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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया और त्योहारों के अवसर पर किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उमंग और उल्लास से भरे अवसरों पर राष्ट्र उन मेहनती किसान भाइयों और बहनों के प्रति कृतज्ञ है, जो पूरे देश का भरण-पोषण करते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“इत्थं फलति शुद्धेन सिक्तं सङ्कल्पवारिणा।

पुण्यबीजमपि स्वल्पं पुंसां कृषिकृतामिव॥”

इस सुभाषितम् का अर्थ है कि जिस प्रकार किसान द्वारा बोया गया एक छोटा सा बीज, यदि उचित समय पर जल से सींचा जाए तो समय के साथ भरपूर फसल देता है, उसी प्रकार शुद्ध संकल्पों के साथ किया गया छोटा सा प्रयास भी मनुष्य को महान सफलता प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स(X) पर लिखा;

“देश के अलग-अलग हिस्सों में अभी कई पर्व-त्योहार मनाए गए हैं। उमंग और उल्लास से भरे इन अवसरों के लिए हम अपने परिश्रमी किसान भाई-बहनों के कृतज्ञ हैं, जो पूरे देश का पोषण करते हैं।

इत्थं फलति शुद्धेन सिक्तं सङ्कल्पवारिणा।

पुण्यबीजमपि स्वल्पं पुंसां कृषिकृतामिव॥”

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पीके/केसी/पीकेपी