पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए कहा कि जब नागरिक एकता और पारस्परिक सहयोग के सूत्र में बंधे होते हैं, तब राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प के बल पर देश निरंतर प्रगति की नई ऊँचाइयों को छू रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पर लिखा:
“जब नागरिक एकजुटता और आपसी सहयोग के सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प से आज देश उन्नति की नित-नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च।
धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥”
जिस प्रकार लकड़ी के टुकड़े अलग-अलग रहने पर अपनी पूरी ऊर्जा प्रदर्शित नहीं कर पाते, लेकिन एक साथ आने पर प्रज्वलित होकर प्रकाश और ऊष्मा उत्पन्न करते हैं, उसी प्रकार किसी राष्ट्र की प्रगति, समृद्धि और शक्ति उसके नागरिकों की एकता, पारस्परिक सहयोग तथा सामूहिक संकल्प पर निर्भर करता है।
जब नागरिक एकजुटता और आपसी सहयोग के सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प से आज देश उन्नति की नित-नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च।
धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥ pic.twitter.com/ySNn4JgNHn
— Narendra Modi (@narendramodi) June 3, 2026
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पीके/केसी/पीकेपी
जब नागरिक एकजुटता और आपसी सहयोग के सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प से आज देश उन्नति की नित-नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
— Narendra Modi (@narendramodi) June 3, 2026
धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च।
धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥ pic.twitter.com/ySNn4JgNHn