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कैबिनेट ने वरिष्‍ठ पेंशन बीमा योजना, 2003 और वरिष्‍ठ पेंशन बीमा योजना, 2014 का पूर्व प्रभाव से अनुमोदन किया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में, 14 जुलाई, 2003 को प्रारंभ हुई, वरिष्‍ठ पेंशन बीमा योजना (वीपीबीवाई)-2003, और 14 अगस्‍त, 2014 को प्रारंभ हुई वरिष्‍ठ पेंशन बीमा योजना (वीपीबीवाई)-2014 का पूर्व प्रभाव से अनुमोदन किया गया। कैबिनेट ने वीपीबीवाई-2003 पर 2003-04 से 2014-15 की अवधि में सब्सिडी के लिए एलआईसी को जारी की गई राशि और वित्‍तीय वर्ष 2015-16 से वीपीबीवाई-2003 और वीपीबीवाई-2014 के लिए व्‍यय का भी अनुमोदन कर दिया।

ये कार्यक्रम भारतीय जीवन बीमा निगम के जरिए कार्यान्वित किए जा रहे हैं, और इस योजना के अंतर्गत निवेशित निधि पर एलआईसी द्वारा अर्जित वास्‍तविक आमदनी और सरकार द्वारा आश्‍वासित लाभ के बीच अंतर का भुगतान एलआईसी को सब्सिडी के रूप में किया जाता है।

ये दोनों ऐसी पेंशन योजनाएं हैं, जिनका उद्देश्‍य अंशदान राशि के आधार पर वरिष्‍ठ नागरिकों को न्‍यूनतम पेंशन सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत अंशदान करने की तारीख से मृत्‍यु की तारीख तक पेंशन देने की व्‍यवस्‍था है और मृत्‍यु पर अंशदान की राशि नामित व्‍यक्ति को लौटाने का भी प्रावधान है।

दोनों योजनाएं- वीपीबीवाई-2003 और वीपीबीवाई-2014 के अंतर्गत भावी अंशदान अब बंद कर दिया गया है। परन्‍तु्, पॉलिसी की प्रचलन अवधि में बेची गई पॉलिसियों पर सरकार के वायदे के अनुसार अनुसार 9 प्रतिशत लाभ दिया जाता है। वीपीबीवाई-2014 पॉलिसी, अगस्‍त 14, 2014 से अगस्‍त 14, 2015 की अवधि में खोली गई थी और 31 मार्च, 2016 को इसके अंतर्गत लाभ पाने वाले वार्षिक वृत्तिधारियों की संख्‍या 3,17,991 थी। इसी प्रकार वीपीबीवाई-2003 के अंतर्गत 31 मार्च, 2016 को लाभ पाने वाले वार्षिक वृत्तिधारियों की संख्‍या 2,84,699 थी।