पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री – स्मित नमस्ते।
कैप्टन स्मित – जय हिंद सर। नमस्ते सर।
प्रधानमंत्री – कैसे हो अभी, तबीयत कैसी है?
कैप्टन स्मित – सर सब ठीक है सर, सब ठीक है।
प्रधानमंत्री – देखिए पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा है, महामृत्युंजय का जाप सब जगह चल रहे हैं।
कैप्टन स्मित – यस सर।
प्रधानमंत्री – आपकी हिम्मत ने, आपके धैर्य ने और आपकी सूझबूझ ने, यानी फ्रिक्शन ऑफ़ सेकेंड में इतने निर्णय कर लिए आपने…
कैप्टन स्मित – यस सर।
प्रधानमंत्री – और इतने लोगों की जान बचाई। और आज पूरा देश गर्व से कह सकता है कि हम हिंदुस्तानी जान लेने वाले लोग नहीं है, जान बचाने वाले लोग हैं।
कैप्टन स्मित – बिल्कुल सर।
प्रधानमंत्री – और आपने अपने शरीर पे इतना बड़ा घाव हुआ, आप स्वयं जीवन और मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे थे, उस समय भी आपने अपने जीवन की परवाह नहीं की, सभी यात्रियों के जीवन की परवाह की और सबसे बड़ी बात 140 करोड़ देशवासियों का आपने मान बढ़ाया।
कैप्टन स्मित – Thank You Sir.
प्रधानमंत्री – और इसलिए मैं और हृदय से, हृदय से गर्व अनुभव करता हूं।
कैप्टन स्मित – सर मैं… sorry
प्रधानमंत्री –कल मुझे भूपेंद्र भाई से बात करने का मौका मिला, गीता बहन से बात की, सोनल बहन से बात की, जावा और बॉबी से तो नहीं कर पाया। लेकिन मैंने गीता बहन को कहा था कि आपका नाम गीता है, लेकिन आपने कृष्ण की गीता को पूरी तरह पचा दिया। और आपने स्मित को उस साक्षात गीता के संस्कारों से उसका जीवन बनाया।
कैप्टन स्मित – बिल्कुल सर।
प्रधानमंत्री – स्मित अब मैं आपसे सुनना चाहूंगा।
कैप्टन स्मित – सर मेरे लिए मैं सर से भी बोल रहा था, आप मेरे सबसे बड़े, सबसे बड़े आइडियल है सर। और आप मेरे को ऐसे कॉल करके मेरी हौसला अफजाई कर रहे हैं। मुझे बहुत-बहुत-बहुत गर्व फील हो रहा है। मैं उस मोमेंट में सर, मैं, हाँ मैं अपनी, मैं अपनी लाइफ के लिए लड़ रहा था, बट एक ऐसा मोमेंट था जब मेरे को रियलाइज हुआ कि अगर मैंने कुछ नहीं किया, क्योंकि मैं गिर चुका था, मेरे को इतने घाव लग चुके थे कि मैं फंस चुका था नीचे, एंड उस टाइम पे मैं बोला अगर मैं नहीं उठूंगा, सर मैं FZ में 17 साल से जहाज उड़ा रहा हूं। मैं पिछले 11 साल से कैप्टन हूं। और मुझे पता चलता है, आंख बंद करके भी कि जहाज में क्या हो रहा है। जब मैं नीचे गिरा हुआ था, तब मुझे, तब मुझे एहसास हो रहा था कि एयरक्राफ्ट नीचे जा रहा है। और मुझे ये बिल्कुल पता था कि ये एक लास्ट पुश अगर स्मित, कर दे, दरवाजा बस वही है और तभी भी मैं मार खा ही रहा था। बस वो खोल दिया सर। बाकी सब आ गए और बाकी सबकी भी उतनी ही, उतनी ही उसमें, उसमें रोल था। बट जान के मैं सर बोल रहा था कि मैं अपनी जान के हिसाब से कर रहा था। बट एट द सेम टाइम मुझे इतना भी पता था कि मैं उन सबको नहीं मरने दे सकता। बस उसके बाद मेरे को लोगों ने यहां पे भी, सऊदी में भी, यहां पे भी तो पड के इससे अच्छी केयर और इससे अच्छा मेडिकल अटेंशन नहीं मिल सकता था। एंड मैं सर, आई एम जस्ट मैं एक सिर्फ पॉजिटिविटी में, मैं जभी भी मेरे को दर्द होता है, मुझे एक ही चीज आती है, मैं सिर्फ हनुमान चालीसा बोलता हूं। उस टाइम पे भी मैं सिर्फ हनुमान चालीसा ही बोल रहा था और मुझे पता है कि वो भगवान ने ही मेरे को बचाया। बस आपका एक कॉल आ गया मेरे को बहुत-बहुत गर्व होता है। अब भी मेरे को हो रहा है मेरे पे गर्व, अब तक नहीं हो रहा था। अब हो गया सर। सॉरी मैं आपके सामने रो रहा हूं सर।
प्रधानमंत्री – स्मित, अगर मेरे सामने आप भावुक नहीं होंगे, तो कहां होंगे?
कैप्टन स्मित – सर ये मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी आपसे बात होगी, कभी नहीं सोचा।
प्रधानमंत्री – आपने इतना बड़ा काम किया है भाई कि हर देशवासी आज, दुनिया के लोग भी आपको देखने, आपसे बात करने के लिए बहुत ही आतुर है। और ये बात आपने जो बताई है हनुमान चालीसा की, इसके लिए तो मैं गीता बहन को प्रणाम करूंगा कि आपको ऐसे संस्कार दिए, भूपेंद्र भाई को प्रणाम करूंगा। और मैं, मैं आपको बताऊं स्मित, कल मेरी जब सोनल बहन से बात हुई, तो मैं सरप्राइज था, इतनी स्वस्थता से वो बात कर रही थी।
कैप्टन स्मित – यस सर।
प्रधानमंत्री – इतनी हिम्मत से बात कर रही थी। सचमुच में, मैंने कल्पना नहीं की थी कि सोनल बहन ऐसी परिस्थिति में इतनी स्वस्थता से बात कर सकती है। तो मैं समझता हूं कि आपने एक परिवार के नाते, आपने सचमुच में पूरे देश का नाम रोशन किया है।
कैप्टन स्मित – सर मैं रोज सुबह जब पूजा करता हूं। मेरा दो साल का बेटा मेरी गोद में बैठके मेरे साथ हनुमान चालीसा, मैं उसको सुनाता हूं कि जो मुझे बोला गया है, क्योंकि आज हम लोग देश से दूर है, बट हमारी संस्कृति से दूर नहीं होना चाहिए।
प्रधानमंत्री – सही बात है।
कैप्टन स्मित – और अभी तो यहां पर तो वो भी नहीं लगता कि हम देश से दूर है। ये यहां के लोग बहुत-बहुत- बहुत प्यार से और बहुत ध्यान से हमें रख रहे हैं।
प्रधानमंत्री – आपको पता नहीं होगा, लोग सावरकुंडला में भी, वढवान में भी, सब लोग एक ऐसे भावुक वातावरण बना दिया है और पूरे हिंदुस्तान में तो है ही है। कल सभी मंदिरों में पूजा-प्रार्थना-आरती हुई, सभी तीर्थ क्षेत्रों में आरती हुई और सब आपके दीर्घायु के लिए और उत्तम स्वास्थ्य के लिए सब प्रार्थना कर रहे हैं। इसलिए, आप तो जल्द ही स्वस्थ होने ही वाले हैं। भारत आपका स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक है। अब शरीर में कोई तकलीफ जो भी हो, मैं समझ सकता हूं। आप वीर पुरुष हैं, तो अपने घावों को तो झेलना शायद आपके लिए बहुत आसान कर लिया है आपने?
कैप्टन स्मित – नहीं सर, मैं, मैं इस घाव को, घाव की तरह नहीं सोच रहा हूं, बिकॉज़ वो मेरे को और भी फिर उतना मुश्किल होगा मेरा रिकवरी। मैं इसको एक जर्नी की तरह सोच रहा हूं, जो स्लोली-स्लोली होने वाला है एंड वो टाइम लेके होगा, बट मैं बहुत-बहुत कॉन्फिडेंट हूं कि ये रिकवरी होगा, और मैं एकदम ही स्वस्थ हो जाऊंगा।
प्रधानमंत्री – मैं सऊदी सरकार का भी और यूएई सरकार का भी हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने आपकी बहुत केयर की। मैं उनका भी आभारी हूं। स्मित आपको जब भी जरूरत लगे, मैं एक फोन कॉल अवे हूं।
कैप्टन स्मित – Thank You Sir.
प्रधानमंत्री – लेकिन आप, आपने सचमुच में, वरना ये कल मैं देख रहा था लोगों ने सोशल मीडिया में जो अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं और लोगों ने कहा अगर ऐसा ना होता, तो पता नहीं हिंदुस्तान पर क्या-क्या बीतती, भारत के सभी पायलटों पर क्या बीतती। भारत के सभी पायलटों को किस प्रकार से देखा जाता। आपने इन सबको बचा लिया है। यानी बहुत बड़ा काम आपने किया है।
कैप्टन स्मित – Yes Sir.
प्रधानमंत्री – जब मिलूंगा तब अंदर की बातें तो बाद में सुनूंगा मैं, क्योंकि मैं नहीं चाहता हूं कि, मोबाइल पर ऐसी बातें करूं मैं आपसे।
कैप्टन स्मित – ठीक है सर।
प्रधानमंत्री – और आप भी पूरी तरह स्वस्थ हो जाइए और अब बिल्कुल पूरा देश आपके साथ है।
कैप्टन स्मित – Thank You Sir.
प्रधानमंत्री – मैं ज्यादा आपको परेशान करना नहीं चाहता हूं। मेरी तरफ से बहुत शुभकामनाएं हैं। आज गांधी जयंती है। अहिंसा क्या होती है, वो आपने जी करके दिखाया है।
कैप्टन स्मित – Thank You Sir.
प्रधानमंत्री – चलिए, जय श्री कृष्ण। जय श्री कृष्ण बेटा। थोड़ी गुजराती में भी बात कर लेते हैं।
कैप्टन स्मित – जय श्री कृष्ण सर।
प्रधानमंत्री – बॉबी और जीवा गुजराती बोलते हैं या नहीं बोलते हैं ?
कैप्टन स्मित – दोनो बोलते है सर, दोनो बोलते है ।
प्रधानमंत्री – जोरदार गुजराती बोलते हैं…
कैप्टन स्मित – दोनो पहले गुजराती सीखे उसके बाद इंग्लिश सीखे।
प्रधानमंत्री – अच्छा, बच्चों से मिलना हुआ? बच्चों से? डॉक्टर ने अलाऊ किया मिलने के लिए?
कैप्टन स्मित – मेरी बडी लडकी आई थी मिलने के लिए, लेकिन ये सब देखकर वो डर गई..
प्रधानमंत्री – अच्छा… अच्छा…
कैप्टन स्मित – वो थोडी बीमार थी और मेरे से बहुत करीब है, और मेरा छोटा लडका दो साल का है उसे अलाउ नहीं किया।
प्रधानमंत्री – अभी तो ध्यान रखना ही चाहिए। लेकिन सोनलबहन खूब हिम्मतवाले है।
कैप्टन स्मित – यस सर
प्रधानमंत्री – कल इतनी स्वस्थता से मेरे साथ बात की। नहीं तो मैने अनुभव किया है कि ऐसी परिस्थिति में कोई बात ही न हो। फरियाद का कोई नामोनिशान नहीं। भूपेन्द्रभाई और गीताबहन के साथ कल मुंबई एयरपोर्ट पर बात की। फिर भी फरियाद का कोई नामोनिशान नहीं। बस उनकी तरह से बात की कि भगवान अच्छा ही करेंगे।
कैप्टन स्मित – यस सर
प्रधानमंत्री – चलो, जय श्री कृष्ण। और खूब जल्दी से स्वस्थ हो जाओ फिर हम मिलते हैं।
कैप्टन स्मित – यस सर
प्रधानमंत्री – God bless you!
कैप्टन स्मित – Jai Hind.
प्रधानमंत्री – Jai Hind.
डिस्क्लेमर: प्रधानमंत्री के साथ बातचीत का कुछ अंश गुजराती भाषा में भी है, जिसका यहाँ भावानुवाद किया गया है।
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MJPS/SS/SS/RK
An unforgettable conversation with Captain Smit, filled with pride and emotions. pic.twitter.com/CCf46PKOWR
— Narendra Modi (@narendramodi) October 2, 2026