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नाविक परिचय दस्‍तावेज पर आईएलओ के संधिपत्र संख्‍या 185 को अनुमोदित किया गया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने आज नाविकों के पहचान दस्‍तावेज (एसआईडी) सम्‍बन्‍धी अंतर्राष्‍ट्रीय श्रम संगठन आईएलओ के संधिपत्र संख्‍या 185 के अनुमोदन को मंजूरी दी। एक बायोमैट्रिक प्रणाली पर आधारित नाविक परिचय दस्‍तावेज तैयार किया जाएगा जो विदेशों में सामुद्रिक क्षेत्र में रोजगार की चाह में जाने वाले लोगों की पहचान के लिए एक पूर्ण रूप से सुरक्षित प्रणाली होगी और इसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। इस संधिपत्र को भारत का अनुमोदन मिलने से विदेश जाने वाले भारतीय नागरिकों को फायदा होगा और अगर भारत इस संधिपत्र को मन्‍जूरी नहीं देता तो वैश्विक सामुद्रिक क्षेत्र में भारतीय नागरिकों को रोजगार के अवसरों में संभावित खतरों का सामना करना पड़ सकता था।

यह प्रस्‍तावित एसआईडी, बायोमैट्रिक्‍स आधारित पहचान पर होगा और इसके लिए जारी किए जाने वाले देश में एक केन्‍द्रीकृत डाटा बेस होगा जिसे विश्‍व में कहीं भी एक अंतरसंचालनीय और स्‍टैंडर्ड बायोमैट्रिक टेम्‍पलेट के जरिए हासिल किया जा सकेगा। इस एसआईडी कार्ड को रखने वाले भारतीय समुद्री नागरिकों को विदेशों में समुद्री क्षेत्रों में आने-जाने में किसी तरह की कोई दिक्‍कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा और उन्‍हें वैश्विक बाजार में मान्‍यता प्राप्‍त नाविक के रूप में दर्जा मिलेगा तथा समुद्री क्षेत्र में रोजगार की बेहतर संभावनाएं उनके सामने होंगी। इस संधिपत्र के अनुमोदन से लगभग 1.8 लाख नाविकों को फायदा होगा।

एसआईडी परियोजना को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कम्‍प्‍यूटिंग (सीडैक) के सहयोग से पूरा किया जाएगा और ये एसआईडी तीन पंजीकरण केन्‍द्रों (शिपिंग मास्‍टर कार्यालय मुम्‍बई, कोलकाता और चेन्‍नई) से जारी किए जाएंगे। इनके लिए सम्‍बन्धित व्‍यक्तियों के बारे में पूरी बायोमैट्रिक और जनसांख्यिकी संबंधी जानकारी को एकत्र किया जाना जरूरी है जिनकी पुष्टि की जाएगी और इसके बाद पात्र लोगों को ये कार्ड जारी किए जाएंगे।

यह एसआर्इडी परियोजना पर सरकार पर कोई खर्च नहीं आएगा।