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प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ दान के गुण के वर्णन से संबंधित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने निस्वार्थ दान के गुण को दर्शाने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया है:

पद्माकरं दिनकरो विकचीकरोति चन्द्रो विकासयति कैरवचक्रवालम्।

नाभ्यर्थितो जलधरोऽपि जलं ददाति सन्तः स्वयं परहितेषु कृताभियोगाः।।”

सुभाषितम् का भावार्थ है, “सूर्य कमल को खिलने में सहायता करता है और चंद्रमा कुमुदिनी के लिए भी यही करता है। बादल स्वयं ही जल बरसाते हैं; उसी प्रकार, नेक लोग बिना किसी अपेक्षा के दूसरों का भला करते हैं।”

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

पद्माकरं दिनकरो विकचीकरोति चन्द्रो विकासयति कैरवचक्रवालम्।

नाभ्यर्थितो जलधरोऽपि जलं ददाति सन्तः स्वयं परहितेषु कृताभियोगाः।।”

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पीके/केसी/एसएस/वाईबी