Search

पीएमइंडियापीएमइंडिया

न्यूज अपडेट्स

कैबिनेट ने सागरमाला डेवलपमेंट कंपनी के संस्थापन को दी मंजूरी


बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा दे रही है सरकार

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने कंपनी अधिनियम 2013 के तहत सागरमाला डेवलपमेंट कंपनी (एसडीसी) के संस्थापन को मंजूरी दी है। एसडीसी जहाजरानी मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में होगी। यह विशेष उद्देशीय कंपनी (एसपीवी) परियोजना को इक्विटी सहायता और सागरमाला कार्यक्रम के तहत अवशिष्ट परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। एसडीसी की स्थापना कंपनी अधिनियम 2013 के तहत 1,000 करोड़ रुपये की प्रारंभिक प्राधिकृत शेयर पूंजी और 90 करोड़ रुपये की सदस्यता शेयर पूंजी के साथ की जाएगी।

पहचान की गई परियोजनाएं कार्यान्वयन के लिए संबंधित बंदरगाहों, राज्य सरकारों/समुद्री बोर्डों, केंद्रीय मंत्रालयों को दी जाएंगी। कार्यान्वयन मुख्य तौर पर सार्वजनिक निजी साझेदारी यानी पीपीपी माॅडल के तहत होगा। बंदरगाहों, राज्य सरकारों/समुद्री बोर्डों, केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा विशेष उद्देशीय कंपनी (एसपीवी) परियोजना या अवशिष्ट परियोजनाओं की स्थापना अथवा कार्यान्वयन के लिए केवल इक्विटी सहायता प्रदान की जाएगी और किसी अन्य माध्यम से वित्तपोषण नहीं किया जा सकता।

एसडीसी बंदरगाह आधारित विकास परियोजनाओं की पहचान करेगी और परियोजना एसपीवी को परियोजना विकास एवं ढांचागत गतिविधियों, निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए बोली प्रक्रिया, विभिन्न राज्यों/क्षेत्रों में रणनीतिक परियोजनाओं के लिए जोखिम प्रबंधन के उचित उपाय करने और आवश्यक मंजूरियां हासिल करने में मदद करेगी।

चूंकि पहचान की गई परियोजनाओं के कामकाज पर विभिन्न एजेंसियों को लगाया जाएगा, इसलिए एसडीसी उनमें आपसी सहयोग और वर्तमान में पहचान की गई सभी परियोजनाओं के साथ-साथ मास्टर प्लान या अन्य स्रोतों से उभरने वाली अन्य परियोजनाओं की निगरानी के लिए नोडल एजेंसी की भूमिका निभाएगी।

एसडीसी एनपीपी के तहत पहचान किए गए तटवर्ती आर्थिक क्षेत्रों (सीईजेड) के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करेगी और भारतीय समुद्री क्षेत्र के एकीकृत विकास सुनिश्चित करने के लिए एक ढांचा मुहैया कराएगी।

सागरमाला कार्यक्रम के उद्देश्यों के तहत तटीय सामुदायिक विकास के लिए जहाजरानी मंत्रालय कई पहल/परियोजनाएं शुरू करने जा रहा है। इनमें तटीय समुदाय कौशल विकाय परियोजनाएं और समुद्री मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास के लिए परियोजनाएं उल्लेखनीय हैं।

शुरू की गई कौशल विकास परियोजनाओं में तटीय जिलों में कौशल अंतर का विश्लेषण अध्ययन/बंदरगाह एवं समुद्री क्षेत्र में अत्याधुनिक कौशल प्रशिक्षण, जहाज तोड़ने और मरम्मत के क्षेत्र में सुरक्षा प्रशिक्षण, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के तहत तटीय जिलों में कौशल प्रशिक्षण और समुद्री मछुआरे के लिए कौशल विकास परियोजनाएं शामिल हैं।

जहाजरानी मंत्रालय पशुपालन, दुग्ध एवं मत्स्य विभागों (कृषि मंत्रालय) के साथ मिलकर सागरमाला कार्यक्रम के तहत मछली पकड़ने की चुनिंदा परियोजनाओं को आंशिक वित्तपोषण करेगा। जबकि परियोजनाओं की पहचान करते समय उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो पूरा होने के करीब हैं। केंद्र एवं राज्य सरकारों की वर्तमान योजनाओं के अलावा जहाजरानी मंत्रालय भी एक तटीय समुदाय विकास योजना तैयार कर रहा है।

तटीय समुदाय विकास योजना और सागरमाला कार्यक्रम के तहत पहचान की गई तटीय समुदाय विकास परियोजनाओं का प्रबंधन और वित्तपोषण एसडीसी को दी गई महत्वपूर्ण भूमिकाओं में शामिल है। इसके तहत परियोजनाएं विशिष्ट समयबद्ध स्थानीय हस्तक्षेप और नवाचार प्रकृति की होंगी।

एसडीसी अपनी जरूर के अनुसार ऋण या इक्विटी (दीर्घावधि पूंजी) के जरिये भारत सरकार द्वारा मुहैया कराए गए संसाधनों और बहुपक्षीय एवं द्विपक्षीय वित्तपोषण एजेंसियों से रकम जुटाएगी। एसडीसी परियोजना विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी संभावनाएं तलाशेगी।

पृष्ठभूमि

सागरमाला कार्यक्रम को 25 मार्च 2015 को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद लॉन्च किया गया था। इसे भारत में बंदरगाह आधारित आर्थिक विकास के व्यापक उद्देश्यों के साथ शुरू किया गया है। भारत के 7,500 किलोमीटर लंबे तटवर्ती क्षेत्रों, 14,500 किलोमीटर संभावित जलमार्ग और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों के रणनीति स्थानों के दोहन के उद्देश्य से सरकार ने महत्वाकांक्षी सागरमाला कार्यक्रम तैयार किया जिसे 25 मार्च 2015 को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी दी गई।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (एनपीपी) के तहत तटीय और समुद्री क्षेत्र के विकास के लिए वृहत योजना तैयार की गई है। एनपीपी ने बंदरगाहों के आधुनिकीकरण एवं नए बंदरगाहों के विकास, बंदगाहों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने, बंदरगाह आधारित औद्योगीकरण एवं तटीय समुदाय विकास के क्षेत्र में 150 से अधिक परियोजनाओं की पहचान की है।