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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026’ के प्रतिभागियों के सराहनीय कार्यों की प्रशंसा की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026’ के प्रतिभागियों के सराहनीय कार्यों की प्रशंसा की


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026के प्रतिभागियों के साथ वर्चुअल तरीके से बातचीत की। इस दौरान, माईभारत के युवा स्वयंसेवकों ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के सीमावर्ती गांवों में अपने अनुभव साझा किए। बातचीत में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और सार्वजनिक सेवाओं के जरिए इन गांवों में आए बदलावों के साथ-साथ महिलाओं के नेतृत्व में विकास, पर्यटन, सामुदायिक भागीदारी और मज़बूत राष्ट्रीय एकता पर भी जोर दिया गया। देश भर के 245 ज़िलों से 5,000 से ज़्यादा माईभारत स्वयंसेवक (वॉलंटियर्स) इस कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल हुए।

इस कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए, दादर नगर हवेली और दमन एवं दीव के माईभारत स्वयंसेवक श्री दिव्यांश जोशी ने विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग‘, ‘विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट‘, ‘बजट ट्विस्ट‘, मेंटरशिप और वॉलंटियरिंग प्रोग्राम जैसी पहलों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि 2.30 करोड़ से ज्यादा युवाओं को माईभारत की पहलों से फायदा हुआ है, जबकि 2.86 लाख युवाओं ने देशव्यापी क्विज़ में हिस्सा लिया, जिसके जरिए सीमावर्ती गांवों का दौरा करने के लिए 403 स्वयंसेवकों को चुना गया। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले के लियो गांव के अपने दौरे का उल्लेख करते हुए, उन्होंने वहां के निवासियों, बुज़ुर्गों और स्कूली बच्चों के साथ बातचीत, स्थानीय युवाओं के लिए करियर काउंसलिंग, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों, महिला सरपंच के नेतृत्व और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के कामकाज पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनके होमस्टे के अनुभव से पता चला कि अपनापन भाषा और राज्य की सीमाओं से परे होता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वयंसेवकों ने कारगिल वॉर मेमोरियल पर देश के बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और वे अपने अनुभवों को इकट्ठा करके प्रधानमंत्री को सौंपेंगे, साथ ही विकसित भारतके विज़न के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगे।

दादर नगर हवेली और दमन एवं दीव की माईभारत स्वयंसेवक सुश्री निकिता प्रवीण सोलंकी ने बताया कि माईभारत क्विज के जरिए हुए उनके चयन की वजह से ही वह किन्नौर ज़िले के धार चांगो निचला गांव की अपनी पहली स्वतंत्र यात्रा कर पाईं। गांव वालों के प्यार भरे स्वागत ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और महिलाओं के प्रति समाज की बदलती सोच को भी दिखाया। महिला प्रधान, पंचायत प्रतिनिधियों, किसानों, बुज़ुर्गों और बच्चों से बातचीत के दौरान उन्होंने ग्रामीण महिलाओं की कई ज़िम्मेदारियों को देखा। साथ ही, अपनी पुरानी सोच के उलट, उन्होंने वहां अच्छी सड़कें, नियमित बिजली, पीने के पानी के कनेक्शन और डिजिटल कनेक्टिविटी देखी; स्थानीय लोगों ने इन सुविधाओं का श्रेय प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जल जीवन मिशन और आयुष्मान भारत को दिया। उन्होंने सफाई, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी हिस्सा लिया, गांव के बच्चों की उनके गृह-क्षेत्र के बारे में उत्सुकता को याद किया और बताया कि वह अपने मेजंबान परिवार के संपर्क में बनी हुई हैं।

2016 में चांगो इलाके की अपनी दिवाली यात्रा को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सुश्री सोलंकी की यात्रा भारत की बेटियों के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाती है और माईभारतने व्यक्तिगत यात्राओं को एक राष्ट्रीय परिवार में बदल दिया है। श्री मोदी ने कहा, “अकेले यात्रा करना दुनिया को जानने के साथ-साथ खुद को भी जानने का एक तरीका है।”

राजस्थान के जालौर से आए माईभारत स्वयंसेवक श्री सुनील कुमार केला ने बताया कि खुद एक सीमावर्ती गांव से होने के कारण, वे हिमाचल प्रदेश के धार चांगो उपरेला गांव के लोगों से आसानी से जुड़ पाए। भौगोलिक और मौसम संबंधी अंतर के बावजूद, उन्होंने पाया कि दोनों क्षेत्रों के लोग साहस, देशभक्ति और अपनापन जैसी भावनाओं से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। वे वीडियो कॉल के जरिए अपने परिवार से जुड़े रहे और उन्हें सतलुज नदी, स्कूल, जन औषधि केंद्र, अस्पताल और खेल की सुविधाएं दिखाईं; साथ ही, सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए उन्होंने दोस्तों को माईभारत के बारे में जानने और उसे आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया। सड़कों, रहने की जगह, बिजली और मोबाइल कनेक्टिविटी को लेकर उनकी शुरुआती चिंताएं तब दूर हो गईं जब उन्होंने होमस्टे तक जाने वाली अच्छी सड़कें, सौर ऊर्जा प्रणाली और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर देखा, जिसने वहाँ के लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बदल दिया था। उन्होंने यह भी बताया कि वे अपने मेजबान परिवार के संपर्क में बने हुए हैं और उन्होंने उन्हें राजस्थान आने का न्योता भी दिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजस्थान, कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर के सीमावर्ती गांवों के युवाओं की सोच एक जैसी है और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग भौगोलिक रूप से दूर होने के बावजूद देश से भावनात्मक रूप से गहराई से जुड़े हुए हैं। श्री मोदी ने कहा, “जो लोग पहले प्राथमिकता सूची में सबसे पीछे थे, वे अब सबसे आगे हैं।”

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले की माईभारत स्वयंसेवक सुश्री भव्य श्री ने बताया कि पढ़ाई-लिखाई से हटकर कुछ नया सीखने की इच्छा उन्हें माईभारत और उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की हर्षिल घाटी तक ले गई। वहां के अनजान मौसम, खाने-पीने, संस्कृति और जीवनशैली को लेकर उनकी शुरुआती चिंताएं स्थानीय लोगों और अधिकारियों के अच्छे व्यवहार से दूर हो गईं। साथ ही, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों से बातचीत ने उनके अनुशासन, विनम्रता, समर्पण और देश के प्रति निष्ठा के लिए उनके मन में सम्मान और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से आए प्रतिभागी अजनबियों की तरह आए थे, लेकिन एक परिवार बनकर लौटे, जो एक भारत, श्रेष्ठ भारतकी भावना को दर्शाता है। नेलांग और जाडुंग घाटियों और सेब के बागों की तस्वीरों ने उनके दोस्तों के बीच काफी दिलचस्पी पैदा की, जिनमें से कई लोगों ने बाद में माईभारत पर पंजीकरण भी कराया। उन्होंने उन उपकरणों को भी याद किया जो प्रतिभागियों को ठंडे मौसम में ढलने में मदद करने के लिए दिए गए थे; भूस्खलन से प्रभावित अपने पैतृक गांव में मुश्किलों के बावजूद रहने का फैसला करने वाले एक निवासी का जज्बा; और गढ़वाली नृत्य का शांत व ध्यानमग्न करने वाला अंदाज, जो उनके अपने राज्य के जोशीले लोक नृत्यों से बिल्कुल अलग था।

उत्तराखंड के मुखवा गांव की अपनी यात्रा को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बातचीत ने उनके इस विश्वास को और पक्का कर दिया कि भारत के युवा देश को सबसे ऊपर रखते हैं। श्री मोदी ने कहा, “आप सभी ने जिस तरह से एक भारत, श्रेष्ठ भारतकी भावना को अपनाया है, वह और भी कई युवाओं को प्रेरित करेगा।”

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की 21 वर्षीय माईभारत स्वयंसेवक सुश्री सायंतिका मिस्त्री ने प्रधानमंत्री को माईभारत जैसा प्लेटफॉर्म बनाने के लिए धन्यवाद दिया, जिससे करोड़ों युवा देश के निर्माण में योगदान दे सकें। समुद्र तल से लद्दाख के मानगांव (जो लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर है) तक की अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए, उन्होंने एक्यूट माउंटेन सिकनेस‘ (ऊंचाई पर होने वाली बीमारी) से जूझने और माईभारत टीम व आईटीबीपी के जवानों से मिली देखभाल का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने अपने जवानों का इलाज करने से पहले उन्हें एक मेहमान मानकर उनका इलाज करने को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि इस अनुभव से पता चला कि आईटीबीबी के जवान न केवल सीमाओं की रक्षा करते हैं, बल्कि नागरिकों का भी बहुत ख्याल रखते हैं। साथ ही, उन्हें ऊंचाई वाले इलाकों में रहने के लिए जरूरी हिम्मत और सहनशक्ति का भी एहसास हुआ। उनके परिवार को लग रहा था कि वहां कनेक्टिविटी खराब होगी, लेकिन इसके उलट उन्हें सीमावर्ती इलाके में भरोसेमंद इंटरनेट, क्यूआरकोड, यूपीआई पेमेंट की सुविधाएं और वाई-फाई मिला। उन्होंने स्थानीय बच्चों से भी बातचीत की, जिनमें से एक ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह घूमने की इच्छा जताई। उन्होंने वहां के लोगों की आपसी एकता और सहयोग की भावना का भी उल्लेख किया, जिसके जरिए वे मिलकर शादियां और मठ के कार्यक्रम आयोजित करते हैं, खराब हुए मोबाइल टावर को ठीक करते हैं और उसकी बैटरी के लिए स्टोरेज की जगह बनाते हैं।

श्री मोदी ने सुश्री मिस्त्री को अपने अनुभव को लेखों या किताब के ज़रिए दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि दूसरे लोग देश की विशालता, यहां के लोगों और आपसी जुड़ाव की भावना को बेहतर ढंग से समझ सकें। उन्होंने कहा, “जब आप खुशियां बांटते हैं, तो वे बढ़ती हैं।”

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के माईभारत स्वयंसेवक श्री आशीष सोनी, जो सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, ने बजट बनाने की प्रक्रिया के दौरान युवाओं को सुझाव देने का मौका देने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया। हिमाचल प्रदेश के स्पीति इलाके के काजा खास का अपना अनुभव बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता, जिन्हें याद था कि दूर-दराज के इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी कितनी मुश्किल होती थी, यह देखकर हैरान रह गए जब उन्होंने लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई से उन्हें वीडियो-कॉल किया। माईभारत को संघर्ष देखने वाली पीढ़ी और बदलाव देखने वाली पीढ़ी के बीच एक पुल बताते हुए, उन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे पोस्ट ऑफिस हिक्किम से प्रधानमंत्री, अपने परिवार, युवा मामलों के मंत्रालय, रक्षा मंत्री और अपने ज़िलाधिकारी को पत्र लिखने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत न केवल मेट्रो और एयरपोर्ट से जुड़ा है, बल्कि दूर-दराज के इलाकों में सेवा देने वाले संस्थानों से भी जुड़ा है। उन्होंने लगभग 14,500 फीट की ऊंचाई पर क्यूआरकोड पेमेंट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इस बात का सबूत है कि डिजिटल इंडिया पूरे देश में भरोसे का जरिया बन गया है। महिलाओं के स्वयं-सहायता समूहों के साथ बातचीत से उन्हें होमस्टे, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सी-बकथॉर्न आधारित उत्पादों के जरिए उद्यमिता के बारे में पता चला, जबकि पीएम मुद्रा योजना और दीनदयाल अंत्योदय योजना पर चर्चा में आजीविका के मौकों को बढ़ाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कनेक्टिविटी, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बेहतर बनाने में सीमा सड़क संगठन (बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन) द्वारा बनाए गए चिचम पुल की भूमिका पर भी प्रकाश डाला और साथ ही इस इलाके में नाइट टूरिज्म की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।

यह देखते हुए कि तकनीक देश के हर कोने तक पहुंच गई है और स्थानीय उत्पाद खरीदने से रोजगार पैदा होगा, आजीविका को सहारा मिलेगा और क्षेत्रीय पहचान पूरे भारत में फैलेगी, श्री मोदी ने आग्रह किया, “आप जहां भी जाएं, अपने यात्रा बजट का कम से कम पांच प्रतिशत स्थानीय लोगों से उत्पाद खरीदने में खर्च करें।”

संवाद के अंत में, प्रधानमंत्री ने युवा प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। इस कार्यक्रम में माईभारतकी भूमिका पर जोर दिया गया, जिसने युवाओं को भारत के सीमावर्ती गांवों में आए बदलावों को खुद अनुभव करने, पुरानी सोच को बदलने और देश की सांस्कृतिक विविधता, विकास की प्रगति, सामुदायिक भागीदारी और एक भारत, श्रेष्ठ भारतकी भावना के बारे में अपनी समझ को गहरा करने में मदद की।

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