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कैबिनेट ने विभिन्न ऑपरेटरों के पास मौजूद या आगामी नीलामी में उनके द्वारा प्राप्त किए जा सकने वाले विभिन्न बैंड में स्पेक्ट्रम के लिए स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क मंजूर किया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्पेक्ट्रम के विभिन्न बैंडों के स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) के लिए दरें मंजूर कर दी हैं जिनके लिए नीलामी शीघ्र ही आयोजित होने जा रही है। इस निर्णय के साथ ही दूरसंचार विभाग द्वारा स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए आवेदन आमंत्रित करने की सूचना जारी करने की राह स्पष्ट हो गई है।

कैबिनेट के फैसले के मुताबिक स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क निम्नलिखित आधार पर निर्धारित होना है:

(1) आगामी नीलामी में 700, 800, 900, 1800, 2100, 2300 और 2500 मेगाहर्ट्ज बैंड में हासिल किए स्पेक्ट्रम के लिए समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का 3% शुल्क लिया जाएगा जिसमें तार-लाइन सेवाओं से मिला राजस्व शामिल नहीं होगा।

(2) 2010 में प्राप्त किए गए बीडब्ल्यूए स्पेक्ट्रम समेत सभी स्पेक्ट्रम बैंडों में एक ऑपरेटर को दिए गए सभी स्पेक्ट्रमों (चाहे वे प्रशासनिक रूप से या नीलामी के माध्यम से या व्यापार के माध्यम से सौंपे गए हों) में एसयूसी लेने के लिए एसयूसी दरों का भारित औसत लागू किया जाएगा जो एजीआर का न्यूनतम 3 प्रतिशत होगा जिसमें तार-लाइन सेवाओं से राजस्व शामिल नहीं होगा। यह भारित औसत दर स्पेक्ट्रम संपत्ति के उत्पाद के जोड़ और कुल स्पेक्ट्रम संपत्ति में लागू एसयूसी दरों का भाग देकर निकाली जाएगी। यह भारित औसत दर प्रत्येक सेवा क्षेत्र के ऑपरेटर के हिसाब से निर्धारित की जाएगी।

(3) 2300/2500 मेगाहर्ट्ज बैंड में 2015-16 से पहले आवंटित/प्राप्त किए गए स्पेक्ट्रम को न शामिल करते हुए आगामी नीलामी में प्राप्त किए स्पेक्ट्रम को ध्यान में रखने के बाद निकाली गई भारित औसत दर पर 2015-16 के दौरान ऑपरेटरों द्वारा देय एसयूसी की राशि को ऑपरेटरों द्वारा चुकाई जाने वाले एसयूसी की फ्लोर राशि माना जाएगा। इसके अलावा, यदि सेवा प्रदाता के एजीआर में कमी होती है तो एसयूसी की फ्लोर राशि भी उसी अनुपात में कम की जाएगी।

इससे एक ऐसी कानूनसम्मत एसयूसी व्यवस्था की ओर जाया जा सकेगा जो सरल, पारदर्शी और सपाट यथामूल्य वाली होगी और जिसमें राजस्व न देने के लिए होने वाले रचनात्मक लेखांकन से बचा जा सकेगा।