पीएमइंडिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के शताब्दी समारोह में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में शताब्दी की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह 100 साल का उत्सव वास्तव में लाखों युवाओं की अपार आकांक्षाओं और संस्था पर प्रत्येक भारतीय के अटूट विश्वास का उत्सव है। उन्होंने बदलती पीढ़ियों, सरकारों, प्रौद्योगिकियों और पाठ्यक्रम के बावजूद संस्था की अटूट विश्वसनीयता की सराहना की और इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट, एक विशेष सिक्का और 100 महत्वपूर्ण केस कानूनों का संकलन जारी किया।
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता के बाद सामने आई विशाल चुनौतियों को याद करते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने न केवल देश को स्वतंत्र बनाए रखने के लिए, बल्कि नवगठित राष्ट्र के सक्रिय शासन के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना की स्थापना की। उन्होंने संस्था को रूपांतरित और सशक्त बनाकर स्वतंत्र भारत का एक प्रमुख स्तंभ बनाने के लिए सरदार पटेल की प्रशंसा की। श्री मोदी ने कहा, “राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना सरदार पटेल ने ही प्रदान की थी।”
प्रधानमंत्री ने 1926 में ब्रिटिश राज के दौरान स्थापित इस संस्था की तुलना स्वतंत्रता के बाद के इसके विकास से करते हुए कहा कि इस प्रणाली ने सफलतापूर्वक अपना ध्यान एक स्वतंत्र राष्ट्र के सपनों को साकार करने की दिशा में केंद्रित किया है। उन्होंने सराहना करते हुए कहा कि यूपीएससी ने अपने ऐतिहासिक कर्तव्यों का उत्कृष्ट निर्वहन किया है, लेकिन अब देश के सामने आने वाले महत्वपूर्ण अगले 25 वर्षों पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। श्री मोदी ने कहा, “इसलिए, आज मैं चर्चा का केंद्र बिंदु इसी दिशा में रखूंगा।”
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में चयन आयोगों की महत्वपूर्ण भूमिका का विस्तार से वर्णन करते हुए इस बात पर बल दिया कि आज भर्ती किए गए युवा एक साथ राष्ट्र के भविष्य के मुख्य निर्माता और प्राथमिक लाभार्थी होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रत्येक चयन प्रक्रिया को राष्ट्र और नागरिक को प्राथमिकता देने के दोहरे मापदंड पर कड़ाई से परखा जाना चाहिए। श्री मोदी ने कहा, “जब इस भावना से परिपूर्ण उम्मीदवारों का चयन होगा, तो राष्ट्रीय लक्ष्यों को अर्जित करना कहीं अधिक स्वाभाविक और सरल हो जाएगा।”
2047 के व्यापक रूप से भिन्न सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य का अनुमान लगाते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि तेजी से शहरीकरण वाले राष्ट्र में ग्रामीण-शहरी विभाजन कम होने से युवाओं की अपेक्षाएं नाटकीय रूप से बढ़ेंगी। उन्होंने आगाह किया कि पारंपरिक सेवा वितरण मॉडल को त्वरित वितरण की दुनिया की गति के अनुरूप विकसित होना होगा, जहां नागरिक एआई द्वारा संचालित त्वरित, वास्तविक समय के समाधान की मांग करते हैं। श्री मोदी ने कहा, “यह बदलती मानसिकता हमारी प्रशासनिक सेवाओं से भी नए बदलावों की मांग करती है।”
प्रधानमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में मूलभूत बदलाव का आग्रह करते हुए इस बात पर बल दिया कि चयन के मापदंडों में केवल अकादमिक ज्ञान का ही नहीं, बल्कि उम्मीदवारों की अंतर्निहित प्रेरणा का भी मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि वे केवल सरकारी पद की लालसा के बजाय जनसेवा की ओर आकर्षित हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि सही अंतर्निहित प्रेरणा वाले व्यक्तियों का चयन करने से प्रशासन के लिए तेजी से बदलती जन आकांक्षाओं के अनुरूप ढलना अत्यंत सरल हो जाता है। श्री मोदी ने कहा, “इसलिए, हमें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार अपने चयन मापदंडों और भर्ती प्रक्रिया को भी अनुकूलित करना होगा।”
नवनियुक्त प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए, प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि प्रशिक्षु अधिकारियों को अपनी मूल प्रेरणाओं को लिख लेना चाहिए ताकि भविष्य में आने वाली चुनौतियों और जिम्मेदारियों के समय वे आत्म-मूल्यांकन के लिए इनका उपयोग कर सकें। उन्होंने यूपीएससी और राज्य आयोगों को उम्मीदवारों के लिए इसी तरह की आत्म-निरीक्षण प्रणाली को संस्थागत रूप देने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री मोदी ने कहा, “यूपीएससी और राज्य आयोग भी ऐसी प्रणाली विकसित करने पर विचार कर सकते हैं।”
प्रधानमंत्री ने अतीत की पुरातन ‘माई-बाप’ शासन प्रणाली को त्यागते हुए, ‘नागरिक देवो भव’ के परम सिद्धांत पर आधारित एक आधुनिक प्रशासनिक युग की शुरुआत का उल्लेख किया, जिसमें नागरिक को ईश्वर के समान माना जाता है। उन्होंने घोषणा की कि नागरिक सेवा को सर्वोपरि रखना 21वीं सदी के शासन का मूल आधार है। श्री मोदी ने कहा कि इसका अर्थ यह है कि देश का नागरिक हमारे लिए किसी देवता से कम नहीं है।
आधुनिक प्रशासन के लिए नई कार्य संस्कृति को परिभाषित करते हुए, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि 21वीं सदी का भारत पूरी तरह से नए परिचालन सिद्धांतों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस नए युग के मूलभूत सिद्धांत पूरी तरह से तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित हैं। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “इसके मूलभूत सिद्धांत हैं जनहितैषी, सक्रिय और सुशासन!”
शासन के इन मूलभूत सिद्धांतों की विस्तार से चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने इच्छा जताई कि राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर चयन प्रक्रियाओं को सावधानीपूर्वक तैयार किया जाए ताकि ऐसे पेशेवरों की भर्ती हो सके जो समस्याओं का पूर्वानुमान लगा सकें और अनावश्यक दबाव या प्रभाव के बिना काम कर सकें। उन्होंने सहानुभूति का भाव रखने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की आवश्यकता पर बल दिया जो नवीन समाधान खोजें, नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास करें और जनता पर कानूनों के प्रभाव का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। श्री मोदी ने कहा, “हमें देश को ऐसे पेशेवर देने होंगे जो कठिन समस्याओं का समाधान खोजने के लिए अभिनव तरीके अपना सकें।”
समाज के समक्ष विद्यमान अभूतपूर्व प्रौद्योगिकीय व्यवधानों का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि भविष्य के प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना युद्ध, डीपफेक, एल्गोरिथम पूर्वाग्रह और जलवायु न्याय जैसे बिल्कुल नए क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे उम्मीदवारों की दूरदर्शिता और जटिल समस्या-समाधान क्षमताओं को प्राथमिकता देकर इन वैश्विक परिवर्तनों के अनुरूप ढलें। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “ऐसे परिदृश्य में, चयन प्रक्रिया में हमें जटिल समस्या-समाधान और दूरदर्शिता के परीक्षण को भी प्राथमिकता देनी होगी।”
प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा एजेंसियों को समयबद्धता के सिद्धांत को अपनाकर परीक्षा चक्र को छोटा करने के लिए राष्ट्रव्यापी सुधार की गति के साथ तेजी से तालमेल बिठाना चाहिए, ताकि मानकों में कोई कमी न आए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लंबी परीक्षाएं परिवारों पर कोचिंग फीस, किराया और परिवहन जैसे गंभीर वित्तीय बोझ डालती हैं, जिससे परीक्षा चक्र को छोटा करना एक मूलभूत निष्पक्षता का मुद्दा बन जाता है। श्री मोदी ने कहा, “यह एक समानता सुधार भी होगा।”
व्यवस्थित संस्थागत क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करते हुए, प्रधानमंत्री ने वर्तमान राष्ट्रीय सम्मेलनों की सराहना की, जहां राज्य आयोग सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करते हैं, लेकिन उन्होंने इन मंचों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों का अध्ययन करके और तकनीकी दक्षता पर ध्यान केंद्रित करके उन्नत बनाने का आग्रह किया। उन्होंने देश भर के प्रतिभागियों को व्यापक राहत और स्पष्टता प्रदान करने के लिए अंतर-शिक्षण और प्रक्रियाओं के मानकीकरण की वकालत की। श्री मोदी ने कहा, “अंतर-शिक्षण की यह प्रक्रिया यूपीएससी के साथ-साथ प्रत्येक राज्य के चयन आयोगों को भी लाभ पहुँचाएगी।”
संस्थागत विकास की निरंतर आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने सलाह दी कि यूपीएससी और राज्य चयन आयोगों को अपनी क्षमता निर्माण पर लगातार ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के लिए राष्ट्रीय मिशन के तहत पहले से स्थापित डिजिटल बुनियादी ढांचे का भरपूर उपयोग करने की अनुशंसा की। श्री मोदी ने कहा कि इसके लिए मिशन कर्मयोगी के तहत बनाए गए आई-जीओटी प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा सकता है।
अधिकारियों को उनके गहन राष्ट्रीय कर्तव्य की याद दिलाते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उनका मूल उद्देश्य युवा शक्ति को सशक्त राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित करना है। उन्होंने इस बात प्रसन्नता जताई कि अब शहरी अभिजात वर्ग से हटकर ग्रामीण गांवों के प्रतिभाशाली युवाओं तक अवसर सफलतापूर्वक पहुंच रहे हैं। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों में महिला उम्मीदवारों की संख्या में हुई भारी वृद्धि का, जो 1952 में मात्र 3 प्रतिशत से बढ़कर आज 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है, साथ ही, 2014 के बाद यूपीएससी के चार में से तीन अध्यक्षों की ऐतिहासिक नियुक्ति का भी उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा, “ये बदलाव केवल आंकड़े नहीं हैं; ये दर्शाते हैं कि देश में अवसरों का दायरा कितना बढ़ गया है।”
प्रधानमंत्री ने 1976 में संस्था की 50वीं वर्षगांठ के बाद से उम्मीदवारों की भागीदारी में हुई भारी वृद्धि की ओर इंगित करते हुए, परीक्षा देने वालों की संख्या में 45 गुना वृद्धि का उल्लेख किया, जो एक विशाल राष्ट्रीय प्रतिभा भंडार का प्रतिनिधित्व करता है और चयनकर्ताओं से एक बड़ी जिम्मेदारी की मांग करता है। उन्होंने आयोगों को याद दिलाया कि वे केवल उम्मीदवारों का चयन नहीं कर रहे हैं, बल्कि ऐसे व्यक्तियों का चयन कर रहे हैं जो जमीनी स्तर पर सरकार का चेहरा और प्रतिनिधि बनेंगे। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “इसलिए, आप सभी पर सही व्यक्ति का चयन करने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।”
संस्था की दूसरी सदी की नई संभावनाओं, नई चुनौतियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने आयोग से आग्रह किया कि वह अपने संचालन को मजबूती से आगे बढ़ाए और साथ ही अपनी मूलभूत विश्वसनीयता की रक्षा करे। उन्होंने कहा कि यूपीएससी की मूल पहचान, उसकी स्वतंत्रता, निष्पक्षता, योग्यता, गोपनीयता और निष्पक्ष प्रक्रियाएं, हमेशा अक्षुण्ण रहनी चाहिए। श्री मोदी ने दृढ़ता से कहा, “ये मूल्य हमेशा बने रहने चाहिए।”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन भविष्योन्मुखी जनादेश के साथ करते हुए आशा जताई कि संस्था अपनी नई सदी में भी फलती-फूलती और सफलतापूर्वक अनुकूलन करती रहेगी।
100 years of UPSC is a proud milestone. For a century, it has played an important role in administration and serving people. https://t.co/8mLKPv4jXU
— Narendra Modi (@narendramodi) October 1, 2026
आज का ये दिन, UPSC के 100 वर्षों के उत्सव के साथ ही ये एक विरासत का भी उत्सव है… ये उत्सव, उस आकांक्षा का है… जिसे हर वर्ष लाखों-लाख युवा जीते हैं।
ये उत्सव, उस विश्वास का है… जो हर भारतवासी का इस संस्था पर है: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) October 1, 2026
हमें दो कसौटियों को हमेशा याद रखना है।
एक – Nation First.
दूसरी – Citizen First: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) October 1, 2026
हमें ऐसे युवाओं को Public Services में लाना होगा, जो Public Office से नहीं, Public Service से आकर्षित हों।
इसलिए जरूरी है कि Recruitment की परीक्षा… सिर्फ यह न परखे कि Candidate कितना जानता है।
बल्कि वो यह भी देखे कि… वह युवा Civil Services में आना क्यों चाहता है: PM…
— PMO India (@PMOIndia) October 1, 2026
हमारा मंत्र है… नागरिक देवो भव।
यानि देश का नागरिक हमारे लिए किसी देव से कम नहीं है।
हमारे लिए नागरिक की सेवा सर्वोपरि है: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) October 1, 2026
आज 21वीं सदी का भारत, एक नई कार्य-संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है।
इसका मूल सिद्धांत है… Pro-People, Pro-Active, Good Governance: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) October 1, 2026
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पीके/केसी/आरटी/एसकेजे/एसके
100 years of UPSC is a proud milestone. For a century, it has played an important role in administration and serving people. https://t.co/8mLKPv4jXU
— Narendra Modi (@narendramodi) October 1, 2026
आज का ये दिन, UPSC के 100 वर्षों के उत्सव के साथ ही ये एक विरासत का भी उत्सव है... ये उत्सव, उस आकांक्षा का है... जिसे हर वर्ष लाखों-लाख युवा जीते हैं।
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ये उत्सव, उस विश्वास का है... जो हर भारतवासी का इस संस्था पर है: PM @narendramodi
हमें दो कसौटियों को हमेशा याद रखना है।
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एक - Nation First.
दूसरी - Citizen First: PM @narendramodi
हमें ऐसे युवाओं को Public Services में लाना होगा, जो Public Office से नहीं, Public Service से आकर्षित हों।
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इसलिए जरूरी है कि Recruitment की परीक्षा... सिर्फ यह न परखे कि Candidate कितना जानता है।
बल्कि वो यह भी देखे कि... वह युवा Civil Services में आना क्यों चाहता है: PM…
हमारा मंत्र है... नागरिक देवो भव।
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यानि देश का नागरिक हमारे लिए किसी देव से कम नहीं है।
हमारे लिए नागरिक की सेवा सर्वोपरि है: PM @narendramodi
आज 21वीं सदी का भारत, एक नई कार्य-संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है।
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इसका मूल सिद्धांत है... Pro-People, Pro-Active, Good Governance: PM @narendramodi