पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत में एक सुभाषितम् साझा करते हुए कहा कि हमारी मातृभूमि आध्यात्मिक साधना और उपासना के साथ-साथ साहस, शक्ति और सर्वकल्याण की पवित्र भूमि रही है। श्री मोदी ने कामना की कि महान विरासत और प्राचीन संस्कृति की यह पवित्र भूमि सदा सभी को सुख और समृद्धि से परिपूर्ण रखे।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया:
“हमारी मातृभूमि साधना और उपासना के साथ-साथ साहस, शक्ति और सर्व-कल्याण की पुण्यभूमि रही है। महान विरासत और प्राचीन संस्कृति की यह पावन धरती हर किसी को सदैव सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रखे, यही कामना है।
यस्यां पूर्वे पूर्वजना विचक्रिरे यस्यां देवा असुरानभ्यवर्तयन्।
गवामश्वानां वयसश्च विष्ठा भगं वर्चः पृथिवी नो दधातु।।”
जिस भूमि पर हमारे पूर्वजों ने महान और कल्याणकारी कार्य किए और जिस भूमि पर देवताओं ने अन्यायपूर्ण शक्तियों को पराजित किया, वह पशुधन और शक्ति से परिपूर्ण मातृभूमि हमें विशाल स्थान और समृद्धि प्रदान करे।
हमारी मातृभूमि साधना और उपासना के साथ-साथ साहस, शक्ति और सर्व-कल्याण की पुण्यभूमि रही है। महान विरासत और प्राचीन संस्कृति की यह पावन धरती हर किसी को सदैव सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रखे, यही कामना है।
यस्यां पूर्वे पूर्वजना विचक्रिरे यस्यां देवा असुरानभ्यवर्तयन् ।
गवामश्वानां… pic.twitter.com/S0kwe4YRJt
— Narendra Modi (@narendramodi) May 21, 2026
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पीके/केसी/बीयू/वाईबी
हमारी मातृभूमि साधना और उपासना के साथ-साथ साहस, शक्ति और सर्व-कल्याण की पुण्यभूमि रही है। महान विरासत और प्राचीन संस्कृति की यह पावन धरती हर किसी को सदैव सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रखे, यही कामना है।
— Narendra Modi (@narendramodi) May 21, 2026
यस्यां पूर्वे पूर्वजना विचक्रिरे यस्यां देवा असुरानभ्यवर्तयन् ।
गवामश्वानां… pic.twitter.com/S0kwe4YRJt