवाईअड्डों का संख्या वर्ष 2019 तक 127 करना जो वर्ष 2016 में 77 हैं
• मालवाहक सामान की मात्रा को वर्ष 2027 तक 4 गुना बढ़ाकर 10 मिलियन टन करना
• आम आदमी तक विमान सेवाओं को सुलभ बनाना- बिना सेवा वाले हवाई अड्डों पर क्षेत्रीय संपर्क योजना के अंतर्गत एक घंटे के सफर के लिए अधिकतम किराया 2500 रुपए
• अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा शुरू करने के लिए 5 साल घरेलू विमान सेवा देने के शर्त की समाप्ति
• लचीली और मुक्त “ओपन स्काई” और “कोड शेयर” समझौते
• रखरखाव और मरम्मत संचालन (एमआरओ) को प्रोत्साहन देकर दक्षिण एशिया में प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना
• वर्ष 2025 तक गुणवत्ता प्रमाणित 3.3 लाख कुशल कर्मिकों की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करना
• ग्रीन फील्ड हवाई अड्डो और हेलिकॉप्टर अड्डो का विकास
• नियमों में ढ़ील, आसान प्रक्रिया और ई-गर्वनेंस द्वारा व्यापार करने में सुगमता को बढ़ाना
• नागर विमानन क्षेत्र में”मेक इन इंडिया” को प्रोत्साहन देना
नीति के अंतर्गत क्षेत्र :
1. क्षेत्रीय संपर्क
2. सुरक्षा
3. हवाई परिवहन संचालन
4. रूट प्रसार दिशानिर्देश
5. अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए 5/20 की आवश्यकता
6. द्विपक्षीय यातायात अधिकार
7. कोड शेयरिंग समझौते
8. राजकोषीय समर्थन
9. राज्य सरकार, निजी क्षेत्र द्वारा या पीपीपी मोड में विकसित हवाई अड्डे
10. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण
11. वायु नौवहन सेवाएं
12. विमानन सुरक्षा, आव्रजन और सीमा शुल्क
13. हेलीकाप्टर
14. चार्टर्स
15. रखरखाव, मरम्मत और पूरी जांच और परिवर्तन
16 भू प्रबंधन
17. एयर कार्गो
18. वैमानिकी ‘मेक इन इंडिया’
18. विमानन शिक्षा और कौशल विकास
19. सतत विमानन
20.विविध
21. आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम, 1968
नीति की प्रमुख विशेषताएं
1. समय-समय पर मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) प्रत्येक उडान पर निम्न कर लगाकर सभी घरेलू मार्गों पर दी जाएगी, कैट I और कैट II मार्ग को छोड़कर, आरसीएस मार्गों और छोटे विमानों को भी अनुदान दिया जाएगा। एक विस्तृत योजना हितधारकों के विचार-विमर्श के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में प्रस्तुत की जाएगी।
2. 2004 में 5/20 के तहत अंतरराष्ट्रीय उड़ान के प्रारंभ संबंधी नियम को एक नियमन के तहत बदल दिया गया जो जो अंतरराष्ट्रीय परिचालन शुरू करने के लिए एक स्तर के खेल मैदान और एयरलाइनों की अनुमति प्रदान करता है बशर्ते वह घरेलू संचालन के दायित्व को पूरा करने वाले हो। सभी एयरलाइंस प्रदान की गई अंतरराष्ट्रीय परिचालन शुरू कर सकते हैं। वे 20 विमान या कुल क्षमता के 20 प्रतिशत विमान तैनात करेंगें (सभी एयरलाइंस सीटों की औसत संख्या एक साथ रखकर ) जो घरेलू परिचालन के लिए अधिक है।
3. नागर विमानन (डीजीसीए) के महानिदेशक को आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय लचीलापन बनाए रखने के लिए एक प्रभावी विमानन सुरक्षा निरीक्षण प्रणाली और सभी विमानन सुरक्षा से संबंधित मुद्दों के लिए एक पारदर्शी एकल खिड़की प्रणाली की सुविधा प्रदान की जाएगी।
4. रूट प्रसार दिशानिर्देश (आरडीजी) को मापदंड तैयार करके युक्तिसंगत बनाया गया है, जिसके तहत श्रेणी I (ट्रंक मार्ग) को और अधिक पारदर्शी मार्ग घोषित किया गया है। जबकि कैट II और II A पर तैनात किया गया ट्रैफिक का प्रतिशत कैट I के आधार पर व्यक्त किया गया है जो उसके समान है। कैट I मार्ग के लिए प्रस्तावित मानदंड 700 किमी है, औसत सीट कारक 70 प्रतिशत है और सालाना ट्रैफिक 5 लाख यात्रियों के बराबर है। क्षेत्रीय संपर्क योजना के संचालन के तहत कैट III का प्रतिशत कम हो जाएगा। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को II श्रेणी मार्गों वाले हिस्से में शामिल किया गया है।
5. द्विपक्षीय अधिकारों और कोड शेयर समझौतों को उदार बनाया जाएगा जिससे यात्रियों के लिए व्यापार करने में आसानी हो तथा ग्राहकों के पसंद का दायरा भी व्यापक हो। ‘ओपन स्काईस’ को पारस्परिक आधार पर सार्क देशों और दिल्ली से 5000 किलोमीटर दूर देशों में लागू किया जाएगा। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के माध्यम से अतिरिक्त क्षमता हकों के आवंटन के लिए सिफारिश की जाएगी जबकि नामित भारतीय विमानन ने अब तक अपने द्विपक्षीय अधिकारों का 80 प्रतिशत भी उपयोग नहीं किया है, लेकिन विदेशी एयरलाइंस /देशों ने अपने हिस्से का उपयोग किया है और इसकी क्षमता में वृद्धि के लिए दबाव डाल रहे हैं।
6. मंत्रालय या राज्य सरकार द्वारा निजी क्षेत्र या पीपीपी मोड में हवाई अड्डों के विकास को प्रोत्साहित करने और विनियामक निश्चितता प्रदान करने का प्रयास जारी रहेगा। भविष्य में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड हवाई अड्डों की लागत प्रभावी कार्यक्षमता होगी जहां बचाव और सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं होगा।
7. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) अपने हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण और सेवाओं की गुणवत्ता को उन्नत करने के लिए प्रयासरत रहेगा। यदि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के 150 किलोमीटर के दायरे में नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे को मंजूरी मिलती है तो ऐसी अवस्था में उसे उपयुक्त मुआवजा दिया जाएगा जो अभी तक अलग नहीं है।
8. वैश्विक प्रवृत्ति के आधार पर ही वायु नौवहन सेवाओं का आधुनिकीकरण और उन्नयन जारी रहेगा। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण पूरी तरह सामंजस्य युक्त वायु नौवहन प्रणाली जिसके तहत अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) वैश्विक वायु नौवहन योजना, विमानन प्रणाली ब्लॉक का उन्नयन और आधुनिक प्रदर्शन आधारित प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।
9. सरकार चार हैलीकॉप्टर-केन्द्रों के विकास के लिए अलग से शुरू किए गए नियमों को जारी करके हेलीकॉप्टर के प्रयोग को बढावा देगी। नागर विमानन मंत्रालय सभी एजेंसियों और हितधारकों से समन्वय स्थापित करेंगे जिससे कि हेलीकाप्टर में आपातकालीन चिकित्सा सेवा की सुविधा को सुनिश्चित किया जा सके।
10. 2016-17 के बजट में रखरखाव, मरम्मत और जांच के बाद मरम्मत (एमआरओ) के लिए सीमा शुल्क को युक्तिसंगत और माल की निकासी के लिए खासकर उपकरण और उपकरण किट की देखरेख के लिए प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इसके अलावा इस क्षेत्र को बढावा देने के लिए प्रोत्साहन नीति भी प्रस्तावित की गई है-
• नागर विमानन मंत्रालय राज्य सरकारों को एमआरओ के काम के लिए वैट शून्य करने के लिए राजी करेगा।
• भविष्य में बनाए जाने वाले हवाई अड्डों के निर्माण की योजना में एमआरओ सेवाओं के लिए पर्याप्त जगह का प्रावधान भी होगा जहां कहीं भी एमआओ की सेवाओं के लिए उचित संभावना होगी।
• एमआरओ सेवा प्रदाताओं पर नीति के अनुमोदन की तारीख से पांच साल की अवधि तक हवाई अड्डे की रॉयल्टी और अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
11. मौजूदा भू संचालन नीति को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए एक नए ढांचे के साथ प्रतिस्थापित किया जा रहा है। भारतीय हवाई अड्डा आर्थिक नियामक प्राधिकरण अधिनियम 2008 के अंतर्गत हवाई अड्डा संचालक यह सुनिश्चित करेंगे कि वहां तीन भू संचालन एजेंसियां होंगी जिसमें एयर इंडिया की सहायक कंपनी/ संयुक्त उपक्रम सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर मौजूद रहेगी। । गैर-प्रमुख हवाई अड्डों पर हवाई अड्डा संचालक,भू संचालक की संख्या, यातायात उत्पादन, अंदर की तरफ और टर्मिनल निर्माण क्षमता के आधार पर निर्णय लेंगे। हेलीकाप्टर ऑपरेटरों सहित सभी घरेलू एयरलाइन ऑपरेटर सभी हवाई अड्डों पर स्वयं कार्य करने के लिए स्वतंत्र होंगे। जनशक्ति आपूर्तिकर्ता के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती की अनुमति नहीं होगी।