पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि राष्ट्र दूसरी हरित क्रांति के लिए लम्बे समय तक इंतजार नहीं कर सकता और यह पूर्वी भारत से ही आनी चाहिए। श्री मोदी पटना में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 87 वें स्थापना दिवस समारोह में बोल रहे थे।
प्रधानमंत्री ने बजट की कमी के बावजूद उनके काम के लिए भारतीय वैज्ञानिकों की प्रशंसा की और साथ ही उन्होनें कृषि क्षेत्र में “प्रयोगशाला से खेतों तक” वैज्ञानिक नवाचारों की जरूरत पर बल दिया जिससे कि किसान उनका लाभ उठा सकें।
प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” के एक हाल ही के एपिसोड का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने दालों और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने की जरूरत के बारे में बात की थी। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब तक उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर इस साल दालों और तिलहन के बुवाई क्षेत्र में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में भारत को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने का उद्देश्य रखना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पुरस्कार-2014 प्रदान किये और पांच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद कार्यक्रमों का शुभारंभ किया।
बिहार के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी, बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह और केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री मोहनभाई कुंदरिया और श्री संजीव कुमार बाल्यान भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
Eastern India must lead the way when it comes to 2nd green revolution. My speech at ICAR Foundation Day Celebrations. http://t.co/SYSQfZWCLE
— Narendra Modi (@narendramodi) July 25, 2015