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प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति की समीक्षा- व्हाइट लेबल एटीएम के परिचालन में स्वतः रूट के तहत 100 फीसदी तक एफडीआई को अनुमति


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने व्हाइट लेबल एटीएम (डब्ल्यूएलए) के परिचालन में स्वतः रूट के तहत 100 फीसदी तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को इजाजत देने को अपनी मंजूरी दे दी है।

इसके लिए निम्नलिखित शर्तों को ध्यान में रखना होगाः-

(1). डब्ल्यूएलए स्थापित करने के इच्छुक किसी भी गैर-बैंक निकाय की न्यूनतम नेटवर्थ नवीनतम वित्त वर्ष की अंकेक्षित बैलेंस शीट के मुताबिक 100 करोड़ रुपए होनी चाहिए, जिसे हमेशा बरकरार रखना होगा।

(2). अगर कोई निकाय किसी अन्य 18 गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) से जुड़ी गतिविधियों में भी संलग्न हो, तो डब्ल्यूएलए स्थापित करने वाली कंपनी में हुए विदेशी निवेश को भी एनबीएफसी से जुड़ी गतिविधियों में विदेशी निवेश के लिए तय न्यूनतम पूंजीकरण मानकों के अनुरूप रखना होगा, जिसका उल्लेख समेकित एफडीआई नीति सर्कुलर 2015 के पैरा 6.2.18.8.2 में किया गया है।

(3). डब्ल्यूएलए के परिचालन में एफडीआई आरबीआई द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं विशेष पैमाने के अनुरूप होगा। इसके लिए सर्कुलर संख्या डीपीएसएस.सीओ.पीडी. संख्या 2298/02.10.002/2011-2012 देखिए, जिसमें समय-समय पर संशोधन किया गया है।

इस निर्णय से संबंधित गतिविधि में विदेशी निवेश का प्रवाह सुगम एवं तेज होगा और इसके साथ ही प्रधानमंत्री जन धन योजना समेत देश में वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने संबंधी सरकारी प्रयासों में नई जान आएगी। यह उम्मीद की जा रही है कि भारत में निवेश को आसान बनाने के परिणामस्वरूप डब्ल्यूएलए के परिचालनों में पर्याप्त निवेश उपलब्ध होगा। इससे अर्द्ध-शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों (मुख्यतः टियर III से लेकर टियर VI क्षेत्र) में एटीएम नेटवर्क को बढ़ाने संबंधी सरकारी उद्देश्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।

इस क्षेत्र में विदेशी निवेशकों की भागीदारी वित्तीय समावेश को और आगे बढ़ाने में सहायक साबित होगी।