Search

पीएमइंडियापीएमइंडिया

न्यूज अपडेट्स

जाफना सांस्कृतिक केन्द्र की आधारशिला रखने के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ


s2015031463126 [ PM India 209KB ]

s2015031463127 [ PM India 166KB ]

s2015031463128 [ PM India 139KB ]

s2015031463129 [ PM India 218KB ]

उपस्थित सभी वरिष्ठ महानुभाव,

वणकम!

भारत के प्रधानमंत्री के रूप में जाफना में पहली बार आना। मैं आज यहां कोई भी कार्यक्रम न करता सिर्फ इस धरती को नमन कर लेता, तो भी पूरे श्रीलंका में और पूरे विश्व में एक बहुत बड़ी घटना के रूप में माना जाता।

जाफना अपनी एक नई पहचान बना रहा है। जाफना से प्रेम के संदेश की एक नई खुशबू, पूरे विश्व को अनुभव हो रही है और ये मेरा सौभाग्य है कि शांति, भाईचारा, सद्भभावना की इस खुशबू भरी हवा में मुझे भी सांस लेने का अवसर मिला है।

मुख्यमंत्री श्रीमान विगनेश्वर जी ने गुजरात को लेकर काफी तारीफ की। भारत में इन दिनों जो कोऑपरेटिव फैडरेलिज़म पर बल देकर आगे बढ़ रहे हैं, उसकी सराहना की और भारत से उनकी क्या-क्या अपेक्षाएं हैं? उसका भी जिक्र किया।

श्रीलंका और भारत के संबंध विशिष्ट प्रकार के हैं। हम सिर्फ पड़ोसी हैं, ऐसा नहीं है। हम सांस्क़ृतिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए लोग हैं। जाफना के जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं। बहुत कठिनाइयों का सामना यहां के लोगों ने किया है। यहां कि विश्व प्रसिद्ध लाइब्रेरी, जिसमें करीब-करीब एक लाख उत्तम प्रकार के ग्रंथ, मैनस्क्रीप्ट्स यानि एक प्रकार से मानव जाति का अमूल्य खजाना जाफना के पास था। लेकिन वो सारा जल गया, खाक में मिल गया। आज फिर से एक बार काफी ग्रंथों को इकट्ठा कर लिया गया है, लाइब्रेरी को फिर से एक बार जीवंत किया गया है। रोड बने, रेल बने, पोर्ट बने, एयरपोर्ट बने – ये सारी चीजें इंसान को जोड़ने के काम आती हैं। लेकिन लाइब्रेरी जब बनती हैं, किताब जहां होती हैं, वहां सदियों को जोड़ने का काम होता है। ये सदियों को जोड़ने का काम फिर से एक बार हुआ है और इसके लिए मैं जाफना के सभी महानुभाव का हृदय से अभिनंदन करता हूं।

आज मुझे खुशी है कि एक कल्चरल सेंटर के शिलान्यास के लिए मुझे यहां आने का सौभाग्य मिला है। इस कल्चरल सेंटर को बनाने में एक स्पर्धा की गई, आर्किटेक्चर के संबंध में। और स्पर्धा कर-करके तय हुआ, कौन-सा डिजाइन हो? और ये भी देखा गया कि जाफना की परंपराओं की उसमें अभिव्यक्ति हो और ये जो, अभी उसका विडियो दिखाया गया, वॉकथ्रो दिखाया गया, उससे साफ नजर आता है कि पुराने और नए का कितना अद्भभुत संगम किया गया है। भारत के लिए गर्व की बात है कि जाफना में एक यूनिक प्रकार का और वर्ल्ड लेवल का कल्चरल सेंटर बनाने का हमें अवसर मिला है।

मैं जाफनावासियों को, श्रीलंकावासियों को विश्वास दिलाता हूं कि भारत सरकार ने ये जो काम हाथ में लिया है, हम समय पर पूरा करेंगे और कल्पना से भी अच्छा करेंगे और मेरे लिए खुशी की बात है कि पहले कल्चरल प्रोग्राम के लिए मुझे निमंत्रण भी मिल गया और इसका मतलब ये है कि कमिटमेंट कितना स्पष्ट है। कमिटमेंट में कितना कमिटमेंट है, ये नजर आता है।

आज एक प्रकार से मेरी ये यात्रा त्रिवेणी संगम है। आज यहां आने से पहले तलाईमन्नार में रेलवे का उद्घाटन करके मैं आया। मन को इतना आनंद होता था उस दृश्य को देखकर कि समुद्र के छोर तक रेल की पटरी है और उधर रामेश्वरम है। ये प्रोजेक्ट अपने आप में किसी भी भारत के नागरिक को, जिसने इस काम को किया है, गर्व दिलाता है, आनंद देता है। तलाईमन्नार में आज जो रेलवे प्रोजेक्ट का लोकार्पण हुआ है, मुझे विश्वास है इस पूरे क्षेत्र के विकास को एक नई गति देगा।

मेरे लिए आज दूसरी खुशी की बात है कि जाफना के हाउसिंग प्रोजेक्ट का भी आज हम लोकार्पण कर रहे हैं। उन संकट के काल में जिन परिवारों ने सहन किया है, आज उनको जब अपना घर मिले, अपना एक बसेरा मिले तो उसके आशीर्वाद की ताकत बहुत बड़ी होती है और एक प्रकार से हमारे यहां तो कहा गया है, सेवा परमोधर्म। ये हाउसिंग प्रोजेक्ट एक प्रकार से एक उत्तम से उत्तम धर्म कार्य है जो कि सेवा के रूप में हमें करने को मिला है। और ये तीसरा प्रकल्प में आज जो कर रहा हूं – वो एक सेंट्रल कल्चरल सेंटर का शिलान्यास करने का अवसर मुझे मिला है। और इस प्रकार से आज ये मेरी यात्रा त्रिवेणी बन गई है।

मुझे कल संसद में निमंत्रित किया गया। संसद में मुझे संबोधित करने का अवसर मिला और वहां मैंने अपने मन की बातें बताई हैं, जो आज अखबारों में काफी मात्रा में छपी हैं। श्रीलंका को भी प्रगति करनी है। एकता और अखंडता से प्रगति होगी। एकता से साथ समरसता भी चाहिए और कोई भी भू-भाग हो, कोई भी नागरिक हो हर एक को समान अवसर मिलेगा और सबके आगे बढ़ने की संभावनाएं पैदा होंगी। ये शुभकामनाएं भारत की तरफ से हर श्रीलंकावासी को, हर नागरिक को रहेंगी।

मैं अपने राजनीतिक जीवन के अनुभव से कहता हूं। शांति, एकता, सद्भभावना – ये प्रगति के मूल मंत्र हैं, विकास के मूल मंत्र हैं। और मैं भी आपको विकास की नई ऊंचाइयों पर देखना चाहता हूं, इसी धरातल पर देखना चाहता हूं।

आपने मेरा स्वागत किया, सम्मान किया। मैं आपका बहुत आभारी हूं और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं – श्रीलंका की प्रगति और विकास के लिए भारत से जो भी बन सकेगा। कभी भारत पीछे नहीं रहेगा। ये दोस्ती सदियों पुरानी है और सदियों तक चलने वाली दोस्ती है। इसको हम निभाते रहेंगे।

मैं फिर एक बार आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।

वणकम।