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प्रधानमंत्री ने आदर्श शिक्षक के गुणों को दर्शाने वाले संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि कुछ लोग स्वयं किसी कार्य को करने में अति कुशल होते हैं जबकि कुछ अन्य लोग उस ज्ञान या कौशल को दूसरों को सिखाने में विशेष रूप से निपुण होते हैं। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति में यो दोनों गुण यानि आत्म-निपुणता और दूसरों को सिखाने की क्षमता निहित हो, उसे सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों की श्रेणी में सबसे आगे स्थान दिया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

श्लिष्टा क्रिया कस्यचिदात्मसंस्था सङ्क्रान्तिरन्यस्य विशेषयुक्ता।

यस्योभयं साधु स शिक्षकाणां धुरि प्रतिष्ठापयितव्य एव।।

 

इसका अर्थ है कि जहां कुछ लोग अभ्यास में और कुछ शिक्षण में निपुण होते हैं, वहीं वह व्यक्ति जो किसी एक विषय में महारत हासिल करने के साथ-साथ उसे दूसरों को प्रभावी ढंग से सिखाने की क्षमता भी रखता है, वह शिक्षकों की श्रेणी में सर्वोच्च स्थान पाने के योग्य है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा:

श्लिष्टा क्रिया कस्यचिदात्मसंस्था सङ्क्रान्तिरन्यस्य विशेषयुक्ता।

यस्योभयं साधु स शिक्षकाणां धुरि प्रतिष्ठापयितव्य एव।।

 

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पीके/केसी/बीयू/एसएस