पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने हेल्महोल्ज़ सेंटर पोट्सडेम जीएफजेड जर्मन भू-विज्ञान अनुसंधान केन्द्र के साथ एक समझौता ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर करने के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महाद्वीपीय वैज्ञानिक ड्रिलिंग कार्यक्रम (आईसीडीपी) संघ में भारत की सदस्यता को अपनी स्वीकृति दे दी है। यह जर्मनी के ब्रांडेनबर्ग का एक सरकार द्वारा वितपोषित सार्वजनिक विधि संस्थान है।
आईसीडीपी के साथ सदस्यता पर पांच वर्षों की अवधि के लिए समझौता ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर करने से, भारत कोयना क्षेत्र से संबंधित अन्वीक्षण और गहरी खुदाई के संदर्भ में वैज्ञानिक खुदाई के विभिन्न पहलुओं के बारे में गहन विशेषज्ञता के साथ अंतर्राष्ट्रीय रूप से ख्याति प्राप्त विशेज्ञषों के साथ मिलकर कार्य करने में समर्थ हो जाएगा। सदस्यता समझौते के एक अंग के रूप में भारत दो आईसीडीपी पैनलों-कार्यकारी समिति (ईसी) और असेम्बली ऑफ गर्वंनर्स (एओजी) में एक सीट हासिल करेगा। इसके अलावा, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के द्वारा चलाई जा रही कोयना वैज्ञानिक गहरी खुदाई परियोजना के लिए कार्यशालाओं में मदद, आंकड़े प्रबंधन एवं प्रतिदर्ष जैसे प्रमुख वैज्ञानिक क्षेत्र में मानव श्रम परीक्षण के संदर्भ में आईसीडीपी क्षमता निर्माण संवर्धन के अलावा संचालनगत और तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
आईसीडीपी के सदस्य के रूप में भारत के वैज्ञानिकों/अभियंताओं को आईसीडीपी की सभी सह-वित्त पोषित कार्यशालाओं और खुदाई परियोजनाओं में भागीदारी के लिए अपने प्रस्तावों को दाखिल करने का अधिकार होगा और वे आईसीडीपी परियोजना से मिलने वाले सभी आंकड़ों के परिणामों को प्राप्त कर सकेंगे। इससे भूकम्पीय और भूकम्प प्रक्रियाओं के लिए उन्नत समझ के स्तर पर कार्य किया जा सकेगा।