पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने 10,000 वर्ग किलोमीटर आवंटित क्षेत्र में पोली मैटेलिक सल्फाइड से संबंधित अन्वेषण और अन्य विकासात्मक गतिविधियों को संचालित करने के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को अंतर्राष्ट्रीय सीबैड प्राधिकरण (आईएसए) के साथ 15 वर्ष के अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए अपनी मंजूरी दी है। यह अन्वेषण हिंद महासागर में स्थित – केंद्रीय और दक्षिण-पश्चिम भारतीय रिजों (एसडब्ल्यूआईआर) के हिस्सों में किया जाएगा।
15 साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर करके भारत को हिंद महासागर में केन्द्रीय भारतीय रिज और दक्षिण पश्चिम भारतीय रिज में आवंटित क्षेत्र में पोली मैटेलिक सल्फाइड के अन्वेषण के विशेष अधिकार औपचारिक रूप से प्राप्त होंगे। इसके अलावा हिंद महासागर में भारत की उपस्थिति भी बढ़ेगी जहां चीन, कोरिया और जर्मनी जैसे अन्य खिलाड़ी भी सक्रिय हैं। यह कार्यक्रम विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों और अनुसंधान प्रयोगशालाओं/ संगठनों की भागीदारी से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा लागू किया जाएगा।
पृष्ठभूमि :
लोहा, तांबा, जस्ता, चांदी, सोना, प्लेटिनम से युक्त गहरा सीबैड पोली मैटेलिक सल्फाइड एक परिवर्तनीय संघटनों में खनिजकृत चिमनियों के माध्यम से समुद्रीय क्रस्ट के आंतरिक भाग से गर्म मेग्मा उमड़ने से बने गर्म तरलों के अवक्षेप हैं। महासागर रिजों में पीएमएस ने अपने दीर्घकालीन वाणिज्यिक के साथ-साथ सामरिक मूल्यों के कारण दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (यूएनसीएलओएस) के अधीन अंतर्राष्ट्रीय सीबैड प्राधिकरण (आईएसए) ने हिंद महासागर के केंद्रीय भारतीय रिज (सीआईआर) 85 दक्षिण- पश्चिम भारतीय रिज (एसडब्ल्यूआईआर) क्षेत्र में पोली मैटेलिक सल्फाइड (पीएमएस) के अन्वेषण के लिए 15 वर्षों की योजना के साथ 10,000 वर्ग किमी क्षेत्र का आवंटन करने के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) द्वारा प्रस्तुत आवेदन को अपनी मंजूरी दे दी है। आईएसए अंतर्राष्ट्रीय जल सीमा में सीबैड के अजीवित संसाधनों को नियंत्रित करता है।