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द्वीपक्षीय सहयोगियों के साथ विकास निगम के लिए द्विपक्षीय सरकारी विकास सहायता नीति के मौजूदा दिशा-निर्देशों में संशोधन


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने द्विपक्षीय सहयोगियों के साथ विकास निगम के लिए द्विपक्षीय सरकारी विकास सहायता नीति के मौजूदा दिशा-निर्देशों में संशोधन को अपनी मंजूरी दे दी है।

दिशा-निर्देशों में प्रस्तावित संशोधन का विवरण इस प्रकार हैं:-

(1). प्रधानमंत्री की मंजूरी के साथ वित्त मंत्री और विदेश मंत्री को मौजूदा द्वपक्षीय सहयोगियों अर्थात अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, फ्रांस, इटली, कनाडा, रूस के साथ ही यूरोपीय आयोग और जी-8 से बाहर के यूरोपीय संघ के देशों के अलावा किसी भी अन्य देश से द्विपक्षीय सहायता स्वीकार करने के लिए अधिकृत किया जा सकता है।

(2). गहन पूंजी परियोजनाओं और विशेष प्रकृति की अन्य परियोजनाओं की खातिर विशेष ऋण को स्वीकार करने के लिए निम्नलिखित शर्तों होंगी:-

(क). द्विपक्षीय सहयोगी से एक साल में न्यूनतम सहायता एक अरब अमेरिकी डॉलर हो जाएगी, इसमें कम से कम 50 प्रतिशत सामान्य संयुक्त ऋण (विशेष ऋण नहीं) हो जाएगा।

(ख). सभी अनुबंधों (माल, सेवाओं और परामर्श सहित) के लिए संभावना को द्वीपक्षीय सहयोगी देश की कंपनियों और भारतीय कंपनियों तक सीमित किया जा सकता है। जबकि द्विपक्षीय सहयोगियों का 20p£rnpanies संयुक्त उद्यम और भारतीय कंपनियां पात्र होंगी। भारतीय कंपनियों को वहां सीमित किया जा सकता है, जहां भारतीय नागरिकों/कंपनियों द्वारा स्वामित्व 50 प्रतिशत से अधिक है।

(ग). सोर्सिंग की स्थिति को हटाने और ऊपर दिए गए (ख) के बिंदु के तहत बोली प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिक्रिया की कमी की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक बोली में जाने के लिए एक प्रावधान होगा।

(घ). वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य का 30 प्रतिशत से अधिक का वित्त पोषण करने वाले देशों से सोर्सिंग का आग्रह नहीं किया जाना चाहिए।

(ङ). विशेष ऋण पर ब्याज की वार्षिक दर 0.3 प्रतिशत से अधिक (अन्य सभी लागू शुल्क सहित) नहीं होगी और इसकी अवधि 40 साल (वापसी पर रोक के दस वर्षों के साथ) से कम नहीं होगी।

(च). 250 मिलियन अमेरिकी डालर की न्यूनतम परियोजना लागत वाली परियोजनाओं ही इस तरह के विशेष ऋण के लिए अर्हत होंगी।

(छ). सरकार (एकल अथवा संयुक्त) द्वारा लागू की जाने वाली कोई भी परियोजना संबंधित राज्य सरकार की सहमति से ही चलाई जा सकेगी।

संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत, वित्त मंत्री को उपरोक्त शर्तों में से किसी में भी छूट देने अथवा माफ करने के लिए अधिकृत किया गया है।

सहमति के आधार पर बुनियादी ढांचा क्षेत्र और सामरिक महत्व के क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए विशेष ऋण की पेशकश को स्वीकार कर इन क्षेत्रों में व्यापक पूंजी की आवश्यकता के पूरा होने की उम्मीद है। इस निर्णय से बुनियादी ढांचा क्षेत्र और सामरिक महत्व के क्षेत्र की परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए पूंजी में वृद्धि होने की भी उम्मीद है।

आर्थिक गतिविधि तेज होने से रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा मिलेगा। यह योजना ‘मेक इन इंडिया’ को आगे बढ़ाएगी और जहां भी संभव होगा वहां प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण नवाचार को आगे लाएगा।