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प्रधानमंत्री की चीन, मंगोलिया और दक्षिण कोरिया की यात्रा


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 14 मई 2015 से चीन, मंगोलिया और दक्षिण कोरिया की यात्रा करेंगे।

मैं 14 से 16 मई तक चीन की यात्रा पर रहूंगा। दो प्राचीन सभ्‍यताओं और दो सबसे बड़े राष्‍ट्रों के बीच मैत्री में विकास का आकांक्षी हूं।

चीन में मैं जियान, बीजिंग और शंघाई का दौरा करूंगा। मैं राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली क्‍यांग के साथ सकारात्‍मक चर्चा की प्रतीक्षा कर रहा हूं।

मैं श्री शी जिनपिंग द्वारा अपने गृह राज्‍य जियांग की यात्रा के आमंत्रण से सम्‍मानित महसूस करता हूं। यह भूमि जुआन जेंग से संबंधित है, जिन्‍होंने भारत की यात्रा की थी।

मैं विश्‍वास करता हूं कि मेरी इस यात्रा से चीन के साथ विस्‍तृत क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग को बढ़ाने की आधारशिला रखी जाएगी।

मुझे शंघाई में औद्योगिक नेताओं के साथ बैठक करने का अवसर मिलेगा और भारत में शानदार अवसरों की उपलब्धि पर चर्चा होगी।

मुझे पूरा विश्‍वास है कि मेरी चीन यात्रा से एशिया में स्थिरता, प्रगति और समृद्धि मजबूत होगी।

17 मई को मंगोलिया की यात्रा से मुझे हर्ष का अनुभव हो रहा है। इस दिन दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 60 वर्ष होंगे और मंगोलिया के गणतंत्र की रजत जयंती मनाई जाएगी।

लोकतंत्र और बौद्ध धर्म भारत को अपने आध्‍यात्मिक मित्र मंगोलिया से जोड़ते हैं। मुझे आशा है कि आपके शानदार देश की यात्रा से कारोबार और निवेश के अवसर मिलेंगे। 17 मई को ग्रेट खुराल को सम्‍बोधित करने के अवसर से सम्‍मानित हूं। मैं मंगोलिया को सभी क्षेत्रों में भारतीय समर्थन का आश्‍वासन देता हूं।

कोरिया गणराज्‍य के मित्रों को अभिवादन। मैं विश्रांत प्रात: की इस सुंदर भूमि की यात्रा एक बार फिर 18 और 19 मई को करूंगा।

दक्षिण कोरिया हमारी एक्‍ट ईस्‍ट पॉलिसी का एक बहुत महत्‍वपूर्ण अंग है। हम एशिया प्रशांत क्षेत्र के साथ अपनी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मैं राष्‍ट्रपति पार्क ग्‍यून-हाय के साथ मुलाकात की प्रतीक्षा कर रहा हूं। पिछले साल नवंबर में म्‍यामार में उनके साथ होने वाली अपनी मुलाकात को मैं याद करता हूं।

द्विपक्षीय चर्चा में व्‍यापार और निवेश संबंध प्रमुख हैसियत रखते हैं। कोरिया पहला ओईसीडी देश है जिसके साथ भारत ने सीईपीए पर हस्‍ताक्षर किए हैं।

मैं बुनियादी ढांचे, निर्माण, जहाज निर्माण, ऊर्जा, रक्षा उत्‍पादन में कोरिया की क्षमताओं और निवेश का आकांक्षी हूं।

भारत-कोरिया संबंध को एक नई ऊर्जा और प्राथमिकता मिलेगी। कोरिया हमारी विकास यात्रा में सदैव एक विशेष साथी रहा है।