पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में जलवायु परिवर्तन से संबंधित पेरिस समझौते का अनुमोदन 2 अक्टूबर, 2016 को, गांधी जयन्ती के दिन से करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
पेरिस समझौता पिछले वर्ष 12 दिसम्बर, 2015 को 185 देशों द्वारा स्वीकार किया गया था। भारत ने इस समझौते पर इस वर्ष 22 अप्रैल को न्यूयार्क में हस्ताक्षर किए थे। अभी तक कुल मिलाकर 191 राष्ट्र पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार संधि उस समय लागू होगी, जब कुल वैश्विक उत्सर्जन में 55 प्रतिशत योगदान करने वाले 55 देशों इस समझौते की पुष्टि कर देगें। अभी तक 61 राष्ट्र समझौते की पुष्टि करने संबंधी दस्तावेज जमा करा चुके हैं, जिनका कुल वैश्विक ग्रीनहाउस उत्सर्जन में 47.79 प्रतिशत योगदान है।
समझौते की पुष्टि करने के भारत के निर्णय से अभी तक समझौते की पुष्टि कर चुके सभी देशों के उत्सर्जन का स्तर 51.89 प्रतिशत हो गया है। इस वर्ष के अंत तक कई अन्य देशों ने समझौते की पुष्टि करने के इरादे की जानकारी दी है,इसे देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि यह समझौता जल्द ही अमल में आ जायेगा और जलवायु परिवर्तन की समस्या के समाधान में वैश्विक प्रयासों को बल मिलेगा।
पेरिस समझौते की पुष्टि करने पर सहमति व्यक्त करते हुए कैबिनेट ने यह निर्णय भी किया है कि भारत को यह घोषणा करनी चाहिए कि भारत अपने राष्ट्रीय कानूनों और अपने विकास कार्यक्रमों का परिष्कार करेगा, समझौते के कार्यान्वयन के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा और जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने में अपनी वैश्विक प्रतिबद्धता का मूल्यांकन करेगा तथा पुष्टि किए जा रहे समझौते के संदर्भ में ऊर्जा के स्वच्छतर स्रोतों तक भरोसेमंद और किफायती पहुंच कायम करेगा।
पेरिस समझौता २०२० का बाद की जलवायु कार्यवाई से सम्बंधित है। 2020 से पहले की स्थिति में विकसित राष्ट्र क्योटो प्रोटोकोल का पालन करेंगे और कुछ विकासशील देशों ने इस समझौते का पालन करने का स्वैच्छिक संकल्प व्यक्त किया है।