पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने आयकर विभाग की एकीकृत ई-फाइलिंग और केंद्रीकृत प्रोसेसिंग केंद्र 2.0 परियोजना के लिए 4,241.97 करोड़ रुपये के व्यय को मंजूरी दे दी है।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2018-19 तक वर्तमान सीपीसी-आईटीआर 1.0 परियोजना की 1,482.44 करोड़ रुपये की समेकित लागत के लिए व्यय को भी स्वीकृति दे दी है।
इस परियोजना के व्यापक उद्देश्यों का उल्लेख नीचे किया गया हैः
ए. करदाता के लिए त्वरित एवं सटीक निष्कर्ष।
बी. पहली बार सही दृष्टिकोण।
सी. सभी चरणों में उपयोगकर्ता (यूजर) को बेहतर अनुभव प्रदान करना।
डी. निरंतर सहभागिता के जरिए करदाताओं की जागरूकता और शिक्षा को बेहतर करना।
ई. स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा देना।
एफ. बकाया कर मांग का समुचित प्रबंधन करना।
विभिन्न कार्यकलापों के जरिए विभाग और करदाताओं के लिए इस आशय की मंजूरी के अनेक लाभ हैं। ज्यादा सटीक या शुद्धता सुनिश्चित करने और रिफंड/प्रोसेसिंग में लगने वाले समय को काफी घटाने के साधन के रूप में आयकर रिटर्न (आईटीआर) की प्री-फाइलिंग एवं करदाता की ओर से स्वीकार्यता, बकाया कर मांग से जुड़े मुद्दों को सुलझाने में करदाताओं को सहूलियत, करदाताओं की सहायता के लिए एकीकृत संपर्क केन्द्र, डिजिटल मीडिया के जरिए करदाता संपर्क कार्यक्रम और करदाताओं को बेहतर सेवाएं मुहैया कराने के लिए नियोक्ता/साझेदार प्रत्यायन कार्यक्रम इन कार्यकलापों में शामिल हैं।
इस निर्णय से देशभर में सभी श्रेणियों के करदाताओं द्वारा सुसंगत, एक समान, नियम आधारित और गुप्त पहचान तरीके से दाखिल किए गए रिटर्न की प्रोसेसिंग से समस्तरीय इक्विटी सुनिश्चित होगी। इससे सभी करदाताओं के लिए कर मामलों में निष्पक्षता सुनिश्चित होगी, चाहे उनका दर्जा कुछ भी हो।
इस निर्णय से आयकर रिटर्न की त्वरित प्रोसेसिंग एवं विभाग की सहभागिता के बगैर करदाता के बैंक खाते में रिफंड की राशि डालना, अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम तौर-तरीकों एवं मानकों (आईएसओ प्रमाणन) का पालन करना, प्रोसेसिंग से जुड़ी ताजा स्थिति से अवगत कराना और मोबाइल एप, ईमेल, एसएमएस तथा विभाग की वेबसाइट के जरिए त्वरित सुचनाएं देना संभव हो पाएगा। अतः इस निर्णय से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
उपर्युक्त प्रस्ताव के तहत प्रौद्योगिकी के जरिए व्यवसाय में व्यापक बदलाव लाने संबंधी विभाग के लक्ष्य को आगे भी जारी रखा गया है। ई-फाइलिंग और सीपीसी परियोजनाओं से करदाताओं को सेवाएं प्रदान करने और स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए बेहतर अभिनव तरीकों के उपयोग के जरिए विभाग के अंदर सभी प्रक्रियाओं का पूर्ण स्वचालन संभव हो पाया है।