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कैबिनेट ने भारत और संयुक्त राष्ट्र की लैंगिक समानता व महिला सशक्तिकरण (यूएन-वुमेन) समझौते को मंजूरी दी


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और संयुक्त राष्ट्र की लैंगिक समानता व महिला सशक्तिकरण (यूएन-वुमेन) समझौते को लेकर समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर को अनुमति प्रदान कर दी है।

प्रस्ताव में पंचायती राज मंत्रालय में सुशासन की क्षमता बढ़ाने के लिए तकनीकी सहयोग बढ़ाने की मांग की गई है ताकि कानून, नीतियों और कार्यक्रमों के माध्यम से लिंग समानता के लिए बेहतर अवसर का लाभ उठाया जा सके।

पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र महिलाऐं दोनों साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसके तहत चुनी गई महिला प्रतिनिधियों को सशक्त करना और उनकी कार्यकुशलता को बढ़ाना शामिल है। पिछले लाभ को देखते हुए अब दोनों पक्ष प्रशासन प्रक्रियाओं के प्रतिभागी डिजाइन और लैंगिक उत्तरदायी प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए कानूनों, नीतियों एवं कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मिलकर काम करेंगे। दोनों पक्ष जिन बातों पर सहमत हुए हैं उनमें क्षमता विकास के लिए प्रयास, साझा लाभ, साझा सुशासन मिशन, लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण शामिल है। इससे भारत के ग्राणीण क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण की स्थिति में सुधार होगा। यह बीजिंग में आयोजित महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव को खत्म करने का सम्मेलन के उद्देश्यों के मुताबिक है।

प्रस्तावित समझौता ज्ञापन संयुक्त राष्ट्र विकास सहायता फ्रेमवर्क के तहत सहयोग के लिए व्यापक ढांचे के भीतर एमओपीआर और यूएन महिलाओं द्वारा संयुक्त रूप से पहचाने जाने वाली विशिष्ट गतिविधियों के कार्यान्वयन में समयबद्ध परिणाम की उपलब्धि की सुविधा प्रदान करेगा। ये समझौता ज्ञापन इस महत्वपूर्ण भागीदारी को लागू करने की सुविधा प्रदान करेगा।

इसके तहत समझौता ज्ञापन को छह राज्यों के जिला और उपजिला स्तर पर लागू किया जाएगा। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल हैं।