पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 17 जुलाई को हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब का दौरा करेंगे। सुबह लगभग 11 बजे, प्रधानमंत्री जींद रेलवे स्टेशन पर जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। प्रधानमंत्री लगभग 11:30 बजे जींद के एकलव्य स्टेडियम में लगभग 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे। वे इस अवसर पर सभा को संबोधित भी करेंगे।
इसके बाद, प्रधानमंत्री चंडीगढ़ जाएंगे, जहां दोपहर करीब 1:45 बजे वे 6,600 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उद्घाटन करेंगे। वे इस अवसर पर सभा को संबोधित भी करेंगे।
इसके बाद, प्रधानमंत्री जालंधर पहुंचेंगे, जहां वे 5,470 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उनका उद्घाटन करेंगे।
प्रधानमंत्री जिंद में
प्रधानमंत्री जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली देश की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे, जो रेलवे क्षेत्र में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत में ही डिजाइन, इंजीनियरिंग और एकीकृत की गई यह ट्रेन स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके विकसित की गई है, जो उन्नत रेलवे इंजीनियरिंग में देश की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है। इसके साथ ही, भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जिनके पास हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें परिचालन में हैं।
यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलती है, जो हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित करके ट्रेन को आगे बढ़ाती है। इस प्रक्रिया में केवल जल वाष्प उप-उत्पाद के रूप में उत्पन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप रेल संचालन के दौरान कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है।
डीजल ट्रेनों की तुलना में ये ट्रेनें टेलपाइप उत्सर्जन को खत्म करती हैं, जीवाश्म ईंधन और जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम करती हैं और शोर भी काफी कम करती हैं। पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों के विपरीत, इन्हें निरंतर ओवरहेड विद्युतीकरण बुनियादी ढांचे की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि बिजली ट्रेन के अंदर हाइड्रोजन ईंधन सेल के माध्यम से उत्पन्न होती है। इस प्रकार ये ट्रेनें पर्यावरण को लेकर स्वच्छ और कुशल समाधान बन जाती हैं। हरित हाइड्रोजन का उपयोग जीवाश्म ईंधन आधारित थर्मल पावर प्लांट से उत्पन्न बिजली पर निर्भरता को भी कम करता है, जिससे भारत के सतत परिवहन की ओर बदलाव में सहायता मिलती है।
भारत की हाइड्रोजन ट्रेन में 10 कोच हैं, जो इसे अब तक विकसित की गई सबसे लंबी हाइड्रोजन-चालित यात्री ट्रेनों में से एक बनाती है। यह 3,200 एचपी प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित है, जो इसे परिचालन में मौजूद सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन-चालित ट्रेनों में से एक बनाती है।
प्रधानमंत्री हरियाणा में 12,470 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखने के साथ-साथ राष्ट्र को समर्पित भी करेंगे।
प्रधानमंत्री लगभग 9,680 करोड़ रुपये की लागत से विकसित 157.92 किलोमीटर लंबे, चार लेन वाले और पूरी तरह से सुलभ दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे (पैकेज 1 से 5) को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर 667 किलोमीटर लंबे दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे का हिस्सा है। इस एक्सप्रेसवे से दिल्ली और कटरा के बीच यात्रा का समय लगभग 14 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे हो जाएगा, जबकि दिल्ली-अमृतसर की यात्रा का समय लगभग 8 घंटे से घटकर 4 घंटे हो जाएगा। इस परियोजना से एनएच-44 (जीटी रोड) पर ट्रैफिक काफी कम होने, श्री माता वैष्णो देवी के तीर्थयात्रा और पर्यटन में वृद्धि होने और कॉरिडोर के साथ औद्योगिक तथा लॉजिस्टिक्स विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राजमार्ग-7 और राष्ट्रीय राजमार्ग-344 पर बने 33.81 किलोमीटर लंबे चार लेन वाले, आंशिक रूप से प्रवेश-नियंत्रित अंबाला-काला अंब राजमार्ग का भी उद्घाटन करेंगे। यह राजमार्ग अंबाला शहरी क्षेत्र और काला अंब औद्योगिक क्षेत्र के बीच संपर्क को मजबूत करेगा, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाएगा, पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही को सुगम बनाएगा और काला अंब क्षेत्र के उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक लागत को कम करेगा।
एक अन्य महत्वपूर्ण परियोजना जिसका उद्घाटन किया जाएगा, वह राष्ट्रीय राजमार्ग-352ए पर स्थित 40.60 किलोमीटर लंबा जिंद-गोहाना ग्रीनफील्ड राजमार्ग है। यह नया राजमार्ग जिंद और गोहाना के बीच यात्रा के समय को लगभग दो घंटे से घटाकर मात्र 40 मिनट कर देगा, जिससे यात्रियों, माल परिवहन और कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण जिंद-गोहाना क्षेत्र को लाभ होगा, साथ ही रोहतक, पानीपत तथा दिल्ली-एनसीआर से कनेक्टिविटी में सुधार होगा।
प्रधानमंत्री हांसी-बरवाला ब्राउनफील्ड राजमार्ग परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे, जिसकी लंबाई 24.27 किलोमीटर है और जिसके अंतर्गत मौजूदा सड़क को पक्के शोल्डर के साथ 2/4 लेन का बना दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री कुरुक्षेत्र में एलिवेटेड रेलवे ट्रैक का लोकार्पण करेंगे। यह एक महत्वपूर्ण शहरी अवसंरचना परियोजना है जिससे शहर के रेलवे क्रॉसिंग पर लंबे समय से चली आ रही यातायात की भीड़भाड़ की समस्या समाप्त हो जाएगी। इस परियोजना से वाहनों की आवाजाही सुगम होगी, सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और रेल तथा सड़क परिवहन प्रणालियों की परिचालन दक्षता बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री पंडित नेकी राम शर्मा सरकारी मेडिकल कॉलेज, भिवानी; महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज और राव तुला राम अस्पताल, कोरियावास, नारनौल सहित प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इन संस्थानों से हरियाणा में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा मिलेगी, एमबीबीएस सीटों की संख्या में वृद्धि होगी, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की उपलब्धता में सुधार होगा और लोगों को अपने घरों के पास बेहतर चिकित्सा सेवाएं प्राप्त करने में मदद मिलेगी और इससे राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री क्षेत्र के सांस्कृतिक आधारभूत ढांचे को और समृद्ध करते हुए कुरुक्षेत्र में सिख संग्रहालय की आधारशिला रखेंगे। यह संग्रहालय आधुनिक तकनीक के उपयोग के माध्यम से सिख धर्म के इतिहास, सिख गुरुओं की शिक्षाओं, उनके साहस, बलिदानों और भारत की सभ्यता तथा संस्कृति में सिख समुदाय के अमूल्य योगदान को प्रदर्शित करेगा।
प्रधानमंत्री चंडीगढ़ में
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सड़क अवसंरचना से संबंधित 6,600 करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और आधारशिला रखेंगे।
प्रधानमंत्री चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) में एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर और एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर का उद्घाटन करेंगे।
एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं, गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं और विशेष उपचार की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए व्यापक तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। 300 बिस्तरों और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित यह केंद्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा और इससे पूरे क्षेत्र में हजारों परिवारों को लाभ मिलेगा।
एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरो-क्रिटिकल केयर और उन्नत निदान सुविधाओं को एक ही स्थान पर एकीकृत रूप से प्रदान करेगा। यह जटिल तंत्रिका संबंधी विकारों से पीड़ित रोगियों के लिए समय पर और विश्व स्तरीय उपचार सुनिश्चित करेगा, साथ ही न्यूरोसाइंसेज में चिकित्सा अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण को मजबूत करेगा।
प्रधानमंत्री चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के अंतर्गत 150 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला भी रखेंगे। यह सुविधा आपातकालीन तैयारियों, गहन देखभाल सेवाओं और आपदा प्रतिक्रिया क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगी, साथ ही क्षेत्र के समग्र स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करेगी।
प्रधानमंत्री चंडीगढ़ में शैक्षणिक संस्थानों से संबंधित कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में कुरुक्षेत्र बॉयज़ हॉस्टल और मेस, सेक्टर 46 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज में हॉस्टल ब्लॉक और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में रिसर्च स्कॉलर्स हॉस्टल का शिलान्यास शामिल है। इन सुविधाओं से शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए आवासीय सुविधाओं में सुधार होगा तथा उच्च शिक्षा के लिए बेहतर वातावरण बनेगा।
प्रधानमंत्री क्षेत्र में आवाजाही को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रमुख सड़क अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। वे मोहाली जिले में आईटी सिटी से कुराली तक बनने वाले 6 लेन के ग्रीनफील्ड राजमार्ग का उद्घाटन करेंगे। यह राजमार्ग मोहाली, खरार और कुराली के बीच यात्रा का समय कम करेगा और पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के बीच बेहतर संपर्क व्यवस्था प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री जिरकपुर ग्रीनफील्ड बाईपास (6 लेन का मार्ग) की आधारशिला भी रखेंगे। इस परियोजना से जीरकपुर-पंचकुला मार्ग पर यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है, साथ ही यात्रियों के लिए सुगम, तेज और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड राजमार्ग (एनएच-205ए) के पीआर-7 मार्ग की भी आधारशिला रखी जाएगी। यह 10.3 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है, जो लंबी दूरी के यातायात को जीरकपुर के शहरी क्षेत्रों को बाईपास करने और जीरकपुर बाईपास को सीधे एयरोसिटी, चंडीगढ़ से जोड़ने में सक्षम बनाएगा।
जालंधर में प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री 5,470 करोड़ रुपये से अधिक की रेल और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और आधारशिला रखेंगे। इनका उद्देश्य क्षेत्र में संपर्क को मजबूत करना, यात्री सुविधा में सुधार करना और आर्थिक विकास को गति देना है।
प्रधानमंत्री अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत जालंधर कैंट सहित 75 पुनर्निर्मित रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे। 20 राज्यों में फैले 75 अमृत स्टेशनों का उद्घाटन अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो विश्व के सबसे बड़े स्टेशन पुनर्निर्माण कार्यक्रमों में से एक है। लगभग 1,570 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इन स्टेशनों को आधुनिक और यात्री-अनुकूल सुविधाओं में बदला गया है। ‘विरासत भी, विकास भी’ की भावना से पुनर्निर्मित इन स्टेशनों में स्थानीय संस्कृति, विरासत और वास्तुकला को दर्शाने वाले तत्व शामिल किए गए हैं।
प्रधानमंत्री नांगल बांध-तलवारा-मुकेरियन नई रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत लगभग 830 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित दौलतपुर चौक-करतोली नई रेल लाइन का भी उद्घाटन करेंगे। इससे पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच रेल संपर्क काफी मजबूत होगा, जिससे होशियारपुर और ऊना जिलों को लाभ होगा। यह नई रेल लाइन श्री आनंदपुर साहिब और मां चिंतपूर्णी मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को जोड़ेगी, साथ ही यात्रियों को तेज, सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय परिवहन साधन उपलब्ध कराकर दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच को बेहतर बनाएगी।
प्रधानमंत्री करतोली-अंबाला रेल सेवा को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे, जिससे पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में कनेक्टिविटी बेहतर होगी। प्रधानमंत्री अमृतसर (छेहर्टा)-वाराणसी रेल सेवा को भी झंडी दिखाएंगे, जिससे भारत के दो सबसे प्रतिष्ठित आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों के बीच सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा।
प्रधानमंत्री पंजाब में सड़क अवसंरचना को और मजबूत करने के लिए 3,070 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और आधारशिला रखेंगे।
प्रधानमंत्री चार लेन वाले नए दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के 30.9 किलोमीटर लंबे पैकेज-6 का उद्घाटन करेंगे। एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा विशेष रूप से भारी वाहनों के लिए सुगम और तेज यात्रा की सुविधा प्रदान करेगा, साथ ही ईंधन की खपत और वाहन संचालन लागत को भी कम करेगा।
प्रधानमंत्री 25.2 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले ग्रीनफील्ड दक्षिणी लुधियाना बाईपास के विकास की भी आधारशिला रखेंगे। इस परियोजना से लुधियाना और बठिंडा के बीच यात्रा की दूरी और समय कम होगा, साथ ही अन्य प्रमुख आर्थिक केंद्रों से भी बेहतर संपर्क स्थापित होगा।
***
पीके/केसी/एके/वाईबी