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जापान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री का बैन्क्वेट संबोधन


महामहिम प्रधानमंत्री शिंजो अबे,

विशिष्ट अतिथिगण,
कोनबान वा!

मेरे लिए एक महान सम्मान की बात है कि प्रधानमंत्री के रूप में जापान की यह मेरी दूसरी यात्रा है। भारत के लोगों ने जापानी लोगों की उपलब्धियों, उनकी जीवन शक्ति, लंबे समय तक समर्पण और गतिशीलता का स्वागत किया है।

जापान के अनुभव से काफी कुछ सीखा जा सकता है। जापान और भारत के बीच लंबे समय से दोस्ती रही है। हमारे समाज के संबंध हिंदू और बौद्ध धर्म की साझा धाराओं में निहित हैं। हम दोनों आर्थिक विकास और अपनी सभ्यता के लोकाचार के संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को महत्व देते हैं।

खुलेपन को लेकर समान मूल्यों, लोकतंत्र और कानून के प्रति प्रतिबद्धता सम्मान हमारे संबंधों को मजबूत बनाते हैं। आज हमारी विशेष सामरिक और वैश्विक भागीदारी आर्थिक विस्तार की ओर बढ़ रही है।

हम करीबी साझेदार के रूप में और भी बहुत कुछ कर सकते हैं जिससे न केवल हमारे अपने समाज का लाभ मिलेगा बल्कि क्षेत्र व दुनिया को भी इसका लाभ प्राप्त हो सकेगा।

हमारी क्षमता भी दोनों को आगे बढ़ने के लिए जोड़ सकती है, क्योंकि दोनों देश फिलहाल समान अवसरों और चुनौतियों का समान रूप से सामना कर रहे हैं। वैश्विक समुदाय के साथ हम उग्रवाद और आंतकवाद जैसी उभर रही चुनौतियों से निपट सकते हैं।

दोस्तों,

जापान हमेशा से आर्थिक समृद्धि, बुनियादी ढांचे के विकास, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी विकास में भारत महत्वपूर्ण भागीदार रहा है। हमारे इस सहयोग को और विस्तार दिए जाने की पूरी गुंजाइश है।

हमारे आर्थिक संबंध मजबूत हो रहे हैं । व्यापारिक संबंध लगातार विकसित हो रहे हैं और जापान की तरफ से निवेश बढ़ रहा है। हमारे अग्रणी विकास कार्यक्रमों में हिस्सा बनकर जापानी कंपनियां काफी कुछ हासिल कर रही हैं। हम नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जापान से हमने काफी कुछ हासिल किया है।

हमारे संबंधों में एक अहम कड़ी है भारत और जापान के राज्यों के बीच सहयोग में लगातार । यह उच्च प्राथमिकता का एक प्रतिबिंब है कि हम हमारे वैश्विक नजरिया में जापान के लिए समझौता कर रहे हैं। हमारे संबंध सद्भावना और आपसी सहयोग की भावना पर आधारित है और दोनों देशों के लोग एक दूसरे के लिए हमेशा खड़े हैं । और महामहिम अबे के नेतृत्व में यह सब हो रहा है।

पिछले दो वर्षों में मेरी उनके साथ यह आठवीं बैठक है। कई सम्मेलन बैठकों में जो परिणाम आए हैं वह उल्लेखनीय हैं। मैं प्रधानमंत्री अबे और जापान सरकार को मेरा और मेरे इस प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत के लिए आभार प्रकट करता हूं।

निसंदेह हमारी नियति आपस में जुड़ी हुई है। हमें शांति, समृद्धि और विकास के लिए एक साथ काम करने की जरूरत है।

गणमान्य जनों,

अब मैं एक प्रस्ताव पेश कर सकता हूं
महामहिम सम्राट और जापान की महारानी की निरंतर अच्छे स्वास्थ्य और उनके स्वास्थ्य का अच्छी तरह ध्यान रखा जा रहा है। आज रात यहां मौजूद प्रधानमंत्री शिंजो अबे की गहन सफलता के लिए, जापान के मैत्रीपूर्ण लोगों और आप में से हर एक की सफलता के लिए मैं कामना करता हूं।

भारत और जापान के बीच स्थायी दोस्ती के लिए

कानपई!