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प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राज्य सभा में धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर दिया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर दिया।

उन्होंने कहा कि कई सदस्यों ने अपने विचार रखे हैं और विमुद्रीकरण पर एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ चल रही लड़ाई कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं है, और यह किसी एक राजनीतिक दल को परेशान करने के लिए भी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भ्रष्टाचार ने गरीबों एवं मध्यम वर्ग के लोगों की आकांक्षाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। उन्होंने कहा कि जो लोग सिस्टम के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं, उनसे कड़ाई से निपटा जाएगा, ताकि गरीबों के हाथों को मजबूती दी जा सके।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विमुद्रीकरण के बाद लगभग 700 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है और यह संख्या बढ़ रही है।

श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज एक क्षैतिज विभाजन है, जिसमें एक ओर भारत की जनता और केंद्र सरकार है तथा दूसरी तरफ राजनेताओं का एक समूह है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज उन बुराइयों को ठीक करने का काम कर रहा है, जो हमारे समाज में घुस चुकी हैं। उन्होंने कहा कि हमें व्यावहारिक बदलाव लाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए और हमारे राष्ट्र की शक्ति को कम करके नहीं आंकना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संस्थानों को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए और भारतीय रिजर्व बैंक को विवाद में नहीं घसीटा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि शासन से जुड़े मुद्दों पर काफी कुछ ऐसा किया गया है जिसने आम लोगों को मजबूती प्रदान की है। प्रधानमंत्री ने सरकार के ई-मार्केटप्लेस के जरिए सरकार द्वारा खरीद नीति में लाई गई पारदर्शिता का भी जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत के संदेश को आगे बढ़ाने और इसको लेकर जागरुकता फैलाने के लिए मीडिया को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता का दायरा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई को एक जन आंदोलन बनना चाहिए और हम सभी को इस उद्देश्य के लिए काम करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘एक भारत- श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत हम सभी को देश के विभिन्न हिस्सों की संस्कृति एवं क्षमताओं को जानने, समझने का अवसर मिला है।